हाईकोर्ट

[MGNREGA] कलकत्ता हाइकोर्ट ने श्रमिकों द्वारा मजदूरी दावों के जिलावार वेरिफिकेशन के लिए समिति गठित की
[MGNREGA] कलकत्ता हाइकोर्ट ने श्रमिकों द्वारा मजदूरी दावों के जिलावार वेरिफिकेशन के लिए समिति गठित की

कलकत्ता हाइकोर्ट ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत दिहाड़ी मजदूरों द्वारा किए गए जिलावार दावों के सत्यापन के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की।चीफ जस्टिस टीएस शिवगनम और जस्टिस हिरणमय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने कहा,इन सभी पहलुओं पर विचार करते हुए चार सदस्यीय टीम में (1) भारत के लेखा परीक्षक और नियंत्रक महालेखा परीक्षक के कार्यालय से सीनियर अधिकारी, (2) भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय से अधिकारी, (3) पश्चिम बंगाल सरकार के प्रधान महालेखाकार, लेखा परीक्षा-I से...

[Cyber Crime] जांचकर्ता कुशल नहीं, जांच में देरी उनके खिलाफ नहीं हो सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट
[Cyber Crime] जांचकर्ता कुशल नहीं, जांच में देरी उनके खिलाफ नहीं हो सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने पाया कि साइबर अपराध उभरता हुआ क्षेत्र है। यहां तक ​​कि जांचकर्ताओं के पास भी आवश्यक कौशल और शैक्षणिक योग्यता की कमी है। इसलिए यदि जांच में सामान्य से अधिक समय लगता है तो इसे जांच में देरी करने का जानबूझकर किया गया प्रयास नहीं माना जा सकता।साइबर अपराध मामले में गिरफ्तारी से पहले जमानत दायर की गई, जिसमें याचिकाकर्ता पर सॉफ्टवेयर लिंक देने का आरोप लगाया गया, जो नकली कर रसीदें तैयार करता था।जस्टिस अनूप चितकारा ने कहा कि जांच में देरी के लिए याचिकाकर्ता को जमानत नहीं मिल...

अडल्ट्री तलाक का आधार, लेकिन यह बच्चे की कस्टडी से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
अडल्ट्री तलाक का आधार, लेकिन यह बच्चे की कस्टडी से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अडल्ट्री तलाक का आधार है लेकिन यह बच्चे की कस्टडी से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस राजेश पाटिल ने अडल्ट्री के आधार पर अपनी अलग रह रही पत्नी से अपनी नौ वर्षीय बेटी की कस्टडी की मांग करने वाले पूर्व विधायक के बेटे द्वारा दायर रिट याचिका खारिज कर दी।अदालत ने कहा"अडल्ट्री किसी भी मामले में तलाक का आधार है लेकिन यह कस्टडी न देने का आधार नहीं हो सकता।"अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के जनवरी 2024 के फैसले पर भरोसा किया, जिसमें विवाहेतर संबंध के आरोपों के साबित...

कर्नाटक हाइकोर्टने धन के दुरुपयोग के आरोपी राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष के खिलाफ आगे की जांच पर रोक लगाई
कर्नाटक हाइकोर्टने धन के दुरुपयोग के आरोपी राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष के खिलाफ आगे की जांच पर रोक लगाई

कर्नाटक हाइकोर्ट ने कर्नाटक राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष विशाल रघु के खिलाफ आगे की जांच पर रोक लगा दी, जिन पर कई लाख रुपये के सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का आरोप है।जस्टिस एस विश्वजीत शेट्टी की सिंगल बेंच ने अंतरिम राहत देते हुए कहा,"याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रार्थना के अनुसार अंतरिम रोक रहेगी। प्रतिवादी नंबर 2 को आपत्तियों का बयान दर्ज करने और आदेश में संशोधन की मांग करने की स्वतंत्रता दी जाती है, राज्य सरकार के लिए HCGP द्वारा नोटिस स्वीकार किया जाता है।"रघु ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा...

[Stamp Act] धारा 47-ए (3) गिफ्ट डीड के मामले में लागू नहीं होगी क्योंकि बाजार मूल्य संपत्ति के मूल्य के समान नहीं है : इलाहाबाद हाईकोर्ट
[Stamp Act] धारा 47-ए (3) गिफ्ट डीड के मामले में लागू नहीं होगी क्योंकि "बाजार मूल्य" "संपत्ति के मूल्य" के समान नहीं है : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना है कि जहां संपत्ति गिफ्ट डीड के माध्यम से स्थानांतरित की गई है वहां भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 47-ए (3) को लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि धारा 47-ए उन उपकरणों पर लागू होती है जहां स्टाम्प शुल्क "बाजार मूल्य" पर निर्धारित किया गया है, न कि "संपत्ति के मूल्य" पर जैसा कि गिफ्ट डीड में होता है।भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 47-ए में प्रावधान है कि यदि किसी लिखित में बताई गई संपत्ति का बाजार मूल्य अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम मूल्य से कम है, तो पंजीकरण अधिकारी ...

पीड़िता के मृत्यु के समय दिए गए कई बयान एक-दूसरे के विपरीत, सुसंगत नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने 35 साल पुराने बलात्कार मामले में आरोपी को बरी किया
पीड़िता के मृत्यु के समय दिए गए कई बयान एक-दूसरे के विपरीत, सुसंगत नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने 35 साल पुराने बलात्कार मामले में आरोपी को बरी किया

हाल ही में, राजस्थान हाईकोर्ट ने 1989 से बलात्कार के एक मामले में सभी आरोपियों को इस आधार पर बरी कर दिया कि पीड़िता द्वारा दिए गए कई मृत्युपूर्व बयान एक-दूसरे के अनुरूप नहीं थे। इस तरह के मृत्यु पूर्व बयानों के आधार पर दोषसिद्धि जो भौतिक विवरणों में विपरीत हैं, असुरक्षित साबित हो सकती है, कोर्ट ने भद्रगिरि वेंकट रवि बनाम आंध्र प्रदेश के लोक अभियोजक उच्च न्यायालय (2013) पर भरोसा करते हुए दोहराया।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल जज बेंच ने इस बात पर भी जोर दिया कि मृतक के मृत्युपूर्व बयान दर्ज...

बिना किसी विरोध के पूर्ण और अंतिम निपटारे के बाद भुनाए गए चेक, राजस्थान हाईकोर्ट ने मध्यस्थता से किया इनकार
बिना किसी विरोध के 'पूर्ण और अंतिम निपटारे' के बाद भुनाए गए चेक, राजस्थान हाईकोर्ट ने मध्यस्थता से किया इनकार

राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर बेंच ने माना है कि मध्यस्थ की नियुक्ति की मांग करने वाले आवेदन को अनुमति नहीं दी जाएगी यदि पार्टियों ने पहले ही पूर्ण और अंतिम समझौता कर लिया है, और आवेदक ने विरोध या आपत्ति के बिना निपटान राशि को भुना लिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में, विवाद को गैर-मध्यस्थ माना जाएगा।चीफ़ जस्टिस मणींद्र मोहन श्रीवास्तव की पीठ ने आगे स्पष्ट किया कि मध्यस्थ की नियुक्ति की मांग करने वाली याचिका को तुच्छ माना जाएगा यदि यह पक्षों के बीच पूर्ण और अंतिम निपटान और निपटान के हिस्से के रूप...

शराब के व्यापार का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने पंजाब आबकारी नीति 2024-25 को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
शराब के व्यापार का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं': पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने पंजाब आबकारी नीति 2024-25 को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

शराब के व्यापार का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है, पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने पंजाब आबकारी नीति 2024-2025 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की।यह तर्क दिया गया कि वर्ष 2024-2025 के लिए आबकारी नीति के अनुसार शराब की दुकानों के लिए आवेदन शुल्क बढ़ाकर 75,000 कर दिया गया, जो वापस नहीं किया जाएगा, जो अनुचित है, क्योंकि दुकानों का आवंटन लॉट के माध्यम से किया जाता है।जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने कहा,"इस न्यायालय का दृढ़ मत है कि शराब के व्यापार का अधिकार मौलिक...

SC/ST आयोग के पास SBI को अनुकंपा के आधार पर व्यक्ति को नियुक्त करने की सिफारिश करने का कोई अधिकार नहीं: कर्नाटक हाइकोर्ट
SC/ST आयोग के पास SBI को अनुकंपा के आधार पर व्यक्ति को नियुक्त करने की सिफारिश करने का कोई अधिकार नहीं: कर्नाटक हाइकोर्ट

कर्नाटक हाइकोर्ट ने माना कि कर्नाटक राज्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग भारतीय स्टेट बैंक को अनुकंपा के आधार पर प्रतिवादी को रोजगार प्रदान करने की सिफारिश नहीं कर सकता।जस्टिस सचिन शंकर मगदुम की सिंगल जज बेंच ने भारतीय स्टेट बैंक द्वारा दायर याचिका स्वीकार करते हुए आयोग का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें बैंक को चेतना सदाशिव कंबले सेवानगर को रोजगार प्रदान करने की सिफारिश की गई थी।पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और इस न्यायालय ने कई निर्णयों में लगातार माना है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति...

महेंद्रगढ़ स्कूल बस दुर्घटना: सुरक्षा दिशा-निर्देशों की अवहेलना करने पर शीर्ष अधिकारियों को दंडित करने के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट में अवमानना ​​याचिका दायर
महेंद्रगढ़ स्कूल बस दुर्घटना: सुरक्षा दिशा-निर्देशों की अवहेलना करने पर शीर्ष अधिकारियों को दंडित करने के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट में अवमानना ​​याचिका दायर

स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए नीति सुरक्षित स्कूल वाहन नीति के क्रियान्वयन पर न्यायालय के आदेश की कथित रूप से अवहेलना करने के लिए हरियाणा के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​याचिका दायर की गई।11 अप्रैल को हरियाणा के महेंद्रगढ़ में भयानक दुर्घटना में 6 छात्रों की मौत हो गई, जब कथित रूप से नशे में धुत स्कूल बस चालक ने बस को पेड़ से टकरा दिया।बाल क्रांति ट्रस्ट द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि हरियाणा सरकार के प्रधान सचिव, परिवहन आयुक्त और अन्य शीर्ष अधिकारी हाइकोर्ट के निर्देश के बाद नीति...

क्या धारा 29ए का आवेदन वाणिज्यिक न्यायालय में दायर किया जा सकता है या केवल हाईकोर्ट में दायर किया जा सकता है? बॉम्बे हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने मामले को बड़ी बेंच को रेफर किया
क्या धारा 29ए का आवेदन वाणिज्यिक न्यायालय में दायर किया जा सकता है या केवल हाईकोर्ट में दायर किया जा सकता है? बॉम्बे हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने मामले को बड़ी बेंच को रेफर किया

बॉम्बे हाईकोर्ट (गोवा बेंच) ने हाईकोर्ट की दो समन्वय पीठों के परस्पर विरोधी विचारों को देखते हुए वाणिज्यिक न्यायालय के समक्ष मध्यस्थता के विस्तार की मांग करने वाली धारा 29ए आवेदन के सुनवाई योग्य होने के मुद्दे को एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया है। जस्टिस भरत पी ​​देशपांडे की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि ए एंड सी अधिनियम की धारा 29ए में न केवल मध्यस्थ के जनादेश का विस्तार शामिल है, बल्कि मध्यस्थ की फीस के प्रतिस्थापन, समाप्ति और कटौती से संबंधित प्रश्न भी शामिल हैं, इसलिए, अधिनियम की धारा 11 के तहत दी गई...

कलकत्ता हाइकोर्ट ने गर्मी की छुट्टियों के अंत तक वकीलों को एडवोकेट गाउन पहनने से छूट दी
कलकत्ता हाइकोर्ट ने गर्मी की छुट्टियों के अंत तक वकीलों को एडवोकेट गाउन पहनने से छूट दी

कोलकाता शहर में चल रही भीषण गर्मी और तापमान के 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुँचने के मद्देनजर कलकत्ता हाइकोर्ट ने अधिसूचना जारी किया। उक्त अधिसूचना में कहा गया कि न्यायालय में उपस्थित होने वाले वकीलों को गर्मी के महीनों के दौरान एडवोकेट गाउन पहनने से छूट दी जाएगी।इससे पहले कर्नाटक हाइकोर्ट और अन्य हाइकोर्ट ने भी बढ़ते तापमान को ध्यान में रखते हुए इसी तरह के आदेश पारित किए।चीफ जस्टिस शिवगनम के निर्देश पर हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने इसी तरह का निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया।नोटिस में कहा...

जानबूझकर किया गया धार्मिक अपमान: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भगवान शिव पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोपी व्यक्ति को राहत देने से इनकार किया
'जानबूझकर किया गया धार्मिक अपमान': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भगवान शिव पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोपी व्यक्ति को राहत देने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज सोशल मीडिया पर भगवान शिव के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोपी ओवैस खान के खिलाफ एक आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया और इसे "जानबूझकर किया गया धार्मिक अपमान" बताया। न्यायालय ने कहा कि धार्मिक भावनाएं नागरिकों के लिए अत्यधिक महत्व रखती हैं, और ऐसी भावनाओं को अपमानित करने या विघटित करने के उद्देश्य से किया गया कोई भी कार्य सहिष्णुता और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का "गंभीर अपमान" है।अदालत ने कहा कि आरोपी की हरकतें, जो धार्मिक भावनाओं के प्रति "घोर उपेक्षा"...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रेमिका के चचेरे भाई का सिर काटने के दोषी व्यक्ति की उम्रकैद की सजा निलंबित की, जमानत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रेमिका के चचेरे भाई का सिर काटने के दोषी व्यक्ति की उम्रकैद की सजा निलंबित की, जमानत दी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में अपनी प्रेमिका के चचेरे भाई की सिर काटकर हत्या करने के दोषी व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा निलंबित कर दी और जमानत दे दी। जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस श्याम सी चांडक की खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया अभियोजन पक्ष के मामले को इस हद तक खारिज कर दिया कि पानी से भरे स्थान पर पाए जाने के बावजूद हत्या के हथियार में मानव खून था।19 जून, 2018 को पुणे के कोंढावा के एक निवासी को एक आदमी का बिना सिर वाला शव मिला, जिसके शरीर पर केवल अंडरवियर था। बाद में शव की पहचान उमेश इंगले के रूप में...

[साइबर अपराध] यदि आईटी अधिनियम के तहत धाराएं अपराध के सभी तत्वों को संबोधित नहीं करती हैं तो सा‌थ में आईपीसी को लागू किया जा सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट पूर्ण पीठ
[साइबर अपराध] यदि आईटी अधिनियम के तहत धाराएं अपराध के सभी तत्वों को संबोधित नहीं करती हैं तो सा‌थ में आईपीसी को लागू किया जा सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट पूर्ण पीठ

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 साइबर अपराधों को संबोधित करने के लिए एक विशेष अधिनियम है और इसका अत्यधिक प्रभाव पड़ता है, लेकिन यह उन मामलों में आईपीसी के आवेदन को नहीं रोकता है, जहां आईटी अधिनियम के तहत अपराधों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया है। अदालत ने माना कि धारा 43 (कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाने के लिए जुर्माना) सहपठित धारा 66 (धोखाधड़ी या बेईमानी से कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाना) और आईटी अधिनियम की धारा 72 (गोपनीयता और निजता का उल्लंघन)...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को एसडीएम द्वारा 3 दिनों के लिए अवैध रूप से हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 25,000 रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को 'एसडीएम' द्वारा 3 दिनों के लिए अवैध रूप से हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 25,000 रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ‌पिछले हफ्ते जौनपुर जिले में तैनात सब-ड‌िविजनल मजिस्ट्रेट के 'मनमाने' कृत्य के कारण तीन दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखे गए एक व्यक्ति को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस सुरेंद्र सिंह-प्रथम की पीठ ने शिव कुमार वर्मा और अन्य बनाम यूपी राज्य और 3 अन्य 2021 के मामले में हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर व्यक्ति/याचिकाकर्ता को 10,000 रुपये की मुकदमेबाजी लागत का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।खंडपीठ ने यह आदेश रमेश चंद गुप्ता द्वारा दायर...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अनुमति के बिना पिता के लिए प्रचार करने के आरोपी सपा नेता के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अनुमति के बिना पिता के लिए प्रचार करने के आरोपी सपा नेता के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते समाजवादी पार्टी नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री की बेटी श्रेया वर्मा के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दिया। श्रेया के खिलाफ 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में आवश्यक अनुमति के बिना अपने पिता के लिए प्रचार करने के आरोप में आपराधिक कार्यवाही शुरु की गई थी। जस्टिस शमीम अहमद की पीठ ने वर्मा और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 171 एच और 188 के तहत एफआईआर दर्ज करने में खामियां पाईं। उन्होंने देखा कि इस मामले में पुलिस जांच अधिकार क्षेत्र के बिना थी, और ऐसी...

सेशन कोर्ट सीआरपीसी की धारा 319 के चरण तक प्रतीक्षा किए बिना अभी तक आरोप-पत्र दाखिल नहीं किए गए अभियुक्तों के विरुद्ध संज्ञान ले सकता है: राजस्थान हाइकोर्ट
सेशन कोर्ट सीआरपीसी की धारा 319 के चरण तक प्रतीक्षा किए बिना अभी तक आरोप-पत्र दाखिल नहीं किए गए अभियुक्तों के विरुद्ध संज्ञान ले सकता है: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सेशन कोर्ट सीआरपीसी की धारा 319 के तहत निर्धारित चरण तक प्रतीक्षा किए बिना पुलिस द्वारा अभी तक आरोप-पत्र दाखिल नहीं किए गए अभियुक्तों के विरुद्ध संज्ञान ले सकता है।संबंधित केस कानूनों की विस्तृत चर्चा के बाद जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल जज बेंच इस निष्कर्ष पर पहुंची कि एडिशनल सेशन कोर्ट ने मूल अधिकार क्षेत्र की अदालत के रूप में मजिस्ट्रेट द्वारा मामले को सौंपे जाने के बाद सीआरपीसी की धारा 193 के तहत शेष अभियुक्तों के विरुद्ध सही ढंग से संज्ञान...

दिल्ली हाइकोर्ट ने 26 साल पहले कथित तौर पर हत्या करने के लिए आजीवन कारावास की सजा पाए आरोपियों को बरी किया
दिल्ली हाइकोर्ट ने 26 साल पहले कथित तौर पर हत्या करने के लिए आजीवन कारावास की सजा पाए आरोपियों को बरी किया

26 साल से अधिक पहले हत्या के आरोपी दो व्यक्तियों की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को पलटते हुए दिल्ली हाइकोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया, जबकि यह फैसला सुनाया कि पीड़ित के साथ अंतिम बार साथ देखा जाना अपराध के लिए अपर्याप्त आधार है।जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस मनोज जैन ने ट्रायल कोर्ट के अक्टूबर 2001 के फैसले के खिलाफ अपील पर अपने फैसले में कहा कि तथ्य यह है कि आरोपी और पीड़ित ने एक साथ काम किया, जिसका मतलब है कि उनका एक साथ होना जरूरी नहीं था। उन्होंने गवाहों की गवाही की...

मृतक सरकारी कर्मचारी के परिवार के सदस्य अनुकंपा नियुक्ति के लिए बार-बार दावा नहीं कर सकते: केरल हाइकोर्ट
मृतक सरकारी कर्मचारी के परिवार के सदस्य अनुकंपा नियुक्ति के लिए बार-बार दावा नहीं कर सकते: केरल हाइकोर्ट

केरल हाइकोर्ट ने कहा कि अधिकारियों से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे मृतक कर्मचारी के कानूनी उत्तराधिकारियों को अनुकंपा के आधार पर लगातार नियुक्ति प्रदान करें।जस्टिस ईश्वरन एस. ने कहा,"यह नहीं माना जा सकता कि अनुकंपा नियुक्ति की योजना परिवार के सदस्यों को नियुक्ति के लिए बार-बार दावा करने की अनुमति देती है। हमें यह याद रखना चाहिए कि अनुकंपा नियुक्ति, नियुक्ति का तरीका नहीं है। इसका उद्देश्य केवल मृतक के परिवार को हुई गरीबी से उबरना है।"मामले के तथ्यों के अनुसार याचिकाकर्ता मृतक आर. बालचंद्रन...