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नितिन गडकरी की लोकसभा चुनाव जीत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज; याचिकाकर्ता पर लगा जुर्माना
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को राहत देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने नागपुर निर्वाचन क्षेत्र से 18वीं लोकसभा के लिए उनके चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की, जिसमें उन पर अपनी फोटो और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनाव चिह्न वाली मतदाता पर्चियां छपवाकर उन्हें मतदाताओं में वितरित करने में 'गलत व्यवहार' करने का आरोप लगाया गया।एकल जज जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के ने सूरज मिश्रा (30) द्वारा दायर चुनाव याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि उनकी याचिका यह साबित करने में विफल रही कि गडकरी और...
NI Act में चुराए गए इंस्ट्रूमेंट के पेमेंट के संबंध में प्रावधान
वाहक लिखत की दशा में अधिनियम की धाराएं 10, 78 एवं 82 (ग) लिखतों के संदाय के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण है कि सभी मामलों में संदाय एक विधिसम्मत धारक को किया जाना चाहिए। यहाँ प्रश्न है कि वाहक की देय लिखत में किसे विधिसम्मत धारक माना जाय। ऐसी दशा में सही धारक वह है जिसने परिदान के द्वारा लिखत को प्राप्त किया है। वाहक को देय लिखत की दशा में यह निर्धारित करना कि किस धारक ने लिखत को परिदान द्वारा या अन्यथा रूप में प्राप्त किया है, कठिन है।यदि यह दिखाने के लिए कुछ नहीं है कि वह संदाय पाने का हकदार नहीं...
NI Act में धारा 10 के प्रावधान
निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 10 सम्यक अनुक्रम में संदाय के संबंध में है।किसी भी सम्यक् अनुक्रम संदाय के लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए-लिखत के प्रकट शब्दों के अनुसार संदाय,सद्भावना पूर्वकबिना किसी उपेक्षा के,लिखत का कब्जा रखने वाले (धारक) को, एवं उस व्यक्ति को जो संदाय पाने का हकदार है। उक्त परिस्थितियों में की गई संदाय को विधिसम्मत संदाय भी कहेंगे।लिखत के प्रकट शब्दों के अनुसार-लिखत के प्रकट शब्दों से अभिप्रेत है कि पक्षकारों के आशय के अनुसार संदाय किया जाना चाहिए जो...
अच्छी तरह से शिक्षित और नौकरी का अनुभव रखने वाली पत्नी को केवल पति से गुजारा भत्ता पाने के लिए बेकार नहीं बैठना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षित पत्नी जिसके पास नौकरी का अनुभव है, उसको केवल पति से भरण-पोषण पाने के लिए बेकार नहीं बैठे रहना चाहिए।जस्टिस चंद्र धारी सिंह ने कहा,"इस न्यायालय का विचार है कि एक शिक्षित पत्नी जिसके पास उपयुक्त नौकरी का अनुभव है, को केवल पति से भरण-पोषण पाने के लिए बेकार नहीं रहना चाहिए।"न्यायालय ने एक पत्नी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें वैवाहिक विवाद में CrPC की धारा 125 के तहत उसे अंतरिम भरण-पोषण देने से इनकार करने वाले फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई। दंपति...
युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा की शादी हुई खत्म, हाईकोर्ट के आदेश के बाद फैमिली कोर्ट ने दिया फैसला
मुंबई की फैमिली कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और उनकी अलग रह रही पत्नी धनश्री वर्मा के बीच शादी को खत्म कर दिया।चहल की ओर से पेश हुए वकील नितिन गुप्ता ने लाइव लॉ से कहा,"शादी खत्म हो गई है और अब वे कानूनी रूप से अलग हो गए हैं।"यह फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा बुधवार (19 मार्च) को मुंबई के बांद्रा इलाके में फैमिली कोर्ट को आदेश दिए जाने के बाद आया, जिसमें कहा गया कि चहल को 22 मार्च से इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के आगामी सीजन के लिए अपनी टीम किंग्स इलेवन पंजाब में शामिल होना...
न्यायालय के निर्णय की भाषा और और दंड निर्धारण की प्रक्रिया – धारा 393, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
न्यायालय (Court) द्वारा दिए गए निर्णय (Judgment) में यह तय किया जाता है कि अभियुक्त (Accused) दोषी है या नहीं। यदि दोषी है, तो उसे क्या दंड (Punishment) दिया जाएगा।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 393 में यह प्रावधान किया गया है कि न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय की भाषा और उसकी सामग्री कैसी होनी चाहिए। यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि निर्णय स्पष्ट, न्यायपूर्ण और पारदर्शी हो। निर्णय की भाषा (Language of the Judgment) धारा 393(1)(a) के अनुसार, हर निर्णय न्यायालय की आधिकारिक भाषा...
किरायेदार को बेदखल करने के कानूनी आधार – राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 9 भाग 2
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 (Rajasthan Rent Control Act, 2001) किरायेदार (Tenant) और मकान मालिक (Landlord) के बीच संबंधों को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। इस अधिनियम की धारा 9 यह तय करती है कि किन परिस्थितियों में मकान मालिक अपने किरायेदार को कानूनी रूप से बेदखल (Eviction) कर सकता है।भाग 1 में, किराया न देना, संपत्ति को नुकसान पहुँचाना, बिना अनुमति निर्माण करना, अनुचित गतिविधियाँ करना और संपत्ति का गलत उपयोग जैसे विभिन्न कारणों को समझाया गया था। लेकिन, बेदखली केवल इन कारणों तक...
मृत कर्मचारी के सेवा रिकॉर्ड में बड़ी सजा दर्ज होने पर कानूनी उत्तराधिकारी अनुकंपा नियुक्ति के पात्र नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि यदि किसी मृत कर्मचारी के सेवा रिकॉर्ड में मृत्यु के समय बड़ी सजा दर्ज है, तो उसके कानूनी उत्तराधिकारी अनुकंपा नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे। हालांकि, यदि बड़ी सजा केवल कुछ वर्षों के लिए प्रभावी थी और बाद में सेवा पर उसका प्रतिकूल प्रभाव नहीं रहा, तो इसे नियुक्ति में बाधा नहीं माना जाएगा।याचिकाकर्ता के पिता पर 2 वर्षों के लिए एक बड़ी सजा लगाई गई थी। इस अवधि की समाप्ति के बाद, उन्हें संघ सरकार, ब्रांच कलेक्टरेट, जिला मऊ, यूपी में मैनेजर के पद पर पदोन्नति दी गई।...
क्या बिना पूर्व Environmental Clearance के उद्योगों को बंद किया जाना चाहिए? एक कानूनी विश्लेषण
भारत में पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance - EC) और औद्योगिक संचालन को लेकर कई महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने M/S Pahwa Plastics Pvt. Ltd. & Anr. बनाम Dastak NGO & Ors. (2022) के मामले में यह तय किया कि क्या किसी ऐसे उद्योग को बंद किया जाना चाहिए, जिसे पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिली है, लेकिन जिसे कानूनी रूप से Consent to Establish (CTE) और Consent to Operate (CTO) प्राप्त हुआ है और जिसने Post-Facto EC (बाद में दी जाने वाली स्वीकृति) के लिए आवेदन किया है।इस...
भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 की धारा 68 और 69 के अनुसार गलत तारीख वाले दस्तावेजों और अवैध स्टांप बिक्री पर कानूनी प्रावधान
भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) एक महत्वपूर्ण कानून है जो विभिन्न वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions) और कानूनी दस्तावेजों (Legal Documents) पर स्टांप शुल्क (Stamp Duty) के भुगतान को नियंत्रित करता है।इस कानून का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी अनुबंध (Agreement), विनिमय बिल (Bill of Exchange), प्रोमिसरी नोट (Promissory Note) और अन्य दस्तावेज सही ढंग से स्टांप किए जाएं ताकि सरकार को राजस्व (Revenue) की हानि न हो। पिछली धाराओं में, हमने कई अपराधों के बारे में...
क्या भारत को शरणार्थी कानून की आवश्यकता है?
कुछ सप्ताह पहले त्रिपुरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में कुछ लड़कियों को सीमा-बाड़ के पास सेल्फी लेते हुए देखा जा सकता है, जबकि दूसरी तरफ कुछ बांग्लादेशी नागरिक बाड़ से चिपके हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। कई लोगों ने इसे हास्यपूर्ण और हल्के-फुल्के अंदाज में लिया, लेकिन कुछ लोगों ने इस बात पर चिंता जताई कि भारत की सीमाएं सीमा-पार घुसपैठ के लिए कितनी असुरक्षित हैं। भारतीय उपमहाद्वीप और शरणार्थियों को सुरक्षा प्रदान करने का इसका इतिहास जनता के लिए...
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के 3 एडिशनल जजों की स्थायी नियुक्ति की सिफारिश की
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के तीन एडिशनल जजों, जिनमें दो महिलाएँ शामिल हैं, को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की है।कॉलेजियम ने अपनी बैठक में, जो बुधवार (19 मार्च) को आयोजित हुई, निम्नलिखित एडिशनल जजों को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के स्थायी जज के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी:(i) श्री जस्टिस सुमीत गोयल,(ii) श्रीमती जस्टिस सुदीप्ति शर्मा, और(iii) सुश्री जस्टिस कीर्ति सिंह।
सिर्फ आवासीय अपार्टमेंट्स का पंजीकरण अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट के तहत होगा, को-ऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट नहीं लागू: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोहराया है कि केवल आवासीय फ्लैटों वाली संपत्ति को कर्नाटक अपार्टमेंट स्वामित्व अधिनियम, 1972 के तहत पंजीकृत किया जाना चाहिए और संपत्ति का प्रबंधन और रखरखाव करने के लिए कोई भी एसोसिएशन कर्नाटक सहकारी समिति अधिनियम, 1959 के तहत पंजीकृत नहीं हो सकती है। जस्टिस के एस हेमलेखा ने सरस्वती प्रकाश और अन्य द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया, जो “पार्कसाइड रिटायरमेंट होम्स ब्रिगेड ऑर्चर्ड्स अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स” नामक एक अपार्टमेंट परिसर में अपार्टमेंट के मालिक...
पंजाब के दूरदराज के इलाकों में शिक्षा के लिए 'सिख्या प्रदाताओं' ने मदद की, शिक्षक भर्ती में उन्हें आयु में छूट से वंचित करना संविधान के खिलाफ: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत "सिख्या प्रदाता" (शिक्षा प्रदाता) सरकारी भर्ती परीक्षा में आयु सीमा में छूट के हकदार हैं, उन्हें छूट से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 21-ए का उल्लंघन होगा।जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी ने कहा, “शिक्षा प्रदाताओं को सरकारी स्कूलों में छात्रों को पढ़ाने के लिए नियुक्त किया जा रहा है, इस प्रकार शिक्षा के माध्यम से संबंधित दूरदराज के इलाकों में शिक्षा के उत्थान को सुनिश्चित किया जा रहा है। चूंकि इससे भारत के संविधान...
पुलिस बल के लिए शारीरिक और मानसिक फिटनेस सर्वोपरि: पी एंड एच हाईकोर्ट ने 15 साल पहले जारी पद पर नियुक्ति की मांग करने वाले 40 वर्षीय व्यक्ति की याचिका खारिज की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस में नियुक्ति की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 2008 में आयोजित एक भर्ती परीक्षा में राजनेताओं के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए साक्षात्कार में उन्हें कम अंक दिए गए थे। जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा, "याचिकाकर्ता, वर्तमान में 40 वर्ष से अधिक आयु के हैं। पुलिस बल में शारीरिक/मानसिक फिटनेस सर्वोपरि है। याचिकाकर्ताओं से प्रारंभिक नियुक्ति के समय पुलिस निरीक्षक के लिए निर्धारित फिटनेस की अपेक्षा नहीं की जा...
NRI 2016 बैगेज नियमों के तहत 'पात्र यात्रियों' को मिलने वाले लाभों के हकदार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि एक अनिवासी भारतीय भारत आगमन पर सीमा शुल्क के प्रयोजनों के लिए बैगेज नियम, 2016 के तहत एक "पात्र यात्री" को प्रदान किए जाने वाले लाभ का पूर्ण हकदार है। वित्त मंत्रालय द्वारा 30 जून, 2017 की अधिसूचना के माध्यम से पात्र यात्री की परिभाषा इस प्रकार की गई थी कि वह भारतीय मूल का यात्री या वैध भारतीय पासपोर्ट रखने वाला यात्री है, जो विदेश में कम से कम छह महीने रहने के बाद भारत आता है।बैगेज नियम पात्र यात्रियों को प्रयुक्त घरेलू सामान, व्यावसायिक उपकरण और व्यक्तिगत सामान...
सीनियर सिटीजन द्वारा संपत्ति हस्तांतरित करते समय प्रेम और स्नेह 'निहित शर्त', सेटलमेंट डीड में इसका स्पष्ट उल्लेख आवश्यक नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत धारा 23(1) के तहत प्रेम और स्नेह एक निहित शर्त है और समझौते के दस्तावेज में इसका स्पष्ट उल्लेख होना आवश्यक नहीं है। जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस के राजशेखरन की पीठ ने कहा कि अधिनियम का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिक की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना है। न्यायालय ने कहा कि जब कोई वरिष्ठ नागरिक संपत्ति का हस्तांतरण करता है, तो यह केवल एक कानूनी कार्य नहीं होता है, बल्कि बुढ़ापे में देखभाल की उम्मीद से किया गया कार्य होता है। इस...
सुप्रीम कोर्ट ने सोना तस्करी मामले की सुनवाई केरल से कर्नाटक स्थानांतरित करने की इच्छा जताई
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (20 मार्च) को मौखिक रूप से 2020 के सोने की तस्करी मामले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई केरल से कर्नाटक स्थानांतरित करने की इच्छा व्यक्त की। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि चूंकि प्रथम दृष्टया आरोप "गंभीर" हैं, इसलिए मुकदमे को स्थानांतरित करने के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका का विरोध नहीं किया जाना चाहिए।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा 2022 में दायर स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें धन शोधन निवारण...
केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से रैगिंग रोकने के लिए नियम बनाने वाले कार्य समूह का मसौदा दाखिल करने को कहा
केरल हाईकोर्ट ने बुधवार (19 मार्च) को राज्य सरकार से एक सप्ताह के भीतर कार्य समूह का मसौदा दाखिल करने को कहा, जिसका उद्देश्य राज्य में रैगिंग की बढ़ती समस्या को रोकने के लिए व्यापक नियम बनाना है।चीफ जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस सी. जयचंद्रन की स्पेशल बेंच ने पहले कहा कि रैगिंग गतिविधियों को रोकने के लिए मजबूत वैधानिक तंत्र की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य सरकार को नियमों का मसौदा तैयार करने और यह आकलन करने के लिए कि केरल रैगिंग निषेध अधिनियम 1998 में किसी संशोधन की आवश्यकता है या नहीं विभिन्न...
'आरोप पत्र दाखिल होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए', सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत की शर्त की आलोचना की
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट का अग्रिम जमानत आदेश अस्वीकार कर दिया, जिसमें शर्त लगाई गई कि आरोप पत्र दाखिल होने के बाद ट्रायल कोर्ट आवेदक के खिलाफ गिरफ्तारी सहित बलपूर्वक कदम उठाएगा।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने ऐसी शर्त लगाए जाने को अनुचित बताया। इसके बजाय कहा कि हाईकोर्ट आरोप पत्र दाखिल होने के बाद बलपूर्वक कदम उठाने के बारे में ट्रायल कोर्ट को निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र छोड़ सकता था।कोर्ट ने टिप्पणी की,“याचिकाकर्ता के वकील का यह कहना सही है कि...




















