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ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का अधिकार: DM का प्रमाणपत्र जेंडर की अंतिम पुष्टि, पासपोर्ट प्राधिकरण मेडिकल जांच की मांग नहीं कर सकता : इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 की धारा 7 के तहत जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया प्रमाणपत्र जेंडर/पहचान का अंतिम और निर्णायक प्रमाण है। पासपोर्ट प्राधिकरण ऐसे मामले में दोबारा मेडिकल जांच या जन्म प्रमाणपत्र में बदलाव की शर्त नहीं रख सकता।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने खुश आर गोयल की याचिका का निस्तारण करते हुए यह टिप्पणी की।याचिका में पासपोर्ट अधिकारियों की उस कार्रवाई को चुनौती दी गई,...
“ED को हथियार बनाया गया” बनाम “ED को आतंकित किया गया” : ममता बनर्जी मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस
I-PAC कार्यालय में तलाशी के दौरान कथित बाधा को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर मामले में एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे “हथियार” नहीं बनाया गया, बल्कि “आतंकित” किया गया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने यह टिप्पणी सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा की उस दलील के जवाब में की, जिसमें उन्होंने एजेंसी के “weaponization” (राजनीतिक उपयोग) का आरोप लगाया था।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने...
जघन्य अपराधों में जमानत के सिद्धांत गंभीर आर्थिक अपराधों पर भी लागू : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जघन्य अपराधों में जमानत के लिए लागू सिद्धांत गंभीर आर्थिक अपराधों पर भी समान रूप से लागू होते हैं, क्योंकि ऐसे अपराध नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करते हैं। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक आदतन आर्थिक अपराधी को जमानत दे दी गई थी। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने केवल सह-अभियुक्त के साथ समानता (parity) के आधार पर जमानत दी, जबकि आरोपी की सक्रिय भूमिका,...
लाल किले पर हुए बम धमाके के सिलसिले में फेसबुक पर आपत्तिजनक कमेंट पोस्ट करने के आरोपी को मिली ज़मानत
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने लाल किले के पास हुए बम धमाके के सिलसिले में फेसबुक पर कथित तौर पर आपत्तिजनक कमेंट पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार हुए व्यक्ति को स्थायी ज़मानत दी।जस्टिस प्रांजल दास ने ज़मानत अर्जी मंज़ूर करते हुए कहा,“मामले के मेरिट पर जाए बिना; सिर्फ़ हिरासत की अवधि और जांच पूरी होने पर विचार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित कोर्ट की संतुष्टि के लिए उतनी ही रकम के एक उपयुक्त ज़मानत के साथ 25,000 रुपये के ज़मानत बॉन्ड पर जाने की अनुमति दी जाएगी।”न्यायालय के समक्ष रखे गए मामले के अनुसार...
कानूनी वारिस संयुक्त किरायेदार होते हैं, सह-किरायेदार नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने बेदखली डिक्री बरकरार रखी
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि मूल किरायेदार की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिस अलग-अलग या स्वतंत्र किरायेदारी अधिकार प्राप्त नहीं करते, बल्कि वे संयुक्त किरायेदार के रूप में उसके स्थान पर आते हैं। ऐसे मामलों में एक संयुक्त किरायेदार के विरुद्ध की गई कार्यवाही सभी पर बाध्यकारी होती है।जस्टिस बिपिन गुप्ता की एकल पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए सह-किरायेदार के उत्तराधिकारियों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में बेदखली डिक्री के क्रियान्वयन को चुनौती दी गई...
पेंशन के लिए पूर्व सेवा की गणना पर कोई टकराव नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट की पूर्ण पीठ का स्पष्ट निर्णय
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट की पूर्ण पीठ ने पेंशन संबंधी लाभ के लिए पूर्व सेवा की गणना को लेकर दो खंडपीठ के निर्णयों में कथित विरोधाभास के प्रश्न पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।अदालत ने कहा कि दोनों निर्णय अलग-अलग तथ्यात्मक और वैधानिक परिस्थितियों में दिए गए, इसलिए उनमें किसी प्रकार का वास्तविक टकराव नहीं है।चीफ जस्टिस शील नागू, जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज और जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने कहा,“किसी भी निर्णयों के बीच कथित टकराव वास्तविक, प्रत्यक्ष और अपूरणीय होना चाहिए, जो समान तथ्यों और समान विधिक...
अतीत के आधार पर अनवरत कैद उचित नहीं: जम्मू-कश्मीर हाइकोर्ट ने पूर्व हिजबुल मुजाहिद्दीन सदस्य को दी जमानत
जम्मू कश्मीर एंड लद्दाख हाइकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और शीघ्र सुनवाई के संवैधानिक अधिकार को पुनः रेखांकित करते हुए कहा कि किसी आरोपी के पूर्व आचरण के आधार पर जिसके लिए वह पहले ही अभियोजन और हिरासत झेल चुका हो उसे वर्तमान मामले में अनिश्चित काल तक जेल में नहीं रखा जा सकता, जब तक उसके खिलाफ विश्वसनीय और प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध न हों।जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अब्दुल राशिद की जमानत अपील स्वीकार की और NIA कोर्ट जम्मू द्वारा पारित जमानत...
युवा वकीलों के लिए बड़ी राहत: राजस्थान हाइकोर्ट ने बनाया जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड, कानून की किताबों के लिए मिलेगी सहायता
राजस्थान हाइकोर्ट ने प्रथम पीढ़ी के युवा वकीलों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एक अहम पहल की।हाइकोर्ट ने जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड के गठन का निर्देश दिया, जिसके माध्यम से कम आयु और सीमित अनुभव वाले वकीलों को कानून की पुस्तकें खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी।यह आदेश जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने पारित किया।अदालत ने कहा कि पहली पीढ़ी के युवा वकीलों के सामने अपनी प्रैक्टिस स्थापित करने में गंभीर आर्थिक और व्यावसायिक चुनौतियाँ हैं। उनके पास न तो पारिवारिक पृष्ठभूमि का सहारा होता है और न...
गंभीर अपराधों में पीड़ित को मुआवज़ा सज़ा का विकल्प नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कुछ हाईकोर्ट के उस ट्रेंड की आलोचना की, जिसमें गंभीर अपराधों में पीड़ित को दिए जाने वाले मुआवज़े की रकम बढ़ाकर जेल की सज़ा कम कर दी जाती है।कोर्ट ने कहा कि इस तरह के तरीके से यह गलत मैसेज जाएगा कि आरोपी पैसे का मुआवज़ा देकर सज़ा से बच सकता है।कोर्ट ने कहा,"पीड़ित को दिया जाने वाला मुआवज़ा सिर्फ़ मुआवज़े के तौर पर है। इसे सज़ा के बराबर या उसका विकल्प नहीं माना जा सकता।" कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें हत्या की कोशिश के दो दोषियों की सज़ा घटाकर दो महीने कर दी...
'विदेशी कॉन्सेप्ट उधार न लें': सुप्रीम कोर्ट ने सेक्सुअल ऑफेंस के मामलों में जजों को सेंसिटिव बनाने के लिए भारतीय सामाजिक ताने-बाने से जुड़ी गाइडलाइंस बनाने की मांग की
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी को सेक्सुअल ऑफेंस के मामलों को कोर्ट में संभालने में सेंसिटिविटी और दया पैदा करने के लिए पूरी ड्राफ्ट गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया। साथ ही इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसे नियम भारत के सामाजिक ताने-बाने को दिखाने चाहिए और विदेशी अधिकार क्षेत्रों से उधार नहीं लिए जाने चाहिए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादित आदेश पर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए स्वप्रेरणा मामले की...
अगर फ़ैसले में देरी हो तो क्या मुकदमा चलाने के लिए 'डीम्ड सैंक्शन' है? सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को भेजा
सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल बड़ी बेंच को भेजा कि क्या किसी सरकारी कर्मचारी पर मुकदमा चलाने की मंज़ूरी को "डीम्ड" माना जा सकता है अगर सक्षम अधिकारी तय समय में फ़ैसला लेने में नाकाम रहता है। कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगा दी जिसमें ऐसी डीम्ड सैंक्शन का प्रावधान था।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच तमिलनाडु राज्य की तरफ से दायर स्पेशल लीव पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी। यह पिटीशन मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के 22 नवंबर, 2024 के ऑर्डर के खिलाफ थी।डीम्ड सैंक्शन पर...
आपसी सुसाइड पैक्ट में जिंदा पार्टनर उकसाने के लिए जिम्मेदार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सुसाइड पैक्ट में जिंदा पार्टनर को सुसाइड के लिए उकसाने का दोषी ठहराया जा सकता है। साथ ही कोर्ट ने फैसला सुनाया कि साथ मरने का आपसी वादा IPC की धारा 306 और 107 के तहत जिम्मेदारी लाने के लिए जरूरी साइकोलॉजिकल प्रेरणा देता है।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने 2002 में मशहूर तमिल/तेलुगु एक्ट्रेस प्रत्यूषा को सुसाइड के लिए उकसाने के लिए गुडिपल्ली सिद्धार्थ रेड्डी की सजा बरकरार रखी।यह मामला 2002 में एक्ट्रेस प्रत्यूषा की मौत से जुड़ा है, जिनकी मौत आरोपी के साथ...
सहमति से बने फिजिकल रिलेशनशिप के खराब होने के बाद सहमति को बाद में वापस नहीं लिया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी महिला की दी गई सहमति को बाद में वापस नहीं लिया जा सकता ताकि सहमति से बने रिलेशनशिप को सिर्फ इसलिए क्रिमिनल ऑफेंस में बदला जा सके, क्योंकि रिलेशनशिप टूट गया।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि कानून को महिलाओं को असली सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन, ज़बरदस्ती और गलत इस्तेमाल से बचाने के लिए सतर्क रहना चाहिए। साथ ही उसे अपने प्रोसेस के गलत इस्तेमाल से भी बचना चाहिए।कोर्ट ने कहा,"क्रिमिनल लॉ को ऐसे रिलेशनशिप से होने वाले बदले, दबाव या पर्सनल बदले का ज़रिया बनने की...
पालिका बाज़ार वेंडिंग प्लान को मंज़ूरी देने से पहले दुकानदारों और वेंडरों की बात सुन सरकार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह कनॉट प्लेस और पालिका बाज़ार के लिए प्रस्तावित टाउन वेंडिंग प्लान पर आखिरी फ़ैसला लेने से पहले दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के प्रतिनिधियों की बात सुने। इन दोनों को सुप्रीम कोर्ट ने सुधीर मदान और अन्य बनाम MCD और अन्य (2007) में नो-वेंडिंग ज़ोन घोषित किया।यह डेवलपमेंट पालिका बाज़ार शॉपकीपर्स वेलफ़ेयर एसोसिएशन की रिट पिटीशन में आया। इसमें टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) द्वारा किए गए सर्वे, सर्टिफिकेट ऑफ़ वेंडिंग (COVs) जारी करने और नई दिल्ली...
मोबाइल फ़ोन/व्हाट्सएप से समन भेजना BNSS के तहत मान्य: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कांस्टेबल पर लगाया गया जुर्माना रद्द किया
एक अहम आदेश में बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि इलेक्ट्रॉनिक तरीके से या मोबाइल फ़ोन से भी समन भेजना कानूनी होगा, क्योंकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के नियमों के तहत इसकी इजाज़त है।नागपुर सीट पर बैठी सिंगल-जज जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के ने स्पेशल POCSO कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें कांस्टेबल पर बाल शोषण के मामले में सरकारी गवाहों को मोबाइल फ़ोन, खासकर WhatsApp के ज़रिए समन भेजने पर जुर्माना लगाया गया।21 जनवरी के आदेश को चुनौती देते हुए पब्लिक प्रॉसिक्यूटर डीवी चौहान ने बताया कि स्पेशल POCSO...
"जल्दबाज़ी में न्याय, न्याय को दबाना:" मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO आरोपी को एक्सपर्ट गवाह को बुलाने की इजाज़त दी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को सिर्फ़ टेक्निकल वजहों जैसे कि एप्लीकेशन फाइल करने में देरी या पुराने केस पेंडिंग होने पर फॉरेंसिक एक्सपर्ट को बुलाने और उनसे पूछताछ करने के मौके से मना नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी कहा कि केस का जल्दी निपटारा फेयर ट्रायल की कीमत पर नहीं हो सकता।जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने आरोपी द्वारा दायर क्रिमिनल रिवीजन को मंज़ूरी दी, जिसमें स्पेशल जज (POCSO), रीवा के ऑर्डर को चुनौती दी गई। इस ऑर्डर में फॉरेंसिक एक्सपर्ट समेत बचाव पक्ष के गवाहों को बुलाने की...
'पेनिस को वजाइना के ऊपर रखना, बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना रेप नहीं': छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप की सज़ा बदली
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सोमवार (16 फरवरी) को कहा कि मेल ऑर्गन को वजाइना के ऊपर रखना और फिर बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना इंडियन पैनल कोड (IPC) की धारा 375 के तहत 'रेप' नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह 'रेप की कोशिश' है और IPC की धारा 376/511 के तहत सज़ा होगी।रेप की सज़ा को रेप की कोशिश में बदलते हुए जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने कहा,“अश्लील हमले को अक्सर रेप की कोशिश में बदल दिया जाता है। इस नतीजे पर पहुंचने के लिए कि आरोपी का बर्ताव हर हाल में, और हर तरह के विरोध के बावजूद, अपने जुनून को...
JJ Act के तहत नाबालिग के लिए जमानत पूरा अधिकार नहीं, 'न्याय का अंत' धारा 12 के तहत एक अहम टेस्ट: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
एक जघन्य हत्या के आरोपी नाबालिग को जमानत देने से मना करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने समझाया कि नाबालिग अधिकार के तौर पर बेल का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि किए गए जुर्म की प्रकृति और गंभीरता को ध्यान में रखना होगा।जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2015 (JJ Act) की धारा 12(1) का ज़िक्र किया, जिसमें यह प्रावधान है कि— जब किसी बच्चे पर कोई जुर्म करने का आरोप लगता है और उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने लाया जाता है तो ऐसे व्यक्ति को बेल पर रिहा कर दिया...
SDM ने गैर-कानूनी तरीके से वकील को हिरासत में लिया, हाईकोर्ट ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया
9 फरवरी, 2025 को पटना हाईकोर्ट ने दानापुर के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के ऑफिस के अंदर प्रैक्टिस करने वाले वकील को कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने के मामले में CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया।जस्टिस अरुण कुमार झा की सिंगल जज बेंच पटना हाईकोर्ट के वकील की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ता के मुताबिक, वह एक क्लाइंट की तरफ से केस लड़ने के लिए SDM, दानापुर के सामने पेश हुआ। आरोप है कि SDM ने मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिजन्स एक्ट, 2007 की धारा 17...
'जीवन के अधिकार में सुरक्षित हाईवे शामिल': राजस्थान हाईकोर्ट ने 2 महीने के अंदर धार्मिक अतिक्रमण समेत सभी अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया
पूरे राजस्थान में नेशनल हाईवे के राइट ऑफ़ वे (ROW) के अंदर धार्मिक ढांचों समेत बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का न्यायिक संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने 2 महीने के अंदर उन्हें हटाने या सही जगह पर दूसरी जगह ले जाने का निर्देश दिया।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की डिवीजन बेंच ने कहा कि हाईवे कंट्रोल लाइन, बिल्डिंग लाइन, सड़क की ज़मीन की बाउंड्री वगैरह का ज़िक्र किए बिना अलग-अलग परमिशन, लाइसेंस और यूटिलिटी कनेक्शन देते समय इंटर-डिपार्टमेंट कोऑर्डिनेशन की कमी के कारण खतरनाक एक्सेस पॉइंट...




















