हाईकोर्ट

दत्तक माता-पिता को यौन शोषण और क्रूरता का दोषी, दिल्ली हाईकोर्ट ने मानव तस्करी के पहलू की अनदेखी पर पुलिस को फटकारा
दत्तक माता-पिता को यौन शोषण और क्रूरता का दोषी, दिल्ली हाईकोर्ट ने मानव तस्करी के पहलू की अनदेखी पर पुलिस को फटकारा

दत्तक माता-पिता को यौन शोषण और क्रूरता का दोषी, दिल्ली हाईकोर्ट ने मानव तस्करी के पहलू की अनदेखी पर पुलिस को फटकारा दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्ची के दत्तक माता-पिता को क्रूरता और यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया। न्यायालय ने कहा कि यह मामला बच्चों की तस्करी से जुड़ा हो सकता है। इस पहलू की अनदेखी करने पर पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं।जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जांच अधिकारी ने बच्ची के जैविक माता-पिता को ढूंढने का कोई प्रयास नहीं किया और न ही यह जांच की गई कि बच्ची...

डाबर च्यवनप्राश विज्ञापन मामले में पतंजलि को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने अपील पर उठाए सवाल
डाबर च्यवनप्राश विज्ञापन मामले में पतंजलि को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने अपील पर उठाए सवाल

पतंजलि आयुर्वेद ने दिल्ली हाईकोर्ट में एकल जज के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसे डाबर के च्यवनप्राश उत्पाद का कथित रूप से अपमान करने वाले विज्ञापन चलाने से रोक दिया गया था।मामले की सुनवाई जस्टिस सी. हरिशंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने की।शुरुआत में कोर्ट ने पतंजलि का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर एडवोकेट जयंत मेहता से मौखिक रूप से कहा कि सिंगल जज का आदेश विवेकाधीन प्रकृति का है। उसके खिलाफ अपील में बैठने का कोई कारण नहीं है।कोर्ट ने टिप्पणी की,“आपने च्यवनप्राश बनाने वाले सभी लोगों को...

आरोपी द्वारा आत्म-दोषपूर्ण तथ्य न बताना, स्वीकारोक्ति से इनकार करना असहयोग नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
आरोपी द्वारा आत्म-दोषपूर्ण तथ्य न बताना, स्वीकारोक्ति से इनकार करना असहयोग नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी द्वारा जांच अधिकारी द्वारा पूछे गए प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर न देना या कोई भी स्वीकारोक्ति देने से इनकार करना असहयोग नहीं कहा जा सकता।जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा कि किसी आरोपी द्वारा अपने विरुद्ध कोई भी आरोप लगाने वाली बात कहने से इनकार करना भी असहयोग नहीं कहा जा सकता।अदालत एक आरोपी द्वारा जबरन वसूली के मामले में अग्रिम ज़मानत की मांग करते हुए दायर याचिका पर विचार कर रहा था। यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 384 (जबरन वसूली), 385 (जबरन वसूली के लिए किसी...

अरविंद केजरीवाल को नहीं मिल रहा सरकारी बंगला, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा- मनमर्जी पर आधारित नहीं हो सकता
अरविंद केजरीवाल को नहीं मिल रहा सरकारी बंगला, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा- 'मनमर्जी पर आधारित नहीं हो सकता'

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को टिप्पणी की कि आवासीय आवास का आवंटन पूरी तरह से अधिकारियों की मनमर्जी पर आधारित नहीं हो सकता, क्योंकि उसने आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को आवासीय आवास आवंटित करने की याचिका पर सुनवाई की।जस्टिस सचिन दत्ता ने केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के संयुक्त सचिव और संपदा निदेशालय के निदेशक को अगली सुनवाई की तारीख 25 सितंबर को वर्चुअल रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया।केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि 35, लोधी एस्टेट...

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 1999 में बलात्कार के दोषी व्यक्ति की उम्र निर्धारित करने के लिए किशोर परीक्षण कराने का निर्देश दिया
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 1999 में बलात्कार के दोषी व्यक्ति की उम्र निर्धारित करने के लिए किशोर परीक्षण कराने का निर्देश दिया

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 1999 में बलात्कार के दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की उम्र निर्धारित करने के लिए किशोर परीक्षण कराने का निर्देश दिया। यह निर्देश तब आया, जब दोषी ने दावा किया कि अपराध के समय वह नाबालिग था, जिससे उसके मामले में किशोर न्याय प्रावधानों की प्रयोज्यता पर सवाल उठे।स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र के आधार पर अपीलकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि कथित अपराध की तारीख को उसकी उम्र 16 वर्ष 06 महीने और 17 दिन थी और यद्यपि ट्रायल कोर्ट के समक्ष किशोर होने का तर्क नहीं दिया गया। फिर भी विभिन्न...

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने BJP MLA की चुनाव याचिका खारिज करने की मांग वाली याचिका खारिज की
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने BJP MLA की चुनाव याचिका खारिज करने की मांग वाली याचिका खारिज की

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी विधायक (BJP MLA) देवेंद्र अत्री द्वारा कांग्रेस (Congress) उम्मीदवार बिजेंद्र सिंह द्वारा उनके खिलाफ दायर चुनाव याचिका खारिज करने की मांग वाली याचिका खारिज की।पहले सिंह ने अत्री के खिलाफ चुनाव याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने पुनर्मतगणना की मांग की थी और भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाया था। बाद में कांग्रेस उम्मीदवार ने संशोधित याचिका दायर की, जिसमें भ्रष्ट आचरण के आरोपों को हटा दिया गया और उनकी याचिका को केवल पुनर्मतगणना तक ही सीमित रखा गया।अदालत ने...

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला आने तक NHAI द्वारा CLAT-PG अंकों के आधार पर वकीलों की भर्ती पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला आने तक NHAI द्वारा CLAT-PG अंकों के आधार पर वकीलों की भर्ती पर रोक लगाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (18 सितंबर) को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की 11 अगस्त की अधिसूचना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें कहा गया कि वकीलों की भर्ती के लिए CLAT-PG अंक आधार होंगे।अदालत ने याचिका पर फैसला सुनाए जाने तक NHAI द्वारा भर्ती पर भी रोक लगाई।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने सभी पक्षकारों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।पिछली सुनवाई में NHAI ने हाईकोर्ट को बताया कि वह वकीलों की भर्ती के लिए...

बार-बार मुकदमेबाजी की अनुमति नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठाओं को कुंभी दर्जा देने के खिलाफ PIL खारिज की
बार-बार मुकदमेबाजी की अनुमति नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठाओं को कुंभी दर्जा देने के खिलाफ PIL खारिज की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार के उस शासनादेश (GR) के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) खारिज की, जिसके तहत मराठा समुदाय के उन सदस्यों को जो स्वयं को कुंभी मूल का बताते हैं, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में कुंभी जाति का प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अखंड की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले पर पहले से ही याचिका अदालत में लंबित है और नई याचिका दाख़िल करना मुकदमेबाजी की अनावश्यक पुनरावृत्ति होगी।चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की,“हम मुकदमेबाजी...

भ्रष्टाचार मामले में हाईकोर्ट सेशन जज के खिलाफ की विभागीय जांच की सिफारिश
भ्रष्टाचार मामले में हाईकोर्ट सेशन जज के खिलाफ की विभागीय जांच की सिफारिश

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सेशन जज के खिलाफ विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की। अदालत ने पाया कि जज ने ज़मीन अधिग्रहण कार्यालय में कार्यरत सरकारी कंप्यूटर ऑपरेटर जिस पर 5 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि गबन करने का आरोप है, उनके खिलाफ गंभीर धाराओं को नज़रअंदाज़ कर केवल हल्की धारा कायम रखी, जिससे उसे अनुचित लाभ मिला।जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की पीठ ने आदेश दिया कि इस मामले की प्रति प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (विजिलेंस), हाईकोर्ट ऑफ़ मध्यप्रदेश, जबलपुर को भेजी जाए और माननीय चीफ जस्टिस के...

सुप्रीम कोर्ट से पुष्टि प्राप्त भूमि अधिग्रहण धारा 24(2) के तहत न तो निरस्त होगा, न ही पुनर्जीवित: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सुप्रीम कोर्ट से पुष्टि प्राप्त भूमि अधिग्रहण धारा 24(2) के तहत न तो निरस्त होगा, न ही पुनर्जीवित: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन भूमि अधिग्रहण कार्यवाहियों को सुप्रीम कोर्ट पहले ही वैध ठहरा चुका है, उन्हें भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में न्यायसंगत मुआवज़ा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 24(2) के आधार पर न तो पुनर्जीवित किया जा सकता है और न ही अमान्य घोषित।जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने यह टिप्पणी मेरठ ज़िले की भूमि अधिग्रहण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए दी। अदालत ने कहा कि अधिग्रहण की कार्यवाही 1990 में पूरी हो चुकी थी।...

सिर्फ तेज़ रफ़्तार शब्द कहना लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
सिर्फ 'तेज़ रफ़्तार' शब्द कहना लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि केवल गवाह का यह कहना कि आरोपी “तेज़ रफ़्तार” से गाड़ी चला रहा था, लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। जस्टिस राकेश काइंथला ने स्पष्ट किया कि अभियोजन को आरोपी की विशेष लापरवाही साबित करनी होगी।मामला जुलाई 2009 का है जब सूचक ने ऊना में अपनी कार सड़क के किनारे खड़ी की थी। आरोप था कि एचआरटीसी बस चालक ने पीछे से तेज़ रफ़्तार में टक्कर मारी। ट्रायल कोर्ट ने चालक को दोषी ठहराया था और कहा था कि सड़क सीधी थी और बस रोकी जा सकती थी। परंतु अपीलीय अदालत ने चालक को...

सरकारी फाइल में की गई टिप्पणी का कोई कानूनी महत्व नहीं, निलंबन रद्द नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
सरकारी फाइल में की गई टिप्पणी का कोई कानूनी महत्व नहीं, निलंबन रद्द नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकारी अधिकारियों द्वारा फाइलों में की गई टिप्पणियां या टिपण्णी केवल उनके बीच का आंतरिक पत्राचार है, इसका कोई कानूनी महत्व नहीं होता।जस्टिस अनूप कुमार ढांड एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे एक प्रधान ने अपने निलंबन आदेश के खिलाफ दायर किया था। याचिकाकर्ता को राजस्थान पंचायती राज अधिनियम की धारा 38 के तहत निलंबित किया गया था। यह निलंबन 2017 में उसके सरपंच कार्यकाल के दौरान हुई एक घटना से संबंधित आरोप पत्र के बाद किया गया था।याचिकाकर्ता का तर्क था कि उस पर...

बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला: हाईकोर्ट के निर्देश पर मजिस्ट्रेट को CrPC की धारा 145 के तहत अलग से प्रारंभिक आदेश की जरूरत नहीं
बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला: हाईकोर्ट के निर्देश पर मजिस्ट्रेट को CrPC की धारा 145 के तहत अलग से प्रारंभिक आदेश की जरूरत नहीं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया कि यदि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 145 के तहत किसी जांच का विशेष निर्देश दिया तो मजिस्ट्रेट को धारा 145(1) के तहत अलग प्रारंभिक आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है।न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में शांति भंग होने की संभावना वाले विवाद के बारे में संतुष्टि पहले ही हाईकोर्ट द्वारा दर्ज कर ली जाती है और मजिस्ट्रेट का कर्तव्य केवल निर्देशानुसार जांच करना होता है।मामले की पृष्ठभूमिजस्टिस अमित बोरकर रोमेल हाउसिंग एलएलपी...

सिटिंग जज पर स्कैंडलस टिप्पणियां करने के लिए एडवोकेट निलेश ओझा के खिलाफ होगी अतिरिक्त आपराधिक अवमानना कार्यवाही
सिटिंग जज पर 'स्कैंडलस' टिप्पणियां करने के लिए एडवोकेट निलेश ओझा के खिलाफ होगी अतिरिक्त आपराधिक अवमानना कार्यवाही

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को एडवोकेट निलेश ओझा के खिलाफ स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना की एक और कार्यवाही शुरू की। अदालत ने पाया कि ओझा ने सिटिंग जज के खिलाफ स्कैंडलस और अपमानजनक आरोप” लगाए, जबकि वे खुद पर लंबित आपराधिक अवमानना मामले में अपना बचाव कर रहे थे।इस वर्ष अप्रैल में हाईकोर्ट ने ओझा के खिलाफ स्वतः संज्ञान अवमानना कार्यवाही शुरू की थी, क्योंकि उन्होंने जस्टिस रेवती मोहिता-डेरे और तत्कालीन चीफ जस्टिस देवेंद्र उपाध्याय (वर्तमान में दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस) के खिलाफ मानहानिकारक और...