गंदे और बदबूदार शौचालय, खराब इन-फ्लाइट सुविधाएँ: उपभोक्ता आयोग ने एयर इंडिया पर लगाया 1.5 लाख रुपए का जुर्माना
Praveen Mishra
26 Jan 2026 12:10 PM IST

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग–VI, नई दिल्ली, जिसमें सुश्री पूनम चौधरी (अध्यक्ष) और श्री शेखर चंद्र (सदस्य) शामिल थे, ने एक लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ान के दौरान यात्रियों को घटिया सुविधाएँ उपलब्ध कराने के मामले में एयर इंडिया को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराया है। आयोग ने माना कि एयरलाइन की लापरवाही के कारण यात्रियों को मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न झेलना पड़ा।
संक्षिप्त तथ्य
शिकायतकर्ता और उनकी पुत्री ने 6 सितंबर 2023 और 13 सितंबर 2023 को दिल्ली से न्यूयॉर्क और वापस आने के लिए MakeMyTrip के माध्यम से राउंड-ट्रिप इकोनॉमी क्लास के हवाई टिकट बुक किए थे। टिकटों की कुल कीमत ₹2,73,108 थी। इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ता की पुत्री की वापसी यात्रा पहले कराने के लिए ₹45,000 अतिरिक्त भुगतान किया गया, जिससे कुल खर्च ₹3,18,108 हो गया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि लगभग 15 घंटे की लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ान के दौरान विमान की स्थिति बेहद खराब थी। सीटें टूटी हुई थीं, सीट रीक्लाइन बटन और केबिन क्रू को बुलाने के लिए लगे कॉल बटन काम नहीं कर रहे थे तथा इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट स्क्रीन भी खराब थीं।
इसके अलावा, विमान और शौचालयों की स्वच्छता बेहद खराब थी, दुर्गंध आ रही थी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। भोजन और पेय पदार्थों की गुणवत्ता को भी घटिया बताया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना था कि केबिन क्रू का व्यवहार रूखा, उदासीन और शिकायतों के प्रति असंवेदनशील था।
खराब सेवाओं से आहत होकर शिकायतकर्ता ने विपक्षी पक्षों को कानूनी नोटिस भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का रुख करते हुए पूरे टिकट मूल्य की वापसी, ₹10 लाख मुआवज़ा (मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए) और वाद व्यय की मांग की।
एयर इंडिया की दलीलें
एयर इंडिया ने सेवा में कमी के आरोपों से इनकार किया। एयरलाइन ने कहा कि विमान उड़ान के लिए पूरी तरह सुरक्षित था और सभी लागू सुरक्षा एवं सेवा मानकों के अनुरूप संचालित किया गया। यह भी तर्क दिया गया कि उड़ान के दौरान किसी प्रकार की तत्काल शिकायत दर्ज नहीं की गई थी और यदि कोई मामूली तकनीकी समस्या रही भी हो, तो उसे सेवा में कमी नहीं माना जा सकता। एयर इंडिया ने यह भी कहा कि चूंकि यात्रियों ने यात्रा पूरी कर ली थी, इसलिए टिकट राशि की वापसी का सवाल ही नहीं उठता।
MakeMy Trip की दलीलें
MakeMyTrip India Pvt. Ltd. ने कहा कि उसने केवल एक ऑनलाइन बुकिंग मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। उसका उड़ान के संचालन, रखरखाव या इन-फ्लाइट सेवाओं से कोई संबंध नहीं है। इसलिए उड़ान के दौरान कथित कमियों के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इस आधार पर उसने शिकायत खारिज करने की मांग की।
आयोग के अवलोकन और निर्णय
आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने सीटों और अन्य सुविधाओं की खराब स्थिति दर्शाने वाली तस्वीरें तथा विपक्षी पक्षों को भेजे गए कानूनी नोटिसों की प्रतियां रिकॉर्ड पर रखी थीं। आयोग ने यह भी नोट किया कि गंभीर आरोपों के बावजूद एयर इंडिया कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण या ठोस खंडन प्रस्तुत करने में विफल रही, जो उसके विरुद्ध गया।
आयोग ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत एयरलाइन एक “सेवा प्रदाता” है और टिकट के बदले भुगतान करने वाला यात्री “उपभोक्ता”। टिकट मूल्य में शामिल सुविधाएँ प्रदान न करना सेवा में कमी है, जिससे यात्रियों को मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न होता है।
हालांकि, आयोग ने मेकमायट्रिप के खिलाफ कोई कमी नहीं पाई और माना कि वह केवल बुकिंग सुविधा प्रदान करने वाला मंच था, जिसका इन-फ्लाइट सेवाओं से कोई सरोकार नहीं है।
अंतिम आदेश
आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए एयर इंडिया को निर्देश दिया कि वह:
शिकायतकर्ता और उनकी पुत्री को ₹50,000-₹50,000 (कुल ₹1,00,000) मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए अदा करे;
इसके अतिरिक्त ₹50,000 मुकदमे बाजी खर्च के रूप में भुगतान करे।
हालांकि, आयोग ने यह कहते हुए टिकट राशि की वापसी का आदेश देने से इनकार कर दिया कि यात्रा पहले ही पूरी की जा चुकी थी।

