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केवल संपत्ति का स्पष्ट विवरण न होना या वसीयत करने वाले की मृत्यु वसीयत के तुरंत बाद होना वसीयत को अमान्य नहीं कर सकता: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में दिए गए एक निर्णय में स्पष्ट किया कि वसीयत के निष्पादन को लेकर संदेह केवल अस्पष्ट दावों पर आधारित नहीं हो सकता।कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की वसीयत को इस आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि वसीयतकर्ता की मृत्यु वसीयत के तुरंत बाद हो गई या वसीयत में संपत्ति का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया।जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा,“कौन-सी परिस्थितियाँ संदेहास्पद मानी जाएंगी, इसे स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया जा सकता, न ही पूरी तरह सूचीबद्ध किया जा...
उपराष्ट्रपति के अनुच्छेद 142 को 'न्यूक्लियर मिसाइल' कहने पर कपिल सिब्बल जताई आपत्ति, क्या कुछ कहा?
सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की टिप्पणी पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ "न्यूक्लियर मिसाइल" के रूप में कर रहा है। सिब्बल ने कहा कि उन्हें इस बात का गहरा दुख है कि एक संवैधानिक पदाधिकारी ऐसी टिप्पणी कर रहा है।मीडिया को संबोधित करते हुए सिब्बल ने कहा सुबह जब मैं उठा और अखबारों में उपराष्ट्रपति की टिप्पणी पढ़ी तो मुझे बहुत दुख...
झारखंड हाईकोर्ट ने 'तमरिया' को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दिए जाने के खिलाफ याचिका खारिज की
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में जाति जांच समिति की रिपोर्ट के खिलाफ याचिका खारिज की, जिसके द्वारा 'तमरिया' जाति को मुंडा जाति की उपजाति के रूप में स्वीकार किया गया था और इसे अनुसूचित जनजाति श्रेणी में लाया गया था।मामला खारिज करते हुए न्यायालय ने माना कि राज्य के एक विभाग द्वारा उसी राज्य के दूसरे विभाग के खिलाफ दायर रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।यह याचिका राज्य के प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग द्वारा राज्य के अनुसूचित जनजाति विभाग के सचिव की अध्यक्षता में तैयार की गई उपरोक्त रिपोर्ट के खिलाफ...
अनुबंध का उल्लंघन स्पष्ट हो जाने पर दूसरों के रोजगार को प्रभावित करने वाले ब्लैकलिस्टिंग जैसे कठोर दंड नहीं लगाए जाने चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुबंध का उल्लंघन वास्तविक रूप से स्पष्ट हो जाता है तो कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने जैसे कठोर दंड नहीं लगाए जाने चाहिए। इससे जुड़े लोगों के रोजगार एवं व्यवसाय पर प्रभाव पड़ता है।जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर एवं जस्टिस विकास सूरी ने कहा,"जब किसी संपन्न अनुबंध का उल्लंघन वास्तविक रूप से स्पष्ट हो जाता है, इसके अलावा जब संबंधित व्यक्ति/संस्था द्वारा अपने संविदात्मक दायित्व को पूरा करने में कथित रूप से चूक करने के विरुद्ध वास्तविक विवाद उठाया जाता है, तो...
ज़ोमैटो का डिलीवरी फीस, फूड चार्ज और प्लेटफ़ॉर्म फीस लेना अनुचित या भेदभावपूर्ण नहीं: CCI
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की रवनीत कौर (अध्यक्ष), अनिल अग्रवाल (सदस्य), स्वेता कक्कड़ (सदस्य) और दीपक अनुराग (सदस्य) की पीठ ने माना कि ज़ोमैटो द्वारा विभिन्न प्रकार की फीस, जैसे प्लेटफ़ॉर्म चार्ज, फूड फीस और डिलीवरी फीस लगाना प्रकृति में अनुचित या भेदभावपूर्ण नहीं है। साथ ही प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 (अधिनियम) की धारा 4 के अनुसार प्रभुत्वशाली स्थिति का दुरुपयोग नहीं है।संक्षिप्त तथ्य:ललित वाधेर ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग में ज़ोमैटो लिमिटेड (प्रतिवादी/OP) के खिलाफ़ एक रिपोर्ट दायर की।...
पटना हाईकोर्ट ने पब्लिक टेंडर में जाली अनुभव प्रमाण पत्र देने के लिए फर्म को ब्लैक लिस्ट करने का फैसला बरकरार रखा
पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने एक फैसले में कहा कि सार्वजनिक निविदा में जाली प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना एक गंभीर मामला है, जो निगम के विश्वास को खतरे में डालता है।न्यायालय ने आगे कहा कि ऐसे व्यक्तियों के बारे में अन्य विभागों को चेतावनी देना प्रत्येक निगम का कर्तव्य है।एक्टिंग चीफ जस्टिस आशुतोष कुमार और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा,"जाली प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना जिसके कारण FIR दर्ज हो जाती है, भले ही उससे संबंधित जांच लंबित हो, एक गंभीर मामला है। यह निगम के विश्वास को...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अविवाहित महिला के साथ यौन संबंध बनाने के मामले में आरोपी को दोषी ठहराने का आदेश रद्द किया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक सत्र न्यायालय द्वारा भारतीय दंड संहिता ('IPC') की धारा 497 के तहत व्यभिचार का दोषी ठहराए जाने के आदेश को पलट दिया है , जिसमें शादी के झूठे आश्वासन पर एक अविवाहित महिला के साथ बार-बार यौन संबंध बनाने के लिए व्यभिचार का दोषी ठहराया गया था।आरोपी-अपीलकर्ता को बरी करते हुए जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने कहा- “ट्रायल कोर्ट द्वारा अपीलकर्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 497 के तहत दोषी ठहराया जाना कानून में गलत है, और इसलिए अपीलकर्ता IPC की धारा 497 के आरोप से...
GST अधिकारी सीमा के आधार पर प्री-डिपॉजिट के रिफंड से इनकार नहीं कर सकते, अनुच्छेद 265 का उल्लंघन: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल के एक फैसले में कहा है कि जीएसटी अधिनियम की धारा 107 (6) (b) के तहत किए गए वैधानिक पूर्व-जमा के लिए रिफंड दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया गया है कि दावा धारा 54 (1) के तहत 2 साल की सीमा के बाद दायर किया गया था, कानूनी रूप से अस्थिर है।जस्टिस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने कहा, "इस आशय का कोई विवाद नहीं है कि एक बार रिफंड वैधानिक अभ्यास के माध्यम से होता है, तो इसे न तो राज्य द्वारा और न ही केंद्र द्वारा रखा जा सकता है, वह भी एक प्रावधान की सहायता लेकर, जो...
NDPS Act की अनुसूची में दर्ज पदार्थों से निपटना अपराध: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NDPS ACT की अनुसूची में सूचीबद्ध एक साइकोट्रोपिक पदार्थ से जुड़ी गतिविधियां, लेकिन एनडीपीएस नियमों की अनुसूची I में नहीं, NDPS ACTकी धारा 8 (c) के तहत अपराध का गठन करती हैं।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की जहां प्रतिवादी-अभियुक्त को बुप्रेनोर्फिन हाइड्रोक्लोराइड के कब्जे में पाया गया था, जो NDPS ACTकी अनुसूची में सूचीबद्ध एक साइकोट्रोपिक पदार्थ है, लेकिन एनडीपीएस नियमों की अनुसूची I में नहीं है; हालांकि, NDPS ACTके तहत उसके...
राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी वकील कार्यालय में प्रशासनिक और ढांचागत कमियों को सुधारने के लिए सुझाव देने के लिए 5 सदस्यीय पैनल बनाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी वकील के कार्यालय की मौजूदा कमियों, संरचनात्मक आवश्यकताओं और प्रशासनिक आवश्यकताओं की जांच करने और क्षमता बढ़ाने, प्रशासनिक सुधार और बुनियादी ढांचे में सुधार के उपायों की सिफारिश करने के लिए बार के सदस्यों की 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है।जस्टिस फरजंद अली ने सरकारी वकील के कार्यालय के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान दिया जैसे कि मंत्रिस्तरीय कर्मचारियों की कमी, बुनियादी ढांचे की कमी, राज्य कानून अधिकारियों को अपर्याप्त पारिश्रमिक, और परिणामस्वरूप प्रक्रियात्मक देरी के...
स्टांप ड्यूटी में कमी के मामले में कलेक्टर द्वारा मूल मांगने से इनकार करने से दस्तावेज जब्त करने की अदालत की शक्ति कम नहीं होगी: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने माना कि एक कलेक्टर (स्टाम्प) द्वारा भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 48B के तहत शक्ति का प्रयोग नहीं करने का निर्णय लिया गया है, जो उसे स्टाम्प ड्यूटी में कमी के मामले में मूल उपकरण के उत्पादन का आदेश देने का अधिकार देता है, धारा 33 के तहत दस्तावेज़ को जब्त करने की न्यायालय की शक्ति को कम नहीं करेगा।जस्टिस राकेश मोहन पांडे ने अपने आदेश में कहा, "वर्तमान मामले में, दस्तावेजों को ट्रायल कोर्ट द्वारा कलेक्टर (स्टाम्प) को भेजा गया था और उन्होंने स्टाम्प अधिनियम की धारा 48 बी के...
अपील की सुनवाई की प्रक्रिया जब उसे तुरंत खारिज नहीं किया गया हो – धारा 426 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
आपराधिक न्याय व्यवस्था (Criminal Justice System) में अपील (Appeal) की प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब किसी व्यक्ति को निचली अदालत (Lower Court) द्वारा दोषी (Convicted) ठहराया जाता है, तो उसे यह अधिकार (Right) होता है कि वह उस निर्णय (Decision) को ऊपरी अदालत (Appellate Court) में चुनौती दे सके।लेकिन जरूरी नहीं कि हर अपील पर तुरंत सुनवाई हो। कभी-कभी अगर अपीलीय अदालत को लगता है कि अपील में कोई मजबूत आधार (Strong Ground) नहीं है, तो वह उसे बिना किसी लंबी प्रक्रिया के तुरंत खारिज...
खाते के मामलों में Court Fee कैसे लगेगी – राजस्थान न्यायालय शुल्क अधिनियम, 1961 की धारा 33
जब कोई व्यक्ति Court में मुकदमा करता है, तो उसे Court Fee (अदालत शुल्क) देना होता है। यह शुल्क इस आधार पर तय होता है कि वह किस प्रकार का मुकदमा है और उसमें कितनी राशि का दावा किया गया है। Rajasthan Court Fees and Suits Valuation Act, 1961 में अलग-अलग प्रकार के मामलों में Court Fee कैसे लगेगी, यह साफ-साफ बताया गया है।ऐसे कई मुकदमे होते हैं जिनमें यह साफ नहीं होता कि वास्तव में कितनी राशि किसी पक्ष को मिलनी चाहिए। खासकर ऐसे मामलों में जहाँ Accounts (लेखा-जोखा) बनाना या जाँच करना जरूरी हो, वहाँ...
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की कठिनाइयों को दूर करने और नियम बनाने की राज्य सरकार की शक्तियाँ – धारा 30 और 31
धारा 30 – कठिनाइयाँ दूर करने की शक्तिकभी-कभी ऐसा होता है कि किसी कानून को लागू करने में व्यवहारिक समस्याएँ (Practical Difficulties) आ जाती हैं। ऐसा ही कुछ अगर राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 (Rajasthan Rent Control Act, 2001) के साथ हो, तो इस कानून की धारा 30 राज्य सरकार को यह अधिकार (Power) देती है कि वह ऐसी किसी भी कठिनाई (Difficulty) को दूर करने के लिए एक आदेश (Order) जारी कर सकती है। यह आदेश तभी जारी हो सकता है जब वह कानून के अन्य प्रावधानों (Provisions) के विपरीत न हो और उस समस्या...
क्या Chargesheet को सरकारी Websites पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जा सकता है?
20 जनवरी 2023 को दिए गए एक अहम फैसले Saurav Das v. Union of India & Others में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर निर्णय दिया। याचिकाकर्ता ने संविधान के Article 32 के तहत एक याचिका दायर की थी, जिसमें मांग की गई थी कि Cr.P.C. (Code of Criminal Procedure) की धारा 173 के तहत दायर की गई सभी Chargesheet और Final Reports को सरकारी Websites पर जनता के लिए उपलब्ध कराया जाए।सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि Chargesheet और उससे जुड़ी दस्तावेज Indian Evidence Act, 1872...
Section 12 JJ Act| कानून का उद्देश्य संघर्षरत बच्चों को सुधारना, उन्हें दंडित करना समाज के लिए आत्मघाती होगा: पटना हाईकोर्ट
कानून के साथ संघर्ष करने वाले (सीआईसीएल) कथित बच्चे को जमानत देते समय पटना हाईकोर्ट ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 12 का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया कि किशोर को जमानत देना एक नियम है और जमानत देने से इनकार करना अपवाद है। ऐसा करते हुए न्यायालय ने कहा कि कानून के साथ संघर्ष करने वाले किशोर को जमानत देने से केवल कुछ परिस्थितियों में ही इनकार किया जा सकता है, जिसमें यह भी शामिल है कि अगर जमानत पर किशोर किसी ज्ञात अपराधी के संपर्क में आ सकता है या किशोर शारीरिक, मनोवैज्ञानिक खतरे में पड़...
महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत वैधानिक संरक्षण को 'शीघ्र बेदखली' की मांग करने के लिए मध्यस्थता याचिका दायर करके दरकिनार नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
जस्टिस सोमशेखर सुंदरसन की बॉम्बे हाईकोर्ट की पीठ ने माना कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 9 के तहत अधिकार क्षेत्र का उपयोग महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम, 1999 के तहत किरायेदारों को दी जाने वाली वैधानिक सुरक्षा को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता है। धारा 9 के तहत अंतरिम उपायों को मध्यस्थता कार्यवाही में सहायता करनी चाहिए और बेदखली और पुनर्विकास के लिए किराया अधिनियम के तहत विशेष वैधानिक तंत्र को ओवरराइड या संघर्ष नहीं करना चाहिए। न्यायालय ने देखा कि संरक्षित किरायेदारों...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 'सुपर डीलक्स' फ्लैट देने से मनमाने ढंग से इनकार करने पर कर्मचारी को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पात्रता मानदंड पूरा करने के बावजूद मनमाने ढंग से "सुपर डीलक्स श्रेणी" के तहत फ्लैट देने से इनकार करने के लिए हरियाणा सरकार के एक कर्मचारी को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी ने पाया कि याचिकाकर्ता को "तुच्छ कारण" के लिए सुपर डीलक्स श्रेणी में फ्लैट देने से मना कर दिया गया था, "जो रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों के बिल्कुल विपरीत है, जिसके तथ्यों से पता चलता है कि सुपर डीलक्स श्रेणी के फ्लैटों की संख्या में वृद्धि होने के बावजूद,...
BDS/MBBS मेडिकल अधिकारियों की रिटायरमेंट आयु के संबंध में तुरंत सर्कुलर जारी किया जाए: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि वह राज्य सरकार से यह अपेक्षा करता है कि वह अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सर्कुलर या अधिसूचना जारी करे, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि BDS (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी)/MBBS डिग्री धारक मेडिकल अधिकारियों की रिटायरमेंट की आयु अब 62 वर्ष होगी और यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा।जस्टिस रेखा बोरणा ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें BDS डिग्रीधारी याचिकाकर्ता को 60 वर्ष की आयु में रिटायर किए जाने को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने यह निर्णय डॉ. सर्वेश प्रधान बनाम राजस्थान...
महाभारत की द्रौपदी का हवाला देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने व्यभिचार मामले में व्यक्ति को बरी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने महाभारत की द्रौपदी का उदाहरण देते हुए महिला को पति की संपत्ति माना जाने का उदाहरण देते हुए एक व्यक्ति को महिला के पति द्वारा उसके खिलाफ दायर व्यभिचार के मामले में बरी कर दिया। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा, "महिला को पति की संपत्ति माना जाना और इसके विनाशकारी परिणाम महाभारत में अच्छी तरह से वर्णित हैं, जिसमें द्रौपदी को किसी और ने नहीं बल्कि उसके अपने पति युधिष्ठिर ने जुए के खेल में दांव पर लगा दिया था, जहां अन्य चार भाई मूक दर्शक बने हुए थे और द्रौपदी के पास अपनी गरिमा के...



















