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NRI 2016 बैगेज नियमों के तहत पात्र यात्रियों को मिलने वाले लाभों के हकदार: दिल्ली हाईकोर्ट
NRI 2016 बैगेज नियमों के तहत 'पात्र यात्रियों' को मिलने वाले लाभों के हकदार: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि एक अनिवासी भारतीय भारत आगमन पर सीमा शुल्क के प्रयोजनों के लिए बैगेज नियम, 2016 के तहत एक "पात्र यात्री" को प्रदान किए जाने वाले लाभ का पूर्ण हकदार है। वित्त मंत्रालय द्वारा 30 जून, 2017 की अधिसूचना के माध्यम से पात्र यात्री की परिभाषा इस प्रकार की गई थी कि वह भारतीय मूल का यात्री या वैध भारतीय पासपोर्ट रखने वाला यात्री है, जो विदेश में कम से कम छह महीने रहने के बाद भारत आता है।बैगेज नियम पात्र यात्रियों को प्रयुक्त घरेलू सामान, व्यावसायिक उपकरण और व्यक्तिगत सामान...

सीनियर सिटीजन द्वारा संपत्ति हस्तांतरित करते समय प्रेम और स्नेह निहित शर्त, सेटलमेंट डीड में इसका स्पष्ट उल्लेख आवश्यक नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
सीनियर सिटीजन द्वारा संपत्ति हस्तांतरित करते समय प्रेम और स्नेह 'निहित शर्त', सेटलमेंट डीड में इसका स्पष्ट उल्लेख आवश्यक नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत धारा 23(1) के तहत प्रेम और स्नेह एक निहित शर्त है और समझौते के दस्तावेज में इसका स्पष्ट उल्लेख होना आवश्यक नहीं है। जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस के राजशेखरन की पीठ ने कहा कि अधिनियम का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिक की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना है। न्यायालय ने कहा कि जब कोई वरिष्ठ नागरिक संपत्ति का हस्तांतरण करता है, तो यह केवल एक कानूनी कार्य नहीं होता है, बल्कि बुढ़ापे में देखभाल की उम्मीद से किया गया कार्य होता है। इस...

सुप्रीम कोर्ट ने सोना तस्करी मामले की सुनवाई केरल से कर्नाटक स्थानांतरित करने की इच्छा जताई
सुप्रीम कोर्ट ने सोना तस्करी मामले की सुनवाई केरल से कर्नाटक स्थानांतरित करने की इच्छा जताई

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (20 मार्च) को मौखिक रूप से 2020 के सोने की तस्करी मामले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई केरल से कर्नाटक स्थानांतरित करने की इच्छा व्यक्त की। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि चूंकि प्रथम दृष्टया आरोप "गंभीर" हैं, इसलिए मुकदमे को स्थानांतरित करने के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका का विरोध नहीं किया जाना चाहिए।ज‌स्टिस एमएम सुंदरेश और ज‌स्टिस राजेश बिंदल की पीठ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा 2022 में दायर स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें धन शोधन निवारण...

केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से रैगिंग रोकने के लिए नियम बनाने वाले कार्य समूह का मसौदा दाखिल करने को कहा
केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से रैगिंग रोकने के लिए नियम बनाने वाले कार्य समूह का मसौदा दाखिल करने को कहा

केरल हाईकोर्ट ने बुधवार (19 मार्च) को राज्य सरकार से एक सप्ताह के भीतर कार्य समूह का मसौदा दाखिल करने को कहा, जिसका उद्देश्य राज्य में रैगिंग की बढ़ती समस्या को रोकने के लिए व्यापक नियम बनाना है।चीफ जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस सी. जयचंद्रन की स्पेशल बेंच ने पहले कहा कि रैगिंग गतिविधियों को रोकने के लिए मजबूत वैधानिक तंत्र की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य सरकार को नियमों का मसौदा तैयार करने और यह आकलन करने के लिए कि केरल रैगिंग निषेध अधिनियम 1998 में किसी संशोधन की आवश्यकता है या नहीं विभिन्न...

आरोप पत्र दाखिल होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत की शर्त की आलोचना की
'आरोप पत्र दाखिल होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए', सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत की शर्त की आलोचना की

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट का अग्रिम जमानत आदेश अस्वीकार कर दिया, जिसमें शर्त लगाई गई कि आरोप पत्र दाखिल होने के बाद ट्रायल कोर्ट आवेदक के खिलाफ गिरफ्तारी सहित बलपूर्वक कदम उठाएगा।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने ऐसी शर्त लगाए जाने को अनुचित बताया। इसके बजाय कहा कि हाईकोर्ट आरोप पत्र दाखिल होने के बाद बलपूर्वक कदम उठाने के बारे में ट्रायल कोर्ट को निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र छोड़ सकता था।कोर्ट ने टिप्पणी की,“याचिकाकर्ता के वकील का यह कहना सही है कि...

हाईकोर्ट ने जजों के लिए आवासीय फ्लैटों के निर्माण के लिए वित्त सुनिश्चित करने के प्रयासों में कमी को लेकर दिल्ली सरकार की खिंचाई की
हाईकोर्ट ने जजों के लिए आवासीय फ्लैटों के निर्माण के लिए वित्त सुनिश्चित करने के प्रयासों में कमी को लेकर दिल्ली सरकार की खिंचाई की

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय फ्लैटों के निर्माण की लंबित परियोजना के लिए वित्त सुनिश्चित करने के प्रयासों में कमी के लिए दिल्ली सरकार की खिंचाई की। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को याद दिलाया कि न्यायिक अधिकारियों को पर्याप्त आधिकारिक आवास प्रदान करना सभी के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए।कोर्ट ने कहा, "न्यायिक अधिकारियों द्वारा किए जा रहे कार्य और कर्तव्यों की...

संदेह से परे सबूत आपराधिक कानून का सिद्धांत है, कर कानून पर लागू नहीं: दिल्ली उच्च न्यायालय
'संदेह से परे सबूत' आपराधिक कानून का सिद्धांत है, कर कानून पर लागू नहीं: दिल्ली उच्च न्यायालय

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 'उचित संदेह से परे सबूत' के सिद्धांत को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 148 पर लागू नहीं किया जा सकता है, जो किसी कर निर्धारण अधिकारी को यह 'विश्वास करने का कारण' होने पर कर निर्धारण खोलने में सक्षम बनाता है कि करदाता की आय कर निर्धारण से बच गई है। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा, "यह सामान्य बात है कि "उचित संदेह से परे साबित करने" की अवधारणा दंडात्मक प्रावधानों/क़ानूनों पर "स्ट्रिक्टु सेंसो" लागू होती है। यह...

लीव एनकैशमैंट संवैधानिक संपत्ति अधिकार; इसे विशिष्ट वैधानिक प्राधिकरण के बिना अस्वीकार नहीं किया जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
लीव एनकैशमैंट संवैधानिक संपत्ति अधिकार; इसे विशिष्ट वैधानिक प्राधिकरण के बिना अस्वीकार नहीं किया जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट की जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने घोषित किया कि सेवा से बर्खास्त कर्मचारी लीव एनकैशमेंट का हकदार है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 300ए के तहत संपत्ति का अधिकार है। न्यायालय ने माना कि कर्नाटक ग्रामीण बैंक द्वारा बर्खास्त कर्मचारी को लीव एनकैशमेंट का भुगतान करने से इनकार करना अवैध था। इसने इस बात पर जोर दिया कि एक बार अर्जित होने के बाद, लीव एनकैशमेंट सहित टर्मिनल लाभ कर्मचारी की संपत्ति बन जाते हैं। इसलिए, उन्हें मनमाने ढंग से रोका नहीं जा सकता। तदनुसार, न्यायालय ने रिट...

पुलिस पक्षपातपूर्ण कार्यवाही कर रही है: सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण कानून के गलत इस्तेमाल के लिए यूपी पुलिस को लगाई फटकार
'पुलिस पक्षपातपूर्ण कार्यवाही कर रही है': सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण कानून के गलत इस्तेमाल के लिए यूपी पुलिस को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को बलात्कार के कथित मामले को मनमाने ढंग से संभालने के लिए फटकार लगाई। उक्त मामले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश धर्म के गैरकानूनी धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2021 के तहत अपराध लागू किए गए ।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ याचिकाकर्ता द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो कथित बलात्कार और गैरकानूनी धर्मांतरण के मामले में आरोपी है।याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता पिछले 8 महीनों से जेल में है।उन्होंने कहा,"मैं...

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने BFI को अनुराग ठाकुर को आगामी चुनावों में भाग लेने की अनुमति देने का निर्देश दिया
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने BFI को अनुराग ठाकुर को आगामी चुनावों में भाग लेने की अनुमति देने का निर्देश दिया

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार को पूर्व खेल मंत्री और हमीरपुर से पांच बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद रह चुके अनुराग सिंह ठाकुर को निर्वाचन मंडल से अयोग्य ठहराए जाने के फैसले पर प्रभावी रूप से रोक लगा दी। साथ ही भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) को नामांकन की तिथि बढ़ाने का निर्देश दिया, जिससे ठाकुर अपना नामांकन दाखिल कर सकें और चुनावों में भाग ले सकें।जस्टिस अजय मोहन गोयल की पीठ ने अपने आदेश में कहा,"प्रतिवादी नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाएंगे, जिससे मिस्टर अनुराग सिंह ठाकुर अपना...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पेंशन पात्रता के लिए मूल और आमेलित जनपद पंचायत कर्मचारियों के बीच अंतर स्पष्ट किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पेंशन पात्रता के लिए मूल और आमेलित जनपद पंचायत कर्मचारियों के बीच अंतर स्पष्ट किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस सुरेश कुमार कैत (चीफ जस्टिस) और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील खारिज कर दी। न्यायालय ने फैसला सुनाया कि जनपद पंचायत का कोई कर्मचारी जो पिछली जनपद सभा से अपने आमेलन को साबित करने में विफल रहा है, उसे पेंशन लाभ नहीं मिल सकता। न्यायालय ने माना कि 1962 के मध्य प्रदेश पंचायत अधिनियम के बाद जनपद सभा के केवल जनपद पंचायत में आमेलित कर्मचारियों को ही पेंशन का अधिकार होगा, जबकि मूल जनपद पंचायत कर्मचारी केवल अंशदायी भविष्य निधि के हकदार...

NDPS Act की धारा 37 मानवीय या मेडिकल आधार पर जमानत देने के हाईकोर्ट के अधिकार पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
NDPS Act की धारा 37 मानवीय या मेडिकल आधार पर जमानत देने के हाईकोर्ट के अधिकार पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने माना कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस अधिनियम (NDPS Act) की धारा 37 के प्रावधान दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 439 के तहत हाईकोर्ट के अधिकार पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं हैं।जस्टिस मोहम्मद यूसुफ वानी की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि NDPS Act की धारा 37 मादक पदार्थों की वाणिज्यिक मात्रा से जुड़े मामलों में जमानत देने पर प्रतिबंध लगाती है, लेकिन यह मानवीय आधार पर जमानत देने के हाईकोर्ट के विवेक पर रोक नहीं लगाती।जस्टिस वानी ने टिप्पणी की,"NDPS Act की...

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य आबकारी अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा, बार में महिलाओं के काम करने पर लगी भेदभावपूर्ण रोक हटाने की तैयारी
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य आबकारी अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा, बार में महिलाओं के काम करने पर लगी भेदभावपूर्ण रोक हटाने की तैयारी

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य विधानसभा के समक्ष बंगाल आबकारी अधिनियम 1909 में संशोधन करने का प्रस्ताव रखा, जिससे महिलाओं को राज्य में शराब की ऑन दुकानों में काम करने की अनुमति दी जा सके, जो वर्तमान में आबकारी नियमों के तहत निषिद्ध है।ऑन दुकान वह होती है, जहां परिसर में शराब पीने के लिए बेची जाती है, जबकि ऑफ दुकान वह होती है जहां शराब काउंटर पर बेची जाती है।महिलाओं को ऐसे बार में काम करने की अनुमति देने का प्रस्ताव जहां शराब परोसी जाती है, मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा पेश किया गया, जिन्होंने...

वेतन वेरिफिकेशन सेल यूनिवर्सिटी द्वारा कर्मचारियों के वेतन निर्धारण को एकतरफा तरीके से रद्द नहीं कर सकता: पटना हाईकोर्ट
वेतन वेरिफिकेशन सेल यूनिवर्सिटी द्वारा कर्मचारियों के वेतन निर्धारण को एकतरफा तरीके से रद्द नहीं कर सकता: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट की जस्टिस हरीश कुमार की एकल पीठ ने फैसला सुनाया कि शिक्षा विभाग के अंतर्गत वेतन वेरिफिकेशन सेल यूनिवर्सिटी की वैधानिक समिति द्वारा किए गए वेतन निर्धारण निर्णयों को एकतरफा तरीके से रद्द नहीं कर सकता। न्यायालय ने कहा कि वेतन वेरिफिकेशन सेल की आपत्तियों को लेखापरीक्षा आपत्तियों के रूप में माना जाना चाहिए; उन्हें यूनिवर्सिटी को प्रभावित कर्मचारियों को सूचित करने और कोई भी कार्रवाई करने से पहले उनकी प्रतिक्रियाएं मांगने की आवश्यकता होती है। न्यायालय ने फैसला सुनाया कि वेतन निर्धारण पर...

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के 19000 से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को बेदखली से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के 19000 से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को बेदखली से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में महाराष्ट्र के पुणे के पास पिंपरी-चिंचवाड़ में 19000 से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को बेदखली से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया।कोर्ट ने कहा कि जब तक स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग विनियमन) अधिनियम 2014 के अनुसार हॉकिंग और नॉन-हॉकिंग क्षेत्रों की पहचान/अधिसूचना करने का काम नहीं हो जाता, तब तक यथास्थिति बनाए रखी जाए और हॉकर्स को उनके विक्रय स्थल से बेदखल न किया जाए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने आदेश पारित करते हुए...

कंसोर्टियम विवाह का मूलभूत पहलू: केरल हाईकोर्ट ने बिना किसी उचित कारण के पति को छोड़ने वाली पत्नी को भरण-पोषण देने से इनकार किया
'कंसोर्टियम' विवाह का मूलभूत पहलू: केरल हाईकोर्ट ने बिना किसी उचित कारण के पति को छोड़ने वाली पत्नी को भरण-पोषण देने से इनकार किया

'केरल हाईकोर्ट ने कहा कि जो पत्नी अपने पति को छोड़कर बिना किसी उचित कारण के अलग रहने का विकल्प चुनती है, वह CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा करने की हकदार नहीं है।न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि एक-दूसरे के साथ रहने आराम और स्नेह पाने का अधिकार जिसे आमतौर पर कंसोर्टियम के रूप में जाना जाता है, विवाह का एक मूलभूत पहलू है। इसने आगे कहा कि जब कोई भी पति या पत्नी दूसरे के साथ रहना छोड़ देता है तो यह वैवाहिक दायित्वों से वापसी माना जाता है।जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने कहा,"विवाह का प्राथमिक...

गवाह द्वारा अपने लिए तथा समान बचाव वाले अन्य लोगों के लिए गवाही देना, उसके साक्ष्य को अस्वीकार करने का कोई आधार नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
गवाह द्वारा अपने लिए तथा समान बचाव वाले अन्य लोगों के लिए गवाही देना, उसके साक्ष्य को अस्वीकार करने का कोई आधार नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि समान वर्ग के पक्षों की परीक्षा के क्रम को नियंत्रित करने वाला कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि सामान्य प्रथा यह है कि पहले एक ही पक्ष के लोगों की परीक्षा ली जाती है।अदालत ने आगे कहा कि सिर्फ इसलिए कि कोई गवाह न सिर्फ अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए भी गवाही देता है, यह उसके साक्ष्य को अस्वीकार करने का आधार नहीं हो सकता।ऐसा करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता (वादी) की इस दलील को खारिज कर दिया कि प्रतिवादी नंबर 1 का हलफनामा खारिज किया जाना चाहिए, क्योंकि वह अपनी ओर से तथा...

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार से ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड में दोषी की समयपूर्व रिहाई याचिका पर 6 सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार से ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड में दोषी की समयपूर्व रिहाई याचिका पर 6 सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (19 मार्च) को ओडिशा राज्य से दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की याचिका पर निर्णय लेने को कहा, जो 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ सिंह द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें सिंह ने अपनी सजा में छूट की मांग की थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने 24 साल से अधिक कारावास की सजा काट ली है।राज्य के वकील ने पीठ को सूचित किया कि वे इस मुद्दे पर...

केवल जांच के दौरान पीड़िता की चुप्पी और आंसू बलात्कार के आरोपी को लाभ नहीं पहुंचा सकते : सुप्रीम कोर्ट ने 38 साल बाद दोषसिद्धि बहाल की
केवल जांच के दौरान पीड़िता की चुप्पी और आंसू बलात्कार के आरोपी को लाभ नहीं पहुंचा सकते : सुप्रीम कोर्ट ने 38 साल बाद दोषसिद्धि बहाल की

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में व्यक्ति की दोषसिद्धि को केवल इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि पीड़िता जिरह के दौरान चुप रही और केवल आंसू बहाती रही।सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि हाईकोर्ट ने 6 पन्नों के आदेश के जरिए केवल जांच के दौरान पीड़िता की चुप्पी के आधार पर ट्रायल कोर्ट के सुविचारित फैसला खारिज किया।हाईकोर्ट ने प्रतिवादी-आरोपी की दोषसिद्धि खारिज की थी, यह देखते हुए कि अभियोक्ता (पीड़ित...