बड़े पैमाने पर चलने वाले बूचड़खाने के लिए रेगुलर FSSAI लाइसेंस ज़रूरी, सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट काफ़ी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Shahadat
13 Sept 2026 10:49 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'छोटे फ़ूड बिज़नेस' (Petty Food Business) के लिए तय क्षमता से ज़्यादा क्षमता पर चलने वाले बड़े पैमाने के बूचड़खाने के लिए 'फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006' (FSSAI) के तहत रेगुलर लाइसेंस की ज़रूरत होती है और सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट से ऐसी गतिविधि की इजाज़त नहीं मिल सकती।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 19(1)(g) के तहत व्यापार या कारोबार करने का मौलिक अधिकार, फ़ूड सेफ़्टी और पब्लिक हेल्थ के हित में लागू वैध लाइसेंसिंग की ज़रूरत को खत्म नहीं करता है।
इस तरह बेंच ने कानपुर नगर के ज़िला मजिस्ट्रेट के मई 2025 के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें याचिकाकर्ता के बूचड़खाने को फिर से खोलने के आवेदन को नामंज़ूर कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता (जुनैद आलम) ने दो-यूनिट वाले बूचड़खाने को आधुनिक बनाने और उसका कामकाज फिर से शुरू करने के लिए उचित समय की भी मांग की थी।
याचिकाकर्ता आलम ने 29 जून 2024 के फ़ूड सेफ़्टी रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट का हवाला दिया, जो 29 नवंबर 2028 तक वैध बताया गया। सर्टिफ़िकेट में कारोबार को "स्लॉटरिंग यूनिट्स, डिस्ट्रीब्यूटर" के तौर पर बताया गया, जबकि इसके प्रोडक्ट एनेक्ज़र (अनुबंध) में फ्रोज़न बीफ़ और फ्रोज़न पोल्ट्री मीट का ज़िक्र है।
उन्होंने GST और उद्यम रजिस्ट्रेशन, लेबोरेटरी टेस्ट रिपोर्ट और नगर निगम, कानपुर नगर द्वारा जारी 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफ़िकेट' (NOC) का भी हवाला दिया।
उन्होंने तर्क दिया कि इन दस्तावेज़ों से दो स्लॉटरिंग यूनिट्स के संचालन की इजाज़त मिलती थी और अधिकारियों को उन्हें सुनवाई का मौका और आधुनिकीकरण के लिए उचित समय देना चाहिए था।
हालांकि, राज्य ने कहा कि रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट, स्लॉटरिंग के प्रस्तावित पैमाने के लिए ज़रूरी रेगुलर लाइसेंस नहीं है।
यह बताया गया कि नए राज्य लाइसेंस के लिए याचिकाकर्ता के आवेदन में 20 बड़े जानवरों की प्रस्तावित क्षमता बताई गई और कमियों को दूर करने के लिए आवेदन वापस कर दिया गया। इस तरह जब ज़िला मजिस्ट्रेट ने विवादित आदेश पारित किया, तब तक कोई रेगुलर लाइसेंस नहीं दिया गया।
हाईकोर्ट की टिप्पणियां
हाईकोर्ट ने 'फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006' की धारा 31 की जांच की। कोर्ट ने देखा कि धारा 31(1) लाइसेंस के बिना फ़ूड बिज़नेस शुरू करने या चलाने पर रोक लगाती है, जबकि धारा 31(2) में छोटे फ़ूड मैन्युफ़ैक्चरर (जैसे कि छोटे स्तर पर काम करने वाले) के लिए छूट दी गई है, जिन्हें फिर भी रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी है।
कोर्ट ने 'फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स (फ़ूड बिज़नेस का लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन) रेगुलेशन, 2011' के रेगुलेशन 1.2.1(4) का ज़िक्र किया। इसके तहत, जानवरों को काटने (Slaughtering) के काम को तभी 'छोटा फ़ूड बिज़नेस' माना जाता है, जब इसकी क्षमता रोज़ाना दो बड़े जानवर, दस छोटे जानवर या 50 पोल्ट्री पक्षी (मुर्गे-मुर्गियाँ) या उससे कम हो। इस छूट के अलावा, रेगुलेशन 2.1.2 के तहत एक वैलिड लाइसेंस की ज़रूरत होती है।
यह पाते हुए कि याचिकाकर्ता की प्रस्तावित क्षमता (20 बड़े जानवर) इस सीमा से ज़्यादा थी, कोर्ट ने यह टिप्पणी की:
"29.06.2024 का रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट उस स्तर के लिए काफ़ी नहीं है, जिस पर याचिकाकर्ता स्लॉटर हाउस (बूचड़खाना) चलाना चाहता है। यह क्षमता छोटे फ़ूड बिज़नेस के लिए तय सीमा से ज़्यादा है। इसलिए, एक्ट की धारा 31(1) और रेगुलेशन 2.1.2 (रेगुलेशन, 2011) के तहत एक रेगुलर लाइसेंस की ज़रूरत है।"
कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि रेगुलर लाइसेंस के लिए याचिकाकर्ता की एप्लीकेशन से ही स्लॉटर हाउस चलाने की इजाज़त नहीं मिल जाती।
राज्य लाइसेंस के लिए आवेदन में कमियों को दूर करने के लिए उसे वापस भेज दिया गया।
कोर्ट ने कहा:
"इसकी पावती (Acknowledgement) केवल आवेदन जमा होने का सबूत है और यह उस गतिविधि के लिए अनुमति नहीं देती जिसके लिए लाइसेंस मांगा गया।"
कोर्ट ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता का GST और उद्यम रजिस्ट्रेशन, लेबोरेटरी रिपोर्ट और म्युनिसिपल NOC सहायक दस्तावेज़ हैं और वे एक्ट और नियमों के तहत ज़रूरी लाइसेंस की जगह नहीं ले सकते।
कोर्ट ने यह भी देखा कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के आदेश ने किसी मौजूदा रेगुलर लाइसेंस रद्द नहीं किया। बल्कि, दोबारा खोलने का अनुरोध इसलिए खारिज कर दिया गया, क्योंकि प्रस्तावित गतिविधि के लिए ज़रूरी रेगुलर लाइसेंस और अन्य अनुमतियां नहीं ली गईं।
इसके बाद कोर्ट ने कहा:
"ज़रूरी लाइसेंस न होने पर याचिकाकर्ता को बूचड़खाना (Slaughter House) दोबारा खोलने और चलाने की अनुमति देने का कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता।"
लक्ष्मी नारायण मोदी बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि बिना अनुमति या बिना लाइसेंस वाले बूचड़खानों को बंद करने का निर्देश दिया गया और उन्हें ज़रूरी लाइसेंस लेने और लागू नियमों व कानूनों का पालन करने के बाद ही काम करने की अनुमति दी गई।
इसके अनुसार रिट याचिका खारिज कर दी गई।
हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता के लिए यह विकल्प खुला रखा कि वह कमियों को दूर करे और राज्य लाइसेंस आवेदन पर आगे बढ़े या कानून के अनुसार ज़रूरी दस्तावेज़ों और मंजूरियों के साथ नया आवेदन जमा करे। कोर्ट ने कहा कि ऐसे किसी भी आवेदन पर उसके गुण-दोष और कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।
कोर्ट ने पुलिस द्वारा परेशान किए जाने के आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला, क्योंकि याचिका में उन आरोपों के आधार पर कोई राहत नहीं मांगी गई।
Case Title : Junaid Alam vs. State Of U.P. And 3 Others 2026 LiveLaw (AB) 700


