संपादकीय

COVID-19 के दौर में न्यायः सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जर‌िए सुनवाई का अनुभव
COVID-19 के दौर में न्यायः सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जर‌िए सुनवाई का अनुभव

निध‌ि मोहन पाराशर10 से ज्यादा दिनों तक खुद को क्वारंटाइन रखने के बाद सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर कारण सूची में अपने केस की तारीख देखना रोमांचक था। मेरा केस 27 मार्च 2020 को 3 बजे सूचीबद्ध किया गया था। ज्यादा काबिल-ए-तारीफ यह है कि COVID-19 के कारण जारी लॉकडाउन के दौर में सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही जरूरी मामलों को सूचिबद्घ करने और सुनवाई सुनिश्चित करने की एक असाधारण प्रक्रिया विकसित की है। मामले को सूचीबद्ध कराने का तरीका सरल है और मेरा अनुभव यह है कि सामान्य दिनों की मामले को सूचीबद्ध करने के...

बैंकिंग और गैर बैंकिंग संस्थानों को लोन की किश्तों के भुगतान पर अगले 3 महीने की मोहलत देने की अनुमति: आरबीआई
बैंकिंग और गैर बैंकिंग संस्थानों को लोन की किश्तों के भुगतान पर अगले 3 महीने की मोहलत देने की अनुमति: आरबीआई

अर्थव्यवस्था पर COVID-19 के प्रभाव को कम करने के लिए गए निर्णयों के रूप में, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने शुक्रवार को घोषणा की कि सभी वाणिज्यिक बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को 1 मार्च, 2020 तक की अवधि से बकाया लोन की किश्तों के भुगतान पर अगले 3 महीने की मोहलत देने की अनुमति है।इसके अलावा, सभी लोन देने वाली संस्थाओं को वर्किंग कैपिटल लोन पर ब्याज के भुगतान पर 3 महीने के मोहलत देने की अनुमति है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने स्पष्ट किया कि टर्म लोन पर स्थगन और...

केरल हाईकोर्ट का आदेश, बहुत जरूरी न हो तो लॉक डाउन की अवधि में पुलिस न करे गिरफ्तारी
केरल हाईकोर्ट का आदेश, बहुत जरूरी न हो तो लॉक डाउन की अवधि में पुलिस न करे गिरफ्तारी

केरल हाईकोर्ट ने वकीलों और सरकारी कानून अधिकारियों के दफ्तरों और सहायक कर्मचारियों के कामकाज पर पड़ रहे नेशनल लॉकडाउन के प्रभावों के मद्देनजर निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि यदि अपरिहार्य न हो तो गिरफ्तारी न की जाए। जघन्य और गंभीर अपराधों में कार्रवाई करने के लिए पुलिस स्वतंत्र है। मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार, जस्टिस सीके अब्दुल रहीम और सीटी रविकुमार की पूर्ण ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कई निर्देश जारी किए हैं। "उक्त स्थिति को ध्यान में रखते हुए, हमारा दृढ़ मत है कि किसी...

COVID-19 : मुख्य न्यायाधीश से असम में हिरासत केंद्रों में रखे गए सभी बंदियों की रिहाई का अनुरोध 
COVID-19 : मुख्य न्यायाधीश से असम में हिरासत केंद्रों में रखे गए सभी बंदियों की रिहाई का अनुरोध 

COVID-19 महामारी के मद्देनजर, भारत के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे के समक्ष एक प्रतिनिधित्व प्रस्तुत कर असम में विदेशियों के हिरासत केंद्रों में रखे गए सभी व्यक्तियों की रिहाई की मांग की गई है।ये प्रतिनिधित्व " जस्टिस एंड लिबर्टी इनीशिएटिव " नामक एक स्वैच्छिक संगठन द्वारा "मानवीय आधार" पर दाखिल किया गया है।इसमें 11 मार्च को राज्य सभा में गृह राज्य मंत्री द्वारा दिए गए हालिया बयान का हवाला देते हुए, यह बताया गया है कि असम में छह हिरासत केंद्रों में 802 व्यक्ति हैं। इन लोगों में कई वृद्ध और...

कोविड लॉकडाउन: जानिए मिथ्या दावे (FalseClaim) एवं चेतावनी (Warning) के मामलों में कौन सी परिस्थितियों में हो सकती है जेल?
कोविड लॉकडाउन: जानिए मिथ्या दावे (FalseClaim) एवं चेतावनी (Warning) के मामलों में कौन सी परिस्थितियों में हो सकती है जेल?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (24 मार्च) रात 12 बजे से अगले 21 दिनों के लिए तीन सप्ताह के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की। पीएम ने कहा कि COVID-19 वायरस को फैलने से रोकने के लिए यह उपाय नितांत आवश्यक था।दरअसल COVID-19 महामारी के फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत शक्तियों का उपयोग करते हुए 21 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की है। हालाँकि, 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान कुछ आवश्यक सामग्री और सेवाएं बंद से मुक्त रहेंगी, आप उनकी जानकारी इस लेख से...

पीएम मोदी ने  अगले 21 दिनों तक देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की,  COVID 19 को फैलने से रोकने के लिए उठाया कदम
पीएम मोदी ने अगले 21 दिनों तक देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की, COVID 19 को फैलने से रोकने के लिए उठाया कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार रात 12 बजे से अगले 21 दिनों के लिए तीन सप्ताह के देशव्यापी लॉक डाउन की घोषणा की। पीएम ने कहा कि COVID-19 वायरस को फैलने से रोकने के लिए यह उपाय नितांत आवश्यक था। पीएम ने 'लोगों से भीड़भाड़ से दूरी' को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया और नागरिकों से घर पर रहने और ट्रांसमिशन को तोड़ने के लिए स्वास्थ्य निर्देशों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा, "आने वाले 21 दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमण साइकिल को...

राजस्थान हाईकोर्ट ने ICMR से अस्पतालों को निर्देश देने को कहा, कोरोना वायरस संक्रमित रोगी को तब तक डिस्चार्ज न  करें, जब तक कि वह पूरी तरह ठीक न हो जाए
राजस्थान हाईकोर्ट ने ICMR से अस्पतालों को निर्देश देने को कहा, कोरोना वायरस संक्रमित रोगी को तब तक डिस्चार्ज न करें, जब तक कि वह पूरी तरह ठीक न हो जाए

महामारी COVID-19 से निपटने के उपाय के तहत स्वत: संज्ञान लेते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने जनहित याचिका पर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के निदेशक से सभी मेडिकल और चिकित्सा एजेंसियों को आवश्यक निर्देश देने को कहा है कि कोरोना वायरस संक्रमित रोगी को तब तक डिस्चार्ज नहीं किया जाए जब तक कि ब्लड टेस्ट से उनके पूरी तरह से वायरस मुक्त होने की पुष्टि न हो जाए। COVID-19 (कोरोनावायरस) महामारी के रूप में बताते हुए अधिवक्ता सेहबान नकवी द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर यह जनहित याचिका दर्ज...

BCI ने प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर युवा वकीलों को 20 हज़ार रुपए प्रति माह भत्ता देने का अनुरोध किया
BCI ने प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर युवा वकीलों को 20 हज़ार रुपए प्रति माह भत्ता देने का अनुरोध किया

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने के लिए देशभर में हुए लॉकडाउन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर युवा वकीलों को प्रति माह न्यूनतम राशि देने का आग्रह किया है। बीसीआई ने युवा वकीलों को प्रति माह 20,000 रुपए केंद्र सरकार और / या राज्य सरकार के कोष से निर्वाह भत्ता प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया कि "पूरी दुनिया और पूरा देश सबसे कठिन...

COVID19 महामारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, शाहीन बाग से प्रदर्शन खत्म होने के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त वार्ताकारों ने बयान जारी किया
COVID19 महामारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, शाहीन बाग से प्रदर्शन खत्म होने के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त वार्ताकारों ने बयान जारी किया

COVID19 महामारी के कारण दिल्ली में लगाए गए लॉकडाउन के मद्देनजर मंगलवार सुबह पुलिस द्वारा शाहीन बाग धरना स्थल से प्रदर्शनकारियों को हटाने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े और अधिवक्ता साधना रामचंद्रन, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे में वार्ताकार के रूप में नियुक्त किया था, उन्होंने एक बयान जारी किया। अपने बयान में हेगड़े और रामचंद्रन ने इस मुद्दे को "जीत या हार का सवाल नहीं" के रूप में देखने के लिए सभी से आग्रह किया और कहा कि देश को गंभीर खतरा पैदा करने वाली महामारी को "प्राथमिकता" देनी...