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अहमदाबाद विमान दुर्घटना: पीड़ितों की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए गुजरात हाईकोर्ट शुक्रवार को 2 मिनट का मौन रखा
अहमदाबाद विमान दुर्घटना: पीड़ितों की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए गुजरात हाईकोर्ट शुक्रवार को 2 मिनट का मौन रखा

गुजरात हाईकोर्ट शुक्रवार सुबह अहमदाबाद में गुरुवार दोपहर को हुई एयर इंडिया विमान दुर्घटना के पीड़ितों की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए 2 मिनट का मौन रखा।रजिस्ट्रार जनरल द्वारा गुरुवार को जारी एक सर्कुलर में कहा गया कि गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट यूनियन की प्रबंध समिति ने इस दुखद घटना पर 2 मिनट का मौन रखने का अनुरोध किया और चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया।सर्कुलर में कहा गया,"माननीय चीफ जस्टिस ने उक्त अनुरोध को स्वीकार करते हुए यह सूचित करने का निर्देश दिया कि माननीय जज,...

जानकारी देकर भेजे गए सामान पर डिलीवरी के बाद भी रेलवे जुर्माना लगा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
जानकारी देकर भेजे गए सामान पर डिलीवरी के बाद भी रेलवे जुर्माना लगा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह निर्णय दिया कि रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 66 के तहत, माल/सामान की डिलीवरी के बाद भी यदि उसमें गलत जानकारी दी गई हो, तो रेलवे जुर्माना लगा सकता है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पी.के. मिश्रा की खंडपीठ ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस निर्णय को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि डिलीवरी के बाद पेनल चार्ज नहीं लगाए जा सकते। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि धारा 66 में शुल्क लगाने के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई गई है, इसलिए इसे किसी भी चरण में लागू किया जा सकता है।यह...

पंजाब पुलिस नियम | भ्रष्टाचार के मामलों में पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के लिए डीएम की सहमति अनिवार्य नहीं: हाईकोर्ट
पंजाब पुलिस नियम | भ्रष्टाचार के मामलों में पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के लिए डीएम की सहमति अनिवार्य नहीं: हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस नियमावली (Punjab Police Rules - PPR) के तहत भ्रष्टाचार के मामलों में पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM) की सहमति आवश्यक नहीं है।जस्टिस जगमोहन बंसल ने नियम 16.40 का हवाला देते हुए कहा,“प्राधिकरणों को प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के अनुसार न्यायिक अभियोजन या विभागीय कार्रवाई प्रारंभ करनी होती है। नियम 16.40 के तहत जिला मजिस्ट्रेट की सहमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। अतः प्रतिवादी द्वारा विभागीय...

कानून की छात्रा ने आवारा कुत्ते द्वारा काटे जाने के बाद केरल हाईकोर्ट में दायर की याचिका
कानून की छात्रा ने आवारा कुत्ते द्वारा काटे जाने के बाद केरल हाईकोर्ट में दायर की याचिका

केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया एक छात्रा ने, जिसे आवारा कुत्ते ने काटा।छात्रा ने आरोप लगाया कि इलाके में कई बार आवारा कुत्तों के हमले की घटनाएं होने के बावजूद नेदुमनगड नगरपालिका के अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।यह मामला जस्टिस सी. एस. डायस के समक्ष लाया गया, जिन्होंने राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ता के अनुसार, जब वह नेदुमनगड नगरपालिका कार्यालय से इंटर्नशिप करके लौट रही थी, तभी पांच आवारा कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। उनमें से एक कुत्ते ने उसे काटा। उसने बताया कि वह...

सावरकर मानहानि मामला: वादी ने भाषण देते समय राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल की गई पुस्तक की प्रति मांगी
सावरकर मानहानि मामला: वादी ने भाषण देते समय राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल की गई पुस्तक की प्रति मांगी

पुणे स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सत्यकी सावरकर द्वारा दायर आवेदन का जवाब देने के लिए समय दिया, जिन्होंने हिंदू महासभा के नेता विनायक सावरकर के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक भाषण देते समय उनके (गांधी) द्वारा इस्तेमाल की गई पुस्तक की प्रति मांगी।स्पेशल जज अमोल शिंदे ने गांधी को आवेदन पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए 3 जुलाई तक का समय दिया।इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए मामले में गांधी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील मिलिंद पवार ने कहा,"हमने चार पृष्ठों का...

सपने में भी नहीं सोचाा था कि सम्‍मान हो ठेस पहुंचाऊंगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट को कानूनी प्रावधान की याद दिलाने पर आलोचना के बाद डीएम ने मांगी माफ़ी
'सपने में भी नहीं सोचाा था कि सम्‍मान हो ठेस पहुंचाऊंगी': इलाहाबाद हाईकोर्ट को कानूनी प्रावधान की 'याद दिलाने' पर आलोचना के बाद डीएम ने मांगी माफ़ी

‌बिजनौर में जिला मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात आईएएस अधिकारी जसजीत कौर ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट से 'बिना शर्त' माफ़ी मांगी। दरअसल हाईकोर्ट ने उनकी ओर से दायर एक हलफ़नामे पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसे कानून के बारे में हाईकोर्ट की समझ का "अपमान करने का प्रयास" माना गया था। यह मुद्दा तब उठा जब डीएम ने अपने हलफ़नामे में यूपी-राजस्व संहिता नियम, 2016 के तहत एक प्रावधान का उल्लेख किया, जिसे न्यायालय ने कानूनी प्रावधान को अनावश्यक और अनुचित रूप से याद दिलाने के रूप में व्याख्या की।मुख्यतः जस्टिस...

अनिश्चित काल के लिए फैसला सुरक्षित नहीं रखा जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने बेदखली के डर से किरायेदार की याचिका पर अपीलीय किराया न्यायाधिकरण से कहा
अनिश्चित काल के लिए फैसला सुरक्षित नहीं रखा जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने बेदखली के डर से किरायेदार की याचिका पर अपीलीय किराया न्यायाधिकरण से कहा

राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्णय दिया है कि अपीलीय किराया न्यायाधिकरण से अनिश्चित काल के लिए निर्णय सुरक्षित रखने की अपेक्षा नहीं की जाती है, विशेषकर तब जब उसके समक्ष किसी मामले में बहस महीनों पहले सुनी और समाप्त हो चुकी हो। जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 19(8) के अनुसार न्यायाधिकरण को अपील का नोटिस प्रतिवादियों को दिए जाने की तिथि से एक सौ अस्सी दिन की अवधि के भीतर निपटारा करना चाहिए।प्रतिवादियों ने किराए के परिसर से बेदखल करने के लिए...

सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट जजों ने अहमदाबाद विमान दुर्घटना पर व्यक्त किया शोक
सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट जजों ने अहमदाबाद विमान दुर्घटना पर व्यक्त किया शोक

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों ने रजिस्ट्री अधिकारियों के साथ मिलकर आज यानी गुरुवार को अहमदाबाद में एयर इंडिया के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।सीजेआई ने बीजे मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल के मरीजों के लिए भी चिंता व्यक्त की, जिनके लिए लंदन जाने वाला विमान अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया।सीजेआई ने कहा,"इस कठिन समय में हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उनके साथ हैं। उन्हें...

जब तक अभियोजन पक्ष प्रथम दृष्टया मामला स्थापित नहीं कर देता, तब तक लास्ट-सीन-थ्योरी लागू नहीं की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट ने मौत की सजा पाए दोषियों को बरी किया
जब तक अभियोजन पक्ष प्रथम दृष्टया मामला स्थापित नहीं कर देता, तब तक लास्ट-सीन-थ्योरी लागू नहीं की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट ने मौत की सजा पाए दोषियों को बरी किया

राजस्‍थान हाईकोर्ट ने मृत्युदंड को खारिज करते हुए तथा 4 बच्चों सहित 6 लोगों के परिवार की हत्या के आरोपी अपीलकर्ताओं को बरी करते हुए कहा कि आपराधिक मुकदमे में अंतिम बार साथ देखे जाने के साक्ष्य के महत्व को "अत्यधिक महत्व" नहीं दिया जा सकता, क्योंकि यह अपने आप में किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के क्रियान्वयन द्वारा आरोपी पर दायित्व स्थानांतरित किए जाने से पहले, यह माना जाना...

कैदियों की समयपूर्व रिहाई: दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा समीक्षा बोर्ड की संरचना, निर्णय लेने की प्रक्रिया के लिए दिशा-निर्देश जारी किए
कैदियों की समयपूर्व रिहाई: दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा समीक्षा बोर्ड की संरचना, निर्णय लेने की प्रक्रिया के लिए दिशा-निर्देश जारी किए

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (11 जून) को सजा समीक्षा बोर्ड (SRB) के सदस्यों द्वारा अपनी आधिकारिक क्षमता में नियुक्त किए जाने के बाद SRB की बैठकों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित न होने और इसके बजाय अपने प्रतिनिधियों को भेजने की प्रथा पर आपत्ति जताई।SRB का गठन कैदियों को दी गई सजा की समीक्षा करने और उचित मामलों में समयपूर्व रिहाई की सिफारिश करने के लिए किया जाता है।जस्टिस गिरीश कथपाली आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी के मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसकी समयपूर्व रिहाई के लिए लगातार आवेदन SRB द्वारा...

राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम की धारा 15| जवाब के साथ हलफनामा/दस्तावेज़ प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं, निर्देशात्मक प्रकृति का: हाईकोर्ट ने दोहराया
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम की धारा 15| जवाब के साथ हलफनामा/दस्तावेज़ प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं, निर्देशात्मक प्रकृति का: हाईकोर्ट ने दोहराया

राजस्थान हाईकोर्ट ने रमेश कुमार बनाम चंदू लाल व अन्य मामले में डिवीजन बेंच के निर्णय पर भरोसा जताते हुए एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 15 अनिवार्य नहीं बल्कि निर्देशात्मक (Directory) प्रकृति की है।अधिनियम की धारा 15 के अनुसार पक्षकार को अपने जवाब के साथ हलफनामे और दस्तावेज़ दाखिल करने होते हैं।जस्टिस अनूप कुमार धंड की एकल पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें किराया न्यायाधिकरण (Rent Tribunal) के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता का...

भड़काऊ भाषण न देना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट ने आतंकी फंडिंग मामले में शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका पर कहा
भड़काऊ भाषण न देना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट ने आतंकी फंडिंग मामले में शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका पर कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (12 जून) को कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को जमानत देने से इनकार किया। अपनी याचिका में शाह ने आतंकी फंडिंग के कथित मामले में जमानत देने से इनकार करने वाले NIA कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की खंडपीठ ने NIA कोर्ट का फैसले बरकरार रखते हुए कहा कि भड़काऊ भाषणों या गैरकानूनी गतिविधियों को भड़काने को सही ठहराने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।खंडपीठ ने कहा,"इस अधिकार (अभिव्यक्ति की...

सीनियर सिटीजन भरण-पोषण ट्रिब्यूनल में पक्षकारों की ओर से पैरवी करने का अधिकार वकीलों को : बॉम्बे हाईकोर्ट
सीनियर सिटीजन भरण-पोषण ट्रिब्यूनल में पक्षकारों की ओर से पैरवी करने का अधिकार वकीलों को : बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि जब भी कोई वकील भरण-पोषण ट्रिब्यूनल के समक्ष किसी पक्षकार की ओर से उपस्थित होता है तो उसे माता-पिता और सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम के तहत उक्त न्यायाधिकरण के समक्ष सुनवाई और पैरवी करने का अधिकार होगा।जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस की एकल पीठ ने पाया कि मापुसा में एक भरण-पोषण ट्रिब्यूनल ने बेटे के खिलाफ उसकी बूढ़ी मां को 10,000 रुपये प्रति माह देने का आदेश पारित किया था, जबकि माता-पिता और सीनियर सिटीजन के...

पूर्व प्रेमिका की 45 बार चाकू घोंपकर हत्या करने वाले व्यक्ति की मृत्युदंड की सजा हुई कम, हाईकोर्ट ने कहा- दुर्लभतम में से दुर्लभतम मामला नहीं
पूर्व प्रेमिका की 45 बार चाकू घोंपकर हत्या करने वाले व्यक्ति की मृत्युदंड की सजा हुई कम, हाईकोर्ट ने कहा- 'दुर्लभतम में से दुर्लभतम' मामला नहीं

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति की मृत्युदंड की सजा कम की, जिस पर अपनी पूर्व प्रेमिका की 45 बार चाकू घोंपकर हत्या करने का आरोप था। इसके बजाय दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।जस्टिस देबांगसु बसाक और जस्टिस शब्बर रशीदी की खंडपीठ ने माना कि यह अपराध मृत्युदंड के लिए दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता है और दोषी को सुधारा नहीं जा सकता।खंडपीठ ने कहा:मृत्युदंड और बिना किसी छूट के आजीवन कारावास की सजा से संबंधित अधिकारियों के अनुपात सहित वर्तमान मामले के संपूर्ण तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में...

लंबे समय तक शादी का झांका देकर यौन संबंध बनाने के आरोपी को हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार
लंबे समय तक शादी का झांका देकर यौन संबंध बनाने के आरोपी को हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने शादी का झूठा वादा करके महिला का यौन शोषण करने के आरोपी व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसी सामग्री है, जो दर्शाती है कि याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर शिकायतकर्ता से संबंध बनाए।अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने शादी का झांसा देकर यौन संबंध बनाए और फिर अपना वादा पूरा करने में विफल रहा।जस्टिस संजय धर की पीठ ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि FIR प्रेरित या निराधार है, जबकि यह देखते हुए कि जांच के चरण में जमानत देने से...

पैरोल अवधि को केवल कुल सजा से घटाया जाना चाहिए, वास्तविक जेल अवधि से नहीं: हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार का फॉर्मूले अमान्य घोषित किया
पैरोल अवधि को केवल कुल सजा से घटाया जाना चाहिए, वास्तविक जेल अवधि से नहीं: हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार का फॉर्मूले अमान्य घोषित किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने समय से पहले रिहाई के मामले में सजा अवधि की गणना करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा जारी फॉर्मूले को अमान्य घोषित करते हुए कहा कि पैरोल अवधि को केवल कुल सजा से घटाया जाना चाहिए, न कि जेल में बिताए गए वास्तविक समय से।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा,"यह निर्देश दिया जाता है कि पैरोल अवधि को केवल कुल सजा से घटाया जाना चाहिए, न कि वास्तविक सजा से। वास्तविक सजा का मतलब केवल कैदी द्वारा जेल परिसर में बिताया गया वास्तविक समय होगा।"न्यायालय दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था,...

कॉलेजियम सिस्टम अपूर्ण, मगर कार्यपालिका के हस्तक्षेप को सीमित करती है और जजों को बाहरी दबावों से बचाती है: जस्टिस सूर्यकांत
कॉलेजियम सिस्टम अपूर्ण, मगर कार्यपालिका के हस्तक्षेप को सीमित करती है और जजों को बाहरी दबावों से बचाती है: जस्टिस सूर्यकांत

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कॉलेजियम सिस्टम अपनी अपूर्णताओं के बावजूद, कार्यपालिका और विधायिका के हस्तक्षेप के खिलाफ न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है।पिछले सप्ताह अमेरिका के सिएटल यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस कांत ने कहा कि कॉलेजियम सिस्टम न्यायपालिका की स्वायत्तता को सुरक्षित रखती है।अपने संबोधन में जस्टिस कांत ने कहा कि भारत में विकसित कॉलेजियम सिस्टम शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के मूल अनुप्रयोग का एक सम्मोहक मॉडल है, जो यह सुनिश्चित...