मुख्य सुर्खियां
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मणिपुर हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को कलकत्ता हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश की
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मणिपुर हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमवी मुरलीधरन को कलकत्ता हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश की है। मूल अनुशंसा इस सप्ताह की शुरुआत में की गई थी। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, और जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रस्ताव में कॉलेजियम ने कहा है कि यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश के साथ परामर्श के बाद "बेहतर न्याय प्रशासन" के लिए किया गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा की ईदगाह मस्जिद को 'हटाने' और इसे कृष्ण जन्मभूमि के रूप में मान्यता देने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद स्थल को कृष्ण जन्म भूमि के रूप में मान्यता देने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) खारिज कर दी।चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर और जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने पिछले महीने मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रखने के बाद यह आदेश पारित किया। वकील महक माहेश्वरी द्वारा 2020 में दायर की गई इस जनहित याचिका में मुख्य रूप से दलील दी गई कि विभिन्न ऐतिहासिक ग्रंथों में दर्ज किया गया कि विचाराधीन स्थल वास्तव में कृष्ण जन्मभूमि है और यहां तक कि मथुरा का इतिहास...
गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश हरियाणवी गीत 'कोर्ट में गोली' देखेंगे, जनहित याचिका में गाने के बोल पर न्यायपालिका की ईमानदारी के खिलाफ होने पर आपत्ति
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और जस्टिस अनिरुद्ध पी. माई की पीठ ने बुधवार को हरियाणवी गाने 'कोर्ट में गोली' को भारतीय न्यायपालिका की अखंडता के खिलाफ बताते हुए आपत्ति जताने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह मामले में आगे की कार्रवाई तय करने के लिए गाने का वीडियो देखेगी। पीठ ने उमाकांत राजाराम चौहान द्वारा एडवोकेट कुलदीप पी. सोलंकी के माध्यम से गाने के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर यह टिप्पणी की। यूट्यूब पर उपलब्ध यह गाना पिछले साल दिसंबर में वत्स...
दिल्ली वायु प्रदूषण : सुप्रीम कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग से एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (10 अक्टूबर) को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास वायु प्रदूषण के संबंध में उठाए गए कदमों के बारे में अदालत को सूचित करने के लिए कहा। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की खंडपीठ ने एमसी मेहता बनाम भारत संघ और अन्य में याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया,“ एमीकस (सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह) ने सर्दियां आने के साथ वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या को उजागर किया। फसल जलाने से यह और बढ़ जाता है। उनका कहना है कि ये सभी...
न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति के लिए हाईकोर्ट की सिफारिश अस्वीकार करने से पहले केंद्रीय कानून मंत्रालय से परामर्श करने में 'कोई अवैधता' नहीं: हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में कहा
हरियाणा सरकार ने राज्य में अतिरिक्त और जिला सत्र न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में केंद्रीय कानून मंत्रालय के साथ परामर्श करने की अपनी कार्रवाई का बचाव किया है।संयुक्त सचिव रश्मि ग्रोवर 13 न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति के लिए हाईकोर्ट की सिफारिशों को खारिज करने के राज्य के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर जवाब दे रही थीं।फैसले से प्रभावित अधिकारियों ने यह कहते हुए हाईकोर्ट का रुख किया कि राज्य सरकार ने जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में केंद्रीय कानून मंत्रालय को शामिल करके "संवैधानिक...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समिति के समक्ष 40 हजार मामलों के लंबित होने पर स्पष्टीकरण मांगा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक एनजीओ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष 40,051 से अधिक मामलों की सामूहिक लंबितता को चिह्नित किया। जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने कहा कि चौंकाने वाले आंकड़े किशोर न्याय अधिनियम 2015 की भावना को खत्म कर रहे हैं।"...किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष लंबित 10,008 मामले और बाल कल्याण समिति के समक्ष लंबित 30,043 मामलों के आंकड़े अधिनियम की भावना को निष्प्रभावी करने के समान...
एनडीपीएस मामले में पंजाब पुलिस के गवाहों के 11 तारीखों पर पेश न होने पर हाईकोर्ट को आरोपियों के साथ उनकी सांठगांठ का संदेह हुआ
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य में नशीली दवाओं के खतरे को रोकने में निष्क्रियता और ढुलमुल रवैये के लिए पंजाब सरकार की कड़ी आलोचना की है। अदालत ने बताया कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत आरोपी व्यक्ति अभियोजन पक्ष के गवाह जो पुलिस अधिकारी हैं, उनकी गैर-मौजूदगी का हवाला देते हुए बार-बार जमानत की मांग कर रहे हैं। जस्टिस मंजरी नेहरू कौल ने कहा, " राज्य द्वारा बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद कि इस मामले पर गौर किया जाएगा कि विशेष रूप से एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में अभियोजन पक्ष के गवाह...
धारा 17ए पीसी अधिनियम का मकसद लोक सेवकों को ओछी जांच से बचाना है, जांच की मंजूरी अभियोजन के लिए स्वत: मंजूरी नहीं है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए लोक सेवकों को उनकी आधिकारिक क्षमता में लिए गए निर्णयों से संबंधित जांच से सुरक्षा कवच प्रदान करती है।जस्टिस एन एस संजय गौड़ा ने स्पष्ट किया कि अनुमोदन प्रक्रिया राज्य और उसके कर्मचारियों के हितों को संतुलित करने के लिए बनाई गई है।याचिकाकर्ता ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत उसके खिलाफ जांच करने के लिए राज्य सरकार द्वारा दी गई मंजूरी को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। यह जांच बेंगलुरु...
तलाक की पहल करने वाली मुस्लिम पत्नी 'खुला' की तारीख से सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पति से भरण-पोषण की हकदार नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने माना कि एक मुस्लिम पत्नी जिसने 'खुला' कहकर तलाक लिया है, वह खुला लागू करने के बाद सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने पति से भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती है।'खुला' द्वारा तलाक, पत्नी के कहने पर और उसकी सहमति से तलाक है, जिसके द्वारा वह पति को विवाह बंधन से मुक्त होने के लिए प्रतिफल देती है या देने के लिए सहमत होती है।सीआरपीसी की धारा 125 (4) का अवलोकन करते हुए, जस्टिस ए बदरुद्दीन ने कहा कि कोई भी पत्नी भरण-पोषण या अंतरिम भरण-पोषण के लिए भत्ता प्राप्त करने की हकदार नहीं होगी, यदि...
वर्चुअल सुनवाई, जजमेंट के अनुवाद में मद्रास हाईकोर्ट शीर्ष पर, जस्टिस एम सुंदर ने नए ई-फाइलिंग सॉफ्टवेयर का उद्घाटन करते हुए कहा
नए ई-फाइलिंग पोर्टल वर्जन 3.0, ई-बेल बॉन्ड मॉड्यूल और ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड्स सॉफ्टवेयर के डिजिटल ट्रांसमिशन के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए कंप्यूटर समिति के अध्यक्ष जस्टिस एम सुंदर ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट वर्चुअल सुनवाई और अदालती फैसलों के क्षेत्रीय भाषा में अनुवाद के संबंध में चार्ट में शीर्ष पर है।सुप्रीम कोर्ट ई-कमेटी द्वारा उपलब्ध कराए गए सांख्यिकीय आंकड़ों पर भरोसा करते हुए, जस्टिस एम सुंदर ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट में 31 जुलाई, 2023 तक 14,35,227 सुनवाई हुई है, यह 25 हाईकोर्ट में कुल...
मृत कर्मचारी का परिवार 36 साल से पेंशन से वंचित: मद्रास हाईकोर्ट ने अधिकारियों के रवैये को अमानवीय बताया, उचित तंत्र की मांग की
मद्रास हाईकोर्ट हाल ही में पिछले 36 वर्षों से फैमिली पेंशन पाने के लिए संघर्ष कर रहे परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने यह भी कहा कि पिछले 36 वर्षों से परिवार को दर-दर भटकाने में अधिकारियों का आचरण, न केवल गैरकानूनी और मनमाना था बल्कि "अमानवीय" भी था, इसी दौरान मृतक कर्मचारी की पत्नी की भी मृत्यु हो गई।कोर्ट ने कहा,“इस तरह के रवैये को गैरकानूनी, मनमाना आदि कहने के बजाय, यह न्यायालय एक शब्द में इसे 'अमानवीय' के रूप में समझा सकता है। ऐसे कृत्य के लिए किसकी जिम्मेदारी तय की जा सकती है यह एक...
पत्नी के पास उच्च शिक्षा की डिग्री होना उसे भरण-पोषण के अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह कहा कि यदि पत्नी के पास उच्च शिक्षा की डिग्री है तो यह उसे भरण-पोषण के अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता। जस्टिस प्रेम नारायण सिंह की पीठ ने पत्नी को प्रति माह 10,000 रुपये का गुजारा भत्ता देने के फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते यह टिप्पणी की।कोर्ट ने अपने आदेश में बताया कि सीआरपीसी की धारा 125 समाजवादी कानून का एक हिस्सा है जिसका उद्देश्य समाज में एक जरूरतमंद महिला की स्थिति में सुधार करना है।कोर्ट ने कहा, " सीआरपीसी की धारा 125 के पीछे...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र से परे कार्य करने, अधिकारियों को बिना कारण तलब करने के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की आलोचना की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और उसके राज्य समकक्ष द्वारा नागरिक विवादों के फैसले की कड़ी निंदा की है, क्योंकि यह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 और यूपी अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1994 के तहत उन्हें दी गई शक्तियों के दायरे से परे है।जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने कहा,“हम राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग द्वारा विवादों पर निर्णय लेने और मामलों पर निर्णय करने के लिए अपनाई गई ऐसी प्रथा की कड़ी निंदा करते हैं, जैसे कि वे अदालतें हों और ऐसे निर्णय को...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कथित तौर पर बाल विवाह कराने के लिए 'पंडित' की खिंचाई की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उस पंडित पर कड़ी कार्रवाई की, जिसने कथित तौर पर उम्र की पुष्टि किए बिना और हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन किए बिना बाल विवाह कराया था।सुखविंदर सिंह और अन्य बनाम पंजाब राज्य और अन्य में हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, पंजाब, हरियाणा और यू.टी. चंडीगढ़ में मंदिर के सभी पंडित, मस्जिद के मौलवी, गुरुद्वारा के ग्रंथी और गिरजाघर के पादरी वर्ष के हर तीन महीने के बाद उस क्षेत्र पर अधिकार क्षेत्र वाले एसएचओ के समक्ष काउंटर-फाइल के साथ अपना रजिस्टर पेश करने का निर्देश दिया गया,...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने लिवर डॉक्टर को हिमालय कॉर्पोरेशन के खिलाफ कथित अपमानजनक ट्वीट्स हाइड करने के लिए एक्स अकाउंट तक पहुंचने की अनुमति दी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स हैंडल '@theliverdr' संचालित करने वाले डॉ साइरिएक एबी फिलिप्स के अकाउंट को निलंबित करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को संशोधित किया।जस्टिस एसजी पंडित ने हिमालय वेलनेस कॉरपोरेशन और उसके उत्पादों के खिलाफ कथित मानहानिकारक ट्वीट्स को हाइड करने को कहने के बाद डॉ. फिलिप्स को अपने अकाउंट तक पहुंचने की अनुमति दी।हिमालय ने दलील दी कि डॉ. फिलिप्स कंपनी के उत्पादों के खिलाफ अपमानजनक बयान पोस्ट कर रहे हैं, जिसके कारण उन्हें काफी कारोबार का नुकसान हुआ है। डॉक्टर के...
आप सांसद राघव चड्ढा ने सरकारी बंगले से बेदखली वाले आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया
आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने मंगलवार को ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, जिस आदेश में राज्यसभा सचिवालय को उन्हें सरकारी बंगले से बेदखल करने की मंजूरी दे दी और रास्ता साफ कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया, जिसने इसे कल सूचीबद्ध करने की अनुमति दे दी।चड्ढा की ओर से पेश वकील ने अदालत को यह भी बताया कि राघव को विवादित आदेश के अनुपालन में बेदखली नोटिस जारी किया गया है।पिछले हफ्ते...
हिरासत के आदेशों को चुनौती देना, निष्पादन से पहले रोक लगाना साक्ष्य की उचित जांच को रोक सकता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने माना कि कानूनी चैनलों के माध्यम से निष्पादन से पहले हिरासत के आदेश को चुनौती देने के बाद वे यह तर्क नहीं दे सकते कि वर्तमान स्थिति और हिरासत के आदेश के बीच लाइव लिंक की कमी के कारण आदेश को रद्द कर दिया जाना चाहिए।चीफ जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह और जस्टिस राजेश सेखरी की खंडपीठ ने तर्क दिया कि आदेश को पहले से चुनौती देकर उन्होंने इस बात की उचित जांच को रोक दिया कि क्या हिरासत आदेश के लिए पर्याप्त आधार या सबूत थे।खंडपीठ ने कहा,“..लेकिन यदि याचिकाकर्ताओं और...
चौबीस घंटे का कवरेज निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को प्रभावित कर रहा है: अभिषेक बनर्जी की पत्नी ने मीडिया कवरेज के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की, जो पश्चिम बंगाल में बहुस्तरीय भर्ती घोटाले की आरोपी हैं। इस केस की जांच सीबीआई और ईडी द्वारा की जा रही है, जिसमें उन्होंने अपने पति के मुकदमे की मीडिया कवरेज को चुनौती दी है, जिससे पूर्वाग्रह पैदा हो रहा है।जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई की, जिन्होंने डीएसजी बिल्वादल भट्टाचार्य और एक प्रतिवादी के एक अन्य वकील की प्रार्थना पर मामले को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर...
सीधी पेशाब मामला : मप्र हाईकोर्ट ने आरोपी की एनएसए हिरासत को बरकरार रखा, कहा उसके कृत्य से पूरे राज्य में शांति को खतरा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सीधी पेशाब मामले में आरोपी बंदी की पत्नी द्वारा उसकी निवारक हिरासत को चुनौती देते हुए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने कहा कि अधिकारियों ने प्रवेश शुक्ला के खिलाफ उक्त अधिनियम की धारा 3(2) के तहत कार्यवाही शुरू करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के प्रावधानों का सही ढंग से अनुपालन किया है ताकि उसे कोई भी अपराध करने से रोका जा सके। आगे चलकर कानून और व्यवस्था बनाए रखने पर प्रतिकूल प्रभाव...
अनुच्छेद 226 | आपराधिक रिट क्षेत्राधिकार में एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ इंट्रा-कोर्ट रिट सुनवाई योग्य नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत आपराधिक रिट क्षेत्राधिकार के प्रयोग में एकल न्यायाधीश पीठ द्वारा पारित आदेश या निर्णय के खिलाफ इंट्रा-कोर्ट रिट दायर नहीं की जा सकती।चीफ जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस कार्डक एटे की खंडपीठ ने अदालत के नियमों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में किसी भी इंट्रा-कोर्ट रिट की अनुमति नहीं है।खंडपीठ ने कहा,“यहां ऊपर की गई चर्चा के संबंध में हमारा दृढ़ विचार है कि इंट्रा-कोर्ट रिट अपील संविधान के अनुच्छेद 226 के...




















