हाईकोर्ट
पैकेज्ड कमोडिटीज रूल्स के तहत पैकेजिंग आवश्यकताओं से छूट का दावा करने के लिए कोई वैधानिक आधार नहीं, पेप्सिको को पालन करना होगा: तेलंगाना हाईकोर्ट
चीफ़ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस अनिल कुमार जुकांती की तेलंगाना हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पेप्सिको द्वारा दायर एक रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें वजन और माप मानक (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 1977 के नियम 6 (1) (ए) द्वारा अनिवार्य कुछ पैकेजिंग आवश्यकताओं के तहत छूट का दावा किया गया था।मामला नियम 6 (1) (ए) में लाए गए संशोधन से संबंधित थी, जिसमें पैकेजों पर नाम और पते की घोषणा के बारे में आवश्यकताओं को निर्दिष्ट किया गया था, विशेष रूप से आयातित पैकेजों और पैकर्स के रूप में कार्य करने वाली कंपनियों के...
सिंहस्थ टेरर अलार्म: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खुद को मुस्लिम बताने और छात्रावास में विस्फोटक रखने के दोषी व्यक्ति को राहत देने से इनकार किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2016 में उज्जैन में एक हॉस्टल के कमरे में विस्फोटक रखने के दोषी सुशील मिश्रा की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने तर्क दिया कि दोषी की संलिप्तता स्थापित करने के लिए परीक्षण पहचान परेड पर्याप्त थी। अदालत के कहा, चूंकि अपीलकर्ता ने छात्रावास में कमरा फर्जी मुस्लिम पहचान पत्र का उपयोग करके लिया था। ताकि सिंहस्थ मेले में मुस्लिम संगठन की भागीदारी दिखाकर उज्जैन में सांप्रदायिक अशांति पैदा की जा सके। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की सिंगल जज बेंच ने कहा कि...
गिरफ्तारी के बावजूद मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के अरविंद केजरीवाल के व्यक्तिगत फैसले से MCD स्कूल के स्टूडेंट को किताबों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि गिरफ्तारी के बावजूद मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का अरविंद केजरीवाल का निर्णय उनका "व्यक्तिगत निर्णय" है, लेकिन उनकी अनुपलब्धता MCD स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के रास्ते में नहीं आ सकती। उनकी नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें, लेखन सामग्री और वर्दी तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी।एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत पीएस अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा कि राष्ट्रीय हित और सार्वजनिक हित की मांग कि इस पद पर रहने वाला कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक या अनिश्चित...
BREAKING | दिल्ली हाईकोर्ट ने PM Modi को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को हिंदू और सिख देवी-देवताओं और पूजा स्थलों के नाम पर कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए वोट मांगने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छह साल के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।यह याचिका पेशे से वकील आनंद एस जोंधले ने दायर की थी।जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि याचिका पूरी तरह से गलत है, क्योंकि याचिकाकर्ता ने माना है कि आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। हालांकि, "इस अदालत के लिए किसी भी शिकायत पर विशेष दृष्टिकोण अपनाने के लिए ECI को निर्देश देना...
कानून आईवीएफ की इच्छुक विवाहित या अविवाहित महिला के बीच अंतर नहीं करता; शुक्राणु/अंडाणु दंपति का ही हो, यह आवश्यक नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में माना कि इन-विट्रियो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के मामलों में यह अनिवार्य नहीं कि शुक्राणु या अंडाणु आईवीएफ की इच्छुक दंपति का ही हो। जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य की सिंगल जज बेंच ने सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 [Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021] के तहत मौजूद नियमों का अवलोकन किया और एक पति की याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसने किशोर उम्र की अपनी बेटी को खोने के बाद आईवीएफ के माध्यम से संतनोत्पत्ति की मांग...
दिल्ली हाइकोर्ट ने PMLA Act की धारा 66 की आधिकारिक व्याख्या की मांग करने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से किया इनकार
दिल्ली हाइकोर्ट ने सोमवार को PMLA Act की धारा 66 की आधिकारिक व्याख्या की मांग करने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया कि ED पुलिस और CBI पर एजेंसियों के साथ साझा की गई जानकारी के आधार पर अपराध के तहत एफआईआर दर्ज करने का दबाव बना रहा है।एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं अशोक कुमार सिंह और अन्य व्यक्ति को उचित कार्यवाही में उचित अदालतों के समक्ष व्याख्या का मुद्दा उठाने की स्वतंत्रता दी।एक्ट की धारा 66 ED को...
अस्थायी पैरोल अवधि से अधिक समय तक रहना कैदियों के नियमों के नियम 14(सी) के तहत स्थायी पैरोल दिए जाने पर रोक नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने हाल ही में माना कि अस्थायी पैरोल अवधि से अधिक समय तक रहना राजस्थान कैदी (पैरोल पर रिहाई) नियम, 1958 के नियम 14(सी) के तहत स्थायी पैरोल प्राप्त करने पर रोक नहीं लगाया जा सकता।जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने कहा कि पैरोल अवधि से अधिक समय तक रहना 1958 के नियमों के नियम 14(सी) में निहित प्रतिबंधों के बराबर नहीं माना जा सकता। नियम 14(सी) में कहा गया कि जेल या पुलिस हिरासत से भागने वाले या हिरासत से भागने का प्रयास करने वाले कैदियों को स्थायी पैरोल नहीं दी...
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने मुस्लिम विवाह एवं तलाक अधिनियम निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने हाल ही में असम सरकार से 24 जून तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा, जिसमें असम मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण अधिनियम 1935 (Assam Muslim Marriages and Divorces Registration Act of 1935) निरस्त करने को चुनौती दी गई।चीफ जस्टिस विजय बिश्नोई और जस्टिस सुमन श्याम की खंडपीठ ने ऑल असम मुस्लिम विवाह एवं तलाक रजिस्ट्रार और काजी एसोसिएशन द्वारा दायर रिट याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।सेंटिनल ने रिपोर्ट की,“याचिकाकर्ताओं ने बताया कि विवाह एवं तलाक अधिनियम को निरस्त करने से एक...
जीवन जीने का अधिकार सभी को प्राप्त: Live-In Relationship में रहने वाली नाबालिग लड़की की सुरक्षा याचिका पर पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट
यह देखते हुए कि केवल इसलिए कि याचिकाकर्ता विवाह योग्य आयु के नहीं हैं, इससे उन्हें उनके मौलिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता, पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने नाबालिग लड़की को बाल गृह भेजने का निर्देश दिया, जो अपने 19 वर्षीय लिव-इन पार्टनर के साथ अपने रिश्तेदारों से सुरक्षा की मांग कर रही थी।उसे बाल गृह भेजने का निर्देश देते हुए न्यायालय ने कहा कि लड़की नाबालिग है, इसलिए अदालत के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह माता-पिता के रूप में नाबालिग के हित में क्या सर्वोत्तम है इसकी जांच करे।जस्टिस हरकेश...
हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट ने वकीलों के उपस्थित न होने के कारण मामले में बहस बंद की
जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस बिपिन सी नेगी की खंडपीठ द्वारा पारित सख्त आदेश में हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट ने राज्य में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देने वाले मामले में निजी प्रतिवादियों के लिए बहस बंद की।न्यायालय ने देखा कि अपनी दलीलें पेश करने के लिए बार-बार अवसर और समय दिए जाने के बावजूद निजी प्रतिवादियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने में विफल रहे या अपनी जिम्मेदारी से भागे रहे है।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने निजी...
Loksabha Election: पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ रहे Congress प्रत्याशी ने अपने खिलाफ दर्ज FIR रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया
युवा कांग्रेस नेता दिव्यांशु बुद्धिराजा ने आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश न होने के आरोप में उनके खिलाफ दर्ज मामला रद्द करने की मांग करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट का रुख किया।दिव्यांशु बुद्धिराजा हरियाणा की करनाल लोकसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री एमएल खट्टर के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।याचिका में कहा गया कि बुद्धिराजा पर 2018 में राजनीतिक प्रतिशोध के कारण सार्वजनिक संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3-ए के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन्हें 2021 में इस मामले में जमानत दे...
Bhojshala Temple-Kamal Maula Mosque Dispute | ASI ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट सौंपने के लिए 8 और सप्ताह का समय मांगा
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष आवेदन दायर कर भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद सर्वेक्षण पर अपनी रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 8 और सप्ताह का समय मांगा। हाईकोर्ट ने 11 मार्च को एएसआई को 6 सप्ताह में सर्वे रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।अपने आवेदन में ASI ने प्रस्तुत किया कि जटिल और परिधीय क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण प्रगति पर है, जिसमें वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है और ASI टीम पूरे स्मारक का विस्तृत दस्तावेजीकरण कर रही है।हालांकि, एप्लिकेशन में कहा गया...
Cyber Crime | बैंक अधिकारियों का आपराधिक जांच में सहयोग करना दायित्व: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बैंक अधिकारियों को साइबर अपराधों (Cyber Crime) की आपराधिक जांच में पूरा सहयोग करना चाहिए।जस्टिस अजय भनोट की पीठ ने आलोक झा द्वारा दायर दूसरी जमानत याचिका को अनुमति देते हुए कहा,"बैंक अधिकारियों से कानून का पालन करने वाले नागरिक होने की उम्मीद की जाती है, जो पुलिस द्वारा की जा रही आपराधिक जांच में सहयोग करने के लिए कानून के दायित्व के तहत हैं।"साइबर अपराध के मामले में आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420, 406, 419, 467, 468, 471, 411 और आईटी अधिनियम की धारा...
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति चुनाव प्रक्रिया को दूषित करते हैं; यदि वे निर्वाचित होते हैं तो वे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अपहरण और जबरन वसूली मामले (नमामि गंगे परियोजना प्रबंधक के) के सिलसिले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह को जमानत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के भाग लेने के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया।अपनी सजा पर रोक लगाने से इनकार करते हुए अपने 35 पेज के आदेश में जस्टिस संजय कुमार सिंह ने चुनावी प्रक्रिया में आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों द्वारा उत्पन्न खतरों पर भी प्रकाश डाला।न्यायालय ने टिप्पणी की,“आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति चुनाव की प्रक्रिया को दूषित करते हैं,...
अपहरण और जबरन वसूली मामले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह को मिली जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को पूर्व सांसद धनंजय सिंह को (नमामि गंगे परियोजना प्रबंधक के) अपहरण और जबरन वसूली मामले में जमानत दे दी। हालांकि, न्यायालय ने उनकी दोषसिद्धि को निलंबित करने या रोक लगाने की उनकी याचिका अस्वीकार कर दी।सिंह और उनके सहयोगी संतोष विक्रम सिंह को पिछले महीने एमपी/एमएलए अदालत ने 7 साल कैद की सजा सुनाई थी। अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए सिंह और उनके सहयोगी हाईकोर्ट में चले गए।इस बात पर जोर देते हुए कि राजनीति में शुचिता आवश्यक है, जस्टिस संजय सिंह की पीठ ने कहा कि अदालतों...
दिल्ली हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी को अपनी शादी में शामिल होने के लिए दो सप्ताह की पैरोल दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए और आजीवन कारावास की सजा पाए व्यक्ति को अपनी सगाई समारोह और शादी में शामिल होने के लिए दो सप्ताह की पैरोल दी।जस्टिस अमित शर्मा ने दोषी राहुल देव की याचिका स्वीकार कर ली, जिसे 2014 में भारतीय दंड संहिता, 1860 (आईपीसी) की धारा 302 और 201 के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराया गया।देव को अगस्त 2014 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।उसने पैरोल पर रिहा होने के लिए याचिका दायर की, क्योंकि उसकी सगाई और शादी क्रमशः 24 और 30 अप्रैल को राष्ट्रीय राजधानी के...
सीआरपीसी की धारा 256 के तहत मजिस्ट्रेट की शक्ति का उपयोग कम से कम किया जाना चाहिए, 'रैक से डॉकेट हटाने के सांख्यिकीय उद्देश्यों' के लिए नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में सीआरपीसी की धारा 256 के तहत मजिस्ट्रेट की शक्तियों पर विस्तार से चर्चा की, जिसका उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए और निश्चित निष्कर्ष पर आधारित होना चाहिए कि शिकायतकर्ता अब आरोपी पर मुकदमा नहीं चलाना चाहता।अदालत ने कहा कि ऐसी शक्ति का उपयोग 'रैक से डॉकेट हटाने' जैसे सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए 'मनमाने ढंग से' और 'यांत्रिक रूप से' नहीं किया जाना चाहिए। इसने रेखांकित किया कि इस तरह के कठोर कदम न्याय के उद्देश्य को कमजोर कर देंगे।यह मामला एन.आई. एक्ट की...
मैला ढोने के खिलाफ कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें: बॉम्बे हाईकोर्ट का राज्य को निर्देश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में ग्रेटर मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और मीरा-भायंदर नगर निगमों से मैला ढोने वालों के रूप में रोजगार के निषेध और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी।इन नगर निगमों को पूरे राज्य से जानकारी एकत्र करने के पहले चरण में जानकारी प्रस्तुत करनी होगी।उत्तर हलफनामे में यह बताना होगा कि क्या राज्य निगरानी समिति, सतर्कता समितियां, राज्य स्तरीय सर्वेक्षण समिति, जिला स्तरीय सर्वेक्षण समिति और मंडल स्तर पर उप-मंडल समिति...
सहकारी समिति के कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, मातृत्व लाभ अधिनियम जैसे श्रम कल्याण विधानों के तहत लाभ के हकदार: केरल हाइकोर्ट
केरल हाइकोर्ट ने माना कि केरल सहकारी समिति अधिनियम के तहत काम करने वाले कर्मचारी श्रम विधानों- केरल दुकानें और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1960, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948, मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 और केरल औद्योगिक प्रतिष्ठान (राष्ट्रीय और त्यौहारी अवकाश) अधिनियम, 1958 के तहत लाभ के हकदार हैं।जस्टिस मुरली पुरुषोत्तमन ने कहा कि केरल सहकारी समिति अधिनियम, पद सृजन, नियुक्ति के लिए योग्यता, नियुक्ति की विधि, वेतन का भुगतान, पदोन्नति और सेवानिवृत्ति जैसी समिति के भीतर कर्मचारियों की सेवा की...
दिल्ली हाइकोर्ट ने न्यायिक अकादमी कोर्स में जेंडर समानता को शामिल करने का आह्वान किया, कहा- छिपे हुए पूर्वाग्रह निष्पक्ष निर्णयों के दुश्मन
दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि जेंडर समानता और सांस्कृतिक विविधता जैसे मुद्दों को दिल्ली न्यायिक अकादमी कोर्स का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, यह देखते हुए कि छिपे हुए पूर्वाग्रह निष्पक्ष और न्यायसंगत निर्णयों के दुश्मन हैं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि न्यायिक शिक्षा और ट्रेनिंग, न केवल कानूनी सिद्धांतों पर बल्कि अदालत के सामने आने वाले लोगों की विविध पृष्ठभूमि और जीवित वास्तविकताओं को समझने पर केंद्रित है, समाज की रूढ़िवादी सोच को बदलने में लंबा रास्ता तय करेगा, क्योंकि इसके परिणामस्वरूप बेहतर...




















