राज�थान हाईकोट
भरण-पोषण का उद्देश्य भूख और बेघर होने से बचाना, पति पर असहनीय आर्थिक बोझ डालना नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य जरूरतमंद जीवनसाथी को तत्काल सहारा देना और उसे भुखमरी या दर-दर भटकने से बचाना है, न कि पति पर ऐसा भारी आर्थिक बोझ डालना जिसे वह वहन ही न कर सके।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि यदि भरण-पोषण के मामलों के निपटारे में वर्षों की देरी हो जाए और फिर आवेदन की तारीख से ही बड़ी रकम देने का आदेश पारित किया जाए, तो यह वेतनभोगी या सीमित आय वाले व्यक्ति पर अत्यधिक और असहनीय आर्थिक दबाव डाल सकता है।अदालत ने कहा,“न्यायिक व्यवस्था में हुई देरी को किसी एक पक्ष पर...
गोदनामे से ही वैध नहीं मानी जाएगी गोद लेने की प्रक्रिया, 'लेने-देने' की रस्म जरूरी : राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल गोदनामा तैयार कर लेने भर से किसी गोद लेने की प्रक्रिया को कानूनन वैध नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के तहत बच्चे को गोद देने और लेने की वास्तविक रस्म का होना अनिवार्य है और इसे महज औपचारिकता नहीं माना जा सकता।जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें निचली अदालत और अपीलीय अदालत द्वारा गोदनामे को अमान्य ठहराने के फैसले को चुनौती दी गई।मामले में महिला पक्ष ने कहा कि...
राजस्थान हाईकोर्ट ने मंत्री की ऑनलाइन आलोचना करने पर टीचर का सस्पेंशन रद्द किया, कहा - 'कार्यकारी नाराज़गी' कानून से ऊपर नहीं हो सकती
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक सरकारी टीचर का सस्पेंशन रद्द किया। टीचर को सोशल मीडिया पर एक मौजूदा मंत्री के खिलाफ टिप्पणी करने के आरोप में सस्पेंड किया गया।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने फैसला सुनाया कि सस्पेंशन के आदेश में इस बात का कोई ज़िक्र नहीं था कि किस कानूनी अधिकार के तहत याचिकाकर्ता को सस्पेंड किया गया। कोर्ट ने कहा कि कार्यकारी नाराज़गी या किसी को हुई कथित शर्मिंदगी, कानूनी अधिकार की जगह नहीं ले सकती।कोर्ट ने टिप्पणी की कि ज़्यादा से ज़्यादा इन आरोपों के आधार पर कानून के मुताबिक सिर्फ़ विभागीय...
फाइनल रिपोर्ट पर फैसला देने के बाद मजिस्ट्रेट दोबारा आदेश नहीं दे सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जब किसी मामले में पुलिस की नकारात्मक अंतिम रिपोर्ट पर मजिस्ट्रेट आदेश पारित कर देता है तो वह फंक्टस ऑफिशियो हो जाता है। उसके बाद विरोध याचिका पर अलग से दूसरा आदेश पारित नहीं कर सकता।जस्टिस अनूप कुमार ढांढ की पीठ ने स्पष्ट किया कि फाइनल रिपोर्ट और विरोध याचिका पर एक साथ विचार करते हुए मजिस्ट्रेट को एक ही साझा आदेश पारित करना चाहिए।अदालत ने कहा,“यदि शिकायतकर्ता विरोध याचिका दाखिल करता है और उसके समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करता है तो...
बिना कानूनी सुरक्षा अपनाए सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ FIR का आदेश नहीं दे सकता मजिस्ट्रेट: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ मजिस्ट्रेट बिना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 में निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन किए सीधे FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकता।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि यदि शिकायत सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से जुड़े कार्यों को लेकर हो, तो मजिस्ट्रेट को FIR दर्ज कराने या संज्ञान लेने से पहले संबंधित अधिकारियों को सुनवाई का अवसर देना और उनके सीनियर अधिकारी से तथ्यात्मक...
जवाई में तेंदुओं के संरक्षण के लिए हाईकोर्ट सख्त, निर्माण और खनन पर रोक; अभयारण्य घोषित करने पर विचार के निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई क्षेत्र में तेंदुओं के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा को लेकर बड़ा आदेश देते हुए इलाके में नए निर्माण और खनन गतिविधियों पर रोक लगाई। अदालत ने राज्य सरकार से यह भी कहा कि पूरे क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने की संभावना पर गंभीरता से विचार किया जाए।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि जवाई क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटन, अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पर्यावरणीय संतुलन...
सहन करना सहमति नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- आर्थिक और सामाजिक मजबूरियों में साथ रहना क्रूरता को खत्म नहीं करता
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कई महिलाएं आर्थिक निर्भरता, सामाजिक दबाव, बच्चों की जिम्मेदारी, रहने की जगह की कमी और बदनामी के डर के कारण प्रताड़नापूर्ण वैवाहिक संबंधों में रहने को मजबूर होती हैं। ऐसे में केवल यह तथ्य कि पति-पत्नी कुछ वर्षों तक एक ही घर में रहे इससे क्रूरता के आरोप स्वतः खत्म नहीं हो जाते।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने कहा,“एक ही घर में रहना हमेशा सौहार्दपूर्ण वैवाहिक जीवन का प्रमाण नहीं होता। कई बार यह प्रतिकूल परिस्थितियों में...
'आटा-साटा' शादियां नैतिक और कानूनी रूप से दिवालिया हैं, बच्ची को सौदेबाजी का ज़रिया बनाया जाता है: राजस्थान हाईकोर्ट
तलाक की खारिज अर्जी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने "आटा-साटा" शादी की प्रचलित प्रथा के बारे में कुछ टिप्पणियां करते हुए राय दीं कि एक संवैधानिक लोकतंत्र में ऐसी प्रथाएं स्पष्ट सामाजिक और कानूनी अस्वीकृति की हकदार हैं।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की डिवीज़न बेंच ने माना कि नाबालिग से जुड़ा आटा-साटा कोई हानिरहित सांस्कृतिक प्रथा नहीं है, बल्कि यह बच्चों को वस्तु बना देती है, उनकी सहमति को दबा देती है, पितृसत्ता को मज़बूत करती है और भविष्य के टकरावों का...
पत्नी बालिग हो और वैध विवाह हो तो पति पर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में पति के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की FIR रद्द करते हुए कहा कि यदि विवाह कानूनी रूप से वैध हो और पत्नी विवाह के समय बालिग हो तो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के अपवाद के तहत पति पर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता।जस्टिस अनुप कुमार ढंड की एकलपीठ ने कहा कि पीड़िता विवाह के समय 18 वर्ष से अधिक आयु की थी और उसने स्वयं आरोपी के साथ 12 अप्रैल 2021 को विवाह किया था। ऐसे में बाद में दर्ज कराई गई FIR “कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग” है।अदालत ने अपने आदेश में कहा,“मामले...
बुजुर्ग माता-पिता की सुरक्षा के लिए बेटे-बहू को घर से बेदखल करना सही: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने सीनियर सिटीजन्स के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि बुजुर्ग माता-पिता की गरिमा और शांतिपूर्ण जीवन की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर बेटे, बहू या अन्य रिश्तेदारों को संपत्ति से बेदखल किया जा सकता है।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने सीनियर सिटीजन दंपति और उनके बेटे-बहू द्वारा दायर याचिका खारिज की। यह याचिका 80 वर्ष से अधिक उम्र के माता-पिता द्वारा संपत्ति से बेदखली के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई।अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि बुजुर्ग माता-पिता को...
S.480 BNSS | केवल महिला होने से हत्या जैसे गंभीर मामलों में जमानत नहीं मिल सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या के गंभीर मामले में सास की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल महिला होने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती, विशेषकर तब जब आरोप बेहद गंभीर हों।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 480 के तहत महिला होने के आधार पर राहत देने की दलील अस्वीकार की।अदालत ने रेखा के.सी. बनाम ज्योतिभाई मामले का हवाला देते हुए कहा कि केवल आरोपी का महिला होना जमानत का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता, खासकर तब जब उसके खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के...
सरकारी नौकरी में अलग-अलग तैनाती को 'परित्याग' नहीं माना जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकारी सेवाओं में कार्यरत पति-पत्नी का अलग-अलग स्थानों पर रहना असामान्य नहीं है। केवल नौकरी की तैनाती के कारण अलग रहना अपने आप में “परित्याग” नहीं माना जा सकता और न ही इसे तलाक का आधार बनाया जा सकता है।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने यह भी कहा कि हर झगड़ा, कटु शब्द या घरेलू विवाद “क्रूरता” की श्रेणी में नहीं आता।अदालत ने कहा कि तलाक के लिए क्रूरता इतनी गंभीर होनी चाहिए, जिससे पीड़ित पक्ष के मन में यह उचित आशंका पैदा हो कि...
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से तय नहीं होगी मृतक की उम्र, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस को मिलेगी प्राथमिकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी मृतक की उम्र तय करने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर नहीं, बल्कि पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे सरकारी दस्तावेजों पर भरोसा किया जाएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज उम्र केवल अनुमानित होती है, जबकि सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी दस्तावेज अधिक विश्वसनीय माने जाएंगे।जस्टिस संदीप तनेजा ने यह टिप्पणी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों की सुनवाई के दौरान की।मामले में हाईकोर्ट ने माना कि दुर्घटना कार...
उम्मीदवार को पात्रता प्रमाण पत्र पेश न करने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जिसे हासिल करना विभाग की ज़िम्मेदारी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि जहां किसी उम्मीदवार की राष्ट्रीयता से जुड़ा पात्रता प्रमाण पत्र हासिल करने की ज़िम्मेदारी नियुक्त करने वाले सरकारी विभाग की होती है, वहां उम्मीदवार के ख़िलाफ़ इस आधार पर कोई भी प्रतिकूल कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती कि उसने वह प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए गृह मंत्रालय से संपर्क नहीं किया।जस्टिस नूपुर भाटी की बेंच सरकारी कर्मचारी द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसके ख़िलाफ़ जारी की गई चार्जशीट रद्द करने की मांग की गई। इस चार्जशीट में आरोप...
बच्चे कहां खेलेंगे: राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर के इकलौते मैदान में पानी की टंकी निर्माण पर लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने गायक कैट स्टीवंस के मशहूर गीत की पंक्ति “वेयर डू द चिल्ड्रेन प्ले?” का उल्लेख करते हुए हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा कस्बे के इकलौते खेल मैदान में ओवरहेड पानी की टंकी के निर्माण पर रोक लगाई।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने टंकी निर्माण के लिए किसी वैकल्पिक स्थान की तलाश करने का गंभीर प्रयास नहीं किया।अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि सक्षम अधिकारी शपथपत्र दाखिल कर बताए कि क्या वास्तव में खेल मैदान ही इस परियोजना...
समझौते के आधार पर साइबर क्राइम खत्म नहीं किए जा सकते, ये समाज पर व्यापक असर डालते हैं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध केवल दो व्यक्तियों के बीच का निजी विवाद नहीं होते बल्कि ये पूरे डिजिटल सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में लोगों के भरोसे को प्रभावित करते हैं। ऐसे मामलों को केवल समझौते के आधार पर खत्म करना साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए बनाए गए कानूनों के उद्देश्य को कमजोर करेगा।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने यह टिप्पणी याचिका खारिज करते हुए की। याचिका में आरोपी ने पक्षों के बीच समझौता होने का हवाला देते हुए FIR रद्द करने की मांग की थी।मामले में आरोप था कि आरोपी ने...
राजस्थान हाई कोर्ट ने NDPS मामलों में बिना सोचे-समझे की जाने वाली कानूनी कार्रवाई पर उठाए सवाल
NDPS Act के तहत आरोपी को ज़मानत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आरोपी को बिना किसी बरामदगी के सिर्फ़ मुख्य आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर फंसाया गया। मुख्य आरोपी से ही नशीले पदार्थ बरामद हुए।जस्टिस अशोक कुमार जैन की बेंच ने "किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ चार्जशीट की सिफ़ारिश करने से पहले अभियोजन पक्ष की सलाह देने वाली प्रक्रिया में हुई कमी" को उजागर किया।कोर्ट ने राय दी कि किसी भी व्यक्ति को ट्रायल के लिए आगे भेजने हेतु सबूतों में कमी या अपर्याप्तता हो सकती है> इसलिए...
गिरफ्तार लोगों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालना कानून से बाहर की सजा: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार लोगों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि यह कानून से बाहर की सजा देने जैसा है और इससे निर्दोष माने जाने के मूल सिद्धांत का उल्लंघन होता है।जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि पुलिस जांच के नाम पर किसी आरोपी को दोषी घोषित नहीं कर सकती। अदालत ने इसे पुलिस द्वारा मीडिया ट्रायल बताते हुए कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस, तस्वीरों का प्रसार और गिरफ्तारी के प्रदर्शन जैसी कार्रवाइयों के...
चार्जशीट के बाद अदालत में पेश होना गिरफ्तारी नहीं, CrPC की धारा 170 का गलत अर्थ नहीं निकाला जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने जालसाजी के मामले में आरोपियों के खिलाफ जारी जमानती वारंट रद्द करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 170 के तहत आरोपी को मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करने का अर्थ उसकी गिरफ्तारी या न्यायिक हिरासत नहीं होता।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने कहा कि यदि जांच एजेंसी ने जांच के दौरान आरोपी को गिरफ्तार करना आवश्यक नहीं समझा, तो केवल चार्जशीट दाखिल होने के बाद औपचारिक रूप से जमानत विचार के लिए आरोपी को हिरासत में नहीं भेजा जा सकता।अदालत ने कहा,“CrPC...
23 आपराधिक मामले लंबित होने के बावजूद पासपोर्ट नवीनीकरण का अधिकार, विदेश यात्रा मौलिक अधिकार: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने 23 लंबित आपराधिक मामलों का सामना कर रहे 66 वर्षीय व्यक्ति को राहत देते हुए पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र देने से इनकार करने वाले कोटा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द किया।जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की पीठ ने कहा कि केवल लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को पासपोर्ट नवीनीकरण से वंचित कर विदेश यात्रा से रोकना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी सहित विभिन्न...


















