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गुजरात हाईकोर्ट ने 2015-2022 तक के कुछ अभिलेखों को नष्ट करने के लिए नोटिस जारी किया; पक्षकारों को समय-सीमा से पहले प्रतियां एकत्र करने की सलाह दी
गुजरात हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों और वकीलों को औपचारिक नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें गुजरात हाईकोर्ट नियम 1993 के अध्याय XV, नियम 162 से 169A(I) और (II) के तहत न्यायिक अभिलेखों के प्रस्तावित विनाश के बारे में सूचित किया गया।गुजरात हाईकोर्ट नियम के नियम 169A(II) के अनुसार हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने कहा कि अपीलीय या मूल साइड स्टाम्प क्रमांकित मुख्य मामलों के कागजात साथ ही इसके आई.ए. जिनका 01.01.2015 से 31.12.2022 की अवधि के दौरान पंजीकरण से इनकार करने के कारण निपटारा किया गया या जिन्हें चूक के...
अगर मूल संरचना सिद्धांत कभी खत्म हुआ तो भगवान ही इस देश की मदद कर पाएंगे: जस्टिस नरीमन
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने कहा है कि मूल संरचना सिद्धांत हमेशा के लिए कायम रहेगा और इस सिद्धांत को खत्म करने के खतरों के बारे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, "और अगर संयोग से यह कभी खत्म हो भी जाए, तो भगवान ही इस देश की रक्षा करें।" जस्टिस नरीमन अपनी पुस्तक 'मूल संरचना सिद्धांत: संवैधानिक अखंडता का रक्षक' के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत श्रोताओं को याद दिलाते हुए की कि 13 अप्रैल, 1919 शायद इतिहास का "सबसे काला दिन" था, जब ब्रिटिश जनरल...
पटना हाईकोर्ट के जस्टिस अंजनी कुमार शरण रिटायर: 'वादकारी तब अदालत आता है जब हर जगह हार चुका होता है, उसे त्वरित न्याय मिलना चाहिए'
पटना हाईकोर्ट के जज जस्टिस अंजनी कुमार शरण 9 अप्रैल को छह वर्षों की न्यायिक सेवा और 28 वर्षों की वकालत के बाद रिटायर हो गए।रिटायरमेंट के अवसर पर उन्होंने कहा,"अदालत न्याय का मंदिर है और इसे हर उस व्यक्ति के लिए सुलभ होना चाहिए, जो अपनी पीड़ा का समाधान चाहता है।"पटना हाईकोर्ट के सेंटेनरी हॉल में दिए गए अपने विदाई भाषण में जिसे उन्होंने हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में दिया, जस्टिस शरण ने अपने सहकर्मियों, विधिक समुदाय और अपने परिवार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।उन्होंने अपने कानूनी सफर को याद...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल चुनाव में विदेशियों के भाग लेने का आरोप लगाने वाली याचिका खारिज की
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की जांच के लिए नई प्रक्रिया की मांग करने वाली जनहित याचिका खारिज की। उक्त याचिका में आगे आरोप लगाया गया था कि विदेशी लोग राज्य के चुनावों में भाग लेने और परिणामों में हेरफेर करने के लिए अवैध रूप से भारतीय नागरिकता प्राप्त कर रहे हैं।याचिका खारिज करते हुए चीफ जस्टिस टीएस शिवगनम और जस्टिस सी. चटर्जी (दास) की खंडपीठ ने कहा,"जैसा कि भारत के चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वकील ने सही ढंग से बताया कि नामांकन की जांच करते समय भारत के चुनाव आयोग द्वारा...
'गिरफ्तारी के आधार' न बताना अनुच्छेद 22(1), CrPC की धारा 50 का उल्लंघन: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले में व्यक्ति की गिरफ्तारी रद्द की। इसने नोट किया कि गिरफ्तारी के समय न तो उसकी गिरफ्तारी के कारण और न ही आधार लिखित रूप में बताए गए, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत उसके संवैधानिक सुरक्षा उपायों और CrPC की धारा 50 के तहत वैधानिक आदेश का उल्लंघन है।पिछले सप्ताह पारित अपने आदेश में जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार के बारे में लिखित रूप से सूचित किए...
कुछ मौलिक अधिकार इतने स्वाभाविक हैं कि उन्हें बहुमत या जनमत संग्रह के ज़रिए भी नहीं छीना जा सकता: जस्टिस केवी विश्वनाथन
सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा कि चूंकि कुछ मौलिक अधिकार प्राकृतिक और अंतर्निहित अधिकार हैं, इसलिए वे बहुमत के हाथ से बाहर हैं और उन्हें जनमत संग्रह के ज़रिए भी नहीं छीना जा सकता।सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन नरीमन द्वारा लिखित पुस्तक "बेसिक स्ट्रक्चर डॉक्ट्रिन: प्रोटेक्टर ऑफ़ कॉन्स्टीट्यूशनल इंटीग्रिटी" के विमोचन के अवसर पर बोलते हुए जस्टिस केवी विश्वनाथन ने याद किया कि नानी पालकीवाला के पूरे करियर में "सबसे कठिन सवाल" यह था कि क्या वे तब भी मूल संरचना सिद्धांत की...
YSR कांग्रेस पार्टी ने वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को इस आधार पर चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया कि इसके प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13, 14, 15, 21, 25, 26, 29, 30 और 300ए का उल्लंघन करते हैं।आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पार्टी के अनुसार, संशोधन वक्फ के प्रशासन को मूल रूप से कमजोर करता है, 1995 के अधिनियम के मूल विधायी इरादे को खत्म करता है और मुस्लिम धार्मिक बंदोबस्त में बड़े पैमाने पर सरकारी हस्तक्षेप की...
वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ BJP शासित पांच राज्यों की सरकारे पहुंची सुप्रीम कोर्ट, याचिका में क्या कहा?
वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई से पहले, असम, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और महाराष्ट्र राज्यों ने इस कानून का समर्थन करते हुए सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप आवेदन दायर किए।उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य द्वारा दायर याचिका में पक्षकार बनने की मांग की। राजस्थान ने कहा कि यद्यपि याचिका "कुछ संवैधानिक चिंताओं को उठाने के लिए नेक इरादे से" दायर की गई हैं, लेकिन यह राज्य प्रशासन द्वारा सामना की जा रही जमीनी हकीकत को समझने में अफसोसजनक रूप से विफल...
राजस्थान न्यायालय शुल्क अधिनियम की धारा 27 : Trust Property से संबंधित वादों में न्यायालय शुल्क
राजस्थान न्यायालय शुल्क और वाद मूल्यांकन अधिनियम की धारा 27 एक विशेष और महत्वपूर्ण धारा है, जो विशेष रूप से विश्वास संपत्ति (Trust Property) से संबंधित वादों में न्यायालय शुल्क (Court Fees) के निर्धारण से जुड़ी है। यह धारा तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति या संस्था अदालत में ऐसे विवादों को लेकर जाती है जो किसी ट्रस्ट की संपत्ति, ट्रस्टी का अधिकार, या ट्रस्टी के बीच विवादों से जुड़े होते हैं।धारा 27 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ट्रस्ट या धर्मार्थ संपत्तियों से संबंधित मुकदमों में न्याय की...
किरायेदार को दी जा रही सुविधाएं बंद करने पर रोक – राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 23
कई बार मकान-मालिक (Landlord) और किरायेदार (Tenant) के बीच विवाद की स्थिति में मकान-मालिक जानबूझकर किरायेदार को दी जा रही आवश्यक सुविधाएं (Amenities) जैसे बिजली, पानी, सफाई, पार्किंग आदि बंद कर देता है। इससे किरायेदार को असुविधा होती है और कई बार उसे मकान खाली करने के लिए मजबूर भी किया जाता है।राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 23 (Section 23 of the Rajasthan Rent Control Act, 2001) इस तरह की मनमानी पर रोक लगाती है। यह धारा सुनिश्चित करती है कि जब तक Rent Authority की अनुमति न हो, तब...
धारा 418 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 – जब सरकार अपर्याप्त सजा के खिलाफ अपील करती है
संदर्भ (Reference): इससे पहले के लेखों में हमने धारा 415, 416 और 417 के अंतर्गत यह समझा कि कौन व्यक्ति अपील कर सकता है, और किन परिस्थितियों में अपील का अधिकार नहीं होता। अब हम धारा 418 के माध्यम से यह जानेंगे कि राज्य सरकार या केंद्र सरकार किस स्थिति में यह मानते हुए कि किसी दोषी को मिली सजा बहुत कम (Inadequate) है, उसके खिलाफ अपील कर सकती है।अपील की अनुमति – जब सजा अपर्याप्त हो धारा 418 के अनुसार, जब किसी व्यक्ति को अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो और उसे जो सजा दी गई हो, वह सरकार को अपर्याप्त...
क्या किसी Criminal Case को सिर्फ Political Rival के दर्ज कराने पर रद्द किया जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने Ramveer Upadhyay & Anr. v. State of U.P. & Anr. मामले में यह महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि क्या किसी Criminal Case को सिर्फ इसलिए खारिज (Quash) किया जा सकता है क्योंकि वह मामला Political Rival द्वारा दर्ज कराया गया है? इस फैसले में कोर्ट ने CrPC की धारा 482 (Section 482 of CrPC), Complaint को शुरुआती स्तर पर खारिज करने की प्रक्रिया, और Political Rivalry के प्रभाव को गहराई से समझाया। इस लेख में हम कोर्ट द्वारा तय किए गए महत्वपूर्ण कानून बिंदुओं को सरल भाषा में समझेंगे।धारा 482...
सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म सिटी प्रोजेक्ट में देरी के लिए चंडीगढ़ के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया, सफल बोलीदाता को 47.75 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र शासित प्रदेश में मल्टीमीडिया-कम-फिल्म सिटी स्थापित करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा नियुक्त कंपनी के पक्ष में पारित आर्बिट्रल अवार्ड काफी हद तक बरकरार रखा, जिसमें अधिकारियों को 47.75 करोड़ रुपये की जब्त बोली राशि वापस करने के लिए उत्तरदायी ठहराया गया।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने फैसला सुनाया, उनका मानना था कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आर्बिट्रल अवार्ड को गलत तरीके से खारिज कर दिया।इसने कहा कि हालांकि विकसित की जाने वाली परियोजना के...
परमानेंट लोक अदालतों के लिए ऑनलाइन सेवाएं शुरू करने वाला केरल बना पहला राज्य
न्याय तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, केरल देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने परमानेंट लोक अदालतों (Permanent Lok Adalats) के लिए ऑनलाइन फाइलिंग और सुनवाई की सुविधा शुरू की। केरल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (KELSA) की इस पहल से विशेष रूप से वंचित समुदायों को न्याय सुलभ कराने में मदद मिलेगी और यह तकनीक के माध्यम से न्याय की दूरी को पाटने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।फिलहाल केरल में तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम और कोझिकोड में तीन परमानेंट लोक अदालतें कार्यरत हैं।...
दिल्ली हाईकोर्ट ने 'हौज खास सोशल' को ईटरी के लाइसेंस नवीनीकरण पर निर्णय होने तक शराब सेवा की अनुमति देने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने शहर के प्रसिद्ध रेस्तरां आउटलेट हौज खास सोशल को आबकारी विभाग के उस निर्देश के विरुद्ध राहत प्रदान की, जिसमें उसने “ईटिंग हाउस लाइसेंस” न होने का हवाला देते हुए शराब की बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया।जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि रेस्तरां-सह-बार को वर्ष 1994 से लाइसेंस प्रदान किया गया, केवल इसलिए कि प्राधिकरण की ओर से इसे नवीनीकृत करने में देरी हुई, रेस्तरां के हितों के विरुद्ध नहीं होगा।पीठ ने कहा,"प्रतिवादी नंबर 2 के विद्वान वकील ने विशिष्ट प्रश्न पर कहा कि याचिकाकर्ता के...
समय के साथ संबंध विकसित हो सकता है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने मां की हत्या के मामले में गवाह बने बेटे के पिता को मुलाक़ात के अधिकार दिए
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने व्यक्ति को सशर्त मुलाकात (visitation) का अधिकार दिया, भले ही उसके नाबालिग बेटे ने उसकी पत्नी की हत्या के मामले में उसके खिलाफ गवाही दी थी।आरोपी पिता को आपराधिक मुकदमे में बरी किए जाने को ध्यान में रखते हुए जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस चला गुना रंजन की खंडपीठ ने यह उचित समझा कि उसे सशर्त मुलाकात का अधिकार दिया जाए, जिससे वह अपने व्यवहार, आचरण और सहभागिता के माध्यम से बेटे का प्यार और स्नेह जीतने का अवसर पा सके।कोर्ट ने कहा,"ग़लतफहमियां या भ्रांतियां, चाहे वह किसी भी...
गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की 276 दिनों की देरी से अपील दाखिल करने और वैधानिक स्थानीय निकायों को रिट आदेशों के कार्यान्वयन से रोकने पर फटकार लगाई
गुजरात हाईकोर्ट ने एक रिट आदेश के खिलाफ 276 दिनों की देरी से अपील दाखिल करने पर राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की। अदालत ने कहा कि जब राज्य सरकार को स्थानीय निकायों के साथ एक पक्ष के रूप में मामले में जोड़ा गया हो, तब वह मूक दर्शक बनकर न तो कोई हलफनामा दाखिल करे और न ही अपना पक्ष रखे यह व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार किसी कार्यवाही को चुनौती नहीं देना चाहती है तो वह संबंधित वैधानिक स्थानीय निकायों को उस निर्णय के अनुपालन से नहीं रोक सकती और न ही उन्हें उस...
राज्यपाल जब असंवैधानिकता के आधार पर विधेयक सुरक्षित रखते हैं तो राष्ट्रपति को एससी की राय लेनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
तमिलनाडु राज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि जब राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए असंवैधानिकता के आधार पर सुरक्षित रखते हैं, तो राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट यानी एससी की राय लेनी चाहिए।भारतीय संविधान का अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को सार्वजनिक महत्व के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट से परामर्शी राय लेने की शक्ति प्रदान करता है। यह परामर्शी अधिकारिता राष्ट्रपति को कानून या तथ्य के प्रश्नों पर सुप्रीम कोर्ट से परामर्श करने की अनुमति देती है।जब...
राज्यपाल राज नहीं रहेगा: तमिलनाडु के राज्यपाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक क्यों है?
'बुलडोजर राज' की तरह 'राज्यपाल राज' भी एक घातक प्रवृत्ति है, जो संविधान को नष्ट कर रही थी, हालांकि यह एक ऐसे तरीके से हो रहा था, जो कि बहुत ही अगोचर था। राज्यपाल, जो कि संवैधानिक नाममात्र के व्यक्ति से अधिक कुछ नहीं हैं, राज्य सरकारों के प्रशासन में तेजी से हस्तक्षेप कर रहे थे और बाधाएं पैदा कर रहे थे। एक बार-बार होने वाली घटना यह थी कि राज्यपाल राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर अनिश्चित काल तक बैठे रहते थे, न तो उन्हें मंजूरी देते थे और न ही उन्हें कारण बताकर वापस करते थे - जिससे विधायी...
शून्य से परे: एक हाइपर-कनेक्टेड विश्व में लुप्त होती मित्रता की कला
मेरे बचपन के दोस्त ने हाल ही में मुझे एक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से एक संदेश भेजा जिसका शीर्षक था "फ्रेंडशिप रिसेस" जिसमें सार्थक दोस्ती में गिरावट पर चर्चा की गई थी। लगभग उसी समय, एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान, मेरी पत्नी ने हमारे बेटे द्वारा उठाए गए एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया। 21 साल की उम्र में, उसने कॉलेज में पिछले तीन वर्षों में अपने सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद भावनात्मक रूप से बाध्यकारी दोस्ती बनाने में असमर्थता पर निराशा व्यक्त की। उसने साझा किया कि जिन लोगों को वह करीबी दोस्त मानता...




















