अपनी पहली शादी छिपाने वाली महिला दूसरे पति से गुज़ारा-भत्ता पाने की हकदार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

Shahadat

21 July 2026 7:07 PM IST

  • अपनी पहली शादी छिपाने वाली महिला दूसरे पति से गुज़ारा-भत्ता पाने की हकदार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जो महिला अपनी पहली शादी छिपाकर दूसरी शादी कर लेती है (जबकि पहली शादी अभी भी कायम है), वह CrPC की धारा 125 के तहत अपने दूसरे पति से गुज़ारा-भत्ता नहीं मांग सकती।

    सिंगल-जज जस्टिस मिलिंद साथये ने 16 जुलाई को एक आदेश में उस महिला की अपील खारिज की, जिसने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसके 'दूसरे पति' को उनकी अमान्य शादी से हुए बेटे के लिए केवल 1,000 रुपये का मासिक गुज़ारा-भत्ता देने का निर्देश दिया गया, लेकिन महिला के लिए कोई अलग भत्ता नहीं दिया गया।

    इस फैसले से असंतुष्ट महिला ने जस्टिस साथये की बेंच में याचिका दायर की। बेंच ने पाया कि याचिकाकर्ता महिला पहले से ही किसी अन्य व्यक्ति से विवाहित थी। जज ने गौर किया कि पहली शादी कायम रहने के बावजूद, महिला ने उस दूसरे पति से मासिक गुज़ारा-भत्ता मांगा, जिसके साथ वह केवल तीन महीने तक रही थी।

    जस्टिस साथये ने 16 जुलाई के आदेश में कहा,

    "महिला दूसरे पति की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी नहीं है। यह भी स्वीकार किया गया कि सक्षम अधिकार क्षेत्र वाली अदालत के आदेश से हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 5(i) की शर्तों का उल्लंघन करने के कारण हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत दोनों पक्षों के बीच विवाह को अमान्य घोषित कर दिया गया। रिकॉर्ड में यह बात सामने आई है कि महिला दूसरे पति के साथ 3 महीने से कुछ अधिक समय तक ही साथ रही थी। उसके बाद से दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में यह मानना ​​असंभव है कि वह 'लिव-इन-रिलेशनशिप' (सह-जीवन संबंध) में रहने वाली व्यक्ति के तौर पर अर्हता प्राप्त कर सकती है, जहां एक पुरुष और महिला काफी लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहते हैं।"

    इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि जज ने गौर किया कि याचिकाकर्ता महिला ने दूसरे पति से अपनी पहली शादी छिपाई, और अब उसी से इस याचिका के माध्यम से मासिक गुज़ारा-भत्ता मांग रही है।

    जस्टिस सथाये ने कहा,

    "इसमें धोखे का पहलू शामिल है, क्योंकि महिला की पहली शादी की बात दूसरे पति से छिपाई गई। ऐसे हालात में CrPC की धारा 125 जैसे फायदेमंद कानून—जो सभी धर्मों पर लागू होता है और धर्मनिरपेक्ष है—के तहत किसी पक्ष को अपनी ही गलती का फायदा उठाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। बात छिपाने और धोखेबाज़ी के कारण उसका केस कमज़ोर हो जाता है। मेरी राय में CrPC की धारा 125 के प्रावधान, जिन्हें नज़रअंदाज़ की गई पत्नी को तुरंत राहत देने के मकसद से बनाया गया है, उनका इस्तेमाल उस याचिकाकर्ता के पक्ष में नहीं किया जा सकता जिसने धोखेबाज़ी की।"

    इन बातों के साथ, जज ने उसकी याचिका खारिज की।

    Case Title: JPPP vs PVP (Writ Petition 130 of 2023)

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