जानिए हमारा कानून
Consumer Protection Act में नेशनल फोरम का अपील पॉवर
नेशनल फोरम से जुड़े एक मामले में राज्य आयोग द्वारा विनिर्णीत क्षतिपूर्ति आदेश के विरुद्ध अपील के इस मामले में नद अदायगी के आधार पर एम आई जी मकान प्रत्यर्थी ने अपीलार्थी को देना निश्चित किया या निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण प्रत्यर्थी अपीलार्थी को मकान का कब्जा नहीं दे सका। प्रत्यर्थी के प्रबंध में समस्याओं के कारण मकान का निर्माण नहीं हो सका। अपीलार्थी का कोई दोष नहीं था। परिवादी 12% वार्षिक ब्याज पाने का हकदार था। किन्तु किस्त जमा करने की चूक पर 16% वार्षिक व्याज देना था। इस प्रकार 16%...
Consumer Protection Act में नेशनल फोरम की शक्ति
इस एक्ट में नेशनल फोरम को पॉवर्स दिए गए है जो सभी फोरम की एकमात्र सुप्रीम फोरम है। इस एक्ट की धारा 58 के अनुसार,(1) इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, नेशनल फोरम को निम्नलिखित की अधिकारिता होगी(क) (i) उन परिवादों को ग्रहण करना जिनमें प्रतिफल के रूप में संदत्त माल या सेवाओं का मूल्य दस करोड़ रु० से अधिक है : परंतु जहां केन्द्रीय सरकार ऐसा करना आवश्यक समझती है वहां वहऐसा अन्य मूल्य विहित कर सकेगी जो वह ठीक समझे।(ii) अनुचित संविदाओं के विरुद्ध परिवाद जहां प्रतिफल के रूप में संदत्त माल या...
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 481 से 486 : अभियुक्त और जमानतदारों का बांड
धारा 481: अभियुक्त को अगले अपीलीय न्यायालय में उपस्थित होने के लिए जमानत (Bail to Require Accused to Appear Before Next Appellate Court)स्पष्टीकरण: इस धारा के अनुसार, जब किसी व्यक्ति का मुकदमा किसी न्यायालय में चल रहा हो और उस पर निर्णय आने से पहले या अपील के निपटारे से पूर्व, न्यायालय अभियुक्त से यह सुनिश्चित करने के लिए एक बांड या जमानत बांड भरवाएगा कि यदि हाईकोर्ट या अपीलीय न्यायालय में उस निर्णय के विरुद्ध कोई अपील या याचिका दायर की जाती है, तो अभियुक्त उस न्यायालय के समक्ष उपस्थित होगा। यह...
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 35 और 36 : इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाणपत्र जारी करना
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अध्याय VII में इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (Electronic Signature Certificates) से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। विशेष रूप से धारा 35 और 36 में यह स्पष्ट किया गया है कि कोई व्यक्ति किस प्रकार प्रमाणीकृत प्राधिकरण से इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकता है, और प्रमाणीकृत प्राधिकरण की क्या-क्या जिम्मेदारियां होती हैं जब वह ऐसा प्रमाणपत्र जारी करता है।धारा 35 – इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाणपत्र जारी करना यह धारा इस बात से शुरू होती है...
राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम के अध्याय से संबंधित धारा 136 से 140-A : संपत्ति के उत्तराधिकार का नियम
धारा 136: त्रुटियों का सुधारधारा 136 भूमि रिकॉर्ड अधिकारी को यह अधिकार देती है कि वह कभी भी रिकॉर्ड ऑफ राइट्स या किसी भी रजिस्टर में की गई लिपिकीय त्रुटियों या उन त्रुटियों को, जिन्हें संबंधित पक्ष स्वीकार करते हैं, ठीक कर सकता है। इसके अतिरिक्त, यदि कोई राजस्व अधिकारी निरीक्षण के दौरान किसी रजिस्टर में कोई त्रुटि पाता है, तो वह भी उस त्रुटि को सही करने का अधिकार रखता है। हालाँकि, इसमें एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि यदि कोई राजस्व अधिकारी निरीक्षण के दौरान रिकॉर्ड ऑफ राइट्स में कोई त्रुटि पाता...
पशुओं के साथ यौन संबंध से जुड़े अपराध के बारे में क्या कहता है भारतीय कानून?
भारत में पशु संबंध (Bestiality) न केवल एक नैतिक (Morality) अपराध माना जाता है, बल्कि पशु कल्याण (Welfare) और सामाजिक मूल्यों के प्रतिकूल (Contrary) भी है। 1 जुलाई 2024 तक यह अपराध मुख्यतः भारतीय दंड संहिता, 1860 (Indian Penal Code) की Section 377 के तहत दंडनीय (Punishable) था, परंतु Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) के लागू होने के साथ इस व्यवस्था में मौलिक परिवर्तन आए हैं।इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि IPC के तहत bestiality को कैसे अपराध माना गया, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के...
Consumer Protection Act में धारा 51 के प्रावधान
जैसा की किसी सिविल वाद में सुप्रीम कोर्ट में भी अपील होती है इस ही तरह इस एक्ट में नेशनल फोरम में भी अपील होती है। इस एक्ट की धारा 51 में नेशनल फोरम में अपील की व्यवस्था है-(1) राज्य आयोग द्वारा किए गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति धारा 47 की उपधारा (1) के खंड (क) के उपखंड (3) या (14) द्वारा प्रदत्त अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, आदेश की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए, अपील कर सकेगा : परंतु यह कि राष्ट्रीय आयोग तीस दिन की उक्त अवधि के अवसान के...
Consumer Protection Act में स्टेट फोरम के समक्ष कंप्लेंट केस
यह अधिनियम उपचारात्मक मंचों को व्यवहार प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत व्यवहार कोर्ट के अधिकारों से सुसति करती है जैसे गवाहों को सम्मन हाजिर होने को बाध्य तथा उनकी परीक्षा शपथ दिलाकर करना, दस्तावेजों को तलब तथा जाँच और अन्य समानो में शपथपत्र पर साक्ष्य लेना, कमीशन जारी करना गवाह भी परीक्षा आदि। अमुक अधिनियम इस प्रकार से अभिप्रेत करता है कि उपचार मंच जो अधिनियम के अन्तर्गत गठित हुआ है अपने सम्मुख आये हुये परिवादों को मौखिक या अभिलेखीय साक्ष्यों द्वारा जैसी भी परिस्थितियाँ हों निर्णय करे। यह बहुत...
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 483: हाईकोर्ट या सत्र न्यायालय की जमानत पर रिहा करने की शक्ति
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) की धारा 483 हाईकोर्ट (High Court) और सत्र न्यायालय (Court of Session) को यह अधिकार प्रदान करती है कि वे अभियुक्तों को जमानत पर रिहा करने, मजिस्ट्रेट द्वारा लगाई गई जमानत की शर्तों को संशोधित करने या किसी अभियुक्त को पुनः हिरासत में लेने का निर्देश दे सकते हैं।यह धारा विशेष रूप से गंभीर अपराधों और विशेष न्यायालयों में विचारणीय मामलों में न्यायालयों को अधिक विवेकपूर्ण भूमिका निभाने का अधिकार देती है। धारा 483(1):...
क्या Certified Copy मिलने में लगे समय को Appeal की Limitation में जोड़ा जा सकता है? Limitation Act और E-Filing से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
Supreme Court ने Sanket Kumar Agarwal बनाम APG Logistics Pvt. Ltd. (2023) के फैसले में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया संबंधी सवाल का समाधान किया कि Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) के तहत National Company Law Tribunal (NCLT) के आदेश के खिलाफ Appeal दायर करने की समय सीमा (Limitation) कैसे गिनी जानी चाहिए, खासकर जब Certified Copy मिलने में देरी हो जाती है।Court ने यह भी जांचा कि क्या E-Filing के साथ-साथ Physical Filing की अनिवार्यता आज के Digital युग में तार्किक है या नहीं। इस फैसले में Section...
राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 130 से 135: उत्तराधिकार और कब्जे के परिवर्तन की सूचना देना
भूमि की सीमा, उसके स्वामित्व, अधिकार, हस्तांतरण और उससे संबंधित दस्तावेजों का सुरक्षित और अद्यतन रिकॉर्ड किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होती है। राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम 1956 को इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु लागू किया गया है।इस अधिनियम की धारा 130 से 135 तक में भूमि सीमाचिन्हों को नुकसान पहुँचाने पर दंड, फील्ड बुक और नक्शों का रखरखाव, वार्षिक रजिस्टरों का निर्माण, उत्तराधिकार या कब्जा परिवर्तन की रिपोर्टिंग तथा रिपोर्ट न करने पर दंड और तहसीलदार की प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित...
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 30 से 34 : प्रमाणीकृत प्राधिकरण को पालन करने वाली प्रक्रियाएं
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 में 'प्रमाणीकृत प्राधिकरण' (Certifying Authority) को इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (Electronic Signature Certificates) जारी करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई जिम्मेदारियां और कर्तव्य सौंपे गए हैं।धारा 30 – प्रमाणीकृत प्राधिकरण को पालन करने वाली प्रक्रियाएं इस धारा के तहत प्रत्येक प्रमाणीकृत प्राधिकरण को कुछ विशिष्ट प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य किया गया है ताकि वह सुरक्षित, विश्वसनीय और पारदर्शी सेवाएं प्रदान कर सके। यह धारा धारा 25 से सीधे...
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 25 से 29 : किन परिस्थितियों में लाइसेंस रद्द किया जा सकता है?
इस लेख में हम सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 25 से 29 तक की सभी महत्वपूर्ण धाराओं का सरल हिंदी में विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं। यह धाराएं "प्रमाणीकृत प्राधिकरण" (Certifying Authority) के लाइसेंस को निलंबित, रद्द करने, जांच करने और कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच जैसी शक्तियों से संबंधित हैं। इनका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाणपत्रों की सुरक्षा और वैधता को सुनिश्चित करना है।धारा 25 – लाइसेंस का निलंबन इस धारा के अंतर्गत नियंत्रक (Controller) को यह शक्ति दी गई है कि वह एक...
क्या Magistrate की अनुमति के बिना Police आगे की जांच कर सकती है? – Section 173(8) और Section 482 CrPC पर Supreme Court का निर्णय
Peethambaran बनाम State of Kerala (2023) के फैसले में Supreme Court ने दो अहम कानूनी मुद्दों पर चर्चा की – पहला, क्या Police को Code of Criminal Procedure, 1973 की धारा 173(8) (Section 173(8) CrPC) के तहत Magistrate की अनुमति के बिना Further Investigation (आगे की जांच) करने का अधिकार है? और दूसरा, क्या High Court अपनी Inherent Powers (निहित शक्तियों) का इस्तेमाल Section 482 CrPC के तहत कैसे और कब कर सकती है?इस फैसले में Supreme Court ने यह भी स्पष्ट किया कि IPC की धारा 420 (Section 420 IPC) के...
राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 124 से 129 : सीमाओं से जुड़े विवादों का समाधान तथा सीमाचिन्हों के रखरखाव की जिम्मेदारी
धारा 124: किराए या लगान को लेकर विवाद की स्थिति में प्रक्रियाराजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 124 के अनुसार, यदि किसी भूमि का किराया या लगान कितना देना है, इसको लेकर कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो ऐसे मामलों में भूमि अभिलेख अधिकारी उस विवाद का निपटारा स्वयं नहीं करेगा।इसके स्थान पर, वह उस वर्ष के लिए, जिसमें अधिकार अभिलेख तैयार किया जा रहा हो, पिछले वर्ष की दर पर किराया या लगान दर्ज करेगा। यदि किसी न्यायिक आदेश, निर्णय, या वैध समझौते के तहत किराया या लगान घटाया या बढ़ाया गया हो, तो उस...
Consumer Protection Act में Compensation award
इस एक्ट के एक केस रोसम्मा यामत बनाम बी० भास्करन नैप्पर, 1997 के मामले में जिला फोरम ने यह अभिनिर्धारित किया कि सेकेण्ड्स के बाबत केता को भत्ता देने के लिए इसलिए निर्देश दिया गया क्योंकि उच्च गुणात्मकता के लिए निर्धारित मूल्य का संग्रह करने के विरोधी पक्षकार के आचरण को अनुचित व्यवसाय वृत्ति का अभिप्राय रखने वाला माना जाना उचित है। इसके अलावा जिला फोरम ने 1,000 रुपये का प्रतिकर का भी संदाय करने के लिए विरोधी पक्षकार को निर्देश दिया। इस निर्णय के विरुद्ध जब अपील दायर की गयी, तब यह अभिनिर्धारित किया...
Consumer Protection Act में स्टेट फोरम की व्यवस्था
इस एक्ट की धारा 47 में स्टेट फोरम के प्रावधान किये गए हैं जो एक अपील फोरम तो है ही साथ ही ट्रायल फोरम भी है जो बड़ी धनराशि की कंप्लेंट भी सुनती है।इस एक्ट की स्टेट फोरम से संबंधित धारा 47 इस प्रकार हैराज्य आयोग की अधिकारिता-(1) इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्य आयोग को निम्नलिखित की अधिकारिता होगी(क) (i) उन परिवादों को ग्रहण करना जिनमें प्रतिफल के रूप में संदत्त माल या सेवाओं का मूल्य एक करोड़ रु से अधिक है किन्तु दस करोड़ रु से अधिक नहीं हो: परंतु जहां केन्द्रीय सरकार ऐसा करना...
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 482: अग्रिम जमानत की अवधारणा
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) की धारा 482 उस स्थिति को संबोधित करती है जब किसी व्यक्ति को यह आशंका हो कि उसे किसी गैर-जमानती अपराध (Non-Bailable Offence) के आरोप में गिरफ्तार किया जा सकता है।इस स्थिति में, व्यक्ति अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की मांग कर सकता है। यह धारा पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 438 से प्रेरित है, जिसे अग्रिम जमानत की धारा के रूप में जाना जाता था। धारा 482 में इस प्रकार की जमानत प्राप्त करने की प्रक्रिया,...
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 21 से 24 : इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी करने के लिए लाइसेंस
धारा 21: इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी करने के लिए लाइसेंसधारा 21 के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति जिसे इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी करने की अनुमति चाहिए, वह नियंत्रक (Controller) के समक्ष आवेदन कर सकता है। लेकिन यह लाइसेंस तभी मिलेगा जब वह व्यक्ति केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कुछ आवश्यक योग्यताओं, विशेषज्ञता, मानव संसाधन, वित्तीय संसाधनों और आधारभूत सुविधाओं की शर्तों को पूरा करता हो। उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि कोई कंपनी "डिजिटसर्ट इंडिया लिमिटेड" नाम से एक नया डिजिटल प्रमाणन...
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 480: गैर-जमानती अपराधों में जमानत कब ली जा सकती है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) की धारा 480 गैर-जमानती अपराधों (Non-Bailable Offences) में जमानत (Bail) से संबंधित प्रावधानों को स्पष्ट करती है। यह धारा न्यायालयों को यह निर्धारित करने का अधिकार देती है कि किन परिस्थितियों में ऐसे अपराधों के आरोपियों को जमानत दी जा सकती है।धारा 480(1): गैर-जमानती अपराधों में जमानत का प्रावधान (Section 480(1): Provision for Bail in Non-Bailable Offences) यदि कोई व्यक्ति, जिसे किसी गैर-जमानती अपराध के लिए गिरफ्तार...




















