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जब विवाद दीवानी प्रकृति का हो तो शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस पर 'कर्तव्य के उल्लंघन' का आरोप लगाते हुए रिट क्षेत्राधिकार लागू करने की मांग की केरल हाईकोर्ट ने की निंदा
केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को व्यवस्था दी कि अवैध बेदखली/अनधिकृत प्रवेश के खतरे को दीवानी अदालत में जाकर दूर किया जा सकता है। इसने आगे कहा कि पुलिस सुरक्षा की मांग करने वाले ऐसे मामलों में हाईकोर्ट के रिट क्षेत्राधिकार को लागू नहीं किया जा सकता है, जब बुनियादी तथ्य भी विवादित हों और दावा किए गए अधिकारों को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत सारांश कार्यवाही में स्थापित न किया जा सके। जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस सी. जयचंद्रन की एक खंडपीठ एक मकान मालिक द्वारा दायर रिट अपील पर सुनवाई कर रही थी,...
टी-20 क्रिकेट मैच का हवाला देते हुए काम बंद करना: पंजाब एंड हरियाणा बार काउंसिल ने पटियाला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया
पंजाब एंड हरियाणा बार काउंसिल ने पटियाला जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को 10 नवंबर को टी20 विश्व कप सेमीफाइनल मैच के मद्देनजर पटियाला जिले की अदालतों में 'दोपहर के भोजन के बाद कोई काम नहीं' का प्रस्ताव पारित करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।बार काउंसिल ने अपने नोटिस में कहा है कि जिला बार एसोसिएशन पटियाला के अध्यक्ष की हैसियत से एडवोकेट जतिंदरपाल सिंह घुमान द्वारा पारित प्रश्नगत प्रस्ताव को देखकर वह हैरान रह गया।इस बात पर जोर देते हुए कि बार काउंसिल सभी मामलों में उच्च नैतिक/शिष्टाचार...
अग्रिम जमानत केवल एक वैधानिक अधिकार है जो अनुच्छेद 21 से जुड़ा नहीं है; उत्तरोत्तर याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत का अनुरोध करना केवल एक वैधानिक अधिकार है, इस सप्ताह के शुरू में कहा कि दूसरी बार और उत्तरोत्तर अग्रिम जमानत अर्जी सुनवाई योग्य नहीं है। जस्टिस सुरेश कुमार गुप्ता की पीठ ने आगे कहा कि सीआरपीसी की धारा 439 (नियमित जमानत याचिकाओं को नियंत्रित करने वाला प्रावधान), जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 से उत्पन्न होती है, के विपरीत सीआरपीसी की धारा 438 केवल एक वैधानिक अधिकार है और अग्रिम जमानत...
साक्ष्य अधिनियम की धारा 101- वसीयत के अस्तित्व को साबित करने के लिए प्रतिवादी वादी के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत कर सकता है जब वादी अन्यथा दावा करता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एक प्रतिवादी दीवानी मुकदमे में वादी के समक्ष साक्ष्य का नेतृत्व कर सकता है, जब वे वसीयत के अस्तित्व का दावा करते हैं, जो कि वाद में दी गई याचिका के विपरीत है।जस्टिस विवेक अग्रवाल ने कहा कि एक ऐसे मामले में जहां वादी का दावा है कि एक व्यक्ति की मृत्यु बिना वसीयत के हुई है, जबकि प्रतिवादी एक वसीयत के अस्तित्व का तर्क देता है, वादी द्वारा लगाए गए दावे को केवल यह सत्यापित करने के बाद तय किया जाएगा कि कोई वसीयत है या नहीं।पक्षकारों के वकील को सुनने और रिकॉर्ड को देखने...
मुस्लिम शादियां पॉक्सो एक्ट से बाहर नहीं, शादी की वैधता के बावजूद नाबालिग से शारीरिक संबंध अपराध: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने फैसला सुनाया है कि व्यक्तिगत कानून के तहत मुसलमानों के बीच विवाह को पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के दायरे से बाहर नहीं किया गया है।जस्टिस बेचू कुरैन थॉमस ने कहा कि अगर विवाह में एक पक्ष नाबालिग है, तो विवाह की वैधता के बावजूद, पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध लागू होंगे।केरल हाईकोर्ट ने जावेद बनाम हरियाणा राज्य (2022 LiveLaw (PH) 276) में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला; फिजा और अन्य बनाम दिल्ली राज्य सरकार और अन्य (2022 LiveLaw (Del) 793) में दिल्ली हाईकोर्ट...
अपनी प्रेमिका की हत्या करने, उसके शरीर को 6 टुकड़ों में काटकर फेंकने का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने पिछले हफ्ते समीर खान नाम के एक व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिस पर जुलाई 2020 में अपनी 'प्रेमिका/पत्नी' की हत्या करने, उसके शरीर को 6 टुकड़ों में काटने और एक सुनसान जगह पर फेंकने का आरोप लगाया गया था।जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की पीठ ने टिप्पणी की,"आरोपों, अपराध की जघन्यता और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सबूतों को ध्यान में रखते हुए, इस अदालत को आरोपी-आवेदक को जमानत देने का कोई आधार नहीं मिला।"मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार, आरोपी (खान) ने 5 जुलाई 2020...
कानूनी वारिसों को रिकॉर्ड में लाए बिना मृत व्यक्ति के खिलाफ पारित आदेश शून्यः दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने मृत व्यक्ति के खिलाफ उसके सभी कानूनी प्रतिनिधियों को रिकॉर्ड में लाए बिना पारित कर निर्धारण/आकलन आदेश को शून्य(निरर्थक) करार देते हुए रद्द कर दिया है। जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा कि निर्धारिती (assessee) की मौत की सूचना उसके कानूनी वारिसों ने दी थी। आईटीआर में भी यह खुलासा किया गया था कि यह कानूनी प्रतिनिधि द्वारा दायर की गई है। हालांकि, रिकॉर्ड पर तथ्यों की जानकारी की कमी के कारण, कानूनी रूप से आवश्यक के रूप में उसके सभी कानूनी...
मृतक कर्मचारी की दूसरी पत्नी से पैदा हुआ बच्चा अनुकंपा नियुक्ति पाने के योग्यः राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर बेंच) ने माना है कि मृतक कर्मचारी की दूसरी पत्नी से पैदा हुआ बच्चा अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए योग्य है। इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने मुकेश कुमार बनाम भारत संघ 2022 लाइव लॉ (एससी) 205 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर भरोसा किया, जिसमें यह माना गया है कि अनुकंपा नियुक्ति नीति मृतक कर्मचारी के बच्चों को वैध और नाजायज के रूप में वर्गीकृत करके केवल वंश के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ भेदभाव नहीं कर सकती...
किशोर न्याय अधिनियम के तहत जन्म तिथि के प्रमाण के लिए आधार कार्ड को दस्तावेज के रूप में मान्यता नहीं : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा है कि आधार कार्ड को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 द्वारा एक्ट के तहत आरोपी की जन्म तिथि के प्रमाण के दस्तावेज के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने कहा कि जब किसी आरोपी की उम्र के संबंध में कोई विवाद होता है और यदि स्कूल से मिला प्रमाण पत्र उपलब्ध है, जो जन्म तिथि निर्दिष्ट करता है, तो केवल उसी पर जेजे अधिनियम, 2015 की धारा 94(2)(i) के तहत कथित बच्चे के जन्म की तारीख की पहचान करने के उद्देश्य से गौर किया जा...
यूपी के मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित टिप्पणी- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाजवादी पार्टी नेता अनुराग भदौरिया के खिलाफ एफआईआर रद्द करने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक टीवी डिबेट शो के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वर्गीय महंत अवैद्यनाथ के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए समाजवादी पार्टी के नेता अनुराग भदौरिया के खिलाफ दर्ज एक एफआईआर को खारिज करने से इनकार कर दिया।जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रेणु अग्रवाल की पीठ ने उसकी एफआईआर को रद्द करने और उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की उसकी याचिका को खारिज कर दिया।यह ध्यान दिया जा सकता है कि भदौरिया के खिलाफ एफआईआर भारतीय जनता पार्टी...
डॉक्टरों के साक्ष्य रिकॉर्ड करने के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने एससी की ई कोर्ट परियोजना के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पॉइंट का लोकार्पण किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि मलिमठ ने इंदौर जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर ,महात्मा गांधी स्मृति मेडिकल कॉलेज एवं फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग इंदौर के सहयोग से भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरंभ किये गए ई -कोर्ट्स प्रोजेक्ट अंतर्गत रविवार को मध्य प्रदेश के डॉक्टरों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से साक्ष्य रिकॉर्ड कराए जाने हेतु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग डिस्टेंस पॉइंट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश जस्टिस शील नागू जस्टिस सुजय पॉल...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (14 नवंबर, 2022 से 18 नवंबर, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।बॉम्बे हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव के आरोपी आनंद तेलतुंबडे को जमानत दी बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत बुक किए गए आईआईटी के पूर्व प्रोफेसर और दलित विद्वान प्रो. आनंद तेलतुंबडे को जमानत दे दी। जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस मिलिंद...
नाबालिग होने के दावों का निर्धारण करते समय स्कूल प्रमाण पत्र के अनुसार जन्म रिकॉर्ड को गांव के रिकॉर्ड पर प्राथमिकता : जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने गुरुवार को दोहराया कि नाबालिग होने के दावों का पता लगाने के लिए, अदालतों को प्ले स्कूल के अलावा अन्य शैक्षणिक संस्थान द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्र को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिसमें सबसे पहले आरोपी ने दाखिला लिया था।जस्टिस एम ए चौधरी की पीठ ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ दायर रिवीजन याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखा गया था कि याचिकाकर्ता/अपीलकर्ता किशोर नहीं था। याचिकाकर्ता के वकील ने...
पुलिस किसी का घर नहीं तोड़ सकती' : गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ 'बुलडोजर कार्रवाई' की निंदा की, कहा आपराधिक कानून इसकी इजाजत नहीं देता
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कुछ आरोपियों के घरों को गिराने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल करने की घटना के संबंध में गुरुवार को हुई सुनवाई में प्रक्रिया के उल्लंघन में पुलिस अधीक्षक के कृत्य पर नाराजगी व्यक्त की।मुख्य न्यायाधीश आरएम छाया की अगुवाई वाली खंडपीठ ने एसपी के कृत्य की ओर इशारा करते हुए कहा,"मुझे किसी भी आपराधिक न्यायशास्त्र से दिखाएं कि किसी अपराध की जांच के लिए पुलिस बिना किसी आदेश के एक व्यक्ति को उखाड़ सकती है और बुलडोजर चला सकती है।"पीठ ने अधिकारियों को फटकारते हुए मौखिक रूप से टिप्पणी...
मुजफ्फरनगर दंगा 2013 मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोग्य करार दिए गए बीजेपी विधायक विक्रम सैनी की सजा निलंबित की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 2013 के मुजफ्फर नगर दंगों के मामले में भाजपा विधायक विक्रम सैनी (अब अयोग्य) को दी गई 2 साल पुरानी सजा को निलंबित कर दिया। हिंसा में कम से कम 60 लोग मारे गए थे और 50,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए थे।जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने आईपीसी की धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियारों से लैस होकर दंगा), 336 (जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कार्य), धारा 353 ( लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए 353 हमला या आपराधिक बल), धारा 504 (शांति भंग करने...
भारत के विधायी इतिहास में पहली बार, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल में व्यक्तियों को संदर्भित करने के लिए 'हर' और 'शी' का उपयोग
भारत के विधायी सुधारों में पहली बार केंद्र सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2022 में 'वह' (she) और 'उसे' (her) का उपयोग करने के बजाय लिंग की परवाह किए बिना व्यक्तियों को संदर्भित करने के लिए 'उसका' और 'वह' का उपयोग किया है।धारा 3(3), विधेयक की व्याख्या खंड में कहा गया है कि लिंग के बजाए सर्वनाम "उसका (her)" और "वह" (she) व्यक्तियों के लिए उपयोग किया गया है।इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी ने जारी अपने नोट में कहा,"भारत के विधायी इतिहास में पहली बार लिंग के बावजूद...
''कानून के शासन के लिए कोई सम्मान नहीं'': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'दुर्भावनापूर्ण' गुंडा एक्ट कार्यवाही शुरू करने के लिए गोरखपुर के डीएम पर 5 लाख का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को गोरखपुर के जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय पर एक व्यक्ति के खिलाफ यूपी गुंडा अधिनियम के तहत 'दुर्भावनापूर्ण' कार्यवाही शुरू करने के लिए पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस व्यक्ति को उसके स्वामित्व वाली संपत्ति को खाली करने और इसे जिला प्रशासन के पक्ष में करने के लिए मजबूर करने का प्रयास किया जा रहा है। जस्टिस सुनीत कुमार और जस्टिस सैयद वैज मियां की खंडपीठ ने राज्य सरकार को मामले की जांच कराने और गोरखपुर के तत्कालीन दोषी जिला मजिस्ट्रेट के. विजयेंद्र पांडियन के...
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कथित अवैध संबंध को लेकर पत्नी से विवाद के चलते बेटी की हत्या करने वाले व्यक्ति की दोषसिद्धि को बरकरार रखा
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में उस व्यक्ति की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है, जिसने पत्नी द्वारा अवैध संबंध बनाने के संदेह में हुए झगड़े के कारण अपनी 2.5 वर्ष की बच्ची की धारदार हथियार से 'क्रूरता' से हत्या कर दी थी।जस्टिस सुमन श्याम और जस्टिस मिताली ठाकुरिया की पीठ ने दोषी की पत्नी (और मृतक की मां) की गवाही पर भरोसा किया। पीठ ने कहा उसने न केवल घटना को देखा था, बल्कि अदालत के समक्ष घटना के बारे में सच्चा बयान दिया था। संक्षेप में मामला 24 जुलाई 2016 को आसमा खातून (आरोपी/अपीलकर्ता की पत्नी और...
निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में पर्याप्त स्वायत्तता है, विलंब शुल्क के लिए प्रतिदिन पांच पैसे के जुर्माने का नियम उन पर लागू नहीं होता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि किसी स्कूल को महीने के दसवें दिन के बाद फीस के भुगतान में देरी के लिए हर दिन के हिसाब से पांच पैसे का जुर्माना लगाने का अधिकार प्रदत्त करने वाला दिल्ली स्कूल शिक्षा नियमावली, 1973 का नियम 166 निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों पर लागू नहीं होता है।जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने कहा कि नियमावली का अध्याय XIII केवल सहायता प्राप्त स्कूलों के संबंध में लागू है, न कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों पर। नियमावली के अध्याय XIII को तीन भागों में...
ई-फाइलिंग के माध्यम से डिफ़ॉल्ट जमानत के लिए दायर आवेदन वैध, फिजिकल कॉपी के अभाव में इसे अनदेखा नहीं कर सकतेः केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि ई-फाइलिंग मोड के माध्यम से समय पर डिफ़ॉल्ट जमानत के लिए दायर एक आवेदन को उसकी फिजिकल कॉपी पेश न करने के अभाव में निचली अदालतों द्वारा अनदेखा नहीं किया जा सकता है। जस्टिस ए बधारुद्दीन ने कहाः ''अब हम ई-वर्ल्ड में रह रहे हैं। कई न्यायालयों में ई-फाइलिंग को अनिवार्य कर दिया गया है और भारत में सभी न्यायालयों में अनिवार्य ई-फाइलिंग को पूरा करने के लिए उठाए जा रहे कदम अंतिम चरण में हैं। इस तरह के परिदृश्य में, एक अदालत ई-फाइलिंग मोड के माध्यम से दायर किसी आवेदन को...

















