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राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 45 से 48 तक : ग्राम सेवकों के वेतन की सुरक्षा, कर्तव्य, नियुक्ति की प्रक्रिया और अयोग्यता
राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 45 से 48 तक : ग्राम सेवकों के वेतन की सुरक्षा, कर्तव्य, नियुक्ति की प्रक्रिया और अयोग्यता

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, 1956 की धाराएं 45 से 48 तक ग्राम सेवकों की सेवा शर्तों को सुरक्षित और व्यवस्थित करने हेतु बनाई गई हैं। इन धाराओं में ग्राम सेवकों के वेतन पर कानूनी सुरक्षा, उनके कर्तव्य, नियुक्ति की विधि तथा किन व्यक्तियों को नियुक्त नहीं किया जा सकता – इन सभी विषयों को स्पष्ट किया गया है। इस लेख में हम इन चारों धाराओं की सरल हिंदी में व्याख्या करेंगे ताकि आमजन और ग्राम प्रशासन से जुड़े सभी व्यक्ति इसे सहजता से समझ सकें।धारा 45 : वेतन की कुर्की से संरक्षण धारा 45 के अनुसार, ग्राम...

राजस्थान कोर्ट फीस मूल्यांकन अधिनियम, 1961 की धाराएं 52 और 53 : वसीयत या उत्तराधिकार पत्र के लिए आवश्यक शुल्क
राजस्थान कोर्ट फीस मूल्यांकन अधिनियम, 1961 की धाराएं 52 और 53 : वसीयत या उत्तराधिकार पत्र के लिए आवश्यक शुल्क

राजस्थान कोर्ट फीस और मुकदमों का मूल्यांकन अधिनियम, 1961 के अध्याय VI में वसीयत (प्रोबेट) और उत्तराधिकार पत्र (लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन) से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। इस अध्याय की धाराएं 50 से 58 तक हैं, जो इन दस्तावेजों के लिए आवेदन, शुल्क निर्धारण, और अन्य संबंधित प्रक्रियाओं को स्पष्ट करती हैं। विशेष रूप से, धाराएं 52 और 53 इन प्रक्रियाओं में न्यायालय की भूमिका और शुल्क के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान करती हैं।धारा 52: वसीयत या उत्तराधिकार पत्र की अनुमति धारा 52 के...

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 40-ए से 44 : लम्बरदारों की सेवा समाप्ति और ग्राम सेवकों की नियुक्ति
राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 40-ए से 44 : लम्बरदारों की सेवा समाप्ति और ग्राम सेवकों की नियुक्ति

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, 1956 में ग्राम स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व संग्रहण के सुचारु संचालन के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। इस अधिनियम की धारा 40-ए से लेकर धारा 44 तक विशेष रूप से लम्बरदार व्यवस्था को समाप्त कर ग्राम सेवकों की नई व्यवस्था को लागू करने की दिशा में बनाई गई हैं। इन धाराओं में स्पष्ट रूप से यह बताया गया है कि ग्राम सेवकों की नियुक्ति कैसे होगी, उनकी सूची कैसे बनाई जाएगी, खाली पदों को कैसे भरा जाएगा और उन्हें कितना पारिश्रमिक दिया जाएगा। यह लेख इन सभी धाराओं को सरल भाषा...

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 32 से 36 : भू अभिलेख निरीक्षण प्रणाली और संबंधित अधिकारियों की भूमिका
राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 32 से 36 : भू अभिलेख निरीक्षण प्रणाली और संबंधित अधिकारियों की भूमिका

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956 (Rajasthan Land Revenue Act, 1956) में ग्रामीण प्रशासन और भूमि अभिलेखों के रख-रखाव से संबंधित कई महत्त्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।इनमें से धारा 32 से लेकर 36 तक की धाराएँ विशेष रूप से पटवारियों, गिरदावर कानूनगो, रिकॉर्ड निरीक्षक तथा सदर कानूनगो जैसे अधिकारियों के कार्यक्षेत्र, नियुक्ति, योग्यता, निरीक्षण व्यवस्था और आम नागरिकों की सूचनाएं देने की जिम्मेदारी को स्पष्ट करती हैं। यह लेख इन धाराओं की सरल भाषा में व्याख्या करता है जिससे आमजन, किसान तथा राजस्व...

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 443 : हाईकोर्ट की पुनर्विचार याचिकाओं को स्थानांतरित करने या वापस लेने की शक्ति
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 443 : हाईकोर्ट की पुनर्विचार याचिकाओं को स्थानांतरित करने या वापस लेने की शक्ति

परिचयभारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 एक नई आपराधिक प्रक्रिया संहिता है, जो देश की न्यायिक व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सरल और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है। इस संहिता में पुनरीक्षण (Revision) से संबंधित विस्तृत प्रावधान अध्याय 32 (धारा 438 से लेकर धारा 447 तक) में किए गए हैं। इस लेख में हम धारा 443 को विस्तारपूर्वक सरल हिंदी में समझने का प्रयास करेंगे, जो हाईकोर्ट को पुनरीक्षण मामलों को स्थानांतरित करने अथवा अपने पास वापस लेने की विशेष शक्ति प्रदान करती है। धारा 443 का उद्देश्य और...

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 32 से 36: भू अभिलेख निरीक्षण प्रणाली और संबंधित अधिकारियों की भूमिका
राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 32 से 36: भू अभिलेख निरीक्षण प्रणाली और संबंधित अधिकारियों की भूमिका

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956 (Rajasthan Land Revenue Act, 1956) में ग्रामीण प्रशासन और भूमि अभिलेखों के रख-रखाव से संबंधित कई महत्त्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।इनमें से धारा 32 से लेकर 36 तक की धाराएँ विशेष रूप से पटवारियों, गिरदावर कानूनगो, रिकॉर्ड निरीक्षक तथा सदर कानूनगो जैसे अधिकारियों के कार्यक्षेत्र, नियुक्ति, योग्यता, निरीक्षण व्यवस्था और आम नागरिकों की सूचनाएं देने की जिम्मेदारी को स्पष्ट करती हैं। यह लेख इन धाराओं की सरल भाषा में व्याख्या करता है जिससे आमजन, किसान तथा राजस्व...