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कोर्ट शिकायतकर्ता/पीड़ित को सीआरपीसी की धारा 311ए के तहत नमूना हस्ताक्षर देने का निर्देश नहीं दे सकता: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि सीआरपीसी की धारा 311ए कोर्ट को यह अनुमति नहीं देती कि वह किसी शिकायतकर्ता या पीड़ित को संहिता के तहत किसी भी जांच या कार्यवाही के लिए नमूना हस्ताक्षर या लिखावट सौंपने का आदेश दे।गौरतलब है कि यह प्रावधान न्यायिक मजिस्ट्रेट को संहिता के तहत किसी भी जांच या कार्यवाही के उद्देश्य से, आरोपी व्यक्ति सहित किसी भी व्यक्ति को नमूना हस्ताक्षर या लिखावट देने का निर्देश देने का अधिकार देता है।हालांकि, मजिस्ट्रेट के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह पहले...
सीआरपीसी धारा 319 के तहत किसी व्यक्ति को बतौर आरोपी समन करने के लिए मामले को प्रथम दृष्टया से अधिक प्रस्तुत करने की आवश्यकता : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दोहराया
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दोहराया है कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 319 के तहत किसी व्यक्ति को समन करने के लिए मामले को प्रथम दृष्टया से अधिक प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। ट्रायल कोर्ट के इस तरह के समन के आदेश के खिलाफ एक संशोधन को खारिज करते हुए, जस्टिस नारायण सिंह धनिक की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,"यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि धारा 319 सीआरपीसी के तहत शक्ति का प्रयोग करने के लिए, एक मामला प्रथम दृष्टया से अधिक हो , लेकिन इस हद तक संतोष की कमी है कि अगर सबूत अखंडित हो जाता है तो...
गुजरात हाईकोर्ट में गर्भवती महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए जनहित याचिका दायर
गुजरात हाईकोर्ट ने अजन्मे शिशुओं और गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव के अधिकार की सुरक्षा की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ता को एक गरीब गर्भवती महिला के मामले का पता चला। इस महिला को इस आधार पर इलाज से वंचित कर दिया गया कि वह इलाज से पहले 42,000 रुपये का भुगतान नहीं कर सकी थी, उसने अब यह याचिका दायर की है।याचिकाकर्ता ने मांग की:1. डॉक्टर और अस्पताल और अन्य आवश्यक संस्थान किसी भी गर्भवती महिला को अत्यधिक प्रसव पीड़ा या चिकित्सा आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता प्रदान करने...
यदि समझौते के बावजूद आपराधिक कार्यवाही जारी रहती है तो पक्षकारों के साथ अन्याय होगा : जेकेएल हाईकोर्ट ने आरपीसी की धारा 498ए के तहत एफआईआर रद्द की
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) की धारा 498ए (क्रूरता का अपराध) के तहत दर्ज एक एफआईआर को रद्द करते हुए कहा है कि यदि मामले के पक्षकारों द्वारा समझौता किए जाने के बावजूद, आपराधिक कार्यवाही को जारी रखने की की अनुमति दी जाती है तो यह मामले के पक्षकारों के साथ अत्यधिक अन्याय होगा।जस्टिस संजय धर की खंडपीठ ने आगे कहा कि इस तरह के मामले में एफआईआर रद्द करने से इनकार करना दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के परिणाम को नष्ट करने के समान होगा। अदालत अब्दुल्ला...
"आप सरकारी स्कूलों के मानकों में सुधार क्यों नहीं कर रहे?" मद्रास हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग से पूछा
मद्रास हाईकोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए उच्च शिक्षा विभाग से सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के बारे में सवाल किए।चीफ जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी और जस्टिस डी भरत चक्रवर्ती की पीठ ने सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए मेडिकल कॉलेजों में 7.5 प्रतिशत सीटों के आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका में आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा कि आजकल बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं और सीधे कोचिंग क्लास में जा रहे हैं।पीठ ने कहा,"अब यह चलन है। यहां तक कि जब छात्रों को प्रतियोगिताओं के लिए जाना पड़ता है, तब भी छात्र...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (14 मार्च, 2022 से 18 मार्च, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।मोटर दुर्घटना दावा - लापरवाह ड्रायवर का बयान चार्जशीट का हिस्सा नहीं बन सकता : गुजरात हाईकोर्टगुजरात हाईकोर्ट ने माना है कि जब ड्रायवर की लापरवाही के कारण हुई मोटर दुर्घटना लिए एक ड्रायवर के खिलाफ कार्यवाही शुरू की जाती है तो उस ड्रायवर के बयान उसके खिलाफ दायर आरोप पत्र का हिस्सा नहीं हो सकते।जस्टिस...
बेटा अपने जीवित माता-पिता के फ्लैट में अधिकार या हिस्से का दावा नहीं कर सकता : बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि एक बेटे के पास अपने माता-पिता के फ्लैट में उनके जीवित रहने तक कोई अधिकार, निश्चित स्वामित्व और लागू करने योग्य हिस्सा नहीं है। जस्टिस गौतम पटेल और जस्टिस माधव जामदार की खंडपीठ ने बेटे के उस सुझाव को खारिज कर दिया कि उसके पास वास्तविक मालिकों, उसके माता-पिता के जीवनकाल में उनके फ्लैट में एक निश्चित और लागू करने योग्य हिस्सा है क्योंकि कोर्ट को उसका यह सुझाव ''बेतुका'' लगा। पीठ ने कहा कि ''तथ्य यह है कि वह उनका बेटा है और उनके किसी भी फ्लैट को 'साझा घर' नहीं...
आपराधिक अपील की अनुमति स्वत: नहीं दी जा सकती, इसे मंज़ूर करने के लिए विवेक का इस्तेमाल करना होगा : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक अपील के लिए अनुमति केवल न्यायालय द्वारा यह देखने के बाद ही दी जा सकती है कि अपील में बहस योग्य बिंदु उठाए गए हैं या नहीं।जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने महाराष्ट्र राज्य बनाम सुजय मंगेश पोयारेकर [(2008) 9 एससीसी 475] में निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि जहां यह निर्णय लिया गया कि मंज़ूरी दी जानी चाहिए या नहीं। हाईकोर्ट को अपना विवेक लगाना चाहिए और विचार करना चाहिए कि क्या अपील में प्रथम दृष्टया मामला बनाया गया है और बहस योग्य बिंदु उठाए गए हैं।अभियोजन का मामला यह है कि तीन...
धारा 307 आईपीसी को आकर्षित करने के लिए इरादा या ज्ञान आवश्यक: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा, "आईपीसी की धारा 307 के तहत अपराध को आकर्षित करने के लिए सामग्री वह इरादा या ज्ञान है, जिसके साथ सभी कृत्यों को परिणामों के बावजूद किया जाता है"।जस्टिस संदीप भट्ट ने यह टिप्पणी बरी के एक आदेश के खिलाफ आपराधिक अपील के संबंध में की। आरोपी पर आईपीसी की धारा 147 (दंगा), 148 (दंगा, घातक हथियार से लैस होकर), 149/143 (गैरकानूनी सभा), 307 (हत्या का प्रयास), धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 325 (स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से...
जब ऊपरी अदालत ने आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाई हो तो पासपोर्ट को नवीनीकृत करने के लिए ट्रायल कोर्ट की अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि जब हाईकोर्ट द्वारा कार्यवाही पर रोक लगाई जाती है तो पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए निचली अदालत की अनुमति आवश्यक नहीं होती है।अदालत ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया कि वह संबंधित आपराधिक अदालत के एक सुविधाजनक आदेश पर जोर दिए बिना अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए एक महिला के आवेदन पर विचार करे, जिसके समक्ष उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित की एकल पीठ ने कस्तूरी राजूपेटा द्वारा दायर याचिका की अनुमति देते हुए कहा, "यह याचिका सफल होती है।...
"उसने अपनी बेटी को मारने की साजिश रची", पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने ऑनर किलिंग मामले में मां को जमानत देने से इनकार किया
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 11 मार्च, 2022 को नाबालिग बेटी की ऑनर किलिंग के मामले में शामिल याचिकाकर्ता की नियमित जमानत की याचिका खारिज कर दी।जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल की पीठ ने याचिकाकर्ता की जमानत याचिका खारिज करते हुए सुनवाई तेज करने का निर्देश दिया।"अभियोजन पक्ष अपने गवाहों की उन तारीखों पर उपस्थिति सुनिश्चित करेगा, जैसा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके बयान दर्ज करने के लिए तय किया जा सकता है ताकि मुकदमे की कार्यवाही में और देरी न हो। निचली अदालत पीडब्लू को समन करने के लिए पहले से एक कार्यक्रम...
तीन महीने में यूटी में ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल की स्थापना पर निर्णय लें: जेकेएल हाईकोर्ट.
जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव को 90 दिनों की अवधि के भीतर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लिए एक आरटीआई पोर्टल की स्थापना पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस सिंधु शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश मोहम्मद तुय्यब मलिक और मोहम्मद खुर्रम कुरैशी द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर जारी किया। इसमें आरटीआई के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल स्थापित करने के लिए सरकार को अदालत का निर्देश देने की मांग की गई।याचिकाकर्ताओं द्वारा...
मोटर दुर्घटना दावा - लापरवाह ड्रायवर का बयान चार्जशीट का हिस्सा नहीं बन सकता : गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने माना है कि जब ड्रायवर की लापरवाही के कारण हुई मोटर दुर्घटना लिए एक ड्रायवर के खिलाफ कार्यवाही शुरू की जाती है तो उस ड्रायवर के बयान उसके खिलाफ दायर आरोप पत्र का हिस्सा नहीं हो सकते।जस्टिस उमेश त्रिवेदी ने कहा," जिस वाहन ट्र्क से एक्सिडेंट हुआ, उसके ड्रायवर के खिलाफ दायर आरोप पत्र दायर होने पर उस पर अदालत में मुकदमा चलाया जाता है। यदि ड्रायवर के खिलाफ चार्जशीट दायर की जाती है और उक्त आपराधिक मामले में उसका अपना बयान दर्ज किया जाता है तो ऐसा बयान चार्जशीट का हिस्सा नहीं बन सकता,...
गुजरात हाईकोर्ट ने फर्जी पहचान पत्र बनवाने के आरोप में गिरफ्तार रोहिंग्या महिला को जमानत दी
गुजरात हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 465, 467, 471, 114 और पासपोर्ट अधिनियम की धारा 3 और 6 और विदेशी अधिनियम की धारा 13, 14ए(ए) और 14ए(बी) के तहत आरोपी महिला को नियमित जमानत दे दी।आवेदक ने प्रस्तुत किया कि आरोपों की प्रकृति और आवेदक की भूमिका को देखते हुए यह जमानत पर रिहा होने के लिए उपयुक्त है। वही प्रतिवादी-प्राधिकरण ने जोरदार तर्क दिया कि अपराध की प्रकृति गंभीर है और जमानत नहीं दी जानी चाहिए।जस्टिस राजेंद्र सरीन ने संजय चंद्रा बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो [2012 1 एससीसी 40]...
यदि समझौते के बावजूद आपराधिक कार्यवाही जारी रहती है तो पक्षकारों के साथ अन्याय होगा : जेकेएल हाईकोर्ट ने आरपीसी की धारा 498ए के तहत एफआईआर रद्द की
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) की धारा 498ए (क्रूरता का अपराध) के तहत दर्ज एक एफआईआर को रद्द करते हुए कहा है कि यदि मामले के पक्षकारों द्वारा समझौता किए जाने के बावजूद, आपराधिक कार्यवाही को जारी रखने की की अनुमति दी जाती है तो यह मामले के पक्षकारों के साथ अत्यधिक अन्याय होगा। जस्टिस संजय धर की खंडपीठ ने आगे कहा कि इस तरह के मामले में एफआईआर रद्द करने से इनकार करना दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के परिणाम को नष्ट करने के समान होगा। अदालत अब्दुल्ला...
भरण-पोषण आवेदन की तिथि से दिया जाता है, आदेश की तिथि से नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रजनेश बनाम नेहा और एक अन्य, (2021) 2 एससीसी 324 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा है कि भरण-पोषण को आवेदन की तारीख से अवार्ड किया जाना है, न कि आदेश की तारीख से।जस्टिस समित गोपाल की खंडपीठ ने एक फैसले में राय दी कि आदेश की तारीख से एक महिला और उसके नाबालिग बच्चों को भरण-पोषण देने का रीविजनल कोर्ट का आदेश अवैध है। दरअसल कोर्ट वर्ष 2005 में दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अलीगढ़ द्वारा पारित एक अप्रैल, 2005 के निर्णय...
यूएई के कानून मंत्री से मिले सीजेआई रमाना; लंबित प्रत्यर्पण मुद्दों, भारतीय कैदियों को कांसुलर एक्सेस पर चर्चा
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमाना ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात के कानून मंत्री के साथ लंबित प्रत्यर्पण आदेशों और संयुक्त अरब अमीरात की जेलों में भारतीयों को कांसुलर एक्सेस के संबंध में चर्चा की। सीजेआई भारतीय सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र, अबू धाबी में भारतीय समुदाय की ओर से आयोजित एक सम्मान समारोह में बोल रहे थे।उन्होंने कहा, "आज हमने संयुक्त अरब अमीरात के कानून मंत्री के साथ कुछ मुद्दों चिंताजनक मुद्दों पर चर्चा की। कुछ 175 लोग हैं, जिनके प्रत्यर्पण आदेश लंबित हैं। जब राजदूत...
आरोपियों को समन करते समय आरोपों की सत्यता का निर्धारण नहीं किया जा सकता, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया कि आरोपों की सत्यता या अन्यथा का निर्धारण आरोपी को तलब करने के स्तर पर नहीं किया जा सकता है। जस्टिस संजय कुमार सिंह की खंडपीठ ने मजिस्ट्रेट के समन आदेश के खिलाफ दायर 482 सीआरपीसी आवेदन को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।मामलादरअसल, धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत पीड़िता ने सितंबर 2014 में न्यायिक मजिस्ट्रेट-III, मेरठ के समक्ष दायर एक आवेदन में आरोप लगाया था कि 27 अगस्त 2014 को जब वह अपने कमरे में सो रही थी, तब लगभग 11.00 बजे आरोपी ने उसके कमरे में घुसकर उस पर टूट पड़ा था...
फिल्म निर्माण इकाइयां पॉश एक्ट के तहत आंतरिक शिकायत समिति गठन करें: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013, जिसे आमतौर पर POSH अधिनियम के रूप में जाना जाता है, के अनुसार फिल्म निर्माण इकाइयों की जिम्मेदारी है कि वे एक आंतरिक शिकायत समिति बनाएं।कोर्ट ने कहा कि अन्य संबंधित एसोसिएशन जैसे फिल्म एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ केरल (एफईएफकेए), केरल फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स को आंतरिक शिकायत समिति बनाना चाहिए। कोर्ट ने वीमेन सिनेमा कलेक्टिव (डब्ल्यूसीसी) की ओर से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) में कार्यस्थलों पर...
माता-पिता के गैर-भारतीय नागरिक होने के एकमात्र आधार पर बच्चे को पासपोर्ट देने से इनकार नहीं किया जा सकता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि भले ही नाबालिग के माता-पिता में से एक ने सहमति देने से इनकार कर दिया हो लेकिन पासपोर्ट जारीकर्ता प्राधिकारी को नाबालिग को पासपोर्ट जारी करने का अधिकार है, बशर्ते अपेक्षित फॉर्म जमा किया गया हो।मामले में एक नाबालिग लड़की की याचिका को स्वीकार करते हुए जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने यह भी कहा कि नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट में गैर-नागरिक को कानूनी अभिभावक के रूप में शामिल करने पर कोई कानूनी रोक नहीं है।कोर्ट ने कहा, "चूंकि याचिकाकर्ता का जन्म भारत में हुआ था और उसका मूल निवास...
















