संपादकीय
पेगासस जासूसी आरोपों की जांच के लिए अदालत की निगरानी में एसआईटी जांच की याचिका
सीरियल जनहित याचिका के वादी एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर विशेष जांच दल द्वारा अदालत की निगरानी में उस मामले की जांच की मांग की है, जिसमें पत्रकारों, एक्टिविस्ट , राजनेताओं आदि पर इजरायली स्पाइवेयर पेगासस का उपयोग करके सरकारी एजेंसियों द्वारा कथित जासूसी की रिपोर्ट की गई है।शर्मा को राफेल सौदे, अनुच्छेद 370, हैदराबाद पुलिस मुठभेड़ आदि जैसे सनसनीखेज मामलों में जनहित याचिकाओं के साथ सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए जाना जाता है। 2018 में, सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन वित्त मंत्री...
COVID-19 पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा: केंद्र ने दिशानिर्देश तय करने के लिए मध्य सितंबर तक के समय की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को COVID-19 पीड़ितों के परिजनों को अनुग्रह सहायता के भुगतान की सिफारिश करने वाले दिशानिर्देश तैयार करने के लिए 4 सप्ताह का समय देने की मांग की है।भारत सरकार ने अपने आवेदन के माध्यम से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को एक व्यापक और मजबूत दिशा-निर्देशों के साथ आने में सक्षम बनाने के लिए समय की मांग की है।आवेदक ने प्रस्तुत किया कि COVID-19 आपदा के पीड़ितों को अनुग्रह राशि के भुगतान के लिए उचित दिशा-निर्देश तैयार करने की कवायद...
धारा 482 सीआरपीसी: असाधारण मामलों में संक्षिप्त कारण बताते हुए अंतरिम संरक्षण आदेश पारित किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट अपवादात्मक मामलों में आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 482 के तहत याचिकाओं में संक्षिप्त कारण बताते हुए अंतरिम संरक्षण आदेश पारित कर सकता है।न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम की खंडपीठ ने कहा, "निहारिका इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र सरकार' मामले में जिस बात को लेकर असहमति प्रकट की गयी है, वह यह है कि अदालतों की प्रवृत्ति है कि वे केवल इतना लिखकर आवृत्त, गुप्त, संक्षिप्त, अस्पष्ट आदेश पारित करते हैं कि...
"अधिवक्ता सोचते हैं कि जनहित याचिकाओं में पूरा बोझ कोर्ट पर डाला जा सकता है, पीआईएल किसी अन्य रिट याचिका की तरह है और दलीलों के नियमों का पालन करना होगा": सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि जनहित याचिका दायर करते समय वादियों को दलीलों के नियमों का पालन करना होगा और तथ्य-खोज का पूरा बोझ अदालतों पर नहीं छोड़ा जा सकता है।"अधिवक्ता सोचते हैं कि जनहित याचिकाओं में पूरा बोझ अदालत पर डाला जा सकता है। आप कम से कम जो एफआईआर हैं,उनका हमें विवरण दें। जनहित याचिका किसी अन्य नियमित रिट याचिका की तरह है। आपको अपनी मदद करनी होगी और दलीलों के नियमों का पालन करना होगा, "जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने केंद्र की कोविड -19 टीकाकरण नीति...
"दबाव समूहों के आगे झुकना दुखद हालात " : सुप्रीम कोर्ट ने बकरीद पर लॉकडाउन में छूट पर केरल को फटकारा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल राज्य द्वारा बकरीद के कारण तीन दिनों के लिए COVID19 लॉकडाउन मानदंडों में ढील देने के फैसले की कड़ी निंदा की।न्यायालय ने 19 जुलाई को बिना किसी प्रतिबंध के श्रेणी डी के रूप में चिह्नित क्षेत्रों में सभी दुकानों को खोलने की अनुमति देने के राज्य के फैसले पर अत्यधिक आलोचनात्मक दृष्टिकोण लिया, जहां COVID संक्रमण दर 15% से ऊपर पॉजिटिव रेट के साथ चरम पर है।न्यायमूर्ति नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा,"श्रेणी डी क्षेत्रों के लिए एक दिन की छूट पूरी तरह से अनावश्यक थी।...
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के 97वें संशोधन को सहकारी समितियों से संबंध की हद तक रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गुजरात उच्च न्यायालय के 2013 के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसने संविधान (97वां संशोधन) 2011 के प्रावधानों को उस हद तक खारिज कर दिया, जिस हद तक उसने सहकारी समितियों से निपटने के लिए संविधान में भाग IX बी पेश किया था।जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीआर गवई की 3 जजों की बेंच ने गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ भारत संघ द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।जबकि जस्टिस नरीमन और जस्टिस बीआर गवई के बहुमत के फैसले ने सहकारी समितियों से निपटने के लिए संशोधन...
सुप्रीम कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग, कालाबाजारी आदि सहित सभी अपराधों के लिए 'एक राष्ट्र एक दंड संहिता' की मांग वाली याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र को भ्रष्टाचार और अपराध से संबंधित मौजूदा पुराने कानूनों के बजाय एक सख्त और व्यापक दंड संहिता का मसौदा तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में 161 साल पुराने 'औपनिवेशिक' भारतीय दंड संहिता,1860 को बदलने की मांग की गई है।याचिका में शुरुआत में कहा गया है कि,"कानून का शासन और जीवन का अधिकार स्वतंत्रता और गरिमा को एक कड़े और व्यापक 'एक राष्ट्र एक दंड संहिता (One nation one penal Code)' को लागू किए बिना सुरक्षित नहीं किया जा सकता है, जिसमें...
राजद्रोह कानून प्रेस की स्वतंत्रता को पूरी तरह बाधित करता है : पत्रकार पेट्रीसिया मुखिम और अनुराधा भसीन ने आईपीसी 124 ए को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत राजद्रोह के अपराध की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई है। यह ऐसी पांचवीं याचिका है।याचिका दो महिला पत्रकारों, पेट्रीसिया मुखिम और अनुराधा भसीन द्वारा दायर की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि जब तक इस कानून को हटा नहीं दिया जाता तब तक पत्रकारों को डराने, चुप कराने और दंडित करने के लिए राजद्रोह अपराध का इस्तेमाल बेरोकटोक जारी है और पिछले छह दशकों के अनुभव से एक अनूठा निष्कर्ष निकलता है कि जब तक इस प्रावधान को...
सुप्रीम कोर्ट ने आज शाम पांच बजे से पहले मणिपुर के एक्टिविस्ट एरेंड्रो लीचोम्बम को रिहा करने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर के राजनीतिक कार्यकर्ता एरेंड्रो लीचोम्बम को रिहा करने का आदेश दिया है, जिन्हें इस फेसबुक पोस्ट पर कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया था कि गोबर या गोमूत्र से COVID का इलाज नहीं होगा।अधिवक्ता शादान फरासत की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने उन्हें आज शाम 5 बजे से पहले 1000 रुपये के बांड के निष्पादन पर रिहा करने का आदेश दिया है।एरेंड्रो के पिता एल रघुमणि सिंह ने याचिका दाखिल की है , जिन्होंने तर्क दिया...
बकरीद के लिए COVID-19 लॉकडाउन प्रतिबंधों में छूट देने के केरल सरकार के फैसले खिलाफ याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से दिन के अंत तक जवाब दाखिल करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केरल सरकार से कहा कि वह केरल सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिन के अंत तक अपना जवाब दाखिल करें। दरअसल, केरल सरकार ने आगामी बकरीद त्योहार को देखते हुए तीन दिनों के लिए COVID-19 लॉकडाउन प्रतिबंधों में छूट देने का निर्णय लिया है।न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि वह मामले को कल (मंगलवार) सुनवाई के लिए लिस्ट में सबसे आगे सूचीबद्ध करें। याचिकाकर्ता पीकेडी नांबियार की ओर से पेश एडवोकेट प्रीति सिंह ने शुरुआत में...
जल अधिनियम की धारा 48 के तहत मुकदमा का सामना कर रहे लोक सेवकों को सीआरपीसी की धारा 197 के तहत अनुमोदन संबंधी संरक्षण उपलब्ध नहीं है: सुप्रीम कोर्ट
पिछले हफ्ते सुनाए गए एक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम की धारा 197 के तहत मुकदमा का सामना कर रहे लोक सेवकों के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत मंजूरी का संरक्षण उपलब्ध नहीं है।न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की खंडपीठ ने 'वी.सी. चिन्नप्पा गौदर बनाम कर्नाटक सरकार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड' और 'कर्नाटक सरकार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बनाम बी. हीरा नायक' के मामलों में पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा :1. यदि जल...
साधारण देशी बम मामलों को आतंकवादी अपराध मानने से एनआईए अधिनियम का उद्देश्य विफल हो जाएगा: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम के तहत अधिसूचित अपराधों से जुड़े सभी मामलों को एनआईए अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित 'विशेष न्यायालयों' में भेजने से होने वाली कठिनाइयों के बारे में चिंता व्यक्त की है।चूंकि विस्फोटक पदार्थ अधिनियम भी एनआईए अधिनियम के तहत एक अधिसूचित अपराध है, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अपराधों से जुड़े हर मामले के लिए एनआईए अधिनियम के तहत विशेष अदालतों में जाना होगा। इस संदर्भ में, हाईकोर्ट ने कहा कि विस्फोटक पदार्थ अधिनियम को तमिलनाडु में गैंगस्टर अपराधों में...
विधिवत नियुक्त अभिभावक के बिना नाबालिग के खिलाफ एक- पक्षीय डिक्री शून्य है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास उच्च न्यायालय के एक फैसले को बरकरार रखा है जिसमें कहा गया है कि किसी नाबालिग के खिलाफ पारित एक-पक्षीय डिक्री, जिसका अभिभावक द्वारा प्रतिनिधित्व नहीं किया गया है, जिसे विधिवत नियुक्त किया गया हो, शून्य है।न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यम की पीठ उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर एक अपील पर विचार कर रही थी, जिसमें एक नाबालिग के खिलाफ पारित एक-पक्षीय डिक्री को इस आधार पर रद्द कर दिया गया था कि उसका प्रतिनिधित्व आदेश XXXII, सिविल प्रक्रिया संहिता...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप: जानिए सुप्रीम कोर्ट में कैसा रहा पिछला सप्ताह
12 जुलाई 2021 से 16 जुलाई 2021 तक सुप्रीम कोर्ट के कुछ ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़रसूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में भी अभी भी हम आदेश के लिए संदेशवाहकों ओर आसमान में देख रहे हैं': सीजेआई रमानाभारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट जमानत के आदेशों को सीधे जेलों तक पहुंचाने के लिए एक प्रणाली विकसित करने के बारे में सोच रहा है ताकि जेल अधिकारी आदेश की प्रमाणित प्रति का इंतजार कर रहे कैदियों की रिहाई में देरी न करें। सीजेआई ने कहा, "हम प्रौद्योगिकी के उपयोग के समय में हैं।...
औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 25एफ के तहत छंटनी की शर्तों का उल्लंघन बकाये वेतन के पूर्ण भुगतान के साथ बहाली के लिए अपरिहार्य नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25एफ का उल्लंघन, [छंटनी की शर्तें] स्वत: पूर्ण बकाये वेतन के साथ बहाली में अपरिहार्य नहीं होगा।इस मामले में पंचमलाल यादव नाम के एक व्यक्ति ने बुंदेलखंड क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के प्रबंधन द्वारा उनकी सेवाओं को समाप्त करने की कार्रवाई को केंद्र सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण (सीजीआईटी) के समक्ष चुनौती दी थी। ट्रिब्यूनल ने दावेदार के खिलाफ संदर्भ का जवाब दिया और माना कि वह एक नियमित कर्मचारी नहीं था, क्योंकि वह दैनिक मजदूरी पर कार्यरत था।...
'अदालत का मजाक मत बनाओ': सुप्रीम कोर्ट ने लॉ स्टूडेंट की COVID-19 इलाज के लिए 'चमत्कारी' हर्बल दवा की आपूर्ति की अनुमति देने की मांग वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर से एक हर्बल दवा की आपूर्ति फिर से शुरू करने के लिए निर्देश देने के लिए दायर एक जनहित याचिका को खारिज किया, जिसमें दावा किया गया था कि इस दवा ने चमत्कारिक रूप से COVID-19 रोगियों को ठीक कर दिया है।सीजेआई एनवी रमाना की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले के कृष्णापट्टनम टाउन से बोनिगी आनंदैया द्वारा बनाई गई हर्बल दवा की आपूर्ति की अनुमति देने के लिए कानून के छात्र द्वारा दायर याचिका में निर्देश जारी किया।बेंच ने...
'यूपी राज्य कांवड़ यात्रा की अनुमति देने के अपने फैसले पर आगे नहीं बढ़ सकता'': सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से कांवड़ यात्रा की अनुमति देने के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य COVID-19 महामारी के बीच राज्य में कांवड़ यात्रा की अनुमति देने के अपने फैसले पर आगे नहीं बढ़ सकता है।न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश राज्य से कहा कि,"वह कांवड़ यात्रा की अनुमति देने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करें और सोमवार को अदालत में वापस आएं।" न्यायमूर्ति नरीमन ने उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन से मौखिक रूप से कहा कि या तो हम सीधे आदेश पारित करेंगे या आपको...
जमानत मिलने के बाद कैदियों की रिहाई में देरी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट सीधे जेलों तक आदेश पहुंचाने के लिए प्रणाली विकसित करेगा
भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट जमानत के आदेशों को सीधे जेलों तक पहुंचाने के लिए एक प्रणाली विकसित करने के बारे में सोच रहा है ताकि जेल अधिकारी आदेश की प्रमाणित प्रति का इंतजार कर रहे कैदियों की रिहाई में देरी न करें।सीजेआई ने कहा, "हम प्रौद्योगिकी के उपयोग के समय में हैं। हम एएसटीईआर: आस्क एंड सिक्योर ट्रांसमिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड नामक एक योजना पर विचार कर रहे हैं। इसका मतलब संबंधित जेल अधिकारियों को बिना प्रतीक्षा किए सभी आदेशों को संप्रेषित करना...
एचपीसी द्वारा द्वारा रिहा किए गए सभी कैदियों को अगले आदेश तक आत्मसमर्पण करने के ना कहा जाए : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया कि स्वत: संज्ञान मामले में 7 मई के आदेश के अनुसार राज्यों की उच्चाधिकार प्राप्त समितियों द्वारा रिहा किए गए सभी कैदियों को अगले आदेश तक आत्मसमर्पण करने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए।शीर्ष अदालत ने सभी राज्य सरकारों को अगले शुक्रवार तक एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसमें बताया जाना है कि 7 मई के आदेश को कैसे लागू किया गया और एचपीसी द्वारा COVID स्थिति को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन पैरोल पर कैदियों को रिहा करने के लिए क्या मानदंड अपनाए गए।पीठ ने...



















