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राजस्थान न्यायालय शुल्क अधिनियम 1961 की धारा 59 और 60 के अंतर्गत दंड और शुल्क की वसूली तथा राजस्व बोर्ड की भूमिका
राजस्थान न्यायालय शुल्क अधिनियम 1961 की धारा 59 और 60 के अंतर्गत दंड और शुल्क की वसूली तथा राजस्व बोर्ड की भूमिका

राजस्थान न्यायालय शुल्क एवं वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 में यह सुनिश्चित किया गया है कि मृतक व्यक्ति की संपत्ति पर जब उत्तराधिकारी को प्रॉबेट या प्रशासन-पत्र (Letters of Administration) दिया जाता है, तो उस पर उचित न्यायालय शुल्क लगे। अगर किसी कारणवश कम शुल्क अदा किया गया हो, जानबूझकर या गलती से, तो इस अधिनियम में ऐसे मामलों से निपटने के लिए सुस्पष्ट प्रावधान दिए गए हैं। धारा 59 और 60 इसी विषय से संबंधित हैं।धारा 59 – दंड व अन्य राशि की वसूली का प्रावधान यह धारा इस बात को सुनिश्चित करती है कि...

कैश रिकवरी मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा ने जिस इन-हाउस-इंक्वारी का किया सामना, उसकी प्रक्रिया को समझिए
कैश रिकवरी मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा ने जिस इन-हाउस-इंक्वारी का किया सामना, उसकी प्रक्रिया को समझिए

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना ने गुरुवार को तीन न्यायाधीशों के पैनल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दिया, जिसने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ उनके आधिकारिक आवास पर कथित रूप से अनधिकृत करेंसी नोटों की खोज के संबंध में इन-हाउस जांच की थी।हालांकि रिपोर्ट के निष्कर्षों के बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन सीजेआई द्वारा राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को रिपोर्ट भेजे जाने का यह तथ्य निश्चित रूप से कुछ बातों का संकेत देता है:1. तीन न्यायाधीशों के पैनल ने...

राजस्व न्यायालयों की गवाही, दस्तावेज़ और समन से जुड़ी शक्तियाँ: राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 57 से 59
राजस्व न्यायालयों की गवाही, दस्तावेज़ और समन से जुड़ी शक्तियाँ: राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 57 से 59

राजस्व अधिकारी और राजस्व न्यायालय न केवल भूमि संबंधी विवादों का निपटारा करते हैं, बल्कि उन्हें इस कार्य के दौरान कई बार व्यक्तियों को बुलाने, उनसे गवाही लेने या दस्तावेज़ प्रस्तुत कराने की आवश्यकता होती है।राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 57, 58 और 59 इन अधिकारों और प्रक्रियाओं को स्पष्ट रूप से निर्धारित करती हैं। इन धाराओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राजस्व संबंधी मामलों में न्यायिक प्रक्रिया प्रभावी और निष्पक्ष ढंग से पूरी की जा सके। धारा 57: व्यक्तियों की उपस्थिति और...