हाईकोर्ट
'मनमाना': राजस्थान हाईकोर्ट ने उस विधवा की नियुक्ति का आदेश दिया, जिसे वैवाहिक मुद्दे से जुड़े लंबित आपराधिक मामले के कारण पद से वंचित कर दिया गया था
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक विधवा उम्मीदवार को राहत प्रदान की है, जिसने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) के साक्षात्कार को सफलतापूर्वक पास कर लिया था, लेकिन वैवाहिक कलह से उत्पन्न लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर उसे नियुक्ति देने से इनकार कर दिया गया था। जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा कि लंबित आपराधिक कार्यवाही के बावजूद सर्कुलर में अयोग्यता के लिए एक शर्त निर्धारित की गई है, प्रशासनिक विवेक को अवतार सिंह बनाम भारत संघ के मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप काम करना...
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने YSR कांग्रेस नेता को SIT के समक्ष बयान देने के लिए वकील के साथ पेश होने की अनुमति दी, कहा- वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य नहीं, पुलिस के पास विवेकाधिकार
वाईएसआर कांग्रेस के सांसद पी.वी. मिधुन रेड्डी द्वारा ऑडियो-वीडियो माध्यम से जांच में अपने वकील की मौजूदगी में बयान दर्ज कराने की याचिका का निपटारा करते हुए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने दोहराया कि इस तरह के माध्यम से बयान दर्ज कराना अनिवार्य नहीं है और यह विवेकाधिकार पुलिस अधिकारी के पास है।हालांकि अदालत ने सांसद को दो वकीलों के साथ विजयवाड़ा के पुलिस आयुक्त के कार्यालय में जाने की अनुमति दी है; हालांकि, किसी भी समय, याचिकाकर्ता के साथ केवल एक वकील को ही उपस्थित रहने की अनुमति होगी। कोर्ट ने कहा,...
लंबे समय से नॉन-रोटेशनल सेवा दे रहे होमगार्ड अब 'स्वयंसेवक' नहीं, राज्य की ओर से शोषण देखना निराशाजनक: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जो होमगार्ड बिना किसी ब्रेक के अपनी तैनाती के बाद से ही गैर-रोटेशनल ड्यूटी पर थे, उन्हें "स्वयंसेवक" नहीं माना जा सकता, क्योंकि उनकी सेवा की असाधारण लंबी अवधि ने उनकी भूमिका को स्वैच्छिक से राज्य के साथ वास्तविक रोजगार में बदल दिया है। जस्टिस अरुण मोंगा की पीठ ने आगे कहा कि उनकी सेवाओं पर इतना अधिक निर्भर होने के बावजूद, राज्य उन्हें उचित सुरक्षा, पारिश्रमिक, नौकरी की सुरक्षा या सेवानिवृत्ति के बाद के लाभ दिए बिना लागत प्रभावी श्रमिक के रूप में शोषण कर रहा...
भर्ती मानदंड का आकलन करने के लिए NCTE विनियमन का अंग्रेजी संस्करण, हिंदी संस्करण पर प्रभावी होगा: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि विसंगति के मामले में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (मान्यता मानदंड और प्रक्रिया) विनियमन (एनसीटीई) का अंग्रेजी पाठ हिंदी संस्करण पर हावी रहेगा, क्योंकि विनियमन केंद्र द्वारा बनाया गया है, इसलिए इसका अंग्रेजी संस्करण लागू होगा। न्यायालय ने यह बात राज्य शिक्षा विभाग को एक महिला को मिडिल स्कूल टीचर/माध्यमिक शिक्षक के रूप में नियुक्त करने का निर्देश देते हुए कही, जिसे पहले इस आधार पर अस्वीकार कर दिया गया था कि वह 50% अंकों के साथ बी.एड. डिग्री के मानदंडों को पूरा...
बॉम्बे हाईकोर्ट के जजों ने वकील के आरोपों के बाद खुद को मामले से किया अलग, अवमानना नोटिस जारी और जांच के आदेश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक वकील द्वारा जजों पर प्रतिवादी के साथ मिलीभगत के आरोप लगाने को गंभीरता से लेते हुए खुद को उस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। साथ ही संबंधित वकील विजय कुर्ले को आपराधिक अवमानना का शोकॉज नोटिस जारी किया। इसके अलावा, महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल को उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए।जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने यह भी आदेश दिया कि भविष्य में यदि किसी भी मामले में वकील विजय कुर्ले उपस्थित हों तो वह मामला इन दो जजों के समक्ष न लाया जाए।न्यायालय...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वरिष्ठतम प्रोफेसर को प्रभार नहीं देने पर सरकारी कॉलेज प्राचार्य की नियुक्ति पर रोक लगाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी गर्ल्स कॉलेज के प्रिंसिपल के रूप में एक जूनियर प्रोफेसर की नियुक्ति पर इस आधार पर रोक लगा दी है कि प्रिंसिपल का प्रभार सबसे वरिष्ठ प्रोफेसर को देने के लिए परिपत्र के अनुसार प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। अदालत कॉलेज में कार्यरत सबसे वरिष्ठ प्रोफेसर बताए गए एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने प्रतिवादी की प्रिंसिपल के रूप में नियुक्ति को चुनौती दी थी।जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने कहा, "यह प्रतिवादियों को दिखाना है कि उन्हें याचिकाकर्ता से पहले...
इंस्टिट्यूट फॉर प्लाज्मा रिसर्च 'राज्य' नहीं, कर्मचारी रिट याचिका दायर नहीं कर सकते: गुजरात हाईकोर्ट
इंस्टिटयूट फॉर प्लाज्मा रिसर्च ने एक व्यक्ति की इंजीनियर के रूप में सर्विस समाप्त कर दी थी, जिसके खिलाफ उसने रिट पीटिशन दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। गुजरात हाईकोर्ट ने हाल में याचिका खारिज करने के उस फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह आधार दिया कि संस्थान एक स्वतंत्र और स्वायत्त निकाय है और केवल इसलिए कि यह परमाणु ऊर्जा विभाग के अधिकार क्षेत्र में है, इसे 'राज्य' नहीं कहा जा सकता है।न्यायालय एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कहा गया था कि...
सोशल मीडिया पोस्ट को लाइक करना उसे पोस्ट करने या शेयर करने के बराबर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी पोस्ट को लाइक करना उसे पोस्ट या शेयर करने के बराबर नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 [इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने के लिए दंड] के तहत अपराध नहीं होगा।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि किसी पोस्ट या संदेश को तब प्रकाशित कहा जा सकता है, जब उसे पोस्ट किया जाता है। किसी पोस्ट या मैसेज को तब प्रसारित कहा जा सकता है जब उसे शेयर या रीट्वीट किया जाता है।न्यायालय ने यह भी कहा कि IT...
भारत में वैवाहिक बलात्कार को मान्यता नहीं: हाईकोर्ट ने अप्राकृतिक यौन संबंध के आरोप में बरी करने का फैसला बरकरार रखा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने अप्राकृतिक यौन संबंध के आरोप में एक व्यक्ति को बरी करने के आदेश को बरकरार रखा।नवजीत सिंह जौहर बनाम भारत संघ विधि मंत्रालय में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उमंग सिंघार बनाम मध्य प्रदेश राज्य में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने कहा कि आज तक भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत वैवाहिक बलात्कार को मान्यता नहीं दी गई है।याचिकाकर्ता-पत्नी ने आरोप लगाया कि उसके साथ क्रूरता की गई दहेज की मांग की गई और अप्राकृतिक यौन...
सुप्रीम कोर्ट की नई केस वर्गीकरण प्रणाली को समझिए
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 21 अप्रैल, 2025 से प्रभावी केस वर्गीकरण की संशोधित प्रणाली शुरू की है। यह लगभग तीन दशकों में सुप्रीम कोर्ट के केस प्रबंधन का पहला बड़ा बदलाव है। इस सुधार से केस प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने और वकीलों और वादियों के लिए इसे अधिक कुशल, डेटा-संचालित और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने की उम्मीद है। ऐतिहासिक रूप से, सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर अपनी केस वर्गीकरण योजना को समायोजित किया था, लेकिन अंतिम प्रमुख व्यापक संशोधन वर्ष 1997 में लागू किया गया था, जिसके बाद छोटे-मोटे...
अस्थाई शिक्षक गैर-सरकारी शिक्षण संस्थान अधिनियम के तहत बर्खास्तगी को चुनौती दे सकते हैं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि राजस्थान गैर-सरकारी शिक्षण संस्थान अधिनियम, 1989 (Rajasthan Non-Government Educational Institutions Act) की धारा 19 के तहत अस्थायी कर्मचारियों की बर्खास्तगी के मामले में भी अपील सुनवाई योग्य है, क्योंकि अधिनियम की धारा 18 के तहत दिए गए आदेश का पालन नियमित और अस्थायी कर्मचारियों दोनों के मामले में किया जाना चाहिए।अधिनियम की धारा 18 संस्थानों में कर्मचारियों को हटाने, बर्खास्त करने या पद कम करने की प्रक्रिया मुहैया करती है।अधिनियम की धारा 19 में धारा 18 के तहत पारित...
मेडिकल बीमा दावे के निपटान में देरी मुआवज़ा मांगने का आधार हो सकती है, लेकिन यह आपराधिक अपराध नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
मेडिकल बीमा दावों के निपटान में देरी का सामना करने वाले रोगियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि दावों के निपटान की प्रक्रिया में देरी मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवज़ा मांगने का आधार हो सकती है, लेकिन यह आपराधिक अपराध नहीं है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने टिप्पणी की,"यह दर्ज करना उचित होगा कि मरीजों द्वारा अपने अंतिम बिलों का निपटान करने में कथित उत्पीड़न की ऐसी घटनाएं कोई अनकही कहानी नहीं हैं, बल्कि मरीजों को अक्सर इसका सामना करना पड़ता है। उनका उत्पीड़न इस तथ्य से और...
UP Revenue Code | सह-भूमिधर संयुक्त स्वामित्व के कानूनी बंटवारे के बाद ही अपने हिस्से के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन की मांग कर सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 80(1) या 80(2) के तहत गैर-कृषि भूमि उपयोग घोषणा का यह अर्थ नहीं है कि भूमि का सह-भूमिधरों के बीच बंटवारा हो चुका है।अधिनियम की धारा 80 (4) की व्याख्या करते हुए जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव और जस्टिस शेखर बी. सराफ की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अगर सह-भूमिधरों में से कोई एक संयुक्त स्वामित्व वाली भूमि के गैर-कृषि उपयोग के लिए आवेदन करना चाहता है तो या तो सभी सह-भूमिधरों को एक साथ आवेदन करना होगा, या अगर...
अनुचित आलोचना: विधेयकों की स्वीकृति के लिए सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा के विरुद्ध उपराष्ट्रपति की टिप्पणी
राज्यपाल द्वारा भेजे गए विधेयकों पर राष्ट्रपति द्वारा कार्रवाई करने के लिए समयसीमा निर्धारित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के विरुद्ध उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का तीखा हमला काफी अमानवीय है। उपराष्ट्रपति ने अपनी टिप्पणियों (हाल ही में दिए गए एक निर्णय द्वारा राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है। हम कहां जा रहे हैं? देश में क्या हो रहा है?) से ऐसा लग रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल यह कहकर देश के लिए विनाश का संकेत दे दिया है कि राष्ट्रपति को भेजे गए विधेयकों पर एक निश्चित समयसीमा के भीतर निर्णय लेना...
जब कानून अंतिम उपाय बन जाता है: भावनात्मक अपील और भारतीय न्यायपालिका पर बढ़ता बोझ
“हर शिकायत वास्तविक हो सकती है, लेकिन हर शिकायत कानूनी नहीं होती।”आज के कानूनी परिदृश्य में, भारतीय अदालतें ऐसे विवादों में फंस रही हैं जो पारंपरिक कानूनी गलतियों के दायरे से कहीं आगे तक फैले हुए हैं। जो पहले अधिकारों को लागू करने और संवैधानिक सवालों को निपटाने के लिए आरक्षित स्थान हुआ करता था, वह अब पहले से कहीं ज़्यादा बार पारस्परिक नाटक, भावनात्मक नतीजों और कानूनी से ज़्यादा व्यक्तिगत लगने वाले विवादों का एक साउंडिंग बोर्ड बन गया है।यह एक सूक्ष्म लेकिन बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है: यह विचार...
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बेबुनियाद विश्वास और अंधविश्वास फैला रहे हैं - क्या हमारे कानूनों में सुधार किए जाने की आवश्यकता है?
जैसा कि नाम से पता चलता है, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर (एसएमआई) वर्तमान डिजिटल युग में लोगों की धारणा पर बहुत अधिक प्रभाव रखते हैं। इंटरनेट पर ऐसे एसएमआई कंटेंट को देखने और शेयर करने वाले डिजिटल उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे उपभोक्ताओं की विचारधारा, कार्य और व्यवहार पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।सोशल मीडिया टूल के माध्यम से बड़े पैमाने पर लोगों को प्रभावित करने की यह शक्ति दोधारी तलवार की तरह काम करती है। हालांकि यह शैक्षिक और कुछ सामाजिक उद्देश्यों के लिए लाभकारी भूमिका निभाता है,...
तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल: संविधानवाद को कायम रखना
राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा शक्तियों के प्रयोग के बारे में संवैधानिक स्थिति स्थापित और स्पष्ट है। उन्हें मंत्रिपरिषद की सलाह के आधार पर अपनी शक्तियों का प्रयोग और अपने कार्यों का निर्वहन करना होता है। अब यह अच्छी तरह से स्थापित हो चुका है कि राष्ट्रपति की स्थिति ब्रिटेन में संवैधानिक सम्राट के समान है। वह आम तौर पर मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधे होते हैं, सिवाय इसके कि संवैधानिक रूप से ऐसा कुछ और निर्धारित हो। "वह उनकी सलाह के विपरीत कुछ नहीं कर सकते और न ही उनकी सलाह के बिना कुछ कर सकते हैं।"...
केवल संपत्ति का स्पष्ट विवरण न होना या वसीयत करने वाले की मृत्यु वसीयत के तुरंत बाद होना वसीयत को अमान्य नहीं कर सकता: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में दिए गए एक निर्णय में स्पष्ट किया कि वसीयत के निष्पादन को लेकर संदेह केवल अस्पष्ट दावों पर आधारित नहीं हो सकता।कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की वसीयत को इस आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि वसीयतकर्ता की मृत्यु वसीयत के तुरंत बाद हो गई या वसीयत में संपत्ति का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया।जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा,“कौन-सी परिस्थितियाँ संदेहास्पद मानी जाएंगी, इसे स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया जा सकता, न ही पूरी तरह सूचीबद्ध किया जा...
झारखंड हाईकोर्ट ने 'तमरिया' को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दिए जाने के खिलाफ याचिका खारिज की
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में जाति जांच समिति की रिपोर्ट के खिलाफ याचिका खारिज की, जिसके द्वारा 'तमरिया' जाति को मुंडा जाति की उपजाति के रूप में स्वीकार किया गया था और इसे अनुसूचित जनजाति श्रेणी में लाया गया था।मामला खारिज करते हुए न्यायालय ने माना कि राज्य के एक विभाग द्वारा उसी राज्य के दूसरे विभाग के खिलाफ दायर रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।यह याचिका राज्य के प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग द्वारा राज्य के अनुसूचित जनजाति विभाग के सचिव की अध्यक्षता में तैयार की गई उपरोक्त रिपोर्ट के खिलाफ...
अनुबंध का उल्लंघन स्पष्ट हो जाने पर दूसरों के रोजगार को प्रभावित करने वाले ब्लैकलिस्टिंग जैसे कठोर दंड नहीं लगाए जाने चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुबंध का उल्लंघन वास्तविक रूप से स्पष्ट हो जाता है तो कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने जैसे कठोर दंड नहीं लगाए जाने चाहिए। इससे जुड़े लोगों के रोजगार एवं व्यवसाय पर प्रभाव पड़ता है।जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर एवं जस्टिस विकास सूरी ने कहा,"जब किसी संपन्न अनुबंध का उल्लंघन वास्तविक रूप से स्पष्ट हो जाता है, इसके अलावा जब संबंधित व्यक्ति/संस्था द्वारा अपने संविदात्मक दायित्व को पूरा करने में कथित रूप से चूक करने के विरुद्ध वास्तविक विवाद उठाया जाता है, तो...



















