हाइकोर्ट की फटकार के अगले ही दिन मंत्री के बेटे ने किया आत्मसमर्पण, महाड दंगे मामले में बड़ी कार्रवाई

Amir Ahmad

23 Jan 2026 12:24 PM IST

  • हाइकोर्ट की फटकार के अगले ही दिन मंत्री के बेटे ने किया आत्मसमर्पण, महाड दंगे मामले में बड़ी कार्रवाई

    बॉम्बे हाइकोर्ट द्वारा महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाए जाने के एक दिन बाद महाड दंगा मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया। राज्य के कैबिनेट मंत्री भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले और इस मामले के अन्य आरोपियों ने स्थानीय पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह जानकारी गुरुवार को हाइकोर्ट को दी गई।

    जस्टिस माधव जामदार ने एक दिन पहले इस मामले में महाराष्ट्र सरकार की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विकास गोगावले की गिरफ्तारी न होने पर गंभीर सवाल उठाते हुए राज्य में “कानून के राज” पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया था। ज

    स्टिस जामदार ने यहां तक पूछ लिया था कि क्या मुख्यमंत्री इस मामले में “बेबस” हैं।

    क्या है मामला

    यह मामला 2 दिसंबर 2025 का है, जब रायगढ़ जिले के महाड नगर परिषद चुनाव के मतदान के दिन शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। इस दौरान मंत्री भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले और उनके चचेरे भाई महेश गोगावले के खिलाफ दंगा और मारपीट का मामला दर्ज किया गया।

    दोनों पक्षकारों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ FIR दर्ज की गई। विकास और महेश गोगावले की अग्रिम जमानत याचिकाएं निचली अदालत ने 23 दिसंबर 2025 को खारिज कीं।

    हाइकोर्ट में सुनवाई

    जस्टिस माधव जामदार के समक्ष एनसीपी नेता माणिकराव जगताप के बेटे श्रेयांश जगताप की अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई के लिए आई। 16 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि गोगावले बंधुओं की अग्रिम जमानत खारिज होने के बावजूद पुलिस ने उन्हें तलाशने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए।

    इसके बाद बुधवार को जब मामला फिर से सुनवाई के लिए आया तो जस्टिस जामदार ने एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे से पूछा कि पुलिस विकास गोगावले को कब तक गिरफ्तार करेगी। इस पर एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि विकास “लापता” है और उसे तलाशने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि आवश्यकता पड़ने पर गैर-जमानती वारंट और उद्घोषणा की कार्रवाई भी की जा सकती है।

    हालांकि, जस्टिस जामदार ने यह भी सवाल किया कि क्या पुलिस ने विकास के पिता और कैबिनेट मंत्री भरत गोगावले का बयान दर्ज किया और जब उनका बेटा फरार है, तो वह राज्य में मंत्री पद पर कैसे बने रह सकते हैं।

    एडवोकेट जनरल ने अदालत से समय मांगा और कहा कि विकास से संपर्क साधने के प्रयास जारी हैं। इस पर जस्टिस जामदार ने मामले को अगले दिन यानी गुरुवार के लिए सूचीबद्ध किया।

    गुरुवार को हाइकोर्ट को सूचित किया गया कि विकास गोगावले और अन्य आरोपियों ने स्थानीय पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। हाइकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद हुए इस घटनाक्रम को सरकार और पुलिस पर बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है।

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