मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

पिता बेटे और बेटी की पढ़ाई के खर्च में भेदभाव नहीं कर सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी की गुहार पर भरण-पोषण की रकम बढ़ाने का आदेश देते हुए कहा कि पिता को बेटे और बेटी की पढ़ाई के खर्च में भेदभाव करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया:"प्रतिवादी को बेटे और बेटी की पढ़ाई के खर्च में भेदभाव करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। अगर प्रतिवादी अपने बालिग बेटे की टेक्निकल पढ़ाई का काफ़ी खर्च उठा रहा है तो यह नाबालिग बेटी को उचित भरण-पोषण और पढ़ाई में मदद देने से मना करने का बहाना नहीं हो सकता।"पत्नी और नाबालिग...

सरकारी कर्मचारियों को ट्रांसफर या अटैचमेंट ऑर्डर के ज़रिए परेशान नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्राम रोज़गार सहायक का ट्रांसफर ऑर्डर रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को अटैचमेंट या सज़ा के तौर पर किए गए ट्रांसफर के ज़रिए परेशान नहीं किया जा सकता। अगर सरकार किसी कर्मचारी का ट्रांसफर प्रशासनिक कारणों से करना चाहती है तो सबसे अच्छा तरीका ट्रांसफर पॉलिसी का पालन करना है।जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की बेंच ने पाया कि शुरुआती जांच और उसके बाद आई जांच रिपोर्ट से यह साबित नहीं होता कि याचिकाकर्ता पर लगाए गए आरोप सही हैं।बेंच ने कहा, "इसलिए किसी भी कर्मचारी...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य से कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की मौत को लेकर उठाए गए बचाव के कदमों की जानकारी मांगी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से कान्हा टाइगर रिज़र्व में बाघों की मौत के मामले में अधिकारियों द्वारा उठाए गए बचाव और इलाज के कदमों के बारे में विस्तृत जवाब मांगा।जस्टिस विवेक जैन और जस्टिस अजय कुमार निरंकार की डिवीज़न बेंच ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए यह टिप्पणी की:"प्रतिवादी कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की मौत के मामले में उनके द्वारा उठाए गए बचाव और इलाज के कदमों के बारे में अपनी जवाब के साथ विशिष्ट बयान देंगे, जिसे दो हफ़्तों के भीतर दाखिल किया जाना है। गर्मियों...

बंटवारा कार्यवाही में मालिकाना हक का फैसला नहीं कर सकते राजस्व अधिकारी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि राजस्व अधिकारी बंटवारा कार्यवाही के दौरान भूमि के मालिकाना हक से जुड़े विवादों का निपटारा नहीं कर सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति राजस्व अभिलेखों में भूमिस्वामी के रूप में दर्ज नहीं है, लेकिन स्वयं को भूमि का सह-स्वामी या भूमिस्वामी बताता है, उसे अपने अधिकार की घोषणा के लिए सक्षम दीवानी अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा।जस्टिस दीपक खोत की पीठ ने यह टिप्पणी याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें राजस्व मंडल और तहसीलदार के आदेशों को...

S.223 BNSS | आरोपी को सुनवाई का मौका देने का मतलब यह नहीं कि संज्ञान लेने से पहले उसे सारे सबूत दिए जाएं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि, हालांकि BNSS की धारा 223 का परंतुक (proviso) मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने से पहले अपनाई जाने वाली प्रक्रिया निर्धारित करता है, जिसमें आरोपी को सुनवाई का मौका देना अनिवार्य है। फिर भी ऐसा मौका अपने आप में यह बाध्यता नहीं बन जाता कि आरोपी को शुरुआती चरण में ही सारे सबूत उपलब्ध कराए जाएं।धारा 223 (1) में कहा गया कि अधिकार क्षेत्र रखने वाला कोई भी मजिस्ट्रेट किसी शिकायत पर किसी अपराध का संज्ञान लेते समय शिकायतकर्ता और यदि कोई हो तो उपस्थित गवाहों की शपथ पर...

किताबों की कीमतें और बेचने वालों की जानकारी न देने का मामला: हाई कोर्ट ने प्रीस्कूल डायरेक्टर के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 'कंगारू किड्स इंटरनेशनल प्रीस्कूल' के डायरेक्टर के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। डायरेक्टर पर कलेक्टर के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप है। कलेक्टर ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और शैक्षणिक सामग्री की मनमानी बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रीस्कूल की किताबों, उनकी कीमतों और बेचने वालों की जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का आदेश दिया था।'कंगारू किड्स इंटरनेशनल प्रीस्कूल' द्वारा दायर रिट याचिका खारिज करते हुए जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने टिप्पणी की कि स्कूल का...

Twisha Sharma Dowry Death: गिरिबाला सिंह की अग्रिम ज़मानत की चुनौतियों पर फैसला सुरक्षित, CBI को पक्षकार बनने की अनुमति

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और त्विशा शर्मा के माता-पिता की उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिनमें त्विशा की सास गिरिबाला सिंह को दहेज हत्या के कथित मामले में दी गई अग्रिम ज़मानत को चुनौती दी गई।जस्टिस देव नारायण मिश्रा की सिंगल-जज बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।सुनवाई के दौरान, त्विशा के माता-पिता की ओर से पेश सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि भोपाल कोर्ट का वह आदेश, जिसमें ट्विशा की सास गिरिबाला (रिटायर्ड जज) को अग्रिम ज़मानत दी गई...

श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव मामला फिर खुला: हाईकोर्ट ने सरकार को फटकारा, कहा- विरोधाभासी रुख अपनाकर प्रक्रिया में देरी की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने श्योपुर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष चुनाव को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को फिर से बहाल किया।अदालत ने राज्य सरकार और निर्वाचित अध्यक्ष रेणु गर्ग के विरोधाभासी रुख पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि दोनों ने अलग-अलग मंचों पर अलग दलीलें देकर न्यायिक प्रक्रिया में देरी की।जस्टिस आशीष श्रोती की पीठ ने प्रथम जिला जज के उस आदेश रद्द किया, जिसमें चुनाव याचिका समयपूर्व बताते हुए खारिज की गई।श्योपुर नगर पालिका परिषद के चुनाव जुलाई 2022 में हुए थे जिनमें 23 पार्षद चुने गए। इसके बाद 5...

तलाकशुदा बेटी को पारिवारिक पेंशन से वंचित करना भेदभावपूर्ण: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि तलाकशुदा बेटी को पारिवारिक पेंशन के अधिकार से बाहर नहीं रखा जा सकता। अदालत ने माना कि ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन होगा।जस्टिस विशाल धगत की पीठ ने कहा,“यदि तलाकशुदा बेटियों को परिवार की परिभाषा में शामिल नहीं किया जाता, तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा, क्योंकि अविवाहित, विवाहित और तलाकशुदा बेटी में कोई अंतर नहीं है।”मामला ज्योति नामक महिला से जुड़ा था जो...

भरण-पोषण न देने पर पति को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण राशि की वसूली के लिए की जाने वाली गिरफ्तारी केवल पालन सुनिश्चित कराने का माध्यम है, इसे अनिश्चितकालीन दंडात्मक कारावास में नहीं बदला जा सकता।जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने अक्टूबर 2025 से जेल में बंद एक मजदूर को रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि किसी निर्धन व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखने से भरण-पोषण कानून का उद्देश्य ही विफल हो सकता है, क्योंकि वह भविष्य में कमाकर भुगतान करने में असमर्थ हो जाता है।अदालत ने कहा,“किसी निर्धन व्यक्ति की लगातार हिरासत,...

संदिग्ध लेनदेन के नाम पर पूरा वेतन अकाउंट फ्रीज करना आजीविका के अधिकार का उल्लंघन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कुछ संदिग्ध लेनदेन की जांच चलने के आधार पर किसी कार्यरत विशेष सशस्त्र बल कर्मी को उसके वैध वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता।अदालत ने माना कि पूरे वेतन खाते पर रोक लगाना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने बैंक को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के वेतन खाते का संचालन बहाल किया जाए। हालांकि जिन लेनदेन पर संदेह है या जो जांच के दायरे में हैं, उन पर रोक जांच एजेंसी के अगले आदेश तक जारी रह सकती...

घर से वकालत करने पर व्यावसायिक बिजली दर नहीं वसूली जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि कोई वकील अपने आवास से कार्यालय संचालित करता है तो उससे व्यावसायिक दर पर बिजली शुल्क नहीं वसूला जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि वकालत को व्यावसायिक गतिविधि नहीं माना जा सकता।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने कहा,“यदि वकील का कार्यालय आवासीय परिसर में स्थित है, तो उसे व्यावसायिक गतिविधि नहीं कहा जा सकता। हालांकि यदि कार्यालय किसी व्यावसायिक भवन में संचालित हो रहा हो तब वह व्यावसायिक दर से छूट नहीं मांग सकता।”अदालत ने आगे कहा कि किसी...

अंतर-धार्मिक के जोड़ों को लगातार पुलिस सुरक्षा पाने के लिए खतरे का स्पष्ट सबूत दिखाना होगा: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अलग-अलग धर्मों के जोड़े की याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने चौबीसों घंटे (24 घंटे) पुलिस सुरक्षा, जिसमें रात के समय विशेष सुरक्षा भी शामिल थी, की मांग की थी। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि लगातार पुलिस सुरक्षा की हर याचिका में खतरे का स्पष्ट सबूत होना चाहिए, न कि सिर्फ़ आम आशंकाएं या इक्का-दुक्का घटनाएं।याचिकाकर्ताओं ने विशेष रूप से प्रतिवादियों की 13.04.2026 की कार्रवाई रद्द करने या उसमें बदलाव करने की मांग की थी। इस कार्रवाई के तहत उनकी सुरक्षा के लिए पहले तैनात किए गए...

Twisha Sharma Dowry Death Case: सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (25 मई) को त्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह से कथित दहेज हत्या मामले में उन्हें दी गई अग्रिम ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाब मांगा।जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल जज बेंच ने पीड़ित के माता-पिता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा (जिनके साथ एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव भी हैं) की दलीलें सुनीं। लूथरा ने याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई की मांग की।लूथरा ने कोर्ट को बताया कि दो संबंधित मामले सूचीबद्ध हैं- एक राज्य सरकार द्वारा दायर और दूसरा पीड़ित के...

पेमेंट ऑफ़ ग्रेच्युटी एक्ट की शर्तें पूरी न होने तक कर्मचारी को नौकरी से निकालने पर ग्रेच्युटी अपने-आप ज़ब्त नहीं की जा सकती: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि सिर्फ़ नौकरी से निकाल देने भर से ग्रेच्युटी अपने-आप ज़ब्त नहीं हो जाती, जब तक कि एक्ट के तहत तय कानूनी शर्तें पूरी न हो जाएं।कोर्ट ने सेंट्रल एमपी ग्रामीण बैंक की तरफ़ से दायर अपील भी खारिज की। इस अपील में बैंक ने सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें बैंक को निर्देश दिया गया कि वह एक मृत कर्मचारी की विधवा को ग्रेच्युटी का भुगतान करे। उस कर्मचारी को पैसों के गबन के आरोपों के चलते नौकरी से निकाल दिया गया।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की...

BCI के नियम वकील-आरोपी को सह-आरोपी का प्रतिनिधित्व करने से नहीं रोकते: एमपी हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी का मामला रद्द किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक वकील के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की। इस वकील ने एक आपराधिक मामले में अपने बेटे की ओर से पेश होकर उसका प्रतिनिधित्व किया, जबकि उस मामले में वे दोनों ही आरोपी थे। कोर्ट ने यह फैसला देते हुए कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम किसी सह-आरोपी वकील को किसी अन्य आरोपी का प्रतिनिधित्व करने से नहीं रोकते हैं।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की:"ऊपर जिस बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम 13 का ज़िक्र किया गया, वह 'मुवक्किल के प्रति...

त्विशा शर्मा दहेज हत्या मामला: पति समर्थ सिंह ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका वापस ली

त्विशा शर्मा दहेज मौत मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की पीठ ने की।अदालत ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता समर्थ सिंह की ओर से पेश वकील ने अग्रिम जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी और कहा कि वह ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करना चाहते हैं। अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि आरोपी चाहे तो जांच अधिकारी या ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण कर सकता है।अदालत ने कहा,“यदि...

POSH शिकायतों की जांच ICC/LCC तंत्र के बाहर किसी समानांतर जांच प्राधिकरण द्वारा नहीं की जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि यौन उत्पीड़न की रोकथाम अधिनियम (POSH Act), 2013 के तहत शिकायतों की जांच या उनका निपटारा आंतरिक शिकायत समिति (ICC) या स्थानीय शिकायत समिति (LCC) के ढांचे के बाहर किसी भी समानांतर प्राधिकरण द्वारा नहीं किया जा सकता।जस्टिस आशीष श्रोती की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे किसी समानांतर प्राधिकरण को अनुमति देने से POSH Act का उद्देश्य ही कमजोर हो जाएगा।पीठ ने कहा:"यदि किसी नियोक्ता को कार्यस्थल पर किसी महिला द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए...