दिल्ली हाइकोर्ट का आदेश: फिजिक्सवाला के खिलाफ अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट हटाए जाएं
Amir Ahmad
23 Jan 2026 2:07 PM IST

दिल्ली हाइकोर्ट ने शुक्रवार को ऑनलाइन शिक्षा मंच फिजिक्सवाला के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक और अपमानजनक पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया।
यह आदेश फिजिक्सवाला के पूर्व कर्मचारी निखिल कुमार सिंह द्वारा किए गए पोस्ट और वीडियो के संबंध में दिया गया।
जस्टिस ज्योति सिंह ने फिजिक्सवाला द्वारा दायर मानहानि वाद में यह अंतरिम निषेधाज्ञा पारित की।
फिजिक्सवाला ने निखिल कुमार सिंह और सोशल मीडिया मंचों के खिलाफ यह याचिका दायर करते हुए मानहानि के लिए 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की।
फिजिक्सवाला की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अमित सिब्बल ने अदालत को बताया कि यह मामला केवल मानहानि का नहीं बल्कि खुले तौर पर गाली-गलौज और अपशब्दों के इस्तेमाल का है।
उन्होंने कहा कि पूर्व कर्मचारी निखिल कुमार सिंह ने फिजिक्सवाला को “घोटाला” बताया और यूट्यूब वीडियो व सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से गंभीर आरोप लगाए।
अमित सिब्बल ने कहा,
“इन पोस्ट में कहा गया कि कंपनी 'भाई-भतीजावाद का पेड़' है। कर्मचारियों के नाम लेकर उनके खिलाफ आपत्तिजनक बातें कही गई।”
उन्होंने यह भी दलील दी कि फिजिक्सवाला के ट्रेडमार्क को भी नुकसान पहुंचाया गया और यह ट्रेडमार्क उल्लंघन का मामला भी है।
इस पर जस्टिस ज्योति सिंह ने निखिल कुमार सिंह के वकील से कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,
“आपके मुवक्किल की शब्दावली में शायद सिर्फ गालियां ही हैं। और आप इसका बचाव करना चाहते हैं?”
निखिल कुमार सिंह की ओर से यह तर्क दिया गया कि कई तीसरे पक्ष और मीडिया रिपोर्टों में भी फिजिक्सवाला के खिलाफ नकारात्मक टिप्पणियां हैं। उन्हें भी इस मामले में पक्षकार बनाया जाना चाहिए।
इस पर अदालत ने कहा,
“आपको अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करने की अनुमति किसने दी? बेहतर होगा कि आप यह कहें कि इन पोस्ट को हटा लिया जाएगा और भविष्य में ऐसा नहीं किया जाएगा। अगर मैं निषेधाज्ञा पारित करूंगी, तो कड़ी टिप्पणियां की जाएंगी और यह मामला साधारण नहीं रहेगा।”
इसके बाद हाइकोर्ट ने फिजिक्सवाला के वकील से आपत्तिजनक लिंक और पोस्ट की सूची देने को कहा ताकि उन्हें हटाने का अंतरिम आदेश पारित किया जा सके।
हाइकोर्ट ने निखिल कुमार सिंह के वकील को निर्देश दिया कि वह 30 दिनों के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करें और अंतरिम निषेधाज्ञा आवेदन पर दो सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करें।

