ताज़ा खबरे
क्या एक ज़िले में एक से ज़्यादा बार एसोसिएशन हो सकते हैं? नीलगिरी ज़िला बार एसोसिएशन की याचिका पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नीलगिरी ज़िला बार एसोसिएशन द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल को नीलगिरी महिला वकील संघ द्वारा मान्यता के लिए दायर आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट वी मोहना ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ को बताया कि एक ही ज़िले में महिला वकीलों के लिए अलग से एक बार एसोसिएशन की...
घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) में घरेलू हिंसा के केस का Maintainable होना
इस एक्ट से संबंधित एक वाद में कहा गया है कि तथ्य कि तलाक विदेशी कोर्ट द्वारा अनुदत्त किया गया था, जिसका घरेलू हिंसा वाद की पोषणीयता से कोई प्रभाव नहीं होगा, यदि उसमें आरोप अधिनियम के प्रावधानों के अधीन विवाद को अन्यथा लाते हैं, दावाकृत का अधिकार, निश्चित रूप से ऐसे आरोप के अन्तिम सबूत पर आधारित होता है।आर्थिक हिंसा मजिस्ट्रेट संरक्षण अधिकारी की रिपोर्ट पर आधारित व्यथित व्यक्ति के आवेदन पर आदेश पारित करने में सक्षम होता है। ऐसे आदेश के पारित करने के बाद भी, यदि प्रत्यर्थी उसे नहीं सुनेगा एवं उनका...
घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) की धारा 20 के प्रावधान
इस एक्ट की धारा 20 में धनीय अनुतोष से संबंधित प्रावधान हैं जिसके अनुसार-(1) धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन किसी आवेदन का निपटारा करते समय, मजिस्ट्रेट, घरेलू हिंसा के परिणामस्वरूप व्यथित व्यक्ति और व्यथित व्यक्ति की किसी सन्तान द्वारा उपगत व्यय और सहन की गई हानियों की पूर्ति के लिए धनीय अनुतोष का संदाय करने के लिए प्रत्यर्थी को निदेश दे सकेगा और ऐसे अनुतोष में निम्नलिखित सम्मिलित हो सकेंगे किन्तु वह निम्नलिखित तक ही सीमित नहीं होगा(क) उपार्जनों की हानि;(ख) चिकित्सीय व्ययों;(ग) व्यथित व्यक्ति के...
न्यायपालिका को अदालतों की सीमाओं से आगे बढ़कर हाशिए पर जी रहे लोगों तक न्याय पहुंचाना चाहिए: जस्टिस सूर्यकांत
सुप्रीम कोर्ट के जज और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस सुर्य कांत ने शनिवार को कहा कि देश की न्याय प्रणाली को केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे उन लोगों के जीवन तक पहुँचना चाहिए जो हाशिए पर हैं, विशेषकर पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में।गुवाहाटी के सोनापुर में आयोजित NALSA ईस्ट-जोन क्षेत्रीय सम्मेलन के उद्घाटन संबोधन में जस्टिस सुर्य कांत ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल उद्घाटन नहीं है, बल्कि यह इस बात की पुष्टि है कि हमारा न्याय के प्रति संकल्प उस...
तकनीक लड़की के उत्थान का साधन बने, शोषण का नहीं: CJI बी.आर. गवाई
भारत के चीफ़ जस्टिस भुषण गवाई ने लड़की के अधिकारों के संरक्षण पर जोर दियाशनिवार को चीफ़ जस्टिस गवाई ने तकनीकी प्रगति के युग में लड़की के अधिकारों की सुरक्षा के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक नई असुरक्षाओं को जन्म देती है, विशेषकर लड़कियों के लिए। “युवा लड़कियों को होने वाले खतरे अब केवल भौतिक स्थानों तक सीमित नहीं हैं। ये अब डिजिटल दुनिया में भी मौजूद हैं, जो अक्सर अनियमित और अनियंत्रित है,” उन्होंने कहा। उन्होंने ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबरबुलिंग, डिजिटल स्टॉकिंग,...
भारत का औपनिवेशिक हैंगओवर: दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अभी भी मानहानि की सज़ा जेल में दे रहा है
सितंबर 2025 में, सुप्रीम कोर्ट फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य बनाम अमिता सिंह की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जो द वायर के खिलाफ दायर एक आपराधिक मानहानि शिकायत से उत्पन्न हुआ मामला था। समन जारी होने से एक बार फिर यह बहस छिड़ गई: क्या भारत में मानहानि एक अपराध बनी रहनी चाहिए, या इस औपनिवेशिक अवशेष से छुटकारा पाने का समय आ गया है? हालांकि, यह कोई नया सवाल नहीं है। सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ (2016) में, सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 1860...
दिल्ली बार काउंसिल चुनावों की संभावित तिथियां घोषित, फरवरी 2026 में होगा मतदान
दिल्ली बार काउंसिल ने अपने आगामी चुनावों के लिए संभावित कार्यक्रम घोषित कर दिया। काउंसिल के अनुसार, मतदान की प्रक्रिया 13 और 14 फरवरी 2026 को आयोजित किए जाने की संभावना है।काउंसिल की बैठक में 9 अक्टूबर, 2025 को पारित एक प्रस्ताव में कहा गया कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश को प्रभावी बनाने और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को पूर्ण सहयोग देने के लिए उठाया गया।सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर, 2025 को सभी राज्य बार काउंसिलों को आदेश दिया कि वे अपने लंबित चुनावों को 31 जनवरी 2026 तक संपन्न करें।संभावित...
दिल्ली हाईकोर्ट का अवलोकन: दृष्टि दोष से पीड़ित अधिकारी का सेना में शामिल होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि भारतीय सेना में दृष्टि दोष से पीड़ित किसी अधिकारी का शामिल होना देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकता है।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने एनडीए और नौसेना अकादमी परीक्षा (II) 2024 में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले उमा महेश्वरा शास्त्री दुर्बका को राहत देने से इनकार किया।दुर्बका ने अपनी सेवा के लिए सेना, वायु सेना, नौसेना अकादमी और नौसेना को वरीयता दी थी। उन्होंने बेंगलुरु के एयर कमोडोर, कमांडेंट...
सशस्त्र बल न्यायाधिकरण को कोर्ट-मार्शल दोषसिद्धि को संशोधित करने और कम दंड लगाने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (10 अक्टूबर) को कहा कि सशस्त्र बल न्यायाधिकरण अधिनियम, 2007 (Armed Forces Tribunal Act) के तहत सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) को कोर्ट मार्शल के निष्कर्षों को प्रतिस्थापित करने का अधिकार है यदि इसके निष्कर्ष अत्यधिक, अवैध या अन्यायपूर्ण है।अदालत ने कहा,"इस प्रकार, 2007 अधिनियम की धारा 15 (6) (ए) और (बी) के तहत ट्रिब्यूनल को कोर्ट मार्शल के निष्कर्ष को प्रतिस्थापित करने का अधिकार है, जिसमें अधिनियम के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही शामिल है। यदि यह अत्यधिक, अवैध या अन्यायपूर्ण...
यूपी राज्य में गोद लेना केवल रजिस्टर्ड डीड द्वारा ही हो सकता है, केवल नोटरीकृत दत्तक ग्रहण विलेख अमान्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17(3) में राज्य संशोधन के आधार पर केवल पंजीकृत दत्तक ग्रहण विलेख यूपी राज्य में मान्य है। न्यायालय ने कहा कि केवल गोद लेने के दस्तावेज का नोटरीकरण इसे उत्तराधिकार साबित करने के लिए वैध नहीं बनाता है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार की बेंच ने की,"यूपी राज्य में लागू अधिनियम, 1956 की संशोधित धारा 16(2) और यूपी राज्य में लागू अधिनियम, 1908 की धारा 17 (1)(एफ) और (3) को संयुक्त रूप से पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि 01.01.1977 के बाद...
चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने झारखंड हाईकोर्ट में क्रेच, डे केयर सेंटर का उद्घाटन किया
झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने गुरुवार (9 अक्टूबर) को हाईकोर्ट परिसर के भीतर एक क्रेच/डे केयर सेंटर का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य न्यायपालिका के सदस्यों, वकीलों और कर्मचारियों के लिए एक सहायक कार्य वातावरण बनाना है।इस अवसर पर बोलते हुए चीफ जस्टिस ने कामकाजी माता-पिता, विशेष रूप से महिलाओं के लिए संस्थागत समर्थन के महत्व पर जोर दिया, यह देखते हुए कि इस तरह की पहल न्याय वितरण प्रणाली के भीतर जेंडर संवेदनशीलता और कार्य-जीवन संतुलन में सार्थक योगदान देती है।उद्घाटन पर एक प्रेस...
सत्य की घातक कीमत: भारत में पत्रकारों की हत्याओं का क्रूर यथार्थ
28 सितंबर, 2025 को, राजीव प्रताप नामक एक पत्रकार का शव उत्तराखंड की भागीरथी नदी में मिला। वह पिछले दस दिनों से लापता थे और कथित तौर पर एक स्वतंत्र पत्रकार थे जो मुख्य रूप से भ्रष्टाचार और सरकारी कुप्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर काम करते थे। यह पहली बार नहीं है कि किसी पत्रकार की हत्या हुई हो, इससे पहले मुकेश चंद्रशेखर नामक एक पत्रकार का शव एक टैंक में ठूंसा हुआ मिला था। 2017 में, धार्मिक अतिवाद के खिलाफ लिखने वाली एक प्रसिद्ध लेखिका और पत्रकार गौरी लंकेश की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई...
अधर में वैधता: CBI पर न्यायिक समर्थन और विधायी चुप्पी
राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में पुलिस जांच संदेह के घेरे में रहती है, लेकिन ऐसे मामलों में सभी संबंधित पक्ष एक स्वर में सीबीआई जांच की मांग करते हैं। देश की जनता में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रति जो विश्वास है, उसे देखते हुए, कुछ विसंगतियों के बावजूद, यह बेहद चिंताजनक है कि व्यापक अधिकार और व्यापक अधिकार क्षेत्र वाली देश की यह प्रमुख जांच एजेंसी अपनी ज़िम्मेदारी के लिए स्थगन आदेश पर निर्भर है। 2013 में, गौहाटी हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र, शक्तियों और वैधानिक आधार के अभाव सहित...
बिना सबूत के जीवनसाथी पर बार-बार बेवफाई का आरोप लगाना, प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना क्रूरता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि बिना किसी सबूत के बार-बार जीवनसाथी पर बेवफाई का आरोप लगाना और उत्पीड़न के साथ-साथ व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना क्रूरता का चरम रूप है।यह रेखांकित करते हुए कि विवाह विश्वास और सम्मान पर टिका है, जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने कहा:"क्रूरता इस बात में नहीं है कि व्यभिचार साबित हुआ या नहीं, वास्तव में यह नहीं था, बल्कि आरोपों की लापरवाह, कलंकपूर्ण और असत्यापित प्रकृति में निहित है। विवरण पुष्टि या सबूत के बिना जीवनसाथी पर बेवफाई...
पंजाब यूनिवर्सिटी परीक्षा केंद्रों में CCTV कैमरे लगाने की याचिका पर नोटिस जारी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी के परीक्षा केंद्रों में CCTV कैमरे लगाने की मांग वाली याचिका पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा।जस्टिस कुलदीप तिवारी ने पंजाब यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी करते हुए मामले को 04 नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया और कहा,"किसी भी पक्ष की ओर से स्थगन के किसी भी अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा।"गुरु नानक कॉलेज द्वारा दायर याचिका में उत्तरदाताओं को अपने सभी संबद्ध कॉलेजों को उनके परीक्षा केंद्रों में CCTV कैमरे स्थापित करने के लिए उचित निर्देश देने और इस तरह के...
सुप्रीम कोर्ट ने सेना भूमि घोटाला मामले में रांची के निलंबित उपायुक्त छवि रंजन को जमानत दी
सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से जुड़े झारखंड सेना भूमि घोटाला मामले में रांची के निलंबित उपायुक्त छवि रंजन को शुक्रवार को जमानत दी।उल्लेखनीय है कि रंजन पर ऋण सुविधाओं आदि का लाभ उठाने के उद्देश्य से कुछ भूमि जोत के रिकॉर्ड तैयार करने में मुख्य आरोपी के साथ साजिश रचने और उसकी सहायता करने का आरोप है। उसे 4 मई 2023 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की खंडपीठ ने उन्हें कुछ शर्तों के अधीन जमानत दी, जिसमें यह भी शामिल है कि वह...
घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) में पीड़ित महिला द्वारा निवास करने के लिए दावा
इस एक्ट में घरेलू हिंसा से पीड़ित कोई भी महिला घर में निवास करने का दावा भी कर सकती है। श्रीमती विजया वसन्त सावन्त बनाम शुभांगी शिवलिंग परब, 2013 के वाद में आवेदन में लगाये गये विभिन्न आरोप अस्पष्ट हैं एवं अभिकथन में प्रत्यर्थी संख्या-2 से 4 के विरुद्ध प्रताड़ना का कोई स्पष्ट कृत्य अन्तर्विष्ट नहीं है। आरोप प्रत्यर्थी संख्या-1 एवं पति को प्रताड़ित करने के लिए उकसाने और दहेज की मांग तक ही सीमित है। सत्र कोर्ट ने इसे भी इंगित किया कि सभी दृष्टान्त सितम्बर, 2004 को अवधि से सम्बन्धित हैं जब याची ने...
घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) में किसी भी महिला का घर से बेदखल नहीं किये जाने का अधिकार
धारा 19 की उपधारा (1) का खण्ड (ख) विशेषतः "प्रत्यर्थी को, उस साझी गृहस्थी से स्वयं को हटाने का निर्देश देता है।" धारा 19 की उपधारा (1) का परन्तुक, हालांकि, कथित करता है कि "परन्तु यह कि खण्ड (ख) के अधीन कोई आदेश किसी व्यक्ति, जो महिला है, के विरुद्ध पारित नहीं किया जायेगा।घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 19 प्रावधानित करती है कि मजिस्ट्रेट, यह समाधान होने पर कि घरेलू हिंसा हुई है, प्रत्यर्थी को साझी गृहस्थी से, किसी व्यक्ति के कब्जे को बेकब्जा करने से या किसी अन्य रीति से उस कब्जे में विघ्न डालने से...
WhatsApp इस्तेमाल का कोई अधिकार नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने ब्लॉक अकाउंट बहाल करने की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने आज उस रिट याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें किसी व्यक्ति के ब्लॉक किए गए WhatsApp अकाउंट तक फिर से पहुँच की मांग की गई थी और साथ ही सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज द्वारा अकाउंट को सस्पेंड/ब्लॉक करने के दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की गई थी।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट महालक्ष्मी पवानी (याचिकाकर्ताओं की ओर से) की सुनवाई के बाद इस मामले को वापस ले लिया गया माना और याचिकाकर्ताओं को यह अधिकार दिया कि वे कानून के तहत उपलब्ध सभी अन्य...
असफल निविदाकर्ता अंतिम चरण में निविदा शर्तों को चुनौती नहीं दे सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने हाल ही में कहा कि किसी निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाले और बाद में असफल घोषित किए गए पक्ष को बाद के चरण में विशेष रूप से प्रक्रिया के काफी आगे बढ़ जाने के बाद निविदा शर्तों को चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने अवनि परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर रिट याचिका खारिज की, जिसमें तकनीकी मूल्यांकन और संपूर्ण निविदा प्रक्रिया को चुनौती देते हुए आरोप...




















