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कर्नाटक हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेज को एक साल के नुकसान के लिए 10 छात्रों में से प्रत्येक को 10 लाख रुपए देने का निर्देश दिया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेज को एक साल के नुकसान के लिए 10 छात्रों में से प्रत्येक को 10 लाख रुपए देने का निर्देश दिया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक नर्सिंग कॉलेज को निर्देश दिया है कि वह विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित एडमिशन की समय सीमा के बाद छात्रों को एडमिशन देकर एक वर्ष का नुकसान करने के लिए दस छात्रों में से प्रत्येक को 10 लाख रुपये का मुआवजा दे।जस्टिस सूरज गोविंदराज की एकल न्यायाधीश पीठ ने मदर मैरी कॉलेज ऑफ नर्सिंग को छात्रों को मुआवजा देने का निर्देश दिया। इसके अलावा, कोर्ट ने राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वह कॉलेज के खिलाफ ऐसी कार्रवाई शुरू करे जो कानून में उपलब्ध हो, जिसमें...

जब विवाद एमएसएमईडी एक्ट के अंतर्गत आता है तो अदालत ए एंड सी एक्ट की धारा 11 के तहत मध्यस्थ नियुक्त नहीं कर सकती: गुजरात हाईकोर्ट
जब विवाद एमएसएमईडी एक्ट के अंतर्गत आता है तो अदालत ए एंड सी एक्ट की धारा 11 के तहत मध्यस्थ नियुक्त नहीं कर सकती: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया है कि यदि विवाद एमएसएमईडी एक्ट, 2006 के अंतर्गत आता है और अधिनियम के प्रावधानों को लागू किया जाता है, तो न्यायालय द्वारा मध्यस्थ की नियुक्ति के लिए ए एंड सी एक्ट की धारा 11 के तहत याचिका सुनवाई योग्य नहीं होगी। जस्टिस बीरेन वैष्णव की पीठ ने पुरानी नज़ीरों पर भरोसा, जिसमें हाईकोर्ट ने माना था कि एमएसएमईडी एक्ट के प्रावधान ए एंड सी एक्ट पर प्रबल हैं और एमएसएमईडी एक्ट के तहत आने वाले विवाद का समाधान केवल अधिनियम की धारा 18 के अनुसार होना चाहिए, और ए एंड सी एक्ट के तहत...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत हासिल करने के लिए अदालत को गुमराह करने वाले वकीलों को फटकार लगाई; माफी के बाद कार्रवाई से परहेज किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत हासिल करने के लिए अदालत को गुमराह करने वाले वकीलों को फटकार लगाई; माफी के बाद कार्रवाई से परहेज किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में हत्या के प्रयास के मामले में अपने मुवक्किल को जमानत दिलाने के लिए अदालत को गुमराह करने के लिए दो वकीलों को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि तेजी से वकील अपना करियर दांव पर लगाकर परिणाम-आधारित सेवाएं दे रहे हैं।जस्टिस एसजी महरे ने कहा,“यह कानूनी पेशे को अपमानित करने का उदाहरण है। इस मामले से कोई भी समझ सकता है कि वादी ने पेशे पर कितना दबदबा बना लिया और कानून व्यवसायी अपने करियर की परवाह किए बिना मुवक्किल को खुश करने के लिए परिणाम-उन्मुख सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। कोर्ट को...

ए एंड सी एक्ट की धारा 29ए में 2019 में किया गया संशोधन प्रकृति में प्रक्रियात्मक, यह सभी लंबित मध्यस्थताओं पर लागू होगाः दिल्ली हाईकोर्ट
ए एंड सी एक्ट की धारा 29ए में 2019 में किया गया संशोधन प्रकृति में प्रक्रियात्मक, यह सभी लंबित मध्यस्थताओं पर लागू होगाः दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि ए एंड सी एक्ट की धारा 29ए में 2019 में किया गया संशोधन प्रकृति में प्रक्रियात्मक है और यह उन सभी मध्यस्थताओं पर लागू होगा, जो इसके लागू होने की तारीख पर लंबित थीं।संशोधन के जर‌िए अवॉर्ड प्रदान करने के लिए 12 महीने की समय सीमा की गणना कार्यवाही के पूरा होने की तारीख से की जाएगी, न कि उस तारीख से जब मध्यस्थ ने संदर्भ दर्ज किया था, जैसा कि असंशोधित धारा के तहत प्रदान किया गया था।जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने दो मध्यस्थों की मृत्यु, तीसरे मध्यस्थ द्वारा खुद को अलग...

अपने विभाग के अलावा किसी अन्य विभाग में काम करने वाले व्यक्ति द्वारा यौन उत्पीड़न किए जाने पर पीड़िता POSH एक्ट के तहत शिकायत कर सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
अपने विभाग के अलावा किसी अन्य विभाग में काम करने वाले व्यक्ति द्वारा यौन उत्पीड़न किए जाने पर पीड़िता POSH एक्ट के तहत शिकायत कर सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने फैसला सुनाया है कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 या पीओएसएच अधिनियम का दायरा उन मामलों तक सीमित नहीं है जहां एक महिला कर्मचारी का उसके ही कार्यालय में काम करने वाले किसी अन्य कर्मचारी द्वारा यौन उत्पीड़न किया जाता है या लेकिन इसका विस्तार उन मामलों पर भी होता है जहां अपराधी कर्मचारी कहीं और कार्यरत है।क़ानून और उसके उद्देश्यों का विश्लेषण करते हुए जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस मनोज जैन की अवकाश पीठ ने कहा,"इनमें...

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कारगिल युद्ध के दौरान हुई सेना गश्ती गोलीबारी मामले में बीएसएफ कर्मियों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कारगिल युद्ध के दौरान हुई सेना गश्ती गोलीबारी मामले में बीएसएफ कर्मियों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कारगिल युद्ध के दौरान 16/17 जुलाई, 1999 की भयावह रात हुए अत्यधिक विवादास्पद सेना गश्ती गोलीबारी मामले में आरोपी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) कर्मियों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा।जस्टिस संजय धर और जस्टिस राजेश सेखरी की खंडपीठ ने कहा,"दुर्भाग्य से, उत्तरदाताओं को केवल संदेह के आधार पर शामिल किया गया। अन्यथा, यह स्थापित करने के लिए बिल्कुल भी सबूत नहीं है कि उत्तरदाताओं ने जानबूझकर सेना के गश्ती दल पर गोलीबारी की।"अदालत सत्र न्यायालय द्वारा उत्तरदाताओं...

ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस ने बीसीआई से अदालतों द्वारा अंतिम निर्णय लेने तक इनरोलमेंट फीस 750 रुपये तक सीमित करने का आग्रह किया
ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस ने बीसीआई से अदालतों द्वारा अंतिम निर्णय लेने तक इनरोलमेंट फीस 750 रुपये तक सीमित करने का आग्रह किया

ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस (AILAJ) ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ दिल्ली को पत्र लिखा, जिसमें उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाने का आग्रह किया गया कि सभी राज्य बार काउंसिल इनरोलमेंट फीस को 750 रुपये तक सीमित रखें, जब तक अदालतें मामले पर अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंच जातीं।AILAJ ने कहा कि विभिन्न राज्य बार काउंसिलों द्वारा ली जाने वाली अत्यधिक इनरोलमेंट फीस हाशिए पर रहने वाले समुदायों के स्टूडेंट के लिए बाधा के रूप में काम करती है, जो कानूनी पेशे में प्रवेश करने की...

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2,000 रुपये के करेंसी नोटों को प्रचलन से वापस लेने के आरबीआई के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2,000 रुपये के करेंसी नोटों को प्रचलन से वापस लेने के आरबीआई के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने 2,000 रुपये के नोटों को प्रचलन से वापस लेने के भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की डिवीजन बेंच ने वकील रजनीश भास्कर गुप्ता की याचिका को खारिज कर दी।पीठ ने इससे पहले वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर इसी तरह की जनहित याचिका को भी खारिज कर दिया था, जिसमें आरबीआई और भारतीय स्टेट बैंक द्वारा बिना किसी पहचान प्रमाण के 2000 रुपए के करेंसी नोटों के...

मेरा सपना न्यायिक अधिकारियों के लिए अखिल भारतीय अंतर-राज्यीय प्रश्नोत्तरी आयोजित करने का है: उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मुरलीधर
"मेरा सपना न्यायिक अधिकारियों के लिए अखिल भारतीय अंतर-राज्यीय प्रश्नोत्तरी आयोजित करने का है": उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मुरलीधर

उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर ने देश के सभी न्यायिक अधिकारियों के लिए 'अखिल भारतीय अंतर-राज्य प्रश्नोत्तरी' देखने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने हाईकोर्ट के जजों के लिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता देखने की भी इच्छा व्यक्त की।चीफ जस्टिस ओडिशा न्यायिक अकादमी, कटक में बोल रहे थे, जहां उड़ीसा हाईकोर्ट ने क्विज़ के सहयोग से ओडिशा के न्यायिक अधिकारियों के लिए पहली बार राज्य स्तरीय प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया। यह पहल हाईकोर्ट की स्थापना के 75वें वर्ष के जश्न के एक हिस्से के रूप...

दिल्ली हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ताओं से नार्को टेस्ट, पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की इच्छा के बारे में पूछने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ताओं से नार्को टेस्ट, पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की इच्छा के बारे में पूछने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली पुलिस को शिकायतकर्ताओं से यह पूछने का निर्देश देने की मांग की गई कि क्या वे आरोपों को साबित करने के लिए जांच के दौरान नार्को टेस्ट और ब्रेन मैपिंग जैसे वैज्ञानिक परीक्षणों से गुजरने को तैयार हैं।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने वकील और भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका खारिज कर दिया।उपाध्याय की याचिका में पुलिस को आरोपियों से यह पूछने का निर्देश देने की भी मांग की...

अवैध कोक संयंत्रों में मेघालय पुलिस की जांच पक्षपातपूर्ण, जांच सीबीआई को सौंपी जाए: याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से कहा
अवैध कोक संयंत्रों में मेघालय पुलिस की जांच पक्षपातपूर्ण, जांच सीबीआई को सौंपी जाए: याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से कहा

मेघालय हाईकोर्ट की तरफ से राज्य में अवैध कोक संचालन के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई बरतने के लिए राज्य सरकार और उसके अधिकारियों को कई बार फटकार लगाने के बाद, याचिकाकर्ता ने संबंधित जनहित याचिका में मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।शैलेन्द्र शर्मा ने हलफनामे में लिखा है,"यह बिल्कुल स्पष्ट है कि मेघालय पुलिस इस मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच नहीं कर रही है। इसलिए यह प्रार्थना की जाती है कि इस मामले की जांच इस कोर्ट की देखरेख में एक स्वतंत्र एजेंसी, अधिमानतः सीबीआई द्वारा की जानी चाहिए। ये न्यायसंगत...

15 साल से अधिक समय तक निरंतर सर्विस में रहने वाले अस्थायी कर्मचारी पेंशन के हक़दार: पटना हाईकोर्ट
'15 साल से अधिक समय तक निरंतर सर्विस में रहने वाले अस्थायी कर्मचारी पेंशन के हक़दार': पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि भले ही किसी कर्मचारी ने बिना पुष्टि के अस्थायी क्षमता में सेवा की हो, उनकी सेवा को पेंशन लाभ के लिए माना जा सकता है यदि यह निरंतर है और 15 साल से अधिक है। इसके साथ ही हाईकोर्ट की एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ अपने रजिस्ट्रार जनरल द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।एकल न्यायाधीश ने हाईकोर्ट से पेंशन जारी करने के लिए पूर्व-कैडर सहायक की अस्थायी सेवा की अवधि पर विचार करने को कहा।चीफ जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने बिहार पेंशन नियमावली के...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य की जर्जर वित्तीय स्थिति के कारण मुख्यमंत्री को जनता से कोई वादा नहीं करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य की 'जर्जर' वित्तीय स्थिति के कारण मुख्यमंत्री को जनता से कोई वादा नहीं करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि यह कानून की स्थापित स्थिति है कि समाचार पत्रों की रिपोर्टों के आधार पर कोई जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें राज्य के खजाने की जर्जर वित्तीय स्थिति के मद्देनजर राज्य के मुख्यमंत्री को कथित तौर पर जनता से कोई भी वादा करना बंद करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।जस्टिस एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस हिरदेश की खंडपीठ ने कहा,"इस अदालत को याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं मिला और इसे खारिज किया जाना चाहिए। हालांकि,...

सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ को सात दिनों के लिए अंतरिम संरक्षण दिया, विशेष सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ को सात दिनों के लिए अंतरिम संरक्षण दिया, विशेष सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार रात एक विशेष सुनवाई में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को 2002 के गुजरात दंगों के संबंध में उच्च सरकारी अधिकारियों को फंसाने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए गुजरात पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर के संबंध में अंतरिम राहत दी।सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाते हुए तीस्ता सीतलवाड़ को अंतरिम संरक्षण दिया, जिस आदेश में गुजरात हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी और सीतलवाड को तुरंत आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया...

पैरोल के आवेदन को केवल इस आशंका पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि आरोपी प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री में शामिल हो सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पैरोल के आवेदन को केवल इस आशंका पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि आरोपी प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री में शामिल हो सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि पैरोल पर रिहाई के आवेदन को केवल इस आशंका पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि आरोपी प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री में शामिल हो सकता है या शांति भंग कर सकता है।जस्टिस बी.एस. वालिया और जस्टिस ललित बत्रा ने कहा,“याचिकाकर्ता के प्रतिबंधित पदार्थ की बिक्री में शामिल होने या शांति भंग करने की आशंका मात्र से मामला अधिनियम की धारा 6(2) (पंजाब अच्छे आचरण कैदी (अस्थायी रिहाई) अधिनियम, 1962) के दायरे में नहीं आएगा।“अदालत पंजाब अच्छे आचरण वाले कैदी (अस्थायी रिहाई) अधिनियम,...

पटना हाईकोर्ट ने हत्या, नाबालिग से बलात्कार के दोषी की मृत्युदंड की सजा में संशोधन किया, आजीवन कारावास की सजा दी
पटना हाईकोर्ट ने हत्या, नाबालिग से बलात्कार के दोषी की मृत्युदंड की सजा में संशोधन किया, आजीवन कारावास की सजा दी

पटना हाईकोर्ट ने बलात्कार और हत्या के एक मामले में 26 वर्षीय व्यक्ति को दी गई मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है, जिसमें 25 साल की अवधि के लिए वास्तविक कारावास से पहले कोई समयपूर्व रिहाई या छूट नहीं होगी। कोर्ट ने कहा,“वर्तमान मामले में अपीलकर्ता 2021 में अपील दायर करने की तारीख पर 24 वर्ष का था। उनका परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं, जैसा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्रियों से पता चला है। यह प्रदर्शित करने के लिए रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं है कि उसका कोई आपराधिक इतिहास रहा हो। इसके...

प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है: उड़ीसा हाईकोर्ट जनता को COVID-19 उपचार का लाभ उठाने से रोकने के आरोपी पत्रकार के खिलाफ मामला रद्द किया
प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है: उड़ीसा हाईकोर्ट जनता को COVID-19 उपचार का लाभ उठाने से रोकने के आरोपी पत्रकार के खिलाफ मामला रद्द किया

उड़ीसा हाईकोर्ट ने एक COVID-19 मरीज और एक अन्य व्यक्ति के बीच बातचीत का प्रसारण करने के लिए ओडिशा टेलीविजन नेटवर्क (ओटीवी) नामक समाचार एजेंसी के एक इनपुट एडिटर के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है, जिसमें मरीज ने COVID महामारी से निपटने में राज्य सरकार की कुछ निष्क्रियताओं की आलोचना की थी।पत्रकार को राहत देते हुए चीफ जस्टिस डॉ एस मुरलीधर की एकल न्यायाधीश पीठ ने 'प्रेस स्वतंत्रता' के महत्व को रेखांकित किया और कहा, "न्यायालय का विचार है कि याचिकाकर्ता, जो ओटीवी का इनपुट एडिटर है, के...

आरोपी ने पीड़िता से शादी की, राजस्थान ने बलात्कार का मामला रद्द किया, कहा- कार्यवाही जारी रहने से उसे बहुत नुकसान होगा
आरोपी ने 'पीड़िता' से शादी की, राजस्थान ने बलात्कार का मामला रद्द किया, कहा- कार्यवाही जारी रहने से उसे बहुत नुकसान होगा

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार के मामले को तब रद्द कर दिया जब आरोपी और पीड़िता दोनों ने अपने मतभेद सुलझा लिए और शादी कर ली।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने कहा कि कार्यवाही जारी रहने से अभियोजक को भारी नुकसान होगा। यह स्वीकार करते हुए कि बलात्कार जैसे अपराधों को सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करके रद्द नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि यदि कोई समझौता हो गया है, तो वह महिला के कल्याण और भविष्य को नजरअंदाज नहीं कर सकती।कोर्ट ने कहा,“इस मामले के विशिष्ट तथ्यों...