मुख्य सुर्खियां
गुजरात हाईकोर्ट ने वर्चुअल सुनवाई के दौरान ड्रिंक्स पीने वाले पुलिसकर्मी को वकीलों को कोका-कोला के कैन बांटने का निर्देश दिया
गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को वर्चुअल सुनवाई के दौरान ड्रिंक्स पी रहे एक पुलिस अधिकारी को बार एसोसिएशन को कोल्ड ड्रिंक (कोका-कोला) के 100 कैन बांटने या अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष जे. शास्त्री की बेंच के सामने जब सुनवाई चल रही थी तो पुलिस इंस्पेक्टर ए.एम. राठौड़ वीसी सुनवाई के दौरान ड्रिंक्स पीते हुए पाए गए।इंस्पेक्टर राठौर एक मामले की ऑनलाइन सुनवाई के लिए अदालत के सामने पेश हो रहे थे। इसमें उन पर ट्रैफिक जंक्शन पर दो महिलाओं के...
पीडब्ल्यूडी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित सीटों को जाति के आधार पर उप-वर्गीकृत नहीं किया जा सकता: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट (Gauhati High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्ति अपने आप में एक श्रेणी का गठन करते हैं। जाति, पंथ, धर्म आदि जैसे अन्य विचारों के आधार पर उस श्रेणी के सदस्यों के बीच कोई और वर्गीकरण नहीं किया जा सकता है।दरअसल, याचिकाकर्ता को केवल इस तथ्य के आधार पर असम सरकार द्वारा आयोजित भर्ती से बाहर रखा गया था कि वह शारीरिक रूप से विकलांग सामान्य श्रेणी का उम्मीदवार है। न्यायमूर्ति सुमन श्याम की एकल न्यायाधीश पीठ ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए कहा, "इस...
किसी व्यक्ति की पत्नी और बच्चे रोजगार में हों तो भी उसे अनुकंपा भत्ते के लिए विशेष विचार से वंचित नहीं किया जा सकताः केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसला में कहा कि एक सरकारी कर्मचारी जिसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, उसे केवल इस कारण अनुकंपा भत्ते के लिए विशेष विचार से वंचित नहीं किया जा सकता है कि उसकी पत्नी और बच्चे कार्यरत हैं।एक रिट याचिका की अनुमति देते हुए, जस्टिस वीजी अरुण ने कहा कि हालांकि सेवा से हटाए गए सरकारी कर्मचारी पेंशन/ग्रेच्युटी के हकदार नहीं हैं, सक्षम प्राधिकारी विशेष विचार के योग्य मामलों में अनुकंपा भत्ता स्वीकृत कर सकते हैं।"... याचिकाकर्ता की पत्नी और बच्चों को नियोजित होना स्वयं इस...
'आपको लगता है कि यह कुर्सी केवल सर के लिए है?' : जस्टिस रेखा पल्ली ने उन्हें 'सर' कहने वाले वकील को टोका
दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को एक दिलचस्प संवाद हुआ। एक वकील ने जस्टिस रेखा पल्ली को "सर" के रूप में संबोधित किया।वकील ने जस्टिस पल्ली को "सर" के रूप में संबोधित किया तो जस्टिस पल्ली ने उन्हें यह कहते हुए टोका कि "मैं सर नहीं हूं। मुझे आशा है कि आप इसे समझ सकते हैं।"वकील ने जवाब दिया,"क्षमा करें, आप जिस कुर्सी पर बैठी हैं, उसकी वजह से मैं ऐसा कह गया।"जस्टिस पल्ली ने इस पर कहा,"यह तो और भी बुरा है। अगर आप इस समय के बाद भी सोचते हैं कि अध्यक्ष महोदय के लिए है। यदि युवा सदस्य अंतर करना बंद नहीं करते...
वकीलों के खिलाफ दर्ज झूठे मामले वापस लें और बार में सद्भाव सुनिश्चित करें: बीसीआई ने डीजीपी, छत्तीसगढ़ को लिखा
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ को पत्र लिखकर वकीलों के खिलाफ दर्ज झूठे आपराधिक मामलों को तुरंत वापस लेने के लिए कहा है। बीसीआई ने यह पत्र तहसील कार्यालय, राजागढ़ के कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा अधिवक्ताओं के साथ मारपीट की एक घटना के बाद उत्पन्न होने के बाद लिखा है।अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा द्वारा हस्ताक्षरित, बीसीआई द्वारा जारी एक नोट में कहा गया घटना राजस्व कार्यालय में प्रचलित भ्रष्ट प्रथाओं के कारण हुई, जिसका वकील विरोध कर रहे थे। उनके हस्तक्षेप के...
"राज्य को पूरे मुआवजे के भुगतान के बिना निजी भूमि का अधिग्रहण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती": हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया
जम्मू एंड कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य को बहुत लंबे समय तक प्रभावित लोगों को पूरा मुआवजा दिए बिना निजी भूमि का अधिग्रहण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति संजय धर की खंडपीठ ने राज्य के उदासीन व्यवहार कहा, "यह एक चिंताजनक स्थिति है कि राज्य पूर्ण मुआवजे के भुगतान के बिना निजी भूमि का अधिग्रहण कर रहा है। राज्य के अधिकारियों की ओर से इस तरह की कार्रवाई या चूक स्वीकार्य नहीं है और इसे अनिश्चित काल तक जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हम...
वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार फाउंटेन कोर्ट चैंबर्स में डोर टेनेंट के रूप में शामिल हुए
वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार फाउंटेन कोर्ट चेम्बर्स में बतौर डोर टेनेंट (Door Tenant) शामिल हुए। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव पचनंदा और ज़ाल अंध्यारुजिना के क्रमशः 2016 और 2021 में डोर टेनेंट के रूप में शामिल होने के बाद वह चैंबर्स का हिस्सा बनने वाले तीसरे भारतीय वकील बन गए हैं।फाउंटेन कोर्ट चेम्बर्स यूके के प्रमुख व्यावसायिक बैरिस्टरों में से एक है। इसके कार्यालय लंदन और सिंगापुर में हैं। इसमें हाई प्रोफ़ाइल वाणिज्यिक विवादों में आने वाले पूर्णकालिक सदस्य और डोर टेनेंट हैं।अरविंद दातार 1980 में पहली...
मोटर दुर्घटना- गवाह नियोक्ता की अनुमति के बिना पेश हुआ, केवल इस आधार पर गवाही संदिग्ध नहीं हो सकतीः झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में मोटर वाहन अधिनियम, 1989 के तहत मुआवजे में वृद्धि संबंधित एक मामले में एक गवाह- उस कंपनी का महाप्रबंधक जहां मृतक काम किया करता था, की गवाही को केवल इसलिए खारिज़ करने से इनकार कर दिया कि वह विभाग प्रमुख की अनुमति के बिना पेश हुआ था।जस्टिस गौतम चौधरी ने कहा कि निजी प्रतिष्ठान में नियम और प्रोटोकॉल सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों या सरकारी विभाग से काफी अलग होते हैं। पीठ ने कहा कि एक गवाह की सत्यता पर केवल इसलिए प्रश्नचिन्ह नहीं लगाया जा सकता है कि उसने ट्रिब्यूनल में...
पांडिचेरी की अदालतें ओरिजनल सिविल कोर्ट रिकॉर्ड की जांच किए बिना फ्रांसीसी सिविल कोड पर आदेश पारित नहीं कर सकतीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने ओरिजनल दस्तावेजों की जांच किए बिना मैरिज रजिस्टर में परिवर्तन करने के निर्देश जारी करने वाले पांडिचेरी की एक अतिरिक्त उप न्यायालय की आलोचना करते हुए कहा कि अदालतें उचित जांच के बिना और केवल वादियों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रतियों पर भरोसा करके आदेश पारित नहीं कर सकती हैं।न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम की एकल पीठ एक फ्रांसीसी नागरिक द्वारा मैरिज रजिस्टर में अपने नाम के साथ-साथ उसके माता-पिता के नाम को सही करने के लिए की गई याचिका पर सुनवाई कर रही...
उपहार अग्निकांड: दिल्ली हाईकोर्ट ने अंसल बंधुओं की सबूतों से छेड़छाड़ मामले में सजा पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को रियल एस्टेट व्यवसायी सुशील अंसल और गोपाल अंसल द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में वर्ष 1997 में हुई उपहार अग्निकांड के संबंध में सबूतों से छेड़छाड़ मामले में उनकी सात साल की जेल की सजा को निलंबित करने की मांग की गई थी।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने हालांकि अनूप सिंह करायत द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने पिछले महीने इसे सुरक्षित रखने के बाद आदेश पारित किया था।न्यायाधीश ने कहा,"आदेश शाम तक अपलोड किए जाएंगे।"अंसल ने तीन दिसंबर, 2021 को...
दुर्घटनाग्रस्त चालक के पास नकली ड्राइविंग लाइसेंस था, केवल इस आधार पर बीमाकर्ता को देयता से मुक्त नहीं किया जा सकताः इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना डेथ क्लेम के एक मामले हाल ही में कहा कि बीमा कंपनी को केवल इस आधार पर अपनी देयता से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती है कि वाहन चलाने वाले व्यक्ति, जिसके कारण मृतक के साथ दुर्घटना हुई थी, उसके पास उस समय विधिवत लाइसेंस नहीं था।यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम लेहरू और अन्य में 2003 में दिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए जस्टिस सुभाष चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि नियोक्ता से यह उम्मीद नहीं होती कि वह रोजगार के समय जारीकर्ता प्राधिकरण से...
दिल्ली हाईकोर्ट ने मेडिकल कारणों COVID-19 वैक्सीन से इनकार करने वाले शिक्षक को अंतरिम राहत देते हुए वेतन जारी करने का आदेश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत के रूप में एक शिक्षक को दो महीने का वेतन जारी करने का निर्देश दिया। इस शिक्षक ने अपनी मेडिकल कंडिशन के कारण COVID-19 की वैक्सीन लेने से इनकार कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप शहर के एक स्कूल में टीचर को ऑनलाइन क्लास लेने से मना कर दिया गया।जस्टिस योगेश खन्ना की पीठ के समक्ष आर.एस. भार्गव ने सेवा में बहाल किए जाने और "छुट्टी पर" स्थिति से हटाने के निर्देश दिए जाने की मांग की। इससे उन्हें वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग मोड के माध्यम से कक्षाएं संचालित करने की अनुमति मिल...
[NDPS Act Section 37] गांजा रखने पर नियमित जमानत दी जा सकती है अगर यह वाणिज्यिक मात्रा नहीं है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में आरोपी को नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act), 1985 के तहत नियमित जमानत दी।कोर्ट ने देखा कि धारा 37 के तहत निर्धारित जमानत की कठोरता उस स्थिति में लागू नहीं होती है जब जब्ती वाणिज्यिक मात्रा में प्रतिबंधित नहीं है। याचिकाकर्ता/अभियुक्त को नियमित जमानत की मांग करते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437 और 439 के तहत याचिका दायर की गई थी, जिसके पास कथित रूप से 4.3 किलोग्राम गांजा मिला था।यह आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ता इसे अवैध...
एनसीडीआरसी सभी बेंच 21 फरवरी से केवल फिजिकल सुनवाई करेंगी
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने प्रस्ताव पारित किया कि उसकी सभी बेंच 21 फरवरी, 2022 से केवल फिजिकल सुनवाई करेंगी। यह भी निर्दिष्ट किया गया कि सुनवाई के वैकल्पिक रूप जैसे वर्चुअल अदालती कार्यवाही और हाइब्रिड सुनवाई भी 21 फरवरी से निलंबित रहेगी।संयुक्त रजिस्ट्रार द्वारा जारी 15 फरवरी, 2022 की अधिसूचना में आगे कहा गया,"राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के माननीय सदस्य राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के परिसर से मामलों की सुनवाई करेंगे।"यह भी निर्देश दिया गया कि अंतिम...
मरने से पहले दिया गया बयान सजा का एकमात्र आधार हो सकता, बशर्त यह सच और स्वैच्छिक हो: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि यदि मृतक स्वस्थ मानसिक स्थिति में और स्वेच्छा से बयान देता है तो मरने से पहले दिया गया बयान (डाइंग डिक्लेयरेशन) दोषसिद्धि का एकमात्र आधार हो सकता है।मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा ने 'अतबीर बनाम दिल्ली सरकार' मामले में दिये गये फैसले पर भरोसा जताया, जिसमें यह फैसला सुनाया गया था कि मरने से पहले दिया गया बयान (मृत्युकालीन घोषणा) सजा का एकमात्र आधार हो सकता है यदि यह न्यायालय के पूर्ण विश्वास को प्रेरित करती है और मृतक बयान देने के समय स्वस्थ मनोस्थिति...
मस्जिदों में लाउड-स्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका: गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने गुजरात सरकार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर नोटिस जारी किया।याचिका में कोर्ट से राज्य सरकार को पूरे राज्य में मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए उचित उपाय करने का निर्देश देने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति आशुतोष जे शास्त्री की पीठ ने गांधीनगर जिले में अपना क्लिनिक चलाने वाले डॉक्टर धर्मेंद्र विष्णुभाई प्रजापति की याचिका पर नोटिस जारी किया है।याचिका में कहा गया है कि गांधीनगर जिले में मुस्लिम समुदाय के...
विवाह विफल रहा है, इसके बावजूद पति/पत्नी का आपसी सहमति से तलाक देने से इनकार करना क्रूरता के समान : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने माना है कि इस तथ्य के बावजूद कि विवाह विफल हो चुका है, यदि पति-पत्नी में से कोई एक आपसी सहमति से तलाक देने से इनकार कर रहा है तो यह दूसरे पति या पत्नी के साथ क्रूरता करने के अलावा और कुछ नहीं है।जस्टिस ए. मोहम्मद मुस्तक और जस्टिस सोफी थॉमस की खंडपीठ ने कहा कि एक बार जब अदालत यह राय बनाने में सक्षम हो जाती है कि असामंजस्य के कारण, विवाह विफल हो गया है और पति-पत्नी में से एक आपसी अलगाव के लिए सहमति नहीं दे रहा है तो अदालत बहुत अच्छी तरह से उस आचरण को क्रूरता के रूप में मान सकती...
हिजाब पर प्रतिबंध मामला : दक्षिण अफ्रीका के फैसले में हिंदू लड़की को सांस्कृतिक अभ्यास के रूप में स्कूल में नाक की रिंग पहनने की अनुमति दी, कर्नाटक हाईकोर्ट में दलील
कर्नाटक हाईकोर्ट की एक पूर्ण पीठ ने सोमवार को याचिकाकर्ता, एक मुस्लिम छात्रा की ओर से व्यापक दलीलें सुनीं, जिसने हिजाब (हेडस्कार्फ़) पहनकर उसे कॉलेज में प्रवेश करने से इनकार करने की एक सरकारी कॉलेज की कार्रवाई को चुनौती दी थी।पीठ ने पिछले शुक्रवार को छात्रों को कक्षाओं में किसी भी प्रकार के धार्मिक कपड़े पहनने से रोका था , जबकि मामले की सुनवाई लंबित है। अंतरिम आदेश केवल उन संस्थानों पर लागू किया गया जिन्होंने कॉमन ड्रेस कोड निर्धारित किया है।मुख्य न्यायाधीश ने सोमवार को सुनवाई की शुरुआत में सभी...
केवल समझौते के कारण नहीं छोड़ा जा सकता, एक महिला को परेशान करने के पाप का प्रायश्चित करना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी को सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला के शीलभंग के आरोपी एक व्यक्ति को एक महीने के लिए सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह देखते हुए कि फैसला दिया है कि उसे केवल शिकायतकर्ता के साथ समझौता करने के कारण नहीं छोड़ा जा सकता है और उसे अपने पाप का प्रायश्चित करना होगा।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने आरोपी को 10 फरवरी से 11 मार्च, 2022 तक एक महीने की अवधि के लिए डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया। अदालत ने उस व्यक्ति को आर्म्ड फोर्सेस बैटल कैजुअल्टी वेलफेयर फंड में...
जब समान हितों वाले कई लोग याचिका दायर करते हैं तो कोर्ट फीस अलग-अलग देनी होगी: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के एक मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि समान हित (Similar Interests) वाले कई व्यक्तियों द्वारा संयुक्त रूप से दायर याचिका में एक ही कोर्ट फीस चुकाना उचित है। हालांकि, जब हित सिर्फ समान होते हैं, लेकिन सामान्य (Common Interest) नहीं होते हैं तो अलग से कोर्ट फीस चुकानी पड़ती है।चीफ जस्टिस रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने दोनों के बीच अंतर पर जोर देते हुए कहा,"यदि याचिकाकर्ताओं के बीच हित सामान्य या संयुक्त हैं, जब वे वर्ग या समूह के रूप में इसमें...













![[NDPS Act Section 37] गांजा रखने पर नियमित जमानत दी जा सकती है अगर यह वाणिज्यिक मात्रा नहीं है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट [NDPS Act Section 37] गांजा रखने पर नियमित जमानत दी जा सकती है अगर यह वाणिज्यिक मात्रा नहीं है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2020/07/04/500x300_377719-377642-ndps-act.jpg)





