UAPA के तहत संपत्ति कुर्की की पुष्टि के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील हो सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

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    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) की धारा 25(6) के तहत आतंकवाद की आय बताकर किसी संपत्ति की जब्ती या कुर्की की पुष्टि करने वाले आदेश को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम, 2008 की धारा 21 के तहत हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा आदेश अंतरिम प्रकृति का नहीं, बल्कि अंतिम आदेश होता है।

    जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीजन बेंच ने कहा कि UAPA की धारा 25(6) के तहत संपत्ति की जब्ती या कुर्की की पुष्टि से संबंधित आदेश अपने स्तर पर अंतिम होता है। बाद में इसी संपत्ति को UAPA की धारा 26 के तहत जब्त किया जा सकता है, लेकिन कुर्की की पुष्टि और संपत्ति जब्त किए जाने की प्रक्रिया अलग-अलग चरण हैं।

    कोर्ट एक्विल अहमद की ओर से दायर अपील पर सुनवाई कर रहा था। अहमद ने स्पेशल जज के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें स्पेशल जज ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के नामित प्राधिकरण द्वारा पुणे स्थित एक संपत्ति की चौथी और पांचवीं मंजिल की कुर्की की पुष्टि करने वाला आदेश बरकरार रखा। यह कुर्की UAPA की धारा 25(3) के तहत की गई।

    राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपील की सुनवाई योग्य होने पर प्रारंभिक आपत्ति जताई। एजेंसी का कहना था कि UAPA का अध्याय-5 आतंकवाद से प्राप्त आय की जब्ती, कुर्की और जब्तीकरण से संबंधित पूरी प्रक्रिया निर्धारित करता है।

    NIA के अनुसार, धारा 25(6) में नामित प्राधिकरण के आदेश के खिलाफ स्पेशल कोर्ट में अपील का प्रावधान है, जबकि धारा 28 के तहत धारा 26 में संपत्ति जब्त किए जाने के अंतिम आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है।

    NIA ने दलील दी कि यदि NIA Act की धारा 21 के तहत कुर्की के आदेश के खिलाफ भी हाईकोर्ट में अपील की अनुमति दी जाती है तो यह कुर्की आदेश के खिलाफ दूसरी अपील की स्थिति पैदा कर देगा।

    हाईकोर्ट ने इस आपत्ति को खारिज किया। खंडपीठ ने कहा कि NIA Act की धारा 21 स्पेशल कोर्ट के किसी भी फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ अपील का वैधानिक अधिकार देती है। इसमें केवल अंतरिम आदेश को अपवाद बनाया गया है। कोर्ट ने इसे पक्षकारों को दिया गया व्यापक वैधानिक अपील अधिकार बताया।

    खंडपीठ ने कहा कि UAPA की धारा 25 के तहत संपत्ति की कुर्की बाद में धारा 26 के तहत जब्तीकरण का आधार बन सकती है, लेकिन दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग चरणों में होती हैं। संपत्ति की केवल कुर्की से वह स्वतः जब्त नहीं हो जाती।

    कोर्ट ने कहा कि संपत्ति जब्त करने से पहले UAPA की धारा 27 के तहत संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस देना और उसे अपना पक्ष रखने तथा सुनवाई का अवसर देना आवश्यक है। इसके बाद ही धारा 26 के तहत संपत्ति जब्त करने का आदेश पारित किया जा सकता है।

    खंडपीठ ने कहा कि कुर्की की पुष्टि और संपत्ति के जब्तीकरण के आदेश से संबंधित दोनों अपील अलग-अलग चरणों से जुड़े होंगे और अपने-अपने स्तर पर अंतिम होंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि इसमें ऐसी कोई वजह नहीं है कि बाद की अपील पर सुनवाई करते समय हाईकोर्ट पहले की अपील में पारित आदेश को ध्यान में नहीं रखेगा।

    इस आधार पर हाईकोर्ट ने अपील को सुनवाई योग्य माना और NIA की प्रारंभिक आपत्ति खारिज की।

    मामले की अंतिम सुनवाई अब 2 दिसंबर को होगी।

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