पूर्व TMC विधायक हुमायूं कबीर की मांगी Z+ सिक्योरिटी, हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय से संपर्क करने की दी इजाज़त
Amir Ahmad
24 Jan 2026 1:17 PM IST

कलकत्ता हाईकोर्ट ने भरतपुर के विधायक हुमायूं कबीर जो तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व सदस्य हैं , जिन्होंने अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाई है, उनको Z+ सुरक्षा के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क करने की इजाज़त दी।
खास बात यह है कि कबीर ने पिछले साल जनता उन्नयन पार्टी की स्थापना की थी।
कबीर ने कहा था कि वह सत्ताधारी राजनीतिक दल के बैनर तले पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्य थे और अभी उन्होंने अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाई। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी जान और माल को खतरा है और वह अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती चाहते हैं खासकर Z+ श्रेणी की सुरक्षा।
जस्टिस सुव्रा घोष की बेंच ने कहा,
"याचिकाकर्ता को चौथे प्रतिवादी (MHA) के सामने एक विस्तृत प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता है, जिसमें उन परिस्थितियों को बताया जाए, जिनके तहत उन्हें सुरक्षा और संरक्षण के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती की आवश्यकता है। ऐसा प्रतिनिधित्व मिलने पर चौथा प्रतिवादी उसमें बताए गए तथ्यों और परिस्थितियों के आलोक में इस पर कार्रवाई करेगा और कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठाएगा अधिमानतः आवेदन प्राप्त होने की तारीख से दो सप्ताह के भीतर।"
राज्य के वकील ने एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि याचिकाकर्ता को मुर्शिदाबाद जिला पुलिस द्वारा पहले से ही पर्याप्त पुलिस सुरक्षा प्रदान की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई सालों से दो सशस्त्र पुलिस कांस्टेबल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए तैनात हैं और यह सुरक्षा आज तक जारी है।
राज्य ने आगे कहा कि जिला पुलिस लगातार याचिकाकर्ता द्वारा आयोजित सभी राजनीतिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों को कवर कर रही है। अब तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि व्यक्तिगत सुरक्षा से संबंधित मामले संविधान की अनुसूची VII, सूची II के तहत आते हैं, जो पूरी तरह से राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। हालांकि वकील ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता बढ़ी हुई सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय (MHA) से संपर्क कर सकता है।
इस स्तर पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा नई राजनीतिक पार्टी बनाने के कारण जिला पुलिस और याचिकाकर्ता के बीच मतभेद हो सकते हैं। याचिकाकर्ता अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती के लिए गृह मंत्रालय (प्रतिवादी 4) के सामने प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करने की अनुमति चाहता है, जिसके लिए आवश्यक लागत का भुगतान किया जाएगा।
यह स्वतंत्रता देते हुए अदालत ने याचिका का निपटारा किया।
कोर्ट ने साफ किया कि इस कोर्ट ने मामले की मेरिट पर विचार नहीं किया और चौथे प्रतिवादी को याचिकाकर्ता द्वारा दी गई अर्जी पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने की छूट होगी। इसलिए रिट याचिका का निपटारा किया जाता है। चूंकि कोई हलफनामा नहीं मांगा गया, इसलिए रिट याचिका में लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया माना जाएगा।

