सुप्रीम कोर्ट

IBC | मोरेटोरियम के बाद लेनदार कॉर्पोरेट देनदार द्वारा पहले जमा की गई सिक्योरिटी डिपॉज़िट से CIRP से पहले के बकाया को नहीं काट सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार मोरेटोरियम लागू हो जाने के बाद कॉर्पोरेट देनदार के CIRP से पहले के बकाया को लेनदार के पास जमा राशि से समायोजित (Set Off) नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जब तक ऐसी जमा राशि को कानूनी रूप से समायोजित नहीं किया जाता, तब तक वह कॉर्पोरेट देनदार की संपत्ति बनी रहती है और मोरेटोरियम के बाद किया गया कोई भी समायोजन कानूनन अस्वीकार्य होगा।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने कहा,"भले ही जमा राशि को बकाया भुगतान में चूक के लिए गारंटी माना जाए।...

चयनित उम्मीदवार के जॉइन न करने पर अगली मेरिट वाले को नियुक्ति का अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी उम्मीदवार को केवल इस आधार पर नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता कि चयनित उम्मीदवार ने जॉइन नहीं किया या प्री-अपॉइंटमेंट औपचारिकताएं पूरी नहीं कीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में रिक्त पद को उसी सेलेक्ट लिस्ट से भरना अनिवार्य नहीं है, बल्कि संबंधित भर्ती नियमों के अनुसार ही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कर्नाटक सरकार की अपील स्वीकार करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उत्तरदाता को...

आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार नियमों की अनुमति होने पर छूट का लाभ उठाने के बावजूद मेरिट के आधार पर सामान्य सीटों का दावा कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (23 मार्च) को यह टिप्पणी की कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार, जिन्होंने किसी योग्यता परीक्षा में छूट का लाभ उठाया, उन्हें अभी भी सामान्य वर्ग के पदों के लिए विचार किया जा सकता है, बशर्ते वे अंतिम चयन चरण में उच्च मेरिट हासिल करें और संबंधित नियम इसकी अनुमति देते हों।TET उम्मीदवारों को राहत देते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ का फैसला रद्द किया, जिसमें यह कहा गया था कि जिन उम्मीदवारों ने छूट का लाभ उठाया है, वे...

राज्य के अधिकारियों द्वारा अधिग्रहित वाहन से हुए हादसे के लिए निजी बीमा कंपनी ज़िम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (23 मार्च) को यह फ़ैसला दिया कि जब किसी निजी वाहन को राज्य द्वारा चुनावों जैसे सार्वजनिक कार्यों के लिए अधिग्रहित किया जाता है तो दुर्घटनाओं की ज़िम्मेदारी अधिग्रहित करने वाले प्राधिकरण की होती है, न कि बीमा कंपनी की।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने कहा,"...जहां किसी वाहन को सार्वजनिक कार्यों के लिए अधिग्रहित किया जाता है और अधिग्रहण की उस अवधि के दौरान कोई घटना घटित होती है तो उसकी ज़िम्मेदारी सही तौर पर अधिग्रहित करने वाले प्राधिकरण की होनी...

आरोपियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर दिशानिर्देश की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने निपटाई
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शुक्रवार को पुलिस द्वारा अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर आरोपियों की तस्वीरें पोस्ट करने को लेकर दिशानिर्देश बनाने की मांग वाली याचिका का निस्तारण कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हाल ही में पीयूसीएल से जुड़े एक मामले में राज्यों को पुलिस की मीडिया ब्रीफिंग के लिए दिशानिर्देश बनाने का निर्देश दिया गया है, जिनमें सोशल मीडिया पोस्टिंग भी शामिल हो सकती है।कोर्ट ने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता उन दिशानिर्देशों के तैयार होने का इंतजार करें।...

विकास के लिए मंज़ूर ज़मीन पर बाद में उगने वाले पेड़ उसे 'डीम्ड फ़ॉरेस्ट' नहीं बना देंगे: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि किसी नोटिफ़ाइड मास्टर प्लान के तहत विकास के लिए तय की गई ज़मीन को सिर्फ़ बाद में पेड़-पौधे या पेड़ उग जाने की वजह से "डीम्ड फ़ॉरेस्ट" (माना गया जंगल) नहीं माना जा सकता। इसलिए ऐसे बाद में उगे पेड़ों को काटने के लिए वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत केंद्र सरकार की पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं होगी।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने दिल्ली के बिजवासन रेलवे स्टेशन पर रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को मंज़ूरी देने वाले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल...

Bihar Special Courts Act | अवैध संपत्ति वाले सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद भी पत्नी के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई जारी रह सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस सरकारी अधिकारी ने अपनी आय से ज़्यादा संपत्ति जमा की हो, उसकी मौत के बाद भी बिहार स्पेशल कोर्ट एक्ट, 2009 के तहत उसकी पत्नी (जो सरकारी कर्मचारी नहीं है) के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई जारी रखी जा सकती है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने पटना हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें कहा गया कि आरोपी अधिकारी की मौत के बाद बिहार स्पेशल कोर्ट एक्ट, 2009 के तहत उसकी पत्नी के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई खत्म हो गई।हाईकोर्ट की टिप्पणी से असहमति जताते हुए बेंच ने...

यूपी गैंगस्टर एक्ट के गंभीर परिणाम होते हैं, इसलिए प्रक्रिया का सख्ती से पालन अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कथित गैंगस्टर गब्बर सिंह के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत चल रही कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने यह फैसला गैंग चार्ट तैयार करने की सिफारिश भेजने की प्रक्रिया में हुई प्रक्रियागत अनियमितताओं का हवाला देते हुए दिया, जिसमें गब्बर सिंह का नाम शामिल है।राज्य सरकार का स्पष्टीकरण खारिज करते हुए कोर्ट ने उस स्थापित सिद्धांत को दोहराया कि जब कोई कानून यह निर्धारित करता है कि कोई काम किसी विशेष तरीके से ही किया जाना चाहिए तो उसे उसी तरीके से...

वैधानिक अपीलें विवादित फैसले की सर्टिफाइड कॉपी के साथ ही दायर की जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया कि विवादित फैसले की सर्टिफाइड कॉपी के बिना किसी भी वैधानिक अपील पर विचार नहीं किया जा सकता।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के एक फैसले के खिलाफ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दायर सिविल अपील की सुनवाई कर रही थी।कोर्ट ने गौर किया कि अपीलकर्ता ने अर्जी दायर कर विवादित फैसले की सर्टिफाइड कॉपी जमा करने से छूट मांगी थी। कोर्ट ने पाया कि अपील को दोबारा दायर करने में 102 दिनों की देरी हुई। फिर भी छूट वाली अर्जी में यह...

हाईकोर्ट बेबुनियाद या परेशान करने वाली आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के लिए FIR/शिकायत से आगे भी देख सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 'कहानी-2' फ़िल्म के प्रोड्यूसर सुजॉय घोष के ख़िलाफ़ कॉपीराइट उल्लंघन का मामला रद्द करते हुए यह टिप्पणी की कि आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के लिए CrPC की धारा 482 या संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते समय हाईकोर्ट को अपनी जांच को केवल मामले के मौजूदा चरण तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि बेबुनियाद कार्यवाही रद्द करने के लिए समग्र परिस्थितियों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर भी विचार करना चाहिए।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने...

कॉर्पोरेट देनदार के खिलाफ बचाव के तौर पर 'सेट-ऑफ' का दावा किया जा सकता है, भले ही समाधान योजना भविष्य के निपटारों पर रोक लगाती हो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि हालांकि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 के तहत स्वीकृत समाधान योजना में शामिल न किए गए दावे समाप्त हो जाते हैं, फिर भी मध्यस्थता की कार्यवाही में बचाव के तौर पर 'सेट-ऑफ' (दावों की आपसी भरपाई) का सीमित दावा किया जा सकता है, बशर्ते इससे कोई सकारात्मक वसूली न हो।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के खिलाफ उजास एनर्जी लिमिटेड द्वारा दायर अपील आंशिक रूप से स्वीकार की। इसके साथ ही खंडपीठ ने...

कर्ज़ चुकाने के लिए कर्ज़दार को फ़ोन करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्ज़दार को अपना पैसा वापस करने के लिए फ़ोन करना, किसी कर्ज़ देने वाले पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस चलाने का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने एक कर्ज़ देने वाले के ख़िलाफ़ आत्महत्या के लिए उकसाने (IPC की धारा 306) का मामला रद्द करते हुए कहा,"अगर कोई कर्ज़ देने वाला अपना पैसा वापस पाने के लिए कर्ज़दार को फ़ोन करता है तो यह एक क़ानूनी काम है। इसलिए सिर्फ़ इस आधार पर कर्ज़ देने वाले पर केस नहीं चलाया जा सकता।"इस मामले में कर्ज़ देने वाले...

फिल्म फ्लॉप हो सकती है; निवेश पर लाभ न मिलने से धोखाधड़ी नहीं बनती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल इसलिए कि किसी फिल्म में किया गया निवेश लाभ नहीं दे पाया, उसके आधार पर धोखाधड़ी (Section 420 IPC) का आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि फिल्म निर्माण स्वभावतः एक जोखिमपूर्ण व्यावसायिक गतिविधि है, जिसमें लाभ की कोई निश्चितता नहीं होती।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति फिल्म में निवेश कर लाभ में हिस्सेदारी के आधार पर पैसा लगाता है, तो वह शून्य रिटर्न का जोखिम भी स्वीकार करता है। केवल लाभ न मिलना...

सुप्रीम कोर्ट ने 'बेंगलुरु वॉटर सप्लाई बोर्ड केस' में 'उद्योग' की परिभाषा सही होने पर फ़ैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने 'बेंगलुरु वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम ए. राजप्पा' (1978) मामले में तत्कालीन जस्टिस वी.के. कृष्णा अय्यर द्वारा दी गई "उद्योग" की विस्तृत परिभाषा पर पुनर्विचार करने के मामले में अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, जस्टिस जॉयमाल्य बागची, जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल एम. पंचोली को मिलाकर बनी एक बेंच ने इस...

पोस्ट-डेटेड चेक का डिसऑनर होना ही धोखाधड़ी के लिए बेईमान इरादे का अनुमान लगाने के लिए काफी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत धोखाधड़ी के दायरे को स्पष्ट करते हुए महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पोस्ट-डेटेड चेक का डिसऑनर होना, अपने आप में चेक जारी करने वाले (Drawer) के बेईमान इरादे का अनुमान लगाने के लिए काफी नहीं है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि धोखाधड़ी के लिए आपराधिक दायित्व के लिए, लेन-देन की शुरुआत में ही कपटपूर्ण इरादे का सबूत होना जरूरी है। इसका अनुमान केवल बाद में वादा पूरा न कर पाने से नहीं लगाया जा सकता।जस्टिस पामिडीघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच...

सेवा के दौरान शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही रिटायरमेंट के बाद भी जारी रह सकती है, अगर नियम इसकी इजाज़त दें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (19 मार्च) को कहा कि अगर सेवा नियम/कानून इसकी इजाज़त देते हैं तो किसी अधिकारी/कर्मचारी के रिटायरमेंट से पहले शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने के बाद भी जारी रखी जा सकती है, और वेतन में कटौती जैसे दंड, पेंशन लाभों की फिर से गणना करके लागू किए जा सकते हैं।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने कहा,"...यह बात तय है कि अगर मौजूदा सेवा नियम/कानून किसी अधिकारी/कर्मचारी के रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने से पहले उसके खिलाफ शुरू की...

Consumer Protection Act | बैंक में जमा रखना 'व्यावसायिक उद्देश्य' नहीं, सिर्फ इसलिए कि उस पर ब्याज मिलता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (19 मार्च) को कहा कि बैंक में जमा राशि पर सिर्फ ब्याज मिलने से ही कोई लेन-देन अपने-आप "व्यावसायिक" नहीं हो जाता, जिससे किसी व्यक्ति को "उपभोक्ता" की परिभाषा से बाहर रखा जा सके; बल्कि, यह जांचना ज़रूरी है कि क्या जमा राशि का किसी लाभ कमाने वाली गतिविधि से कोई करीबी और सीधा संबंध है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने साफ किया कि बैंक में अतिरिक्त पैसे जमा करना, सिर्फ इसलिए 'व्यावसायिक उद्देश्य' नहीं माना जाएगा, क्योंकि उस पर ब्याज मिलता है। बल्कि, जब...

FIR रद्द करने की याचिका को मेरिट पर सुनना जरूरी, पुलिस को निर्देश देकर निपटाना गलत: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एफआईआर रद्द करने (quashing) की याचिकाओं को हाईकोर्ट द्वारा मेरिट पर तय किया जाना अनिवार्य है और केवल पुलिस को अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) के दिशा-निर्देशों का पालन करने का निर्देश देकर याचिका का निस्तारण करना न्यायसंगत नहीं है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बिना मामले के तथ्यों और कानून का परीक्षण किए, केवल पुलिस को गिरफ्तारी संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करने को कहकर...

बिना प्रभावी सुनवाई का अवसर दिए विदेशी तलाक डिक्री मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी विदेशी अदालत द्वारा दिया गया तलाक का डिक्री तब तक भारत में मान्य नहीं होगा, जब तक कि दूसरे पक्ष को उस कार्यवाही में प्रभावी और सार्थक रूप से भाग लेने का अवसर न दिया गया हो।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें अमेरिकी अदालत द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को मान्यता दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि पति को अमेरिकी कार्यवाही में ना तो प्रभावी सुनवाई का अवसर मिला और ना ही उसने उसमें सार्थक भागीदारी...

अपीलीय अदालत को MACT मुआवज़े में हल्के में दखल नहीं देना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (18 मार्च) को फैसला सुनाया कि अपीलीय अदालतें मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) द्वारा तय की गई विकलांगता और मुआवज़े के आकलन में तब तक दखल नहीं दे सकतीं, जब तक कि वे सबूतों का पूरी तरह से फिर से मूल्यांकन न करें और स्पष्ट तथा ठोस कारण न बताएं।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने टिप्पणी की,"...जब कोई अपीलीय अदालत मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा विधिवत दर्ज किए गए तथ्यों के निष्कर्षों में दखल देती है, खासकर विकलांगता के आकलन और कमाई की क्षमता में...
