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कम उम्र का अंतर, सहमति के संकेत और अपील में देरी: POCSO में दोषी नाबालिग की सजा पर पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट की रोक
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने POCSO Act के तहत दोषी ठहराए गए नाबालिग आरोपी की सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगाई।हाइकोर्ट ने यह अहम टिप्पणी की कि मामले में आरोपी और पीड़िता दोनों ही नाबालिग थे उनके बीच उम्र का अंतर बहुत अधिक नहीं था और अपील की सुनवाई निकट भविष्य में होने की संभावना नहीं है।जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर शामिल की डिवीजन बेंच ने कहा,“आरोपों के विश्लेषण से यह संकेत मिलता है कि यदि सहवास हुआ भी तो वह सहमति से था, ऐसा कोई आरोप नहीं है कि आरोपी ने क्रूरता बरती हो, पीड़िता...
मजिस्ट्रेट सिर्फ़ ज़्यादा सज़ा के कारण केस को सेशंस कोर्ट में नहीं भेज सकता, उसे कारण बताने होंगे: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि हालांकि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 323 के तहत मजिस्ट्रेट को जांच या ट्रायल के किसी भी स्टेज पर केस को सेशंस कोर्ट में भेजने का अधिकार है, लेकिन इस शक्ति का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे या सिर्फ़ अपराध के लिए तय सज़ा की गंभीरता के आधार पर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट को अपने सामने दर्ज सबूतों पर चर्चा करने के बाद कारणों के साथ एक राय बनानी होगी, ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि केस की सुनवाई सेशंस कोर्ट में होनी चाहिए।जस्टिस प्रवीण एस. पाटिल चीफ...
पुलिस भर्ती के लिए अपॉइंटमेंट लेटर, एप्लीकेशन से पहले रद्द हुई FIR की जानकारी न देने पर रद्द नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस के कांस्टेबल की नियुक्ति रद्द करने का फैसला रद्द किया। उस कांस्टेबल की उम्मीदवारी इसलिए खत्म कर दी गई, क्योंकि उसने कथित तौर पर एक ऐसी FIR का खुलासा नहीं किया, जिसे एप्लीकेशन और अटेस्टेशन फॉर्म जमा करने से पहले ही ट्रायल कोर्ट ने रद्द किया।जस्टिस जगमोहन बंसल ने पंजाब पुलिस नियमों (जो हरियाणा पर भी लागू होते हैं) का हवाला देते हुए कहा,"ऐसा कोई सब-कॉलम नहीं है, जो उम्मीदवारों को पहले से रद्द हो चुकी FIR की स्थिति का खुलासा करने के लिए अनिवार्य करता हो।...
[महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट] 'ज़ब्त करने की शक्ति संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करती है, इसका प्रयोग केवल रजिस्ट्रिंग अधिकारी ही कर सकता है': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट, 1958 की धारा 33A के तहत किसी दस्तावेज़ को ज़ब्त करने की शक्ति गंभीर कानूनी शक्ति है, जिसका नागरिक के संपत्ति अधिकारों पर सीधा नागरिक परिणाम होता है। इसलिए इसका प्रयोग केवल उसी "रजिस्ट्रिंग अधिकारी" द्वारा किया जा सकता है, जिसके सामने दस्तावेज़ पंजीकृत किया गया। कोर्ट ने कहा कि धारा 33A किसी अन्य राजस्व अधिकारी या सीनियर अधिकारी को केवल प्रशासनिक पदानुक्रम के आधार पर ऐसी शक्ति मानने की अनुमति नहीं देती है।जस्टिस अमित बोरकर रिट याचिका पर...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना संदर्भ के 'रामचरितमानस चौपाई' का हवाला देने वाले वकील को उसका मतलब समझाया, देरी से दायर याचिका खारिज की
हाल ही में दिए गए दिलचस्प आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने एक वकील के लिए 16वीं सदी के भारतीय कवि गोस्वामी तुलसीदास की अवधी भाषा में लिखी महाकाव्य 'श्री रामचरितमानस' की एक चौपाई का मतलब समझाया।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने उस वकील को भी कड़ी फटकार लगाई, जिसने चौपाई के असली संदर्भ को समझे बिना उस पर भरोसा करने की कोशिश की थी।संक्षेप में मामलाअवनींद्र कुमार गुप्ता नाम के एक व्यक्ति ने रिट याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने राज्य सूचना आयोग (SIC) द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी,...
केरल हाईकोर्ट ने दिया कुरान की शिक्षा देने वाले स्कूल को बंद करने का आदेश, कहा- 'RTE Act की मान्यता नहीं'
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक स्कूल को बंद करने का आदेश दिया, जो अपने स्टूडेंट्स को कुरान और उससे जुड़े विषय पढ़ा रहा था, क्योंकि यह राइट ऑफ चिल्ड्रन टू फ्री एंड कंपल्सरी एजुकेशन एक्ट, 2009 (RTE Act) की धारा 18 के अनुसार बिना वैध मान्यता के चल रहा था।जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन दो संबंधित रिट याचिकाओं पर विचार कर रहे थे, जिनमें से एक दो व्यक्तियों ने दायर की। इन्होंने स्कूल के खिलाफ शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद असिस्टेंट एजुकेशनल ऑफिसर ने डिस्ट्रिक्ट एजुकेशनल ऑफिसर को रिपोर्ट भेजी, जिसमें पाया...
एक्टर विवेक ओबेरॉय के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश, डीपफेक के दुरुपयोग पर लगाई रोक
दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेता एवं उद्यमी विवेक ओबेरॉय के पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकार) की रक्षा करते हुए उनके पक्ष में जॉन डो (अज्ञात व्यक्तियों) के विरुद्ध अंतरिम आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने अभिनेता के हक़ में एक्स-पार्टी ऐड-इंटरिम डायनामिक इंजंक्शन जारी करते हुए कई प्रतिवादियों और अज्ञात डिजिटल इकाइयों को उनके नाम, छवि, आवाज़, हाव-भाव और अन्य विशिष्ट पहचान से जुड़े अधिकारों के दुरुपयोग से रोक दिया है।न्यायालय ने कहा कि विवेक ओबेरॉय ने प्रथम दृष्टया...
निरस्त Foreigners Act के तहत अपराध दर्ज करना 'प्रथम दृष्टया अवैध': फॉर्म-C दाख़िल करने में देरी पर दर्ज FIR को MP हाईकोर्ट ने किया रद्द
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक निजी मकान मालिक के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है, जिसमें उस पर किसी विदेशी नागरिक के ठहरने की जानकारी 24 घंटे के भीतर फॉर्म-C में न देने का आरोप लगाया गया था। न्यायालय ने कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष यह स्पष्ट है कि Foreigners Act, 1946 के निरस्त हो जाने के बाद उसके तहत किसी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है, खासकर तब जब Immigration and Foreigners Act, 2025 लागू हो चुका है।जस्टिस हिमांशु जोशी ने कहा कि 1 सितंबर 2025 से 1946 का अधिनियम...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (02 फरवरी, 2026 से 06 फरवरी, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।सेकेंडरी सबूत पेश करने की शर्तें साबित न होने तक दस्तावेज़ की फोटोकॉपी सबूत नहीं: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने फोटोकॉपी किए गए पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर की गई बिक्री यह देखते हुए रद्द की कि किसी दस्तावेज़ की फोटोकॉपी, जो सेकेंडरी सबूत है, तब तक सबूत नहीं है जब तक कि वह एविडेंस एक्ट की धारा 65...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (02 फरवरी, 2026 से 06 फरवरी, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।क्रिश्चियन मैरिज एक्ट के तहत हुई शादियों को रजिस्टर करने के लिए राज्य अधिकारी बाध्य, राजस्थान 2009 का कानून कोई बाधा नहीं: हाईकोर्ट पिछले हफ्ते दिए गए एक महत्वपूर्ण आदेश में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872 (ICM Act) के अनुसार हुई सभी...
पिछले दस सालों में सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी मौत की सज़ा की पुष्टि नहीं की: स्टडी
स्क्वायर सर्कल क्लिनिक (पहले प्रोजेक्ट 39A) की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दस सालों में किसी भी मौत की सज़ा की पुष्टि नहीं की।4 फरवरी को NALSAR के स्क्वायर सर्कल क्लिनिक ने अपनी लेटेस्ट सालाना मौत की सज़ा के आंकड़ों की रिपोर्ट (2016-2025) जारी की। रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि अलग अलग कारणों से मौत की सज़ा देने से बचने का ग्लोबल ट्रेंड है, जिसमें व्यक्तिगत विवेक और सज़ा देने के दिशानिर्देशों का पालन न करना शामिल है।रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 2016 से 2025 तक...
क्या कोई थर्ड पार्टी डिक्री के लिए Order IX Rule 13 CPC एप्लीकेशन फाइल कर सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को भेजा
सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल एक बड़ी बेंच को भेजा कि क्या सिविल डिक्री में कोई थर्ड पार्टी कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर, 1908 के ऑर्डर IX रूल 13 (Order IX Rule 13 CPC) के तहत एकतरफ़ा डिक्री को रद्द करने के लिए एप्लीकेशन दे सकती है।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने इस मुद्दे पर कोर्ट की पिछली बेंचों द्वारा दिए गए विरोधाभासी फैसलों पर ध्यान दिया।राज कुमार बनाम सरदारी लाल एंड अन्य (2004) के फैसले में कहा गया कि डिक्री में कोई थर्ड पार्टी ऐसी एप्लीकेशन दे सकती है, वहीं राम प्रकाश अग्रवाल...
क्रिश्चियन मैरिज एक्ट के तहत हुई शादियों को रजिस्टर करने के लिए राज्य अधिकारी बाध्य, राजस्थान 2009 का कानून कोई बाधा नहीं: हाईकोर्ट
पिछले हफ्ते दिए गए एक महत्वपूर्ण आदेश में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872 (ICM Act) के अनुसार हुई सभी ईसाई शादियों को अनिवार्य रूप से स्वीकार करें, रिकॉर्ड करें और रजिस्टर करें, जिनके संबंध में एक्ट के तहत सर्टिफिकेट जारी किया गया।अपने विस्तृत आदेश में जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संगीता शर्मा की बेंच ने ICM Act 1872 और राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम, 2009 (RCMR Act) के बीच संबंधों को लेकर राज्य में फैली मौजूदा...
वायरल वीडियो प्रकरण: परिवीक्षाधीन DHJS जज की सेवा समाप्ति बरकरार, दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा- कार्रवाई न दंडात्मक, न ही कलंककारी
दिल्ली हाइकोर्ट ने वायरल कोर्टरूम वीडियो के बाद दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा (DHJS) के परिवीक्षाधीन न्यायिक अधिकारी की सेवा समाप्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। हाइकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कार्रवाई अधिकारी की समग्र अनुपयुक्तता के आकलन पर आधारित साधारण सेवा समाप्ति है और इसे न तो दंडात्मक कहा जा सकता है और न ही कलंककारी।जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने 10 अक्टूबर, 2024 की अधिसूचना और 14 अक्टूबर, 2024 के परिणामी आदेश को वैध ठहराया, जिनके माध्यम से परिवीक्षा...
शौचालय की सुविधा अनुच्छेद 21 के तहत बुनियादी मानव अधिकार: बॉम्बे हाइकोर्ट ने मुंबई की झुग्गी बस्तियों में स्वच्छता सुधार के निर्देश दिए
बॉम्बे हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पर्याप्त स्वच्छता और शौचालय की सुविधा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। यह अधिकार झुग्गी बस्तियों में रहने वाले नागरिकों को भी समान रूप से प्राप्त है, भले ही वे झुग्गियां नगर निगम की भूमि पर अतिक्रमण कर बनाई गई हों। हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार जब बड़ी आबादी किसी क्षेत्र में निवास करती है तो नगर निगम अपने वैधानिक और संवैधानिक दायित्वों से मुंह नहीं मोड़ सकता।जस्टिस जी. एस. कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की...
लापरवाह और निराधार आरोप: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने वकील के कहने पर NBW जारी होने के दावे पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने ट्रायल जज पर बेहद गंभीर और निराधार आरोप लगाने वाले दो अभियुक्तों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनकी ट्रांसफर याचिका खारिज की। साथ ही उन पर 1 लाख रुपये का भारी जुर्माना (कॉस्ट) लगाया। हाइकोर्ट ने कहा कि यह दावा पूरी तरह लापरवाह, आधारहीन और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।जस्टिस समीत गोपाल की एकल पीठ ने यह आदेश उन अभियुक्तों के खिलाफ पारित किया, जिन्होंने आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट ने शिकायतकर्ता के भाई जो कि एक वकील है, उनके कहने पर उनके खिलाफ गैर-जमानती...
नाबालिग पीड़िता की पीड़ा से आंख नहीं मूंद सकता कोर्ट: बॉम्बे हाइकोर्ट ने 83 वर्षीय बलात्कार दोषी की सज़ा घटाने से इनकार किया
बॉम्बे हाइकोर्ट (गोवा बेंच) ने एक अहम फैसले में 83 वर्षीय व्यक्ति की सज़ा कम करने से इनकार करते हुए स्पष्ट कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में आरोपी की उम्र को सहानुभूति का आधार नहीं बनाया जा सकता। हाइकोर्ट ने कहा कि अदालत पीड़िता की उम्र और उसके साथ हुए अत्याचार की अनदेखी करते हुए नेल्सन की आंख नहीं फेर सकती।जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की एकल पीठ ने 63 पन्नों के विस्तृत आदेश में 2012 के मामले में 9 वर्षीय बच्ची के यौन शोषण के दोषी मार्टिन सोआरेस की 10 साल की कठोर कारावास की सज़ा को बरकरार रखा। कोर्ट ने...
केरल संयुक्त परिवार उन्मूलन अधिनियम क्या हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के विपरीत है? सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (6 फरवरी) को केरल हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर चार हफ़्ते में जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि केरल संयुक्त हिंदू परिवार प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1975, हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के विपरीत है।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने इस मामले पर विचार किया। हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की अंतरिम प्रार्थना पर भी नोटिस जारी किया गया।विपरीत होने की घोषणा के बाद हाईकोर्ट ने कहा था कि 20 दिसंबर, 2004 (जिस...
सेकेंडरी सबूत पेश करने की शर्तें साबित न होने तक दस्तावेज़ की फोटोकॉपी सबूत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फोटोकॉपी किए गए पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर की गई बिक्री यह देखते हुए रद्द की कि किसी दस्तावेज़ की फोटोकॉपी, जो सेकेंडरी सबूत है, तब तक सबूत नहीं है जब तक कि वह एविडेंस एक्ट की धारा 65 में बताई गई शर्तों के तहत न आती हो।एविडेंस एक्ट की धारा 65 सेकेंडरी सबूत (कॉपी, मौखिक बयान) पेश करने की अनुमति देती है, जब मूल दस्तावेज़ धारा 64 के तहत पेश नहीं किया जा सकता। यह तब लागू होता है, जब मूल दस्तावेज़/सबूत खो गया हो, नष्ट हो गया हो, विरोधी पक्ष के कब्ज़े में हो, या एक सार्वजनिक दस्तावेज़...
सुप्रीम कोर्ट ने खुद को सुप्रीम कोर्ट वकील बताकर बिल्डरों से ठगी करने की आरोपी महिला को दी जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने खुद को सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली वकील बताकर कई लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने की आरोपी लगभग 60 वर्षीय महिला को जमानत दी। कोर्ट ने बॉम्बे हाइकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें महिला की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने पूनम चरणदास खन्ना की विशेष अनुमति याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि लंबे समय से न्यायिक हिरासत में रहने और मुकदमे की धीमी गति को देखते हुए जमानत का मामला बनता है।आरोपी महिला के खिलाफ मुंबई के...




![[महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट] ज़ब्त करने की शक्ति संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करती है, इसका प्रयोग केवल रजिस्ट्रिंग अधिकारी ही कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट [महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट] ज़ब्त करने की शक्ति संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करती है, इसका प्रयोग केवल रजिस्ट्रिंग अधिकारी ही कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2025/05/12/500x300_599612-750x450472964-justice-amit-borkar.jpg)















