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S. 68 Evidence Act | कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच विवाद न होने पर भी वसीयत साबित करने के लिए सत्यापनकर्ता गवाह से पूछताछ अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट
S. 68 Evidence Act | कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच विवाद न होने पर भी वसीयत साबित करने के लिए सत्यापनकर्ता गवाह से पूछताछ अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 68 के तहत वसीयत के कम से कम सत्यापनकर्ता गवाह से पूछताछ अनिवार्य है। इस आवश्यकता को केवल इसलिए नहीं टाला जा सकता, क्योंकि विवाद में कानूनी उत्तराधिकारियों का कोई विवाद नहीं है।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की जिसमें वादी-प्रतिवादी ने दावा किया कि उसने 1996 में अपने पिता से विक्रय समझौते, सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी, शपथ पत्र, रसीद और रजिस्टर्ड वसीयत के माध्यम से संपत्ति खरीदी थी। उसने आरोप लगाया कि...

प्रेम पत्र पीड़िता की भावनाओं का सबूत: बलात्कार मामले में आरोपी की बरी को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बरकरार रखा
"प्रेम पत्र पीड़िता की भावनाओं का सबूत": बलात्कार मामले में आरोपी की बरी को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बरकरार रखा

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 504 506, 376 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(i)(xii) के तहत अपराधों के लिए दंडित व्यक्ति को बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी।न्यायालय ने कहा कि यद्यपि बलात्कार के मामलों में पीड़िता के साक्ष्य को प्रमुखता से ध्यान में रखा जाना चाहिए। फिर भी यदि पीड़िता की गवाही रिकॉर्ड से असंगत और विरोधाभासी है तो उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता।रिकॉर्ड पर मौजूद...

कम दृष्टि वाले उम्मीदवार असिस्टेंट एग्रीकल्चर इंजीनियर पद के लिए पात्र नहीं : उड़ीसा हाईकोर्ट
कम दृष्टि वाले उम्मीदवार असिस्टेंट एग्रीकल्चर इंजीनियर पद के लिए पात्र नहीं : उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि कम दृष्टि दिव्यांगता वाले अभ्यर्थी असिस्टेंट एग्रीकल्चर इंजीनियर के पद पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकते। यदि उस पद को सरकार ने संबंधित अधिसूचना में इस श्रेणी के लिए उपयुक्त नहीं माना है।अदालत ने कहा कि विकलांग व्यक्तियों (PwD) अधिनियम 1995 की धारा 32 और 33 के तहत केवल वही अभ्यर्थी चयन का दावा कर सकते हैं, जिनकी दिव्यांगता उस पद के लिए अधिसूचना द्वारा चिन्हित की गई हो।यह विवाद ओडिशा लोक सेवा आयोग (OPSC) की भर्ती विज्ञप्ति संख्या 02/2019-20 से जुड़ा...

किशोरावस्था साबित करने का पैमाना कठोर सबूत नहीं, संदेह की स्थिति में आरोपी के पक्ष में झुके अदालतें: राजस्थान हाईकोर्ट
किशोरावस्था साबित करने का पैमाना कठोर सबूत नहीं, संदेह की स्थिति में आरोपी के पक्ष में झुके अदालतें: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी की जुवेनाइल (किशोर) होने की दलील पर सुनवाई के दौरान सबूत का पैमाना उतना कठोर नहीं होना चाहिए जितना कि किसी आपराधिक मुकदमे में “बियोंड रीज़नेबल डाउट” की कसौटी पर परखा जाता है। यदि दो दृष्टिकोण संभव हों तो सीमा-रेखा वाले मामलों में अदालत को आरोपी के पक्ष में झुकना चाहिए।जस्टिस संदीप शाह की एकल पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 की धारा 94 में जिन दस्तावेजों को प्राथमिकता दी गई, जैसे...

जम्मू-कश्मीर में कोई भी असुरक्षित खाद्य पदार्थ प्रवेश न करे: हाईकोर्ट ने सड़े हुए मांस और मिलावटी उत्पादों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए
"जम्मू-कश्मीर में कोई भी असुरक्षित खाद्य पदार्थ प्रवेश न करे": हाईकोर्ट ने सड़े हुए मांस और मिलावटी उत्पादों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर संभागों के पुलिस महानिरीक्षकों और खाद्य सुरक्षा आयुक्त तथा औषधि एवं खाद्य नियंत्रण संगठन, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि "खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अनुसार कोई भी असुरक्षित खाद्य पदार्थ केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में प्रवेश न करे।"चीफ जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस राजेश ओसवाल की खंडपीठ एडवोकेट मीर उमर द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश में सड़े और अस्वास्थ्यकर...

जूनियर को पहले पदोन्नत किया गया हो तो रिटायरमेंट के बाद पदोन्नति लाभों से इनकार नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
जूनियर को पहले पदोन्नत किया गया हो तो रिटायरमेंट के बाद पदोन्नति लाभों से इनकार नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस रंजन शर्मा की हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी के जूनियर को उसके कार्यकाल के दौरान पदोन्नत और नियमित किया गया हो तो उसे केवल रिटायरमेंट के आधार पर पदोन्नति और परिणामी लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।पृष्ठभूमि तथ्यप्रतिवादी हिमाचल प्रदेश आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण में कार्यरत था। उसे 28.09.2010 को अधीक्षक ग्रेड-II के पद पर पदोन्नत किया गया। उसकी सेवा के दौरान, उसके दो जूनियर को क्रमशः 01.06.2012 और 18.08.2012 को पदोन्नति दी...

ऋणी की पत्नी डिक्री से अनजान नहीं, इसलिए वह CPC के नियम 99 के तहत आदेश XXI लागू नहीं कर सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
ऋणी की पत्नी डिक्री से अनजान नहीं, इसलिए वह CPC के नियम 99 के तहत आदेश XXI लागू नहीं कर सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सीपीसी के आदेश XXI नियम 99 का प्रयोग किसी निर्णीत-ऋणी, जिसमें उसका जीवनसाथी भी शामिल है, द्वारा नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसका उद्देश्य केवल मुकदमे से जुड़े किसी 'अजनबी' व्यक्ति को राहत प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। इस प्रावधान में यह प्रावधान है कि यदि निर्णीत-ऋणी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी संपत्ति पर कब्जे के लिए डिक्री धारक द्वारा अचल संपत्ति से बेदखल किया जाता है, तो वह ऐसी बेदखली की शिकायत करते हुए न्यायालय में आवेदन कर सकता है।जस्टिस मनोज...

एक ही प्रतिष्ठान में समान स्थिति वाले दैनिक वेतनभोगियों का चयनात्मक नियमितीकरण समता का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट
एक ही प्रतिष्ठान में समान स्थिति वाले दैनिक वेतनभोगियों का चयनात्मक नियमितीकरण समता का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के चयनात्मक नियमितीकरण के विरुद्ध निर्णय दिया। न्यायालय ने कहा कि स्थायी कार्य में लगे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमितीकरण से वंचित करके उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता, जबकि रिक्त पदों पर कार्यरत अन्य समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को यह लाभ दिया जा रहा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उस मामले की सुनवाई की जिसमें अपीलकर्ता - पांच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और एक चालक - 1989-1992 से प्रतिवादी आयोग के साथ...

सहकारी समिति के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु केवल वैधानिक संशोधन के माध्यम से बढ़ाई जा सकती है, विभागीय प्रस्तावों से नहीं: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
सहकारी समिति के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु केवल वैधानिक संशोधन के माध्यम से बढ़ाई जा सकती है, विभागीय प्रस्तावों से नहीं: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट की जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अज़ीम की खंडपीठ ने कहा कि सहकारी समितियों के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 1988 के एसआरओ 233 के अनुसार 58 वर्ष ही रहेगी और इसे केवल वैधानिक नियमों में औपचारिक संशोधन के माध्यम से ही बदला जा सकता है, विभागीय सिफारिशों, प्रस्तावों या मसौदा संशोधनों द्वारा नहीं। तथ्यअपीलकर्ता जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की सहकारी समितियों के कर्मचारी थे। अपीलकर्ता सेवा में शामिल हुए और उन्हें सहायक प्रबंधक के पद पर पदोन्नत किया गया, जबकि...

समझौते में आवश्यक पूर्व-शर्त के अनुपालन को स्थगित करने का मध्यस्थ का निर्णय अनुबंध को फिर से लिखने के समान: दिल्ली हाईकोर्ट
समझौते में आवश्यक पूर्व-शर्त के अनुपालन को स्थगित करने का मध्यस्थ का निर्णय अनुबंध को फिर से लिखने के समान: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस जसमीत सिंह की पीठ ने मध्यस्थता और सुलह अधिनियम (एसीए) की धारा 34 के तहत एक याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि जब अनुबंध के तहत बोलीदाता को निष्पादन की पूर्व-शर्त के रूप में भारत में एक कार्यालय स्थापित करना आवश्यक था, तो मध्यस्थ द्वारा यह निर्णय कि अनुपालन को स्थगित किया जा सकता है, अनुबंध को पुनर्लेखन के समान था। इस तरह के निर्णय ने भारतीय कानून की मूलभूत नीति का उल्लंघन किया और यह निर्णय रद्द किए जाने योग्य था। तथ्यवर्तमान याचिका मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 34...

सार्वजनिक रोज़गार के अवसर कम, भर्ती पूरी तरह से निष्पक्ष होनी चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
'सार्वजनिक रोज़गार के अवसर कम, भर्ती पूरी तरह से निष्पक्ष होनी चाहिए': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया पवित्र बनी रहनी चाहिए और जाली दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त नियुक्ति "आरंभ से ही अमान्य" है। सहायक लाइनमैन के पद पर नियुक्ति के 10 वर्ष बाद, अधिकारियों ने पाया कि प्रस्तुत दस्तावेज जाली थे।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा,"सरकारी नौकरियों के अवसर दुर्लभ और अत्यधिक प्रतिष्ठित दोनों हैं। ऐसे कर्मचारी सभी स्तरों पर राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए यह अपने आप में स्थिरता और गरिमा का आश्वासन लेकर आता है। हालांकि, इसकी...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने किया बड़ा फैसला: पीड़िता को सुने बिना दी गई POCSO आरोपी की जमानत निलंबित
कलकत्ता हाईकोर्ट ने किया बड़ा फैसला: पीड़िता को सुने बिना दी गई POCSO आरोपी की जमानत निलंबित

कलकत्ता हाईकोर्ट ने POCSO मामले में निचली अदालत द्वारा आरोपी को दी गई ज़मानत को निलंबित कर दिया है। अदालत ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को ज़मानत देते समय पीड़िता/सूचना देने वाले को सुनवाई का अवसर नहीं दिया, जिससे भारतीय नागरिक सुरक्षा सहिंता (BNSS) 2023 की धारा 483(2) का उल्लंघन हुआ।जस्टिस बिवास पटनायक ने अपने आदेश में कहा,“इस मामले में निर्विवाद रूप से यह तथ्य है कि पीड़िता/सूचना देने वाले को आरोपी की ज़मानत अर्जी की जानकारी नहीं दी गई। परिणामस्वरूप उसके सुनवाई में भाग लेने के अधिकार का हनन...

आयकर अधिनियम की धारा 22 के तहत एओ नगरपालिका कर योग्य मूल्य से अधिक संपत्ति का वार्षिक मूल्य निर्धारित कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
आयकर अधिनियम की धारा 22 के तहत एओ नगरपालिका कर योग्य मूल्य से अधिक संपत्ति का वार्षिक मूल्य निर्धारित कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि आयकर अधिनियम की धारा 22 के तहत कर निर्धारण अधिकारी (एओ) संपत्ति का वार्षिक मूल्य नगरपालिका के कर योग्य मूल्य से अधिक निर्धारित कर सकता है। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 22 "गृह संपत्ति से आय" की करयोग्यता से संबंधित है। इसमें कहा गया है कि संपत्ति का वार्षिक मूल्य, जिसमें उससे संबद्ध कोई भवन या भूमि शामिल है, जिसका करदाता स्वामी है, सिवाय उस संपत्ति के उन हिस्सों के जिन पर वह अपने द्वारा चलाए जा रहे किसी व्यवसाय या पेशे के लिए कब्जा कर सकता है और जिसके लाभ पर आयकर लगता...

कॉमर्शियल कोर्ट्स एक्ट की धारा 12ए के तहत वाद दायर करते समय प्री-इंस्टिट्यूशन मी‌डिएशन अनिवार्य, जब तक कि वास्तविक तात्कालिकता न हो: HP हाईकोर्ट
कॉमर्शियल कोर्ट्स एक्ट की धारा 12ए के तहत वाद दायर करते समय प्री-इंस्टिट्यूशन मी‌डिएशन अनिवार्य, जब तक कि वास्तविक तात्कालिकता न हो: HP हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जब वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 की धारा 12ए के तहत कोई वाद दायर किया जाता है तो वादी अनिवार्य प्री-इंस्टिट्यूशन मी‌डिएशन की अवहेलना नहीं कर सकता, जब तक कि मांगी गई राहत तत्काल न हो। न्यायालय ने टिप्पणी की कि प्री-इंस्टिट्यूशन मी‌डिएशन के बिना दायर किया गया वाणिज्यिक वाद, ऐसे मामलों में जहां कोई वास्तविक तात्कालिकता नहीं है, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश VII नियम 11(डी) के तहत खारिज किया जाना चाहिए।वाद का अवलोकन करने के बाद, जस्टिस अजय मोहन गोयल ने...

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को लगाई फटकार: गिरफ्तारी पर सवाल पूछने के बजाय जमानत पर फैसला करना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को लगाई फटकार: गिरफ्तारी पर सवाल पूछने के बजाय जमानत पर फैसला करना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे आरोपी को अग्रिम ज़मानत (Anticipatory Bail) देते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की तीखी आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने अस्पष्ट और असामान्य आदेश पारित किया, जिसमें आरोपी की जमानत याचिका पर फैसला करने के बजाय पुलिस से पूछा गया कि उसे चार साल तक क्यों नहीं गिरफ़्तार किया गया।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट को या तो अग्रिम जमानत मंज़ूर करनी चाहिए थी या फिर उसे ठुकरा देना चाहिए था। अदालत ने...