मौखिक टिप्पणियों को सनसनीखेज बनाने पर हाईकोर्ट ने लगाई मीडिया को फटकार, कहा- ऐसा रहा तो बातचीत बंद कर देंगे

Amir Ahmad

23 Jan 2026 12:20 PM IST

  • मौखिक टिप्पणियों को सनसनीखेज बनाने पर हाईकोर्ट ने लगाई मीडिया को फटकार, कहा- ऐसा रहा तो बातचीत बंद कर देंगे

    दिल्ली हाइकोर्ट ने न्यूज़लॉन्ड्री की पत्रकार मनीषा पांडे से जुड़ी मौखिक टिप्पणियों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और सनसनीखेज सुर्खियां बनाने पर कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रति कड़ी नाराज़गी जताई। हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियों को संदर्भ से अलग कर पेश किया गया जिससे पत्रकार के खिलाफ नफरत भरे संदेश फैलाए गए।

    जस्टिस सी. हरि शंकर ने कहा कि अदालत का मनीषा पांडे के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन अदालत की टिप्पणी को अलग पोस्टर के रूप में सोशल मीडिया पर फैलाया गया, जिसके बाद उनके खिलाफ हजारों नफरत भरे संदेश आए।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस हरि शंकर ने कहा,

    “कल की सुनवाई में कुछ कड़ी टिप्पणियां की गईं लेकिन हमारा उद्देश्य उस पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई करना या उनके करियर को नुकसान पहुंचाना नहीं था। हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि हम मनीषा पांडे के खिलाफ कोई कार्रवाई करने का इरादा नहीं रखते।”

    यह मामला टीवी टुडे समूह की ओर से दायर उस अपील से जुड़ा है, जिसमें न्यूज़लॉन्ड्री पर मानहानि और कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप लगाया गया। टीवी टुडे के स्वामित्व में इंडिया टुडे और आज तक जैसे समाचार चैनल आते हैं। इस मामले में न्यूज़लॉन्ड्री ने भी क्रॉस अपील दायर की। इस सुनवाई में जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला भी पीठ का हिस्सा थे।

    पिछली सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि टीवी टुडे, न्यूज़लॉन्ड्री की आलोचना को लेकर जरूरत से ज्यादा संवेदनशील रवैया अपना रहा है और जिन 75 वीडियो को आपत्तिजनक बताया गया, उनमें से केवल एक ही वीडियो प्रथम दृष्टया आपत्तिजनक प्रतीत होता है। इसी वीडियो को लेकर, जिसे मनीषा पांडे ने एंकर किया था, अदालत की कुछ टिप्पणियां मीडिया में व्यापक रूप से रिपोर्ट की गईं।

    इन रिपोर्टों का जिक्र करते हुए जस्टिस हरि शंकर ने कहा,

    “हम मीडिया की आवाज दबाना नहीं चाहते और न ही यह कह रहे हैं कि अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग न की जाए। लेकिन रिपोर्टिंग करते समय उसके परिणामों को भी ध्यान में रखना चाहिए। कल की सुनवाई का एक पैरा अलग निकालकर सोशल मीडिया पर फैलाया गया, जिसके बाद हजारों नफरत भरे संदेश आए। कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं बनना चाहता, जिसके कारण नफरत फैले।”

    उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की रिपोर्टिंग से यह धारणा बन जाती है कि जज किसी के खिलाफ कार्रवाई करने वाले हैं या लोगों की नौकरी जाने वाली है। अगर इसका यही नतीजा रहा तो अदालत को वकीलों से संवाद करना बंद करना पड़ सकता है।

    जस्टिस हरि शंकर ने यह भी कहा कि उनके कुछ सहकर्मी जजों ने अब बिल्कुल भी मौखिक टिप्पणी न करने का फैसला कर लिया।

    उन्होंने स्पष्ट किया,

    “हम फिर दोहराते हैं कि पत्रकार मनीषा पांडे के खिलाफ कोई कार्रवाई करने का हमारा इरादा नहीं है। वह एक अच्छी पत्रकार हो सकती हैं। संबंधित बयान एक अपवाद भी हो सकता है। उनसे कहा जा सकता है कि उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।”

    हाइकोर्ट की इस टिप्पणी को न्यायिक कार्यवाही और मीडिया रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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