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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने मूवी थियेटर में टॉय गन ले जाने के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत दी
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने मूवी थियेटर में "टॉय गन" ले जाने के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत दी

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 290 (सार्वजनिक उपद्रव), 506 (आपराधिक धमकी) सहपठित धारा 34 (आपराधिक कृत्य के लिए एक समान आशय) और आर्म एक्ट की धारा 25 के तहत गिरफ्तार एक व्यक्ति को जमानत दी। जस्टिस चीकाती मानवेंद्रनाथ रॉय ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 290 और 506 के तहत किए गए अपराध जमानती अपराध हैं। इसके साथ ही आर्म एक्ट की धारा 25 के तहत प्रथम दृष्टया आरोप नहीं बनते हैं, क्योंकि याचिकाकर्ता द्वारा इस्तेमाल की गई बंदूक एक "टॉय गन" थी।कोर्ट...

गुजरात हाईकोर्ट ने जस्टिस सोनिया गोकानी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले 64 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ अवमानना के आरोप तय किए
गुजरात हाईकोर्ट ने जस्टिस सोनिया गोकानी के खिलाफ 'अपमानजनक' भाषा का इस्तेमाल करने वाले 64 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ अवमानना के आरोप तय किए

गुजरात हाईकोर्ट ने वर्ष 2013 में जस्टिस सोनिया गोकानी के खिलाफ 'अपमानजनक भाषा' का उपयोग करने के लिए 64 वर्षीय व्यक्ति (आनंद एच गोस्वामी) के खिलाफ अवमानना ​​​​का आरोप तय किए।कोर्ट ने पाया कि आपराधिक विविध के संदर्भ में 2012 की आवेदन नंबर 12353, गोस्वामी/प्रतिवादी ने फरवरी 2013 में जस्टिस गोकानी के चरित्र और क्षमता पर अनुचित मानहानिकारक दावा किया था।उल्लेखनीय है कि आनंद एच. गोस्वामी/प्रतिवादी के खिलाफ अवमानना ​​​​मामला नवंबर 2013 में शुरू किया गया था, जब एचसी ने प्रथम दृष्टया राय दी थी कि गोस्वामी...

यह अवैध हिरासत है: दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश के बावजूद कैदी को समय से पहले रिहा नहीं करने के लिए गृह मंत्रालय की खिंचाई की
"यह अवैध हिरासत है": दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश के बावजूद कैदी को समय से पहले रिहा नहीं करने के लिए गृह मंत्रालय की खिंचाई की

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक कैदी को समय से पहले रिहाई देने के लिए जनवरी, 2021 में पारित एक आदेश का पालन नहीं करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की खिंचाई की।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो एमएचए सचिव को व्यक्तिगत रूप से कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही पूछा जाएगा कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला क्यों न बनाया जाए।अपहरण के एक मामले में 2015 में 14 साल की सजा पूरी करने वाले एक दोषी की समय से पहले रिहाई के लिए...

राजस्थान हाईकोर्ट
मर्डर ट्रायल| जहां ओकुलर गवाही विश्वास दिलाती है, वहां अभियोजन के मकसद और वसूली के रूप में पुष्टि करने की कोई आवश्यकता नहीं है: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने कहा कि यह आपराधिक न्यायशास्त्र का एक अच्छी तरह से स्थापित सिद्धांत है कि हत्या के मामले में, जहां ओकुलर गवाही विश्वास दिलाती है, वहां अभियोजन पक्ष के लिए मकसद और वसूली के रूप में पुष्टि करने की कोई आवश्यकता नहीं है।वर्तमान मामले में, निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को निलंबित करने की मांग करते हुए सीआऱपीसी की धारा 389 के तहत एक आवेदन दायर किया गया था, जिसके तहत अपीलकर्ता को दोषी ठहराया गया है और आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 323 (स्वेच्छा से चोट...

लॉ फर्म में लॉ इंटर्न से कथित तौर पर मारपीट: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इनकार किया
लॉ फर्म में लॉ इंटर्न से कथित तौर पर मारपीट: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इनकार किया

कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने हाल ही में एक वकील के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को लॉ इंटर्न द्वारा दायर एक शिकायत पर रद्द करने से इनकार कर दिया।जस्टिस वी. श्रीशानंद की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,"आक्रामक पक्ष कौन है, वास्तव में जो हुआ वह सभी जांच का विषय है और पूरी जांच के बाद पुलिस सीआरपीसी की धारा 173 के तहत उचित रिपोर्ट दर्ज कर सकती है। तब तक, यह न्यायालय इस स्तर पर रिकॉर्ड सामग्री पर विचार करके कोई...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने उच्च अध्ययन के लिए अस्थायी जाति प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा याचिकाकर्ता के चाचा के जाति प्रमाण पत्र को अंतिम रूप से अस्वीकार करने तक वह उक्त प्रमाण पत्र पर भरोसा करके मांगे गए लाभों की हकदार है।जस्टिस सुनील बी शुक्रे और जस्टिस जी.ए. सनप ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ता के चाचा के जाति प्रमाण पत्र की वैधता के बारे में वास्तविक चिंताएं हैं और उस पर पुनर्विचार किया जा रहा है, फिर भी जब तक इसे पूरी तरह अस्वीकार नहीं किया जाता, तब तक याचिकाकर्ता इससे होने वाले लाभों का हकदार है।याचिकाकर्ता ने अनुसूचित...

Writ Of Habeas Corpus Will Not Lie When Adoptive Mother Seeks Child
क्या आर्य समाज मैरिज ब्यूरो किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कर सकता है? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में आर्य समाज ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में पेश होकर संहिताबद्ध / प्रथागत कानून के बारे में यह स्पष्ट करने को कहा कि आर्य मंदिर संस्था किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन करवा सकती है?जस्टिस रोहित आर्य और जस्टिस एम.आर. फड़के की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) की प्रकृति में दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए सवाल उठाया,प्रतिवादी नंबर छह के अधिवक्ता से प्रश्न पर कोई जवाब नहीं दिया गया कि संहिताबद्ध कानून या...

ई-फाइलिंग वर्जन 3.0 के तहत ई-फाइल किए गए दस्तावेज़ों की हार्ड कॉपी दाखिल करने की आवश्यकता नहीं : उड़ीसा हाईकोर्ट
ई-फाइलिंग वर्जन 3.0 के तहत ई-फाइल किए गए दस्तावेज़ों की हार्ड कॉपी दाखिल करने की आवश्यकता नहीं : उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने मंगलवार को अधिसूचित किया कि ई-फाइलिंग से संबंधित मामलों को कारगर बनाने की दृष्टि से जब भी हाईकोर्ट में ई-फाइलिंग वर्जन 3.0 के माध्यम से कोई मामला ई-फाइल किया जाता है तो ई-फाइल किए गए दस्तावेजों की हार्डकॉपी दाखिल करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।इसके अलावा यह स्पष्ट किया गया कि यदि किसी ई-फाइल किए गए दस्तावेज़ या उसके किसी हिस्से के संबंध में कोई विवाद उत्पन्न होता है तो संबंधित अधिवक्ता या वादी स्वयं संबंधित ई-फाइल किए गए दस्तावेज़ के मूल को दर्ज करेंगे।हाईकोर्ट के...

पश्चिम बंगाल चुनावी हिंसा: कलकत्ता हाईकोर्ट ने कथित पीड़ितों की शिकायतों को दूर करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया
पश्चिम बंगाल चुनावी हिंसा: कलकत्ता हाईकोर्ट ने कथित पीड़ितों की शिकायतों को दूर करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को इस आरोप की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा के कारण 303 से अधिक पीड़ितों को विस्थापित किया गया है, जो कथित तौर पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद हुई थी।कोर्ट ने 19 अगस्त, 2021 के आदेश के तहत चुनाव के बाद हुई हिंसा से संबंधित महिलाओं के खिलाफ हत्या, बलात्कार और अपराध से संबंधित मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी थी, जबकि अन्य आपराधिक मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी)...

दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने शहर की जेलों में कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने की मांग वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें शहर की जेलों में चिकित्सा अधिकारियों, कल्याण अधिकारियों, परामर्शदाताओं, शिक्षा शिक्षकों, योग शिक्षकों और शिक्षा व्यावसायिक सलाहकारों सहित विभिन्न कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने की मांग की गई थी।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने प्रतिवादी के वकील को अग्रिम नोटिस जारी करते हुए कहा,"यह एक गंभीर कमी प्रतीत होती है। आप स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें।"अधिवक्ता अमित साहनी...

Writ Of Habeas Corpus Will Not Lie When Adoptive Mother Seeks Child
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेप के आरोपी की जमानत रद्द करने के लिए 'टू फिंगर टेस्ट' पर भरोसा किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के तहत बलात्कार के आरोपी को दी गई जमानत को रद्द करते हुए कहा है कि हालांकि पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार के बारे में किसी निश्चित राय का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन इस रिपोर्ट में बताया गया है कि उसका हाइमन टूटा हुआ था और उसकी योनि (vagina) में दो उंगलियां आसानी से चली गई थी, जिससे प्रथम दृष्टया इस तथ्य की पुष्टि होती है कि उसका यौन शोषण किया गया था।जमानत रद्द करने की मांग करते हुए पीड़िता के पिता द्वारा सीआरपीसी की धारा...

लिव-इन रिलेशन अनुच्छेद 21 के तहत प्रदान की गई संवैधानिक गारंटी का बाय-प्रोडक्ट है; यह कामुक व्यवहार और यौन अपराधों को बढ़ावा देता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
लिव-इन रिलेशन अनुच्छेद 21 के तहत प्रदान की गई संवैधानिक गारंटी का बाय-प्रोडक्ट है; यह कामुक व्यवहार और यौन अपराधों को बढ़ावा देता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने हाल ही में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदान की गई संवैधानिक गारंटी के उप-उत्पाद (By-Product) के रूप में लिव-इन-रिलेशनशिप (live-in-relationship) के प्रतिबंध को करार दिया है, और देखा है कि इस तरह के संबंध 'संलिप्तता', 'कामुक व्यवहार' और यौन अपराधों को बढ़ावा देते हैं।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की पीठ ने आगे टिप्पणी की,"जो लोग इस स्वतंत्रता का फायदा उठाना चाहते थे, वे इसे अपनाने के लिए तत्पर हैं, लेकिन पूरी तरह से इस बात से अनजान हैं कि इसकी अपनी...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
[मोटर दुर्घटना दावा] 100% कार्यात्मक विकलांगता के मामले में 45% परमानेंट विकलांगता के आधार पर मुआवजे की गणना नहीं की जा सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने सोमवार को कहा कि औरंगाबाद में मोटर दुर्घटना न्यायाधिकरण ने एक मोटर दुर्घटना के दावेदार की परमानेंट विकलांगता को 45% पर स्वीकार करने में त्रुटि की है, जब यह पैर के विच्छेदन के कारण कमाई क्षमता के 100% नुकसान का मामला है।एकल जस्टिस श्रीकांत डी. कुलकर्णी ने विवाह की संभावनाओं के नुकसान के लिए एक लाख और जीवन के सुख, सुविधाओं और मनोरंजन के नुकसान के लिए एक लाख का मुआवजा भी दिया।दावेदार टाटा टेंपो वाहन में क्लीनर के पद पर कार्यरत था। 29.4.2014 को करीब आधी रात को...

गुजरात हाईकोर्ट
न्यायालय के समक्ष जब्त वाहन पेश करने की तारीख से छह महीने की अवधि के भीतर उसका निपटान किया जाना चाहिए, लंबे समय तक पुलिस थानों में नहीं रखना चाहिए : गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने सुंदरभाई अंबालाल देसाई बनाम सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ध्यान देते हुए पुष्टि की कि अदालत के समक्ष वाहन पेश करने की तारीख से छह महीने की अवधि के भीतर जब्त वाहन को उचित रूप से निपटाया जाना चाहिए और लंबे समय तक पुलिस थानों में नहीं रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, यदि वाहन पर अभियुक्त द्वारा दावा नहीं किया जाता है तो बीमा कंपनी या तीसरा व्यक्ति न्यायालय के निर्देश के तहत इसे नीलाम कर सकता है।जस्टिस इलेश जे वोरा की खंडपीठ ने अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट के असाधारण अधिकार क्षेत्र और...

धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर: बॉम्बे हाईकोर्ट लैंडमार्क ध्वनि प्रदूषण फैसले की अवमानना का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत
धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर: बॉम्बे हाईकोर्ट लैंडमार्क ध्वनि प्रदूषण फैसले की अवमानना का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत

बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य में पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव और अन्य उच्च रैंकिंग पुलिस अधिकारियों के खिलाफ धार्मिक स्थलों पर "अवैध लाउडस्पीकर" के संबंध में आदेशों का पालन न करने के लिए 2018 की अवमानना ​​​​याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की।जस्टिस ए.ए. सैयद और जस्टिस अभय आहूजा की खंडपीठ ने उल्लेख किए जाने के बाद 14 जून को याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की।अवमानना ​​​​याचिकाकर्ता संतोष श्रीकृष्ण पचलाग ने कहा कि उनके द्वारा प्राप्त एक आरटीआई जवाब में बताया गया कि 2018 में पूरे महाराष्ट्र...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
कोर्ट द्वारा आवेदन की अस्वीकृति आपराधिक मामले को एक कोर्ट से दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर करने का आधार नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि केवल इसलिए कि आवेदक का आवेदन निचली अदालत द्वारा खारिज कर दिया गया, यह उस कोर्ट से दूसरे कोर्ट में मामले को ट्रांसफर करने का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस राज बीर सिंह की खंडपीठ ने सीआरपीसी की धारा 407 के जनादेश को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार देखा, जो मामलों और अपीलों को स्थानांतरित करने के लिए उच्च न्यायालय की शक्ति से संबंधित है।कोर्ट ने देखा कि सीआरपीसी की धारा 407 के तहत शक्ति को इस न्यायालय द्वारा प्रयोग किया जा सकता है जहां इसे पेश किया जाता...

यह उचित समय है कि अधीनस्थ न्यायालय सीपीसी के मूल सिद्धांतों को समझे : मद्रास हाईकोर्ट
"यह उचित समय है कि अधीनस्थ न्यायालय सीपीसी के मूल सिद्धांतों को समझे ": मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि यह उचित समय है कि अधीनस्थ न्यायालय सीपीसी के मूल सिद्धांतों को समझे और उन वादों को शुरू में ही खारिज कर दे, जो अनुरक्षण योग्य नहीं हैं।न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश की पीठ ने कहा कि इस तरह की कवायद करने के लिए सीपीसी में पर्याप्त प्रावधान हैं और केवल जरूरी यह है कि इस तरह के प्रावधानों की उपलब्धता के बारे में जागरूकता फैलाई जाए और सक्रिय तरीके से इसे लागू किये जाएं।क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर अधिसूचित संपत्तियों के संबंध में निचले अपीलीय...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बरी करने के आदेश के खिलाफ सरकारी अपील दायर करने के सर्कुलर संचालन प्रक्रिया से अवगत कराया

उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government) ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) को बरी करने के आदेश के खिलाफ सरकारी अपील दायर करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले अपने सर्कुलर से अवगत कराया।यह हाईकोर्ट (जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस विकास कुंवर श्रीवास्तव की खंडपीठ) के दो आदेशों के अनुसार किया गया, जिसमें राज्य सरकार को संबंधित नीति / सरकारी आदेश / सर्कुलर का विवरण प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।अनिवार्य रूप से, बेंच ने 30 मार्च को दो ऐसी सरकारी अपीलों के निपटारे (और खारिज) के...