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आपसी सहमति से तलाक की पहली अर्जी के लिए एक वर्ष की अलगाव अवधि अनिवार्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
आपसी सहमति से तलाक की पहली अर्जी के लिए एक वर्ष की अलगाव अवधि अनिवार्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा है कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13B(1) के तहत आपसी सहमति से तलाक की पहली अर्जी दाखिल करने से पहले आवश्यक एक वर्ष की अलगाव अवधि अनिवार्य नहीं है और इसे माफ (वेवर) किया जा सकता है।जस्टिस नवीन चावला, जस्टिस अनुप जयराम भंभानी और जस्टिस रेणु भटनागर की पूर्ण खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस अवधि को अधिनियम की धारा 14(1) के प्रावधान (प्रोवाइजो) को लागू करते हुए माफ किया जा सकता है।अदालत ने यह भी कहा कि एक वर्ष की अलगाव अवधि की माफी से धारा 13B(2) के तहत दूसरी...

NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त,दिल्ली सीमाओं पर स्थित 9 टोल प्लाजा को बंद या स्थानांतरित करने पर विचार करने को NHAI और MCD से कहा
NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त,दिल्ली सीमाओं पर स्थित 9 टोल प्लाजा को बंद या स्थानांतरित करने पर विचार करने को NHAI और MCD से कहा

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ते वायु प्रदूषण स्तर को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 17 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और नगर निगम दिल्ली (MCD) को कई अहम निर्देश जारी किए। अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर स्थित टोल प्लाजा के कारण उत्पन्न हो रही भीषण यातायात भीड़ को कम करने के लिए उन्हें अस्थायी रूप से बंद करने या अन्यत्र स्थानांतरित करने की संभावना पर तत्काल विचार करने को कहा।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ को...

दिल्ली-NCR में BS-IV से नीचे के 10 साल पुराने डीज़ल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी
दिल्ली-NCR में BS-IV से नीचे के 10 साल पुराने डीज़ल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (17 दिसंबर) को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 10 वर्ष से अधिक पुराने डीज़ल वाहनों और 15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने वाले अपने 12 अगस्त के आदेश में आंशिक संशोधन किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे पुराने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जिनका उत्सर्जन मानक बीएस-IV से नीचे का है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने यह आदेश दिल्ली सरकार के अनुरोध पर पारित...

दमन एवं दीव घूमने गए लड़कों को मुंबई पुलिस ने ज़बरदस्ती हिरासत में लेकर वसूल की फिरौती, हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार
दमन एवं दीव घूमने गए लड़कों को मुंबई पुलिस ने ज़बरदस्ती हिरासत में लेकर वसूल की फिरौती, हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

यह देखते हुए कि कानून लागू करने वालों द्वारा किए गए अपराध पूरे न्याय सिस्टम की ईमानदारी को कमजोर करते हैं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेश के पांच पुलिसकर्मियों को जमानत देने से इनकार किया, जिन पर सूरत के युवा लड़कों को अवैध रूप से हिरासत में लेने, उनके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार करने और उन्हें छोड़ने के लिए 'फिरौती' के तौर पर 25 लाख रुपये मांगने और पीड़ितों के परिवार से 5 लाख रुपये मिलने के बाद उन्हें छोड़ने का आरोप है।सिंगल-जज जस्टिस डॉ. नीला गोखले ने कहा कि इस मामले...

सुप्रीम कोर्ट ने RG Kar मेडिकल कॉलेज मामले में स्वतः संज्ञान याचिका कलकत्ता हाईकोर्ट को सौंपी
सुप्रीम कोर्ट ने RG Kar मेडिकल कॉलेज मामले में स्वतः संज्ञान याचिका कलकत्ता हाईकोर्ट को सौंपी

सुप्रीम कोर्ट ने आज आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ हुई बलात्कार और हत्या की घटना से जुड़े उस स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) मामले को कलकत्ता उच्च न्यायालय को स्थानांतरित कर दिया, जिसे उसने स्वयं शुरू किया था। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन की निगरानी कलकत्ता हाईकोर्ट करेगा।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच के समक्ष रखा जाए, जिसके लिए मुख्य न्यायाधीश...

राष्ट्रपति के आदेश के बाद 19 दिसंबर को केरल हाईकोर्ट में शामिल होंगी जस्टिस निशा बानू
राष्ट्रपति के आदेश के बाद 19 दिसंबर को केरल हाईकोर्ट में शामिल होंगी जस्टिस निशा बानू

जस्टिस निशा बानू 19 दिसंबर को केरल हाईकोर्ट में शामिल होंगी। बता दें, जस्टिस बानू को अक्टूबर में मद्रास हाईकोर्ट से केरल हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया गया था।केरल हाईकोर्ट ने जज के शपथ ग्रहण समारोह की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए एक यूट्यूब लिंक जारी किया, जिससे इस बात की पुष्टि होती है।वह 19 दिसंबर को केरल हाई कोर्ट में जज के तौर पर शपथ लेंगी।हालांकि, केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर, 2025 को मद्रास हाईकोर्ट से केरल हाईकोर्ट में उनके ट्रांसफर की सूचना दी थी, लेकिन उन्होंने ट्रांसफर आदेश का पालन नहीं किया था।...

फैमिली कोर्ट काउंसलर्स के लिए जेंडर संवेदीकरण पर एक दिवसीय वर्कशॉप आयोजित
फैमिली कोर्ट काउंसलर्स के लिए जेंडर संवेदीकरण पर एक दिवसीय वर्कशॉप आयोजित

न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, उत्तर प्रदेश (JTRI), लखनऊ में 14 दिसंबर 2025 को “लिंग संवेदीकरण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पारिवारिक न्यायालय मामलों की संवेदनशीलता समिति के निर्देशन में आयोजित किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए पारिवारिक न्यायालय परामर्शदाताओं ने भाग लियाकार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को लिंग को एक सामाजिक संरचना के रूप में समझने, प्रचलित लैंगिक रूढ़ियों की पहचान करने तथा यह समझ विकसित...

अस्थायी कर्मचारियों को दिए गए टेक्निकल ब्रेक मातृत्व अवकाश लाभ से इनकार करने का आधार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
अस्थायी कर्मचारियों को दिए गए टेक्निकल ब्रेक मातृत्व अवकाश लाभ से इनकार करने का आधार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (16 दिसंबर) को फैसला सुनाया कि दैनिक वेतन पर अस्थायी आधार पर काम करने वाली महिला मातृत्व अवकाश के लाभों की हकदार है। उसे इस आधार पर इससे वंचित नहीं किया जा सकता कि उसे साल में 120 दिन पूरे करने के बाद 1 या 2 दिन का टेक्निकल ब्रेक दिया जाता है।कोल्हापुर में सर्किट बेंच में बैठे जस्टिस मकरंद कर्णिक और अजीत कडेथंकर की डिवीजन बेंच ने डॉ. वृषाली यादव द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया, जो सितंबर 2018 से राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रसूति एवं...

सरकारी वकीलों की नियुक्ति पर दिशानिर्देश जारी करे केंद्र सरकार: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया तीन महीने का समय
सरकारी वकीलों की नियुक्ति पर दिशानिर्देश जारी करे केंद्र सरकार: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया तीन महीने का समय

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को विभिन्न सरकारी विभागों की ओर से अदालतों में पेश होने वाले वकीलों की नियुक्ति के लिए दिशानिर्देश जारी करने हेतु तीन महीने का समय दिया। अदालत ने यह निर्देश एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिया।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ विषाल शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट और अधीनस्थ अदालतों में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए किए गए वकीलों के पैनल गठन को चुनौती दी गई।सुनवाई...

अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज: पंजाब सरकार ने हरियाणा पुलिस द्वारा वकील पर कथित हमले के मामले में हाईकोर्ट को बताया
अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज: पंजाब सरकार ने हरियाणा पुलिस द्वारा वकील पर कथित हमले के मामले में हाईकोर्ट को बताया

पंजाब सरकार ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में बताया कि एक ऐसे मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई जिसमें हरियाणा पुलिस ने कथित तौर पर पंजाब में एक वकील पर हमला किया था।हाईकोर्ट ने मंगलवार को 30 नवंबर को चंडीगढ़ के पास नयागांव पंजाब में सादे कपड़ों में हरियाणा पुलिस कर्मियों द्वारा एक वकील अमित पर कथित हमले का स्वतः संज्ञान लिया।FIR दर्ज करने में अनुचित देरी के कारण पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने 15 दिसंबर से हड़ताल पर जाने का फैसला किया था।कोर्ट ने कहा कि 30 नवंबर को एक...

दिल्ली में कक्षा 5 तक स्कूल बंद रखने के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार, मामला CAQM पर छोड़ा
दिल्ली में कक्षा 5 तक स्कूल बंद रखने के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार, मामला CAQM पर छोड़ा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार के उस आदेश को चुनौती देने वाली अर्जियों पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में अत्यधिक खराब वायु गुणवत्ता के कारण 15 दिसंबर से कक्षा 5 तक की शारीरिक (फिजिकल) कक्षाएं निलंबित की गई थीं।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि स्कूलों को बंद करने का निर्णय अस्थायी है और अगले सप्ताह से शीतकालीन अवकाश भी शुरू होने वाला है। हालांकि,...

इंडिगो की उड़ानें रद्द होने पर चार गुना मुआवज़े की मांग वाली जनहित याचिका खारिज
इंडिगो की उड़ानें रद्द होने पर चार गुना मुआवज़े की मांग वाली जनहित याचिका खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडिगो एयरलाइंस द्वारा हाल में रद्द की गई उड़ानों के लिए चार गुना मुआवज़ा देने और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका को सुनवाई से इनकार किया। अदालत ने कहा कि इसी मुद्दे पर पहले से एक याचिका लंबित है और अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करने का कोई औचित्य नहीं है।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विराग गुप्ता पेश हुए, जबकि केंद्र सरकार और डीजीसीए...

भीमा कोरेगांव मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा को दिल्ली शिफ्ट होने की अनुमति दी
भीमा कोरेगांव मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा को दिल्ली शिफ्ट होने की अनुमति दी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एल्गार परिषद–भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी गौतम नवलखा को बड़ी राहत देते हुए जमानत की शर्तों में ढील दी और उन्हें मुंबई छोड़कर दिल्ली में रहने की अनुमति प्रदान की। यह आदेश बुधवार को जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस श्याम चंदक की खंडपीठ ने पारित किया।गौतम नवलखा ने अदालत में याचिका दाखिल कर कहा था कि मुंबई में रहना उनके लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया और वह अपने स्थायी निवास दिल्ली लौटना चाहते हैं। उनकी जमानत की एक शर्त यह थी कि वह विशेष अदालत की अनुमति के बिना मुंबई नहीं छोड़...

ब्लॉट ऑन द यूनिफॉर्म टिप्पणी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, संजू वर्मा से ट्वीट हटाने पर विचार को कहा
'ब्लॉट ऑन द यूनिफॉर्म' टिप्पणी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, संजू वर्मा से ट्वीट हटाने पर विचार को कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय प्रवक्ता संजू वर्मा से उनके ट्वीट को हटाने पर विचार करने को कहा, जिसमें उन्होंने पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आज़ाद को ब्लॉट ऑन द यूनिफॉर्म (वर्दी पर धब्बा) कहा था। यह टिप्पणी आज़ाद द्वारा दायर मानहानि वाद के संदर्भ में आई।जस्टिस अमित बंसल ने मामले में संजू वर्मा को समन जारी किया और कथित मानहानिकारक पोस्ट के खिलाफ अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग पर नोटिस भी जारी किया। आज़ाद की ओर से सीनियर एडवोकेट विकास सिंह पेश हुए जबकि संजू वर्मा का...

बंद दुकान के भीतर कथित जातिसूचक गाली सार्वजनिक दृष्टि में नहीं मानी जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट ने 31 साल पुरानी SC/ST Act के तहत सजा रद्द की
बंद दुकान के भीतर कथित जातिसूचक गाली 'सार्वजनिक दृष्टि' में नहीं मानी जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट ने 31 साल पुरानी SC/ST Act के तहत सजा रद्द की

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) के तहत वर्ष 1994 में दी गई सजा को निरस्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कथित जातिसूचक अपमान किसी बंद दुकान या चारदीवारी के भीतर हुआ हो, जहां आम जनता की मौजूदगी या दृश्यता न हो, तो उसे कानून की दृष्टि में “सार्वजनिक दृष्टि में” किया गया कृत्य नहीं माना जा सकता।यह फैसला जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने सुनाया। मामला एक वाहन शोरूम संचालक से जुड़ा था, जिस पर आरोप था कि उसने एक...

गैस रेगुलेटर आवश्यक वस्तु नहीं, जब तक अधिसूचित न हों: राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 साल पुरानी सजा रद्द की
गैस रेगुलेटर आवश्यक वस्तु नहीं, जब तक अधिसूचित न हों: राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 साल पुरानी सजा रद्द की

राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में यह स्पष्ट किया कि गैस रेगुलेटर अपने आप में आवश्यक वस्तु नहीं माने जा सकते, जब तक कि उन्हें विधि द्वारा विशेष रूप से अधिसूचित न किया गया हो। इसी आधार पर अदालत ने वर्ष 1998 में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सुनाई गई सजा को निरस्त कर दिया।यह फैसला जस्टिस फरजंद अली की सिंगल बेंच ने सुनाया। मामला उस अपील से जुड़ा था, जिसमें अपीलकर्ता को बिना वैध लाइसेंस 38 गैस रेगुलेटर रखने के आरोप में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया। इस सजा को चुनौती देते हुए अपीलकर्ता ने...

लिस पेंडेंस मॉर्गेज प्रॉपर्टी से जुड़े पैसे के मुकदमों पर लागू होता है, TP Act की धारा 52 के तहत एकतरफ़ा कार्यवाही भी शामिल: सुप्रीम कोर्ट
लिस पेंडेंस मॉर्गेज प्रॉपर्टी से जुड़े पैसे के मुकदमों पर लागू होता है, TP Act की धारा 52 के तहत एकतरफ़ा कार्यवाही भी शामिल: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ट्रांसफर ऑफ़ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 52 के तहत लिस पेंडेंस का सिद्धांत ऐसे पैसे की रिकवरी के मुकदमे पर भी लागू होता है, जहां कर्ज अचल संपत्ति पर मॉर्गेज द्वारा सुरक्षित होता है और ट्रांसफर पर रोक इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कार्यवाही में बहस हुई है या एकतरफ़ा है।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने फैसला सुनाया कि एक बार जब कोई बैंक मॉर्गेज द्वारा समर्थित बकाया की रिकवरी के लिए मुकदमा दायर करता है तो मॉर्गेज वाली प्रॉपर्टी धारा 52 के...

मात्र आशंका के आधार पर याचिका: गुजरात हाईकोर्ट ने संभावित कार्रवाई से संबंधित मस्जिद की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
मात्र आशंका के आधार पर याचिका: गुजरात हाईकोर्ट ने संभावित कार्रवाई से संबंधित मस्जिद की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

गुजरात हाईकोर्ट ने अहमदाबाद स्थित मस्जिद द्वारा दायर उस याचिका पर विचार करने से इनकार किया, जिसमें संबंधित प्राधिकरणों द्वारा संभावित कार्रवाई की आशंका जताई गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई ठोस (Cause of Action) उत्पन्न नहीं होता तब तक केवल आशंका के आधार पर दायर की गई याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती।मामले की सुनवाई जस्टिस मौना एम. भट्ट कर रही थीं। याचिका में प्रार्थना की गई कि प्रतिवादी प्राधिकरणों को निर्देश दिया जाए कि वे किसी भी प्रस्तावित कार्रवाई को विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया...