हाईकोर्ट
जब अभियोजन पक्ष बलात्कार साबित करने में असमर्थ हो तो चुप रहने के अधिकार का प्रयोग करने वाला आरोपी यह साबित करने के लिए बाध्य नहीं है कि सहमति ली गई थी: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि बलात्कार के मामले में सहमति के बचाव को साबित करना अभियुक्त का कर्तव्य नहीं है, तथा यदि अभियोजन पक्ष स्वयं अपना मामला साबित करने में असमर्थ है, तो चुप रहने के उसके अधिकार का प्रयोग पर्याप्त होगा। न्यायालय ने कहा कि चूंकि अभियुक्त के चुप रहने के अधिकार से अभियोजन पक्ष पर यौन संबंध के दौरान सहमति न होने को साबित करने का भार बढ़ जाएगा; यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है, तो अभियोजन पक्ष का मामला अपने आप ही भारी हो जाएगा। न्यायालय ने कहा कि यदि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से...
धारा 11 याचिका में सीमा पर आपत्ति पर विचार करते समय अधिकार क्षेत्र के बिना न्यायालय के समक्ष सद्भावपूर्ण कार्यवाही में बिताया गया समय बहिष्कृत किया: दिल्ली हाईकोर्ट
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने धारा 11 याचिका पर सुनवाई करते हुए माना कि याचिकाकर्ता के दावे को केवल इसलिए मृत नहीं माना जा सकता, क्योंकि उन्होंने अधिकार क्षेत्र के बिना न्यायालय के समक्ष सद्भावपूर्ण कार्यवाही में समय बिताया।तथ्यप्रतिवादी ने याचिकाकर्ता के पक्ष में JMD SUBURIO, सेक्टर-67, सोहना रोड, गुड़गांव, हरियाणा में अग्नि-शमन प्रणाली के डिजाइन, निर्माण, आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण, कमीशनिंग और सौंपने के लिए कुल 1.69 करोड़ रुपये का कार्य आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता ने...
2022 आगजनी मामला | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोग्य घोषित किए गए SP MLA इरफान सोलंकी को जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को समाजवादी पार्टी (SP) के अब अयोग्य घोषित किए गए विधायक इरफान सोलंकी को 2022 के घर में आगजनी के मामले में जमानत दी, जिसमें उन्हें इस साल जून में कानपुर की एक स्पेशल कोर्ट ने सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।जस्टिस राजीव गुप्ता और जस्टिस सुरेंद्र सिंह की पीठ ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे 20 नवंबर को सीसामऊ सीट के लिए निर्धारित उपचुनाव का रास्ता साफ हो गया।सोलंकी, उनके भाई और दो अन्य को 2022 में एक महिला के घर में आग लगाने के लिए दोषी...
दिल्ली हाईकोर्ट ने हथियार डीलर संजय भंडारी को राहत देने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने कर चोरी और धन शोधन के आरोपी हथियार डीलर संजय भंडारी की याचिका खारिज की, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के संबंध में स्पेशल कोर्ट के समन आदेश को चुनौती दी गई थी।जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा की एकल पीठ ने टिप्पणी की कि भंडारी अदालत में साफ हाथों से नहीं आया, क्योंकि उसने ED को यूनाइटेड किंगडम में अपना पता नहीं बताया।भंडारी के फरार होने और अपने वर्तमान ठिकाने का खुलासा नहीं करने पर गौर करते हुए न्यायालय ने कहा कि धारा 482 CrPC के तहत अधिकार...
प्रशासनिक देरी से कर्मचारियों के वादे के मुताबिक वेतनमान पाने के अधिकार को नकारा नहीं जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट की जस्टिस वैभवी डी. नानावती की पीठ ने एक फैसले में कहा कि गुजरात राज्य को सरकारी प्रस्तावों के अनुसार पदोन्नति और वेतन समायोजन के अधूरे वादों के बाद, कार्य सहायक संवर्ग के सदस्यों को उनके कार्यकाल के आधार पर उच्च वेतनमान प्रदान करना चाहिए। न्यायालय ने पाया कि वेतन-मान समायोजन को लागू करने में देरी के कारण दिए गए वेतन की राज्य द्वारा वसूली गैरकानूनी है। निर्णय में नियमित वेतन और पदोन्नति उन्नयन में अनावश्यक देरी न करने के राज्य के कर्तव्य पर जोर दिया गया। इसने "निरंतर गलत"...
एक जुलाई, 2024 के बाद दायर की गई जमानत याचिकाएं, आपराधिक याचिकाएं, जिनकी एफआईआर उस डेट से पहले दर्ज की गई थी, बीएनएसएस द्वारा शासित होंगी: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि एक जुलाई, 2024 से पहले यानी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) के लागू होने से पहले दर्ज एफआईआर के संबंध में एक जुलाई, 2024 के बाद दायर सभी गिरफ्तारी-पूर्व जमानत, नियमित जमानत और आपराधिक याचिकाएं क्रमशः बीएनएसएस की धारा 482, 483 और 528 के तहत दायर की जा सकती हैं। चीफ जस्टिस विजय बिश्नोई और जस्टिस देवाशीष बरुआ की खंडपीठ गुवाहाटी हाईकोर्ट (ईटानगर स्थायी पीठ) की एकल न्यायाधीश पीठ द्वारा निम्नलिखित मुद्दे पर दिए गए संदर्भ पर सुनवाई कर रही थी, "यदि...
साक्ष्य अधिनियम की धारा 108 के तहत सिविल मृत्यु की अदालती घोषणा से मृत्यु की तारीख और समय के बारे में अनुमान नहीं लगाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 108 के तहत किसी व्यक्ति की सिविल मृत्यु की घोषणा करने से उसकी मृत्यु की तिथि और समय के बारे में अनुमान नहीं लगाया जा सकता। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने आगे कहा कि धारा 108 की धारणा मृत्यु की घोषणा करने का एकमात्र तरीका नहीं है और किसी पक्ष को यह साबित करने का अधिकार है कि मृत्यु की तिथि और समय सात साल से पहले है। खंडपीठ ने कहा, "यदि मृत्यु की तिथि या समय के बारे में कोई मुद्दा उठता है तो उसे प्रत्यक्ष...
किसी अन्य ब्रांड की उभरी हुई बीयर की बोतलों का दोबारा इस्तेमाल करके अपना बीयर उत्पाद बेचना ट्रेडमार्क का उल्लंघन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुरानी बीयर की बोतलों, जिन पर किसी अन्य कंपनी का ब्रांड नाम/लोगो अंकित है, का दोबारा उपयोग करके अपना बीयर उत्पाद बेचना ट्रेडमार्क उल्लंघन है। इस प्रकार जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस प्रणय वर्मा की खंडपीठ ने माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज लिमिटेड की पुरानी बोतलों में दो बीयर कंपनियों की बिक्री पर रोक लगा दी, जिन पर उनके बीयर ब्रांड 'स्टॉक' और उनके लोगो, पांडा का चेहरा अंकित है।उन्होंने कहा, “भले ही निजी प्रतिवादी अपीलकर्ताओं द्वारा निर्मित बोतलों पर अपने स्वयं...
गायों के 'अवैध परिवहन' को रोकने के लिए निजी व्यक्ति नाकाबंदी नहीं कर सकताः हरियाणा पुलिस ने जारी कि निर्देश, हाईकोर्ट को दी जानकारी
हरियाणा पुलिस ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट को बताया है कि उन्होंने राज्य की पुलिस इकाइयों के प्रमुखों को निर्देश जारी किए हैं कि वे इस बात का प्रचार करें कि गायों के कथित अवैध परिवहन के संबंध में कानून के तहत निजी व्यक्तियों द्वारा नाकाबंदी की अनुमति नहीं है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऐसी अवैध गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। हरियाणा पुलिस ने आगे निर्देश दिया है कि "निजी व्यक्तियों द्वारा नाकाबंदी या किसी अन्य अवैध गतिविधि पर सख्ती से अंकुश लगाया...
राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय श्रम न्यायाधिकरण को विवाद रेफरल तभी वैध होगा जब केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत किया गया हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने घोषित किया कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के कैंटीन कर्मचारी, तीसरे पक्ष के कैंटीन संचालक के साथ अनुबंध के अस्तित्व के बावजूद, कंपनी के प्रत्यक्ष कर्मचारी थे। हालांकि, न्यायालय ने फैसला सुनाया कि HAL और कैंटीन संचालक के बीच अनुबंध "दिखावा" था या नहीं, यह सवाल न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, क्योंकि इसका उल्लेख संदर्भ में नहीं किया गया था। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने माना कि HAL के लिए केंद्र सरकार "उपयुक्त सरकार"...
दिल्ली हाईकोर्ट ने ANI के विकिपीडिया पेज को एडिट करने वाले यूजर्स को समन जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को समाचार एजेंसी एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल (ANI) के विकिपीडिया पेज को कथित रूप से एडिट करने वाले तीन व्यक्तियों को समन जारी किया।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद विकिपीडिया प्लेटफ़ॉर्म को होस्ट करने वाले विकिमीडिया फ़ाउंडेशन के विरुद्ध ANI द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई कर रहे ।इस सप्ताह की शुरुआत में खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के आदेश के विरुद्ध विकिपीडिया की अपील का निपटारा किया, जिसमें ANI के बीच सहमति आदेश के बाद इसे तीन व्यक्तियों के सब्सक्राइबर विवरण का खुलासा करने का...
कर्नाटक हाईकोर्ट MUDA Scame Case में अनुमोदन आदेश के खिलाफ सीएम सिद्धारमैया की अपील पर सुनवाई करेगा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार (14 नवंबर) को कहा कि वह अगले शनिवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अपील पर सुनवाई करेगा, जिसमें एकल न्यायाधीश पीठ के आदेश को चुनौती दी गई, जिसने कथित मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) घोटाले में उनके खिलाफ जांच के लिए मंजूरी/अनुमोदन देने के राज्यपाल के फैसले को बरकरार रखा।चीफ जस्टिस एन वी अंजारिया और जस्टिस के वी अरविंद की खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी की सुनवाई के बाद, जिन्होंने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह कार्यालय...
पहला बन्दूक का बड़ा आकार दूसरे हथियार के लिए लाइसेंस मांगने का आधार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने व्यक्ति का आवेदन खारिज करने वाले सक्षम प्राधिकारी के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया। दूसरा बंदूक लाइसेंस इस आधार पर मांगा गया था कि उसके पास जो पहली लाइसेंसी बंदूक थी वह 12 बोर की बंदूक है जो उसके लिए ले जाने के लिए बहुत भारी थी।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि भारत में हथियार रखने का अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और यूनाइटेड किंगडम (UK) के इस अधिकार की तुलना में पूरी तरह से अलग है। यह माना गया कि किसी को भी हथियार रखने का मौलिक अधिकार नहीं है, खासकर तब जब...
दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक नामा, मुबारत समझौते आदि के आधार पर मुस्लिम विवाह को भंग करने के लिए पारिवारिक न्यायालयों को निर्देश जारी किए
दिल्ली हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत न्यायेतर तलाक के माध्यम से विवाह विच्छेद के लिए पारिवारिक न्यायालय अधिनियम की धारा 7 के तहत दायर किसी भी याचिका पर विचार करते समय राष्ट्रीय राजधानी में पारिवारिक न्यायालयों के मार्गदर्शन के लिए निर्देश पारित किए हैं। जस्टिस रेखा पल्ली और जस्टिस सौरभ बनर्जी की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि पारिवारिक न्यायालय प्रतिवादी को नोटिस जारी करने के बाद दोनों पक्षों के बयान दर्ज करेगा। न्यायालय ने निर्देश दिया कि जहां तलाक की शर्तें किसी समझौते यानी तलाक नामा, खुला...
भंगी', 'नीच', 'भिखारी', 'मंगनी' जातिसूचक शब्द नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने SC/ST Act के तहत आरोप हटाये
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने कुछ व्यक्तियों को संबोधित करते समय 'भंगी', 'नीच', 'भिखारी', 'मंगनी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोपी चार लोगों के खिलाफ SC/ST Act के तहत आरोप हटाये। कोर्ट ने कहा कि ये शब्द जातिसूचक नहीं हैं और न ही ऐसा कोई आरोप है कि चारों व्यक्ति बाद वाले की जाति जानते हैं।ऐसा करते हुए न्यायालय ने यह भी पाया कि जांच के बाद पुलिस ने आरोप को सत्य नहीं पाया। हालांकि न्यायालय ने कहा कि लोक सेवकों को उनके सार्वजनिक कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने के आरोप में आपराधिक मुकदमा...
दहेज हत्या | जब अपराध घर के अंदर किया जाता है तो सबूत का प्रारंभिक बोझ अभियोजन पक्ष पर होता है, हालांकि डिग्री हल्की हो जाती है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के तहत, अभियोजन पक्ष द्वारा मूल तथ्यों को साबित किए बिना मृतक की मृत्यु का कारण बताने के लिए अपीलकर्ता से अपेक्षा करना कानून की अनुचित व्याख्या होगी। न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष को दहेज की मांग को लेकर कथित हत्या में अपीलकर्ता और अन्य की संलिप्तता को दर्शाने वाले आधारभूत तथ्य स्थापित करने होंगे, तभी धारा 106 लागू हो सकती है।जस्टिस आशुतोष कुमार और जस्टिस जितेंद्र कुमार की खंडपीठ ने कहा, "साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के आवेदन...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने क्रेडिट कार्ड घोटाले पर सलाह मांगने वाली महिला को कथित तौर पर धोखा देने के लिए 'ऑनलाइन कानूनी सेवा' कंपनी के खिलाफ मामला रद्द करने से इनकार किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक 'कानूनी सेवा' ऑनलाइन कंपनी के मालिकों के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द करने से इनकार कर दिया, जिन्होंने कथित तौर पर एक महिला को धोखा दिया था, जो क्रेडिट कार्ड घोटाले की शिकार थी और उसने रिपोर्ट करने में मदद के लिए Google के माध्यम से उनसे संपर्क किया था। जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने कहा,"ऐसा प्रतीत होता है कि एक वेबसाइट, जिसका नाम https://www.onlinelegalindia.com है, के बैनर तले उक्त कंपनी ने कई लोगों को उसी तरह से धोखा दिया है, जैसा कि विपक्षी पार्टी नंबर 2 को धोखा...
निचले स्तर के कर्मचारियों से अतिरिक्त भुगतान की वसूली अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: पटना हाईकोर्ट ने बाल विकास परियोजना अधिकारी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
पटना हाईकोर्ट ने दोहराया कि निचले सेवा स्तर जैसे कि तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से अतिरिक्त भुगतान की वसूली करना अन्यायपूर्ण है। इससे नियोक्ता को मिलने वाले किसी भी पारस्परिक लाभ से अधिक उन पर अनुचित बोझ पड़ेगा।इस मामले की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने इस बात पर जोर दिया,"सेवा के निचले स्तर के कर्मचारी अपनी पूरी कमाई अपने परिवार के भरण-पोषण और कल्याण में खर्च करते हैं। यदि उनसे इस तरह का अतिरिक्त भुगतान वसूलने की अनुमति दी जाती है तो इससे नियोक्ता को मिलने वाले...
साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत बरामदगी के संबंध में अनिवार्य सुरक्षा उपायों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए जांच अधिकारियों को निर्देश दें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी डीजीपी को निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य के डीजीपी को निर्देश दिया कि वे जांच अधिकारियों को निर्देश जारी करें कि वे धारा 27 के तहत साक्ष्य में पढ़ी जाने वाली बरामदगी से संबंधित अनिवार्य सुरक्षा उपायों का अनुपालन सुनिश्चित करें। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस डॉ गौतम चौधरी की पीठ ने साक्ष्य बरामदगी के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने में जांच अधिकारियों की चूक के कारण अभियोजन मामलों को अक्सर खारिज करने पर चिंता व्यक्त करते हुए इस बात पर जोर दिया कि इन सुरक्षा उपायों का पालन न करने को...
बॉम्बे हाईकोर्ट का 1956 से पहले मरने वाले पिता की संपत्ति में बेटी के उत्तराधिकार पर अहम फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि पिता की मृत्यु हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के लागू होने से पहले हो गई हो तो बेटी को अपने पिता की संपत्ति में कोई सीमित या पूर्ण उत्तराधिकार अधिकार नहीं होगा।जस्टिस अतुल चंदुरकर और जस्टिस जितेंद्र जैन की खंडपीठ ने एक संदर्भ का उत्तर दिया- क्या एक बेटी हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के लागू होने से पहले अपने मृत पिता की संपत्ति में उत्तराधिकार के माध्यम से कोई सीमित या पूर्ण अधिकार प्राप्त कर सकती है जिनकी मृत्यु 1956 से पहले हो गई हो और जो...




















