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J&K हाईकोर्ट ने गोवंश वध आरोपी की प्रिवेंटिव डिटेंशन बरकरार रखा, आरोपी के कृत्य से सांप्रदायिक तनाव फैला था
J&K हाईकोर्ट ने गोवंश वध आरोपी की प्रिवेंटिव डिटेंशन बरकरार रखा, आरोपी के कृत्य से सांप्रदायिक तनाव फैला था

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने जम्मू और कश्मीर लोक सुरक्षा अधिनियम, 1978 के तहत शेर मोहम्मद नामक व्यक्ति की निवारक हिरासत को बरकरार रखा है उसकी पत्नी, फैमिदा बेगम ने महत्वपूर्ण दस्तावेजों की आपूर्ति न किए जाने तथा अधिकारियों द्वारा विवेक का प्रयोग न किए जाने के आधार पर हिरासत आदेश को चुनौती दी थी। हालांकि, जस्टिस संजय धर ने याचिका को खारिज कर दिया, क्योंकि उठाए गए किसी भी तर्क में कोई दम नहीं पाया गया।याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस संजय धर ने कहा,“उक्त एफआईआर में लगाए गए आरोपों के...

दिल्ली हाईकोर्ट ने द वायर की याचिका खारिज की, पूर्व JNU प्रोफेसर के मानहानि मामले में समन आदेश बरकरार
दिल्ली हाईकोर्ट ने द वायर की याचिका खारिज की, पूर्व JNU प्रोफेसर के मानहानि मामले में समन आदेश बरकरार

दिल्ली हाईकोर्ट ने मीडिया पोर्टल The Wire और इसके संपादक अजय आशीर्वाद महाप्रशस्त द्वारा दायर याचिका खारिज कीस जिसमें पूर्व जेएनयू प्रोफेसर अमिता सिंह द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में समन आदेश को चुनौती दी गई थी।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने 13 जनवरी को ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसमें कोई वैधानिक त्रुटि नहीं है।याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि मजिस्ट्रेट द्वारा समन जारी करने से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 का पालन...

मध्यस्थता अधिनियम की धारा 11(6) के तहत आवेदन की समय-सीमा को यह दावा करके दरकिनार नहीं किया जा सकता कि वकील को नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं था: दिल्ली हाईकोर्ट
मध्यस्थता अधिनियम की धारा 11(6) के तहत आवेदन की समय-सीमा को यह दावा करके दरकिनार नहीं किया जा सकता कि वकील को नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं था: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने माना कि मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (मध्यस्थता अधिनियम) की धारा 11(6) के तहत मध्यस्थ की नियुक्ति के लिए आवेदन दाखिल करने की समय-सीमा को केवल इस आधार पर दरकिनार नहीं किया जा सकता कि याचिकाकर्ता के वकील द्वारा उचित प्राधिकरण के बिना मांग-सह-मध्यस्थता आमंत्रण नोटिस जारी किया गया था। न्यायालय ने माना कि यदि इस तरह का तर्क स्वीकार कर लिया जाता है, तो ऐसे आवेदन दाखिल करने की समय-सीमा निरर्थक हो जाएगी और समय-सीमा निर्धारित करने का मूल उद्देश्य ही...

जज को काम करना चाहिए, वादे नहीं: सीजेआई बीआर गवई ने मीडिया इंटरव्यू न देने पर कहा
"जज को काम करना चाहिए, वादे नहीं": सीजेआई बीआर गवई ने 'मीडिया इंटरव्यू' न देने पर कहा

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) भूषण रामकृष्ण गवई को एक भव्य समारोह में सम्मानित किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जज, सीनियर एडवोकेट, बार नेता और देश भर के कानूनी दिग्गज शामिल हुए। नई दिल्ली के द ललित में आयोजित इस कार्यक्रम में न्यायमूर्ति गवई की एक युवा वकील से लेकर भारत की न्यायपालिका के शीर्ष तक की उल्लेखनीय यात्रा का जश्न मनाया गया। साथ ही संवैधानिक आदर्शों के प्रति कानूनी बिरादरी की प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की गई।अपने भावपूर्ण भाषण में सीजेआई गवई ने...

धर्म परिवर्तन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: धर्म की श्रेष्ठता का दावा सेक्युलरिज़्म के खिलाफ, संविधान जबरन धर्म परिवर्तन की इजाज़त नहीं देता
धर्म परिवर्तन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: धर्म की श्रेष्ठता का दावा सेक्युलरिज़्म के खिलाफ, संविधान जबरन धर्म परिवर्तन की इजाज़त नहीं देता

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को स्वतंत्र रूप से धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार देता है लेकिन यह जबरन या धोखे से किए गए धर्म परिवर्तन का समर्थन नहीं करता।जस्टिस विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने कहा,"अनुच्छेद 25(1) अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, पालन करने और प्रचार करने का अधिकार देता है। लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है।"अदालत ने कहा कि यह सीमाएं इसलिए जरूरी...

मध्यस्थता का लंबित होना स्टाम्प अधिकारियों को स्टाम्प अधिनियम के तहत कार्यवाही शुरू करने से नहीं रोकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
मध्यस्थता का लंबित होना स्टाम्प अधिकारियों को स्टाम्प अधिनियम के तहत कार्यवाही शुरू करने से नहीं रोकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि मध्यस्थता कार्यवाही के लंबित रहने से स्टाम्प अधिकारियों के भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत कार्यवाही शुरू करने के अधिकार क्षेत्र पर रोक नहीं लगती है। मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 और भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत मध्यस्थता समझौतों के बीच परस्पर क्रिया में, उच्चतम न्यायालय ने एक बिना स्टाम्प वाले समझौते से निपटते हुए माना कि स्टाम्प शुल्क की अपर्याप्तता के परिणामस्वरूप मध्यस्थता कार्यवाही नहीं रुकेगी।यह माना गया कि मध्यस्थ स्टाम्प शुल्क की पर्याप्तता पर...

वादकारी ने कहा- उसने वकीलों को अधिकृत नहीं किया, सुप्रीम कोर्ट ने सुलह आदेश वापस लिया, जांच के निर्देश दिए
वादकारी ने कहा- उसने वकीलों को अधिकृत नहीं किया, सुप्रीम कोर्ट ने सुलह आदेश वापस लिया, जांच के निर्देश दिए

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सिविल अपील में दर्ज सुलह आदेश को वापस लिया, जब वादकारी ने बाद में अदालत को बताया कि उसने इस मामले को निपटाने के लिए किसी भी वकील को नियुक्त ही नहीं किया था।अदालत ने रजिस्ट्री को यह जांच करने का निर्देश भी दिया कि ये वकील कैसे यह दावा कर सके कि वे वादकारी की ओर से पेश हुए थे। रजिस्ट्री की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा, जिसमें FIR दर्ज करने का निर्देश भी शामिल है।यह असामान्य घटनाक्रम जस्टिस पी.एस. नरसिंह और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की...

डीजीपी उचित समय के भीतर अधिकारी को दोषमुक्त करने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा कर सकते हैं: P&H हाईकोर्ट
डीजीपी उचित समय के भीतर अधिकारी को दोषमुक्त करने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा कर सकते हैं: P&H हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को उचित अवधि के भीतर पुलिस अधिकारियों को दोषमुक्त करने के आदेशों सहित अनुशासनात्मक कार्यवाही की समीक्षा करने का अधिकार है, भले ही पंजाब पुलिस नियमों के तहत कोई विशिष्ट समय सीमा निर्धारित न की गई हो। वर्तमान मामले में, पुलिस अधिकारी के खिलाफ 2017 में आरोप पत्र दायर किया गया था और जांच अधिकारी ने उसी वर्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। अधिकारी को दोषमुक्त कर दिया गया था। अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने याचिकाकर्ता को दोषमुक्त करने की पुष्टि...

अदालत को डिग्री के मानक का आकलन नहीं करना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्टने राज्य विश्वविद्यालय की अंशकालिक बी.टेक डिग्री को बरकरार रखा
'अदालत को डिग्री के मानक का आकलन नहीं करना चाहिए': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्टने राज्य विश्वविद्यालय की अंशकालिक बी.टेक डिग्री को बरकरार रखा

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दीन बंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल द्वारा प्रदान की गई अंशकालिक बी.टेक (सिविल इंजीनियरिंग) डिग्री की वैधता को बरकरार रखा है तथा पदोन्नति उद्देश्यों के लिए उन्हें नियमित पाठ्यक्रमों के समकक्ष घोषित किया है। डॉ. बी.एल. असावा बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य (1982) में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा एवं जस्टिस एचएस ग्रेवाल की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा,"एक बार जब डिग्री विधिवत मान्यता प्राप्त संस्थान...

सड़क के परिवर्तन के लिए नगर आयुक्त की संतुष्टि सर्वोपरि है, निजी मालिक की सहमति प्रासंगिक नहीं: एपी हाईकोर्ट
सड़क के परिवर्तन के लिए नगर आयुक्त की संतुष्टि सर्वोपरि है, निजी मालिक की सहमति प्रासंगिक नहीं: एपी हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम अधिनियम की धारा 392 के तहत, जो नगर आयुक्त की अनुमति के बिना किसी भी निजी सड़क के निर्माण को रोकती है, सड़क में परिवर्तन का विरोध करने वाले निजी सड़क मालिक की सहमति का कोई महत्व नहीं है। इस संबंध में, जस्टिस न्यापति विजय ने अपने आदेश में कहा:“धारा 392 यह सुनिश्चित करती है कि बनाई गई सड़कें शहर में कनेक्टिंग सड़कों के साथ संरेखित हों और संगठित शहर का विकास सुनिश्चित करें। धारा 392(2) में “आयुक्त की संतुष्टि के लिए” शब्द, संबंधित सड़क में...

दिल्ली हाईकोर्ट ने फीस वृद्धि विवाद पर डीपीएस द्वारका के 32 छात्रों को निष्कासित करने के आदेश पर रोक लगाने के संकेत दिए
दिल्ली हाईकोर्ट ने फीस वृद्धि विवाद पर डीपीएस द्वारका के 32 छात्रों को निष्कासित करने के आदेश पर रोक लगाने के संकेत दिए

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को संकेत दिया कि वह दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), द्वारका की ओर से दिए गए उस आदेश पर रोक लगाने के लिए इच्छुक है, जिसमें फीस वृद्धि के मुद्दे के बीच 32 छात्रों को निष्कासित किया गया था। जस्टिस सचिन दत्ता ने फीस का भुगतान न करने के लिए निष्कासित किए गए 32 छात्रों के अभिभावकों द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। न्यायालय ने सुनवाई सोमवार, 19 मई तक के लिए टाल दी और कहा कि वह उस दिन मामले की सुनवाई करेगा और आदेश पारित करेगा।जस्टिस दत्ता ने कहा कि स्कूल ने...

रक्षा मंजूरी रद्द करने के फैसले को लेकर तुर्की की कंपनी सेलेबी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया
रक्षा मंजूरी रद्द करने के फैसले को लेकर तुर्की की कंपनी सेलेबी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया

तुर्की स्थित कंपनी सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में दी गई, उसकी सुरक्षा मंजूरी रद्द करने के फैसले को चुनौती दी।मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सेलेबी ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि इस निर्णय से 3,791 नौकरियां और निवेशकों का भरोसा प्रभावित होगा और यह निर्णय कंपनी को कोई पूर्व सूचना दिए बिना लिया गया।भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के आधार पर सेलेबी और इससे जुड़ी कंपनियों...

जाति प्रमाण-पत्र निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत न किए जाने पर अभ्यर्थी आरक्षण का दावा नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट
जाति प्रमाण-पत्र निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत न किए जाने पर अभ्यर्थी आरक्षण का दावा नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भर्ती विज्ञापन के तहत आवेदन करने के लिए जाति प्रमाण-पत्र उसमें निर्धारित विशिष्ट प्रारूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए तथा अभ्यर्थी केवल उस श्रेणी से संबंधित होने के आधार पर इस आवश्यकता से छूट का दावा नहीं कर सकता।जस्टिस दीपांकर दत्ता तथा जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने उस अभ्यर्थी को राहत देने से इनकार कर दिया, जिसने भर्ती विज्ञापन द्वारा अपेक्षित विशिष्ट प्रारूप के बजाय, केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए मान्य प्रारूप में जारी OBC जाति प्रमाण-पत्र का उपयोग करके उत्तर प्रदेश...

राजस्थान हाईकोर्ट ने 16 गैर-कार्यशील लोक अदालतों पर राज्य के जवाब की आलोचना की, प्रधान विधि सचिव को 22 मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने 16 गैर-कार्यशील लोक अदालतों पर राज्य के जवाब की आलोचना की, प्रधान विधि सचिव को 22 मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया

16 गैर-कार्यशील स्थायी लोक अदालतों से संबंधित एक स्वप्रेरणा याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार (15 मई) को राज्य सरकार द्वारा दायर हलफनामे पर असंतोष व्यक्त किया और कानूनी मामलों के विभाग के प्रधान सचिव को अगली सुनवाई की तारीख पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया।जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा,"इस न्यायालय द्वारा 13 मई 2025 को जारी निर्देश के अनुपालन में हलफनामा दायर किया गया लेकिन यह बहुत ज्यादा असंतोषजनक है।"न्यायालय ने 13 मई...

क्या राष्ट्रपति के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदला जा सकता है? अनुच्छेद 143 और सलाहकार क्षेत्राधिकार की व्याख्या
क्या राष्ट्रपति के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदला जा सकता है? अनुच्छेद 143 और सलाहकार क्षेत्राधिकार की व्याख्या

संविधान का अनुच्छेद 143(1) तब चर्चा में आया जब भारत के राष्ट्रपति ने विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए राज्यपालों और राष्ट्रपति की शक्तियों से संबंधित 14 प्रश्नों को सुप्रीम कोर्ट को संदर्भित करने के लिए इस प्रावधान को लागू करने का एक असाधारण कदम उठाया।चूंकि संदर्भ के तहत मुद्दों को तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय द्वारा सुलझाया गया था, जो केंद्र सरकार को पसंद नहीं आया, इसलिए राष्ट्रपति के संदर्भ ने कुछ लोगों को चौंका दिया है और एक राजनीतिक विवाद भी...

जमानत याचिकाओं के त्वरित निपटारे के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट सुबह 9 बजे से बैठेगा
जमानत याचिकाओं के त्वरित निपटारे के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट सुबह 9 बजे से बैठेगा

जमानत याचिकाओं की बढ़ती लंबित संख्या को देखते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अनुरोध पर अदालत की कार्यवाही एक घंटा पहले यानी सुबह 9 बजे से शुरू करने पर सहमति जताई।बार एसोसिएशन ने 14 मई को एक पत्र में लिखा कि गर्मी की छुट्टियों से पहले सूचीबद्ध जमानत याचिकाओं के शीघ्र निपटान के लिए बार के कई सदस्यों ने अनुरोध किया।इसलिए यह आग्रह किया गया कि जिन जजों को आपराधिक मामलों की सुनवाई सौंपी गई, वे सुबह 9 बजे से कार्यवाही शुरू करें ताकि इन मामलों का जल्दी निपटारा हो सके।बार...

COVID, यूक्रेन युद्ध से प्रभावित विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट के लिए इंटर्नशिप की आवश्यकता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
COVID, यूक्रेन युद्ध से प्रभावित विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट के लिए इंटर्नशिप की आवश्यकता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में COVID-19 महामारी और/या रूस-यूक्रेन युद्ध से प्रभावित विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट के लिए 1 या 2 साल की अनिवार्य अतिरिक्त इंटर्नशिप की आवश्यकता को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।जस्टिस बीआर गवई (अब सीजेआई) और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने आदेश पारित किया।संक्षेप में कहें तो यह याचिका विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) के रजिस्टर्ड संघ 'एसोसिएशन ऑफ डॉक्टर्स एंड मेडिकल स्टूडेंट्स' (ADAMS) द्वारा दायर की गई। यह राष्ट्रीय मेडिकल आयोग द्वारा जारी सार्वजनिक नोटिस को रद्द करने...