हाईकोर्ट

हाईकोर्ट सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दोषी को परिवीक्षा पर रिहा नहीं कर सकता, जब उसकी अपील सत्र न्यायालय में लंबित हो: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
हाईकोर्ट सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दोषी को परिवीक्षा पर रिहा नहीं कर सकता, जब उसकी अपील सत्र न्यायालय में लंबित हो: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि लापरवाही से मौत के लिए धारा 304-ए के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति को सत्र न्यायालय में अपील लंबित होने पर हाईकोर्ट परिवीक्षा पर रिहा करने पर विचार नहीं कर सकता। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि वैकल्पिक उपाय उपलब्ध है, इसलिए दोषी सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटा सकता।कोर्ट ने कहा,“इसलिए, सीआरपीसी की धारा 482 में निहित प्रतिबंध, हाईकोर्ट में निहित अधिकार क्षेत्र के कारण, तब लागू नहीं होता, जब कोई वैकल्पिक...

दिल्ली हाईकोर्ट ने कैदी अंकित गुज्जर हत्या मामले में तिहाड़ जेल के पूर्व अधिकारी को जमानत देने से किया इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने कैदी अंकित गुज्जर हत्या मामले में तिहाड़ जेल के पूर्व अधिकारी को जमानत देने से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में तिहाड़ जेल के पूर्व उपाधीक्षक को कैदी अंकित गुज्जर की हत्या के मामले में जमानत देने से इनकार किया। 29 वर्षीय कथित गैंगस्टर अंकित गुज्जर 2021 में जेल के अंदर मृत पाया गया था।जस्टिस सुधीर कुमार जैन ने अपराध की प्रकृति और गंभीरता तथा गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की संभावना को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन जेल अधिकारी नरेंद्र मीना को जमानत देने से इनकार किया।अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे पता चले कि मुकदमे में देरी अगर कोई हुई...

धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 1978 के तहत मसौदा नियमों को छह महीने के भीतर अंतिम रूप दें: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार से कहा
धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 1978 के तहत मसौदा नियमों को छह महीने के भीतर अंतिम रूप दें: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार से कहा

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश राज्य से कहा कि वह अरुणाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 1978 की धारा 8 के तहत नियमों को छह महीने के भीतर अंतिम रूप दे।जस्टिस कर्दक एटे और जस्टिस बुदी हाबुंग की खंडपीठ ने कहा“हम उम्मीद करते हैं कि संबंधित अधिकारी अपने दायित्वों के प्रति सचेत रहेंगे। मसौदा नियमों को आज से 6(छह) महीने की अवधि के भीतर अंतिम रूप दे दिया जाएगा।”न्यायालय जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें यह मुद्दा उठाया गया कि राज्य के अधिकारी अरुणाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता...

किराए की राशि या वृद्धि के बारे में किसी वैध विवाद के अभाव में किरायेदार बॉम्बे किराया अधिनियम की धारा 12(3)(ए) के तहत बेदखली से बच नहीं सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
किराए की राशि या वृद्धि के बारे में किसी वैध विवाद के अभाव में किरायेदार बॉम्बे किराया अधिनियम की धारा 12(3)(ए) के तहत बेदखली से बच नहीं सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किराएदार द्वारा मानक किराए या अनुमत वृद्धि की राशि के बारे में किसी विवाद के अभाव में, किराएदार बॉम्बे किराया अधिनियम की धारा 12(3)(ए) के तहत बेदखली से बच नहीं सकता है, यदि किराए का भुगतान निर्दिष्ट समय के भीतर नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा,“इसलिए, मेरे विचार में, मांग नोटिस प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर धारा 11(3) के तहत मानक किराए के निर्धारण के लिए आवेदन दायर करके मानक किराए या अनुमत वृद्धि की राशि के बारे में प्रतिवादी द्वारा बनाए गए किसी भी वैध विवाद के...

1984 के सिख विरोधी दंगे: Congress नेता जगदीश टायलर की हत्या के आरोप के खिलाफ याचिका पर 29 नवंबर को होगी सुनवाई
1984 के सिख विरोधी दंगे: Congress नेता जगदीश टायलर की हत्या के आरोप के खिलाफ याचिका पर 29 नवंबर को होगी सुनवाई

कांग्रेस नेता जगदीश टायलर ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान तीन व्यक्तियों की हत्या से संबंधित मामले में उनके खिलाफ हत्या के आरोप तय किए जाने को चुनौती देते हुए मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने मामले की सुनवाई की और मामले को 29 नवंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। हालांकि, अदालत ने आज याचिका पर नोटिस जारी नहीं किया।टायलर की ओर से सीनियर एडवोकेट अरविंद निगम पेश हुए। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का प्रतिनिधित्व एसपीपी अनुपम एस शर्मा और अधिवक्ता...

दिल्ली सरकार के आरोपपत्र में संदिग्ध कॉलम शामिल करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका, हाईकोर्ट ने प्रधान सचिव को निर्णय लेने का निर्देश दिया
दिल्ली सरकार के आरोपपत्र में संदिग्ध कॉलम शामिल करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका, हाईकोर्ट ने प्रधान सचिव को निर्णय लेने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव (गृह) को निर्देश दिया कि वह आपराधिक मामले में संदिग्ध का विवरण शामिल करने के लिए पुलिस आरोपपत्र में शामिल कॉलम 12 की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को प्रतिनिधित्व के रूप में विचार करें।याचिकाकर्ता जमशेद अंसारी ने यह घोषित करने की मांग की कि दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित अंतिम रिपोर्ट फॉर्म का कॉलम 12 मनमाना है। यह दंड प्रक्रिया संहिता (CrPc) की धारा 173(2) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 में इसके संगत धारा 193(3) के तहत वैधानिक...

हिंदुत्व वॉच अकाउंट को ब्लॉक करने का केंद्र का फैसला अनुपातहीन: X ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया
हिंदुत्व वॉच अकाउंट को ब्लॉक करने का केंद्र का फैसला अनुपातहीन: X ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया

X कॉर्प (ट्विटर) के नाम से जाना जाता था, ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष दलील दी है कि केंद्र सरकार द्वारा हिंदुत्व वॉच अकाउंट को ब्लॉक करने का फैसला अनुपातहीन है। यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत निर्धारित सीमाओं से परे है।याचिका में अकाउंट को बहाल करने और ब्लॉक करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड पेश करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई।ब्लॉकिंग आदेश तब पारित किया गया, जब केंद्र सरकार ने एक्स को नोटिस जारी किया, जिसमें उन यूआरएल की सूची संलग्न की गई, जिन्हें वह ब्लॉक करना...

आरोपी को डिफ़ॉल्ट जमानत का अधिकार नहीं, न्यायालय 60 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी करने में विफल रहा: बॉम्बे हाईकोर्ट
आरोपी को डिफ़ॉल्ट जमानत का अधिकार नहीं, न्यायालय 60 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी करने में विफल रहा: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि कोई व्यक्ति सिर्फ़ इस आधार पर डिफ़ॉल्ट जमानत का हकदार नहीं है कि मामले की सुनवाई दंड प्रक्रिया संहिता (CrPc) की धारा 437 (6) के तहत निर्धारित 60 दिनों के भीतर पूरी नहीं हुई।औरंगाबाद पीठ में बैठे जस्टिस संजय मेहरे की एकल पीठ ने धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले में आरोपी महिला को जमानत देने से इनकार किया।पीठ ने याचिकाकर्ता लताबाई जाधव की मुख्य दलील पर गौर किया, जिन्होंने तर्क दिया कि वह डिफ़ॉल्ट जमानत की हकदार हैं, क्योंकि निचली अदालत मामले को साक्ष्य के लिए...

धारा 193(9) BNSS ने ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना पुलिस रिपोर्ट दाखिल करने के बाद आगे की जांच पर रोक लगाई: राजस्थान हाईकोर्ट
धारा 193(9) BNSS ने ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना पुलिस रिपोर्ट दाखिल करने के बाद आगे की जांच पर रोक लगाई: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 193(9) के प्रावधान के आलोक में जहां पुलिस ने मुख्य आरोपी के खिलाफ जांच के बाद पहले ही रिपोर्ट दाखिल की, ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना आगे कोई जांच नहीं की जा सकती।धारा 193 जांच पूरी होने पर पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट के बारे में बात करती है और धारा 193(9) में नीचे लिखा,“(9) इस धारा में कोई भी बात किसी अपराध के संबंध में आगे की जांच को बाधित करने वाली नहीं मानी जाएगी, जब उपधारा (3) के तहत रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को भेज दी...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंस्टाग्राम पर धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने वाली पोस्ट पर अभद्र भाषा के आरोप में दर्ज FIR खारिज करने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंस्टाग्राम पर धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने वाली पोस्ट पर अभद्र भाषा के आरोप में दर्ज FIR खारिज करने से किया इनकार

अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने के लिए धारा 153A आईपीसी के तहत दर्ज FIR रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि व्यक्ति का यह बचाव कि पोस्ट उसके अकाउंट को हैक करके अपलोड की गई थी, इस स्तर पर विचार नहीं किया जा सकता।संदर्भ के लिए आईपीसी की धारा 153ए धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और सद्भाव बनाए रखने के लिए हानिकारक कार्य करने से संबंधित है।जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया की एकल...

विशेष न्यायाधीश, लोक अभियोजक प्रथम दृष्टया POCSO मामले में लापरवाही के दोषी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले को DNA रिपोर्ट पर विचार करने के लिए वापस भेजा
विशेष न्यायाधीश, लोक अभियोजक प्रथम दृष्टया POCSO मामले में लापरवाही के दोषी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले को DNA रिपोर्ट पर विचार करने के लिए वापस भेजा

यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के एक मामले की सुनवाई करते हुए, जहां DNA रिपोर्ट पर साक्ष्य नहीं लिया गया था, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट और अतिरिक्त जिला लोक अभियोजक (ADPO) दोनों ही प्रथम दृष्टया लापरवाही और कर्तव्य में लापरवाही के दोषी हैं।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस देवनारायण मिश्रा की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा,"हमने पाया कि राज्य के लिए मुकदमा चलाने वाले ADPO ने हमें ज्ञात नहीं कारणों से DNA रिपोर्ट प्रदर्शित न करने का विकल्प चुना, जो...

पीड़ित पिता की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट ने ईशा फाउंडेशन के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का ब्यौरा मांगा
पीड़ित पिता की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट ने ईशा फाउंडेशन के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का ब्यौरा मांगा

अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने के लिए धारा 153A आईपीसी के तहत दर्ज FIR रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि व्यक्ति का यह बचाव कि पोस्ट उसके अकाउंट को हैक करके अपलोड की गई थी, इस स्तर पर विचार नहीं किया जा सकता।संदर्भ के लिए आईपीसी की धारा 153ए धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और सद्भाव बनाए रखने के लिए हानिकारक कार्य करने से संबंधित है।जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया की एकल...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने SC/ST Act के गलत प्रावधान के तहत गिरफ्तार किशोर को दी गई अग्रिम जमानत रद्द करने से इनकार किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने SC/ST Act के गलत प्रावधान के तहत गिरफ्तार किशोर को दी गई अग्रिम जमानत रद्द करने से इनकार किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) 1989 अधिनियम (SC/ST Act) के गलत प्रावधान के तहत सेशन कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्य के साथ दुर्व्यवहार करने और उस पर हमला करने के आरोपी किशोर को दी गई जमानत रद्द करने से इनकार किया।सेशन कोर्ट ने पुलिस द्वारा लागू किए गए SC/ST Act की धारा 3 (1) (आर) के प्रावधान पर विचार करते हुए आरोपी को कथित तौर पर जमानत दी थी, जो किसी भी स्थान पर सार्वजनिक दृश्य में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को अपमानित...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रेड यूनियन का नाम बदलकर एमपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन जैसा दिखने वाला रजिस्ट्रार का आदेश रद्द किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रेड यूनियन का नाम बदलकर एमपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन जैसा दिखने वाला रजिस्ट्रार का आदेश रद्द किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार के एक आदेश को रद्द कर दिया, जिसने मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा एक याचिका दायर करने के बाद एक ट्रेड यूनियन को अपना नाम बदलने की अनुमति दी थी।ऐसा करते हुए अदालत ने कहा कि ट्रेड यूनियन अधिनियम की धारा 25 (2) के तहत रजिस्ट्रार को यह सत्यापित करना होगा कि एक ट्रेड यूनियन का नाम दूसरे के नाम से इतना मिलता-जुलता नहीं है कि यह जनता को धोखा दे सकता है, यह कहते हुए कि वर्तमान मामले में रजिस्ट्रार का आदेश "तर्कहीन" था। जस्टिस जीएस...

पत्नी को गुजारा भत्ता की बकाया राशि का भुगतान करने तक पति द्वारा शुरू की गई तलाक की कार्यवाही पर अदालतें रोक लगा सकती हैं: कर्नाटक हाईकोर्ट
पत्नी को गुजारा भत्ता की बकाया राशि का भुगतान करने तक पति द्वारा शुरू की गई तलाक की कार्यवाही पर अदालतें रोक लगा सकती हैं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि अदालतें पति द्वारा शुरू की गई तलाक की कार्यवाही पर तब तक रोक लगा सकती हैं जब तक कि वह अदालत के आदेश के अनुसार पत्नी को रखरखाव राशि का बकाया भुगतान नहीं कर देता।हाईकोर्ट ने अलग रह रही पत्नी की याचिका को स्वीकार कर लिया और निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें अंतरिम गुजारा भत्ता की बकाया राशि का भुगतान नहीं करने के लिए पति द्वारा शुरू की गई तलाक की कार्यवाही पर रोक लगाने की उसकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। जस्टिस ललिता कन्नेगांती की एकल पीठ ने अपने...

गुजरात हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने और पत्नी के साथ क्रूरता करने के मामले में पति को बरी करने के फैसले को 15 साल बाद पलट दिया, पत्नी के मृत्यु पूर्व बयान को बरकरार रखा
गुजरात हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने और पत्नी के साथ क्रूरता करने के मामले में पति को बरी करने के फैसले को 15 साल बाद पलट दिया, पत्नी के 'मृत्यु पूर्व बयान' को बरकरार रखा

गुजरात हाईकोर्ट ने पत्नी के मृत्यु पूर्व कथन पर भरोसा करते हुए, क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी पति को बरी करने के 15 साल पुराने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलटते हुए कहा कि पत्नी की मानसिक स्थिति के बारे में चिकित्सा अधिकारी द्वारा अनुमोदन न किए जाने मात्र से ही यह कथन अस्वीकार्य नहीं हो जाता। लक्ष्मण बनाम महाराष्ट्र राज्य (2002) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मार्गदर्शक सिद्धांतों का हवाला देते हुए, जस्टिस निशा ठाकोर की एकल न्यायाधीश पीठ ने अपने आदेश में कहा, "माननीय सुप्रीम...

Commercial Courts Act की धारा 12-A के तहत मध्यस्थता समाप्त किए बिना उल्लंघन से जुड़े IPR सूट आमतौर पर स्थापित किए जा सकते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट
Commercial Courts Act की धारा 12-A के तहत मध्यस्थता समाप्त किए बिना उल्लंघन से जुड़े IPR सूट आमतौर पर स्थापित किए जा सकते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 की धारा 12-A के तहत निर्धारित पूर्व-मुकदमा मध्यस्थता को दरकिनार करके तत्काल अंतरिम राहत की याचिका को केवल वाद से स्पष्ट धोखाधड़ी या झूठ के मामलों में खारिज किया जा सकता है।उल्लंघन या पारित होने से जुड़े आईपीआर मुकदमों के संबंध में, न्यायालय ने कहा कि इस तरह के मुकदमे आमतौर पर सीसी अधिनियम की धारा 12-A के तहत पूर्व-मुकदमा मध्यस्थता आवश्यकता को समाप्त किए बिना स्थापित किए जा सकते हैं। जस्टिस आरआई छागला की एकल न्यायाधीश पीठ मूल...

CrPC की धारा 145 के तहत कार्यवाही संपत्ति का कब्जा वसूलने का विकल्प नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
CrPC की धारा 145 के तहत कार्यवाही संपत्ति का कब्जा वसूलने का विकल्प नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि CrPC की धारा 145 के तहत कार्यवाही का उपयोग संपत्ति के कब्जे को पुनर्प्राप्त करने के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता है, जब विवाद संपत्ति के शीर्षक से संबंधित हो।जस्टिस जावेद इकबाल वानी की पीठ ने जोर देकर कहा कि CrPC की धारा 145 का दायरा यह निर्धारित करने तक सीमित है कि आवेदन दाखिल करने के समय या उससे दो महीने पहले किस पक्ष का कब्जा था, बिना इसमें शामिल पक्षों के स्वामित्व या अधिकारों पर विचार किए। यह मामला जम्मू में एक दुकान पर कब्जे को...