सुप्रीम कोर्ट
BREAKING| Waqf Amendment Act 2025 : सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों का नामांकन बरकरार रखा, इन प्रावधानों पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने (14 सितंबर) वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने निम्नलिखित प्रावधानों में हस्तक्षेप किया-1. धारा 3(1)(आर) के प्रावधान, जिसके अनुसार किसी व्यक्ति को वक्फ बनाने के लिए 5 साल तक इस्लाम का पालन करना आवश्यक है, उसको राज्य सरकारों द्वारा इस शर्त के निर्धारण के संबंध में नियम बनाने तक के लिए स्थगित कर दिया गया।2. सरकार के नामित अधिकारी को यह तय करने की अनुमति देने वाले प्रावधान पर रोक लगा दी गई...
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम | अदालत से प्रमाणित वसीयत को राज्य चुनौती नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह फैसला दिया कि यदि किसी हिंदू पुरुष ने वसीयत (Will) बनाई है, जो अदालत द्वारा वैध घोषित की जा चुकी है और जिसे प्रोबेट (Probate) भी मिल चुका है, तो राज्य सरकार हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 29 के तहत एस्कीट (Escheat) के सिद्धांत का उपयोग नहीं कर सकती।यह फैसला जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस एस.सी. शर्मा की खंडपीठ ने दिया। मामला खेतीड़ी (राजस्थान) के राजा बहादुर सरदार सिंह की वसीयत से जुड़ा है, जिनका निधन 1987 में हुआ था। वसीयत (दिनांक 30 अक्टूबर, 1985) के...
सुप्रीम कोर्ट ने कोल इंडिया की दोहरी मूल्य निर्धारण नीति बरकरार रखी, कहा- गैर-प्रमुख क्षेत्रों के लिए 20% की बढ़ोतरी उचित
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में शुक्रवार (12 सितंबर) को कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की 2006 की अंतरिम नीति बरकरार रखी, जिसमें गैर-प्रमुख क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए 20% मूल्य वृद्धि की गई। न्यायालय ने CIL के "दोहरे मूल्य निर्धारण" दृष्टिकोण को सही ठहराया और तर्क दिया कि बिजली और इस्पात जैसे प्रमुख क्षेत्रों को उनके महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपयोगिता कार्यों के कारण मूल्य वृद्धि से बचाया जाना चाहिए, जबकि गैर-आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन करने वाले गैर-प्रमुख उद्योगों के लिए उच्च मूल्य निर्धारण...
बिना मूल्य चुकाए सेल डीड अमान्य : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि यदि बिक्री विलेख (Sale Deed) बिना किसी प्रतिफल (Consideration) के निष्पादित किया जाता है, तो उसे स्थानांतरण संपत्ति अधिनियम, 1882 (Transfer of Property Act), की धारा 54 के तहत मान्य "बिक्री" नहीं माना जाएगा। ऐसा विलेख शून्य (Void) और अमान्य होगा।अदालत ने कवल कृष्ण बनाम राजेश कुमार व अन्य, (2022) 18 SCC 489 मामले का हवाला दिया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि मूल्य का भुगतान बिक्री का आवश्यक हिस्सा है। यदि किसी अचल संपत्ति का बिक्री विलेख बिना मूल्य चुकाए निष्पादित...
भिक्षुक गृहों में मानवीय सुविधाएँ अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 12 सितम्बर को आदेश दिया कि देशभर के सभी भिक्षुक गृहों (Beggars' Homes) को यह सुनिश्चित करना होगा कि वहाँ हुई मौतों का विस्तृत डेटा संजोया जाए—विशेषकर वे मौतें जो लापरवाही, बुनियादी सुविधाओं की कमी या समय पर चिकित्सा न मिलने के कारण हुई हों। ऐसे मामलों में संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश मृतक के परिजनों को 'उचित मुआवज़ा' देंगे। जहाँ आवश्यक हो, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही भी शुरू की जा सकती है।यह आदेश उस मामले से जुड़ा है, जो दिल्ली के लम्पुर भिक्षुक गृह (साल...
NCLT, NCLAT के रिक्त पदों को युद्धस्तर पर भरा जाना चाहिए, RERA में पर्याप्त स्टाफ होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) और राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में रिक्त पदों को "युद्धस्तर" पर भरने का निर्देश दिया।अदालत ने कहा,"अतिरिक्त संख्या के साथ समर्पित IBC पीठों का गठन किया जाना चाहिए। नियमित नियुक्तियां होने तक रिटायर जजों की सेवाओं का तदर्थ आधार पर उपयोग किया जा सकता है।"अदालत ने कहा कि यद्यपि ऐसे निर्देश पहले भी जारी किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।अदालत ने केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर देश...
प्रत्येक नई आवासीय प्रोजेक्ट को खरीदार द्वारा लागत का 20% भुगतान करने पर स्थानीय राजस्व प्राधिकरण के पास रजिस्टर्ड होना अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट
घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि नई आवासीय प्रोजेक्ट के लिए प्रत्येक आवासीय अचल संपत्ति लेनदेन को खरीदार/आवंटी द्वारा संपत्ति की लागत का कम से कम 20% भुगतान करने पर स्थानीय राजस्व प्राधिकरण के पास रजिस्टर्ड किया जाएगा।अदालत ने आगे निर्देश दिया कि ऐसे अनुबंध जो मॉडल रेरा विक्रय समझौते से महत्वपूर्ण रूप से भिन्न हों, या जिनमें रिटर्न/बायबैक खंड शामिल हों, जहां आवंटी की आयु 50 वर्ष से अधिक हो, उन्हें सक्षम राजस्व प्राधिकरण के समक्ष शपथ पत्र द्वारा समर्थित होना...
S.5 Limitation Act | परिसीमा अवधि शुरू होने से लेकर वास्तविक दाखिल तिथि तक की पूरी अवधि के विलंब का स्पष्टीकरण देना होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिसीमा अधिनियम की धारा 5 के अनुसार विलंब की क्षमा के लिए परिसीमा अवधि शुरू होने से लेकर वास्तविक दाखिल तिथि तक की पूरी अवधि के लिए "पर्याप्त कारण" के अस्तित्व को स्थापित करके विलंब का स्पष्टीकरण देना होगा। यदि परिसीमा अवधि 90 दिन है और अपील 100वें दिन विलंब से दायर की जाती है तो पूरे 100 दिनों के लिए स्पष्टीकरण देना होगा।न्यायालय ने नोट किया कि परिसीमा अधिनियम की धारा 5 में "ऐसी अवधि के भीतर" पद के अर्थ के संबंध में व्यक्त की गई राय में भिन्नता है, जहां इस पद का...
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट संवैधानिक कोर्ट को FIR दर्ज करने का निर्देश देने से नहीं रोक सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि जांच एजेंसी द्वारा की गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट किसी संवैधानिक न्यायालय को यह निष्कर्ष निकालने से नहीं रोक सकती कि आरोप प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का खुलासा करते हैं और FIR दर्ज करने का निर्देश देते हैं।अदालत ने प्रदीप निरंकारनाथ शर्मा बनाम गुजरात राज्य मामले में अपने हालिया फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि जब प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का खुलासा हो तो FIR दर्ज करने से पहले शिकायतों की सत्यता की जांच करने की आवश्यकता नहीं है।अदालत ने ललिता कुमारी बनाम...
सिर्फ MLA होने पर अलग ट्रायल नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 सितम्बर) को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें हरियाणा कांग्रेस विधायक मम्मन खान के लिए केवल विधायक होने के आधार पर अलग ट्रायल चलाने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि Ashwini Kumar Upadhyay बनाम Union of India (2023) मामले में सार्वजनिक प्रतिनिधियों से जुड़े मामलों के शीघ्र निपटारे पर जोर दिया गया है, लेकिन ऐसा करना कानून से हटकर किसी जनप्रतिनिधि को संयुक्त ट्रायल का अधिकार न देना उचित नहीं है।कोर्ट ने कहा,“विधायकों से जुड़े मामलों का...
सेल डीड शून्य हो तो कब्जे का मुकदमा अनुच्छेद 59 के बजाय अनुच्छेद 65 के तहत 12 वर्ष की परिसीमा अवधि द्वारा शासित होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी के सेल डीड के शून्य होने के आधार पर अचल संपत्ति पर कब्जे के लिए दायर किया गया मुकदमा, परिसीमा अधिनियम, 1963 के अनुच्छेद 65 के तहत 12 वर्ष की सीमा अवधि द्वारा शासित होगा, न कि अधिनियम के अनुच्छेद 59 के तहत 3 वर्ष की छोटी अवधि द्वारा।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जहां प्रतिवादी द्वारा जाली और शून्य सेल डीड के आधार पर संपत्ति पर कब्जे का दावा किया जाता है, वहां मुकदमा 12 वर्ष के भीतर दायर किया जा सकता है, क्योंकि ऐसा...
'आवास का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार': सुप्रीम कोर्ट
घर खरीदारों की सुरक्षा के उद्देश्य से महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने घोषणा की कि आवास का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से दिवालियापन की कार्यवाही से गुजर रही संकटग्रस्त रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए वित्तपोषण प्रदान करने हेतु एक पुनरुद्धार कोष बनाने का आग्रह किया।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने कहा कि इसका उद्देश्य अन्यथा व्यवहार्य रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के परिसमापन को रोकना और वास्तविक घर खरीदारों के हितों की रक्षा...
जमानत याचिकाएं 2 महीने में निपटाएं, सालों तक लंबित न रखें: सुप्रीम कोर्ट का हाईकोर्ट्स व ट्रायल कोर्ट्स को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की हाईकोर्ट्स और ट्रायल कोर्ट्स को निर्देश दिया है कि वे जमानत और अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) से जुड़ी याचिकाओं को जल्द से जल्द निपटाएं, अधिमानतः 2 महीने के भीतर।जस्टिस आर. महादेवन ने फैसला सुनाते हुए कहा — “हाईकोर्ट और अधीनस्थ अदालतें जमानत और अग्रिम जमानत की याचिकाओं का निपटारा कम समय में करें, अधिमानतः 2 महीने के भीतर। यही निर्देश हमने दिया है।” जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने कहा कि ऐसी याचिकाएँ सीधे तौर पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता...
क्षमा मांगने का अधिकार दोषी को शेष आजीवन कारावास की सजा सुनाने पर ही लागू होता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्षमा मांगने का अधिकार तब भी लागू होता है, जब किसी व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376DA या धारा 376DB जैसे प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया जाता है, जो उस व्यक्ति के शेष जीवनकाल के लिए आजीवन कारावास की अनिवार्य सजा का प्रावधान करते हैं।यह देखते हुए कि क्षमा मांगने का अधिकार संवैधानिक अधिकार और वैधानिक अधिकार दोनों है, अदालत ने IPC की धारा 376DA की वैधता पर निर्णय देने से इनकार कर दिया, जो 16 वर्ष से कम उम्र की नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार के लिए शेष जीवनकाल के...
Sec.420 IPC| फर्जी दस्तावेज़ से कोई लाभ न मिला तो धोखाधड़ी का अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (10 सितम्बर) को एक शैक्षणिक संस्थान के प्रमुख के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी का मामला रद्द कर दिया, जिन पर फर्जी फायर डिपार्टमेंट एनओसी का इस्तेमाल कर संबद्धता (affiliation) लेने का आरोप था।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि कॉलेज को मान्यता दिलाने के लिए फायर डिपार्टमेंट की नकली एनओसी जमा करना न तो धोखाधड़ी (cheating) है और न ही जालसाजी (forgery), क्योंकि यह दस्तावेज़ कानूनी तौर पर अनिवार्य नहीं था और न ही शिक्षा विभाग को संबद्धता देने के लिए इससे...
CrPC की धारा 197 के तहत मंजूरी का मुद्दा कार्यवाही के किसी भी चरण में निचली अदालत में उठाया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में किसी लोक सेवक के विरुद्ध निचली अदालत द्वारा आरोप तय करने में हस्तक्षेप करने से इनकार किया और कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 197 के तहत मंजूरी के प्रश्न पर कार्यवाही के किसी भी चरण में विचार किया जा सकता है, क्योंकि यह मुद्दा प्रस्तुत साक्ष्य की प्रकृति पर निर्भर करता है कि क्या कृत्य आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में किए गए।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की, जिसमें याचिकाकर्ता-लोक सेवक पर IPC की धारा...
पुलिस को FIR दर्ज करने के लिए सूचना की सत्यता की जांच करने की आवश्यकता नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि पुलिस को FIR दर्ज करते समय शिकायत की सत्यता या विश्वसनीयता की जांच करने की आवश्यकता नहीं है; यदि शिकायत में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का पता चलता है तो पुलिस FIR दर्ज करने के लिए बाध्य है।अदालत ने कहा,"यदि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है तो FIR दर्ज करना पुलिस का कर्तव्य है, पुलिस को उक्त सूचना की सत्यता और विश्वसनीयता की जांच करने की आवश्यकता नहीं है।"अदालत ने कहा कि रमेश कुमारी बनाम राज्य (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली) (2006) 2 एससीसी 677 में यह निर्धारित...
आप कैसे कह सकते हैं कि राज्य झूठा बोल रहे हैं, जबकि विधेयक राज्यपाल के पास वर्षों से लंबित हैं? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा
राष्ट्रपति संदर्भ मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से सवाल किया कि केंद्र कैसे कह सकता है कि राज्य "झूठा अलार्म" बजा रहे हैं, जबकि विधेयक राज्यपालों के पास 3-4 वर्षों से लंबित हैं। यह केंद्र द्वारा दी गई इस दलील के जवाब में था कि पिछले 55 वर्षों में, "17000" में से केवल 20 विधेयकों पर ही सहमति रोकी गई है और 90% मामलों में विधेयकों पर एक महीने के भीतर ही सहमति दे दी गई।इस संदर्भ में केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा:"राज्यपाल की भूमिका संविधान के संरक्षक, भारत...
नियम न हों तो आरक्षित उम्मीदवार छूट लेकर भी सामान्य वर्ग में चयनित हो सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितंबर) को फैसला सुनाते हुए कहा कि जब तक भर्ती नियमों में स्पष्ट रूप से मना न किया गया हो, आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार जिसने शारीरिक मानकों में छूट ली हो, अगर मेरिट में चयनित होता है तो उसे सामान्य श्रेणी (अनारक्षित) की पोस्ट पर भी नियुक्त किया जा सकता है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एक सामान्य वर्ग के उम्मीदवार की याचिका खारिज कर दी, जिसने CISF असिस्टेंट कमांडेंट (एक्जीक्यूटिव) भर्ती में एक अंक से चयन चूक जाने के बाद, आरक्षित वर्ग के...
सुप्रीम कोर्ट : टेंडर नोटिस में मांगे ही नहीं गए दस्तावेज़ की गैर-प्रस्तुति पर बोली खारिज नहीं की जा सकती
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितंबर) को कहा कि नोटिस इन्वाइटिंग टेंडर (NIT) के तहत मांगे ही नहीं गए किसी दस्तावेज़ की गैर-प्रस्तुति के आधार पर किसी बोली को खारिज करना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि टेंडर प्राधिकरण उन शर्तों को लागू नहीं कर सकते, जो टेंडर दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से लिखी ही नहीं गई हों।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बोलीदाता की अयोग्यता केवल इसलिए बरकरार रखी गई थी कि उसने जॉइंट वेंचर...


















