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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 21 साल बाद गैर-इरादतन हत्या के मामले में सज़ा रद्द की, कहा- अभियोजन पक्ष ने तथ्यों को छिपाया
गैर-इरादतन हत्या के मामले में 2005 की सज़ा रद्द करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष उसी घटना में चार आरोपियों को लगी गंभीर और धारदार चोटों के बारे में बताने में नाकाम रहा। यह कोई मामूली चूक नहीं थी, बल्कि अहम तथ्यों को जानबूझकर छिपाना था, जिसने उनके मामले की बुनियाद को ही हिला दिया। [2026 LL (PH) 264]जस्टिस एच. एस. ग्रेवाल ने अपील मंज़ूर की और अपीलकर्ताओं को IPC की धारा 148, 304 और 323 (धारा 149 के साथ) के तहत आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने माना कि सबूतों से पता चलता है...

धोखाधड़ी न होने पर योग्यता की कमी के आधार पर 29 साल बाद शिक्षक की नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐसे शिक्षक की अपील को मंज़ूरी दी, जिसकी योग्यता पर लगातार 29 साल की सेवा के बाद सवाल उठाया गया था। कोर्ट ने कहा कि इंटरमीडिएट एजुकेशन एक्ट की धारा 16-E(10) के तहत नियुक्ति रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल बहुत देर से नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने कहा कि वह हाईकोर्ट की फुल बेंच के उस फ़ैसले से बंधा हुआ है, जो 'डॉ. आशा सक्सेना बनाम श्रीमती एस. के. चौधरी और अन्य' मामले में दिया गया। उस मामले में लगभग 17 साल बीत जाने के बाद इसी शक्ति का इस्तेमाल मनमाना माना गया।उसी फ़ैसले का हवाला...

यौन उत्पीड़न मामले में सुनवाई के दौरान वकील ने पीड़िता के कपड़ों पर किए सवाल, हाईकोर्ट ने की आलोचना, कहा- 'जींस पहनना महिला की अपनी पसंद'
दिल्ली हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के एक मामले में बचाव पक्ष के वकील द्वारा की गई जिरह (Cross-Examination) के तरीके की आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के कपड़ों के बारे में पूछे गए सवाल "पूरी तरह से अप्रासंगिक" है और ऐसा लगता है कि इनका मकसद उसे शर्मिंदा करना, अपमानित करना और उसके चरित्र पर सवाल उठाना है। [2026 LiveLaw (Del) 736]जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने कहा कि महिला का जींस पहनना उसकी अपनी पसंद का मामला है और किसी को भी उसके कपड़ों के बारे में कुछ भी तय करने का अधिकार नहीं है।आरोपी को बरी करने...

विधवा द्वारा गोद लिए गए बच्चे को उसके मृत पति की संपत्ति का अधिकार मिल सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिर से कहा कि पति की मौत के बाद विधवा द्वारा गोद लिए गए बेटे को मृत पति का भी गोद लिया हुआ बेटा माना जाएगा और उसे पति का हिस्सा मिलेगा।'सुभाष मिसिर (श्री जनार्दन तिवारी के संरक्षण में) बनाम ठगाई मिसिर' मामले में हाई कोर्ट के पहले के फैसले का पालन करते हुए, जस्टिस चंद्र कुमार राय ने कहा,"इस कोर्ट ने 1966 RD 255 'सुभाष मिसिर (श्री जनार्दन तिवारी के संरक्षण में) बनाम ठगाई मिसिर' मामले में यह माना है कि पति की मौत के बाद विधवा द्वारा गोद लिए गए बेटे को पति का भी गोद लिया हुआ...

'कैजुअल लीव पर मौजूद कर्मचारी को ड्यूटी पर माना जाएगा': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सैनिक की विधवा को स्पेशल फैमिली पेंशन देने का फैसला सही ठहराया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना कि कैजुअल लीव (आकस्मिक अवकाश) के दौरान कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) से हुई सेना के जवान की मौत को मिलिट्री सर्विस से जुड़ा हुआ माना जाएगा। इस आधार पर उनकी विधवा को स्पेशल फैमिली पेंशन दी जाएगी। [2026 LL (PH) 261]जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की डिवीजन बेंच ने भारत सरकार की याचिका खारिज की, जिसमें आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल, रीजनल बेंच, चंडीगढ़ के आदेश को चुनौती दी गई थी। ट्रिब्यूनल ने विधवा को सामान्य फैमिली पेंशन के बजाय स्पेशल...

जो वकील प्रोविज़नल एनरोलमेंट के 2 साल के अंदर AIBE पास नहीं कर पाते, वे प्रैक्टिस जारी नहीं रख सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि जिन वकीलों ने 2009-10 या उसके बाद के एकेडमिक सेशन में लॉ की डिग्री ली और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में प्रोविज़नल तौर पर एनरोल हुए वे प्रोविज़नल एनरोलमेंट के 2 साल के अंदर ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास न करने पर प्रैक्टिस जारी नहीं रख सकते।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने कहा कि अगर ऐसे वकील 2 साल की अवधि में AIBE पास नहीं कर पाते हैं तो वे "किसी भी कोर्ट, ट्रिब्यूनल या किसी अन्य अथॉरिटी" में प्रैक्टिस करने के हकदार नहीं होंगे।कोर्ट ने आगे साफ़...

हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (03 अगस्त, 2026 से 07 अगस्त, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।मीटर से छेड़छाड़ के सबूत के बिना सिर्फ़ बिजली का बिल न भरना 'बिजली की चोरी' नहीं: पटना हाईकोर्ट पटना हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली का बिल न भरना, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 135 के तहत बिजली की चोरी नहीं माना जाएगा, जब तक कि इस बात का कोई सबूत न हो कि कनेक्शन असल में काट दिया गया या उपभोक्ता ने मीटर...

शरजील इमाम और उमर खालिद की रिहाई के लगाए थे नारे, कोर्ट ने TISS स्टूडेंट्स को अग्रिम ज़मानत देने से किया इनकार
मुंबई सेशंस कोर्ट ने 7 अगस्त को दो स्टूडेंट्स को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार किया। इन स्टूडेंट्स ने TISS कैंपस में आयोजित कार्यक्रम में जीएन साईबाबा को श्रद्धांजलि देते हुए शरजील इमाम और उमर खालिद की रिहाई के लिए नारे लगाए थे। शरजील और उमर पर UAPA के तहत मुक़दमा चल रहा है।एडिशनल सेशंस जज वीबी बोहरा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद की ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी थी, इसलिए स्टूडेंट्स को देश के क़ानून का सम्मान करना चाहिए।कोर्ट ने अभि रूप पॉल (32) और कामाख्या प्रसाद दास (23) को...

'पिंक सिटी की विरासत को बचाएं': हाईकोर्ट ने जयपुर में अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जयपुर में अवैध निर्माण को रोकने और पिंक सिटी की विरासत वाली पहचान को बहाल करने के लिए तुरंत कदम उठाएं।जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की डिवीजन बेंच ने जयपुर के 'वॉल्ड सिटी' (चारदीवारी वाले शहर) में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जयपुर नगर निगम के कमिश्नर को निर्देश दिया कि वे मामले की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि बिना ज़रूरी मंज़ूरी के हो रहे सभी निर्माण कार्य रोक दिए जाएं।याचिकाकर्ता ने...

एग्जाम में लॉ स्टूडेंट को मिले ज़ीरो-मार्क्स: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने BCI और लॉ कमीशन को भेजी आंसर बुक, कानूनी शिक्षा के गिरते स्तर पर जताई चिंता
लॉ कॉलेजों में कानूनी शिक्षा के गिरते स्तर पर गंभीर चिंता जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में निर्देश दिया कि लॉ स्टूडेंट की जांची गई आंसर बुक (जिसमें उसे ज़ीरो मार्क्स मिले थे) की एडिट की हुई कॉपी और क्वेश्चन पेपर, बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) और लॉ कमीशन ऑफ़ इंडिया को भेजा जाए।कोर्ट ने BCI से इस बात पर विचार करने को कहा कि क्या कानूनी शिक्षा के मौजूदा स्तर और लॉ संस्थानों की मंज़ूरी, एफिलिएशन और समय-समय पर होने वाली जांच के मौजूदा सिस्टम को "ग्लोबली कॉम्पिटिटिव कानूनी शिक्षा मानकों का...

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून में बड़ा बदलाव, दो साल तक विलंबित पंजीकरण के लिए अब अदालत जाने की जरूरत नहीं
राष्ट्रपति ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 को अपनी मंजूरी दी। इस संशोधन के साथ जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया। अब यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है तो उसके पंजीकरण के लिए ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के आदेश की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे मामलों का निस्तारण अब जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट करेंगे।यह कानून संसद के दोनों सदनों से...

बीइंग ह्यूमन' ज्वैलरी फ्रेंचाइजी विवाद: सलमान खान की कंपनी को नोटिस
चंडीगढ़ जिला कोर्ट ने 'बीइंग ह्यूमन' ज्वेलरी शोरूम से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में अभिनेता सलमान खान की कंपनी बीइंग ह्यूमन, उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री तथा स्टाइल कोटिएंट ज्वेलरी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों को पूर्व-संज्ञान चरण में नोटिस जारी किया।न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. अंबिका शर्मा ने कहा,"यह अदालत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 के प्रावधान के तहत संज्ञान लेने से पहले आरोपितों को नोटिस जारी करना उचित समझती है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।"शिकायत चंडीगढ़ के...

Lucknow Fire Tragedy | हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा विस्तृत जवाब, राज्य ने कहा- फायर सेफ्टी SOP 'लगभग तैयार'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस साल जून में लखनऊ कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग की घटना, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई, उससे जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर यूपी सरकार से विस्तृत जवाब मांगा। राज्य ने कोर्ट को बताया कि फायर सेफ्टी पर प्रस्तावित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) "लगभग तैयार" है।राज्य की बात को रिकॉर्ड करते हुए जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 1 हफ़्ते का समय दिया।हालांकि, बेंच ने साफ़ कर दिया कि हलफनामे में रिट याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों और...

बीफ़ नहीं मिला, न ही वध के लिए ले जाने का कोई सबूत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी तरीके से गाड़ी ज़ब्त करने पर दिया ₹4.75 लाख मुआवज़ा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण अधिनियम, 1955 के तहत गैर-कानूनी तरीके से ज़ब्त की गई गाड़ी का ज़ब्ती आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि अधिकारियों ने पूरी तरह से इस धारणा के आधार पर कार्रवाई की कि मवेशियों को वध के लिए उत्तर प्रदेश से बाहर ले जाया जा रहा था।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने पाया कि गाड़ी से न तो कोई बीफ़ और न ही वध किए गए मवेशियों के अवशेष मिले थे, और ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह पता चले कि जानवरों को बिहार या किसी बूचड़खाने ले जाया जा रहा है।कोर्ट ने...

सिर्फ़ दोषी ठहराए जाने के आधार पर पुलिस कॉन्स्टेबल को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'यूपी पुलिस ऑफिसर्स ऑफ़ द सबऑर्डिनेट रैंक्स (पनिशमेंट एंड अपील) रूल्स, 1991' के नियम 8(2)(a) के तहत किसी पुलिस अधिकारी को सिर्फ़ इसलिए नौकरी से नहीं निकाला जा सकता कि उसे किसी आपराधिक आरोप में दोषी ठहराया गया, जब तक कि अनुशासनात्मक अधिकारी ने पहले उस आचरण पर विचार न किया हो जिसके कारण दोषसिद्धि हुई।कोर्ट ने कहा कि बर्खास्तगी की सज़ा देने का अधिकार पाने के लिए ऐसा विचार करना एक ज़रूरी शर्त है।1991 के नियमों का नियम 8(2) उचित जांच और अनुशासनात्मक कार्यवाही के बिना पुलिस...

PC Act | 2018 के संशोधन से पहले अगर पूर्व सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया तो पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) की धारा 19 में 2018 का संशोधन, जिसके तहत पूर्व सरकारी कर्मचारियों पर मुकदमा चलाने के लिए पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत को बढ़ाया गया, भविष्य के मामलों पर लागू होता है। यह उन मामलों को फिर से नहीं खोलता, जिनमें 26 जुलाई, 2018 से पहले ही मामला दर्ज (संज्ञान) किया जा चुका है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच ने कहा कि यह संशोधन इस हद तक 'पिछली तारीख से लागू' (Retrospective) होता है कि इसका फायदा तब...

मानहानि मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को राहत, हाईकोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही पर लगाई रोक
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने संगरूर के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) के सामने इंडियन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की शिकायत पर कार्यवाही रोक दी।यह मामला संगरूर के रहने वाले हितेश भारद्वाज की शिकायत से जुड़ा है, जिन्होंने कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा बजरंग दल के बारे में की गई टिप्पणियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। भारद्वाज ने कथित तौर पर 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस के चुनावी...

नगर निकाय किराए की बकाया रकम को ज़मीन के लगान की तरह वसूल नहीं कर सकते, वे सिविल केस कर सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नगर पालिका परिषद को अपने किराएदार से मिलने वाला बकाया किराया ज़मीन के लगान के बकाये की तरह वसूल नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा किराया एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत देय राशि है, न कि कोई टैक्स।उत्तर प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1916 की धारा 173-A नगरपालिका को कलेक्टर से वसूली के लिए आवेदन करने की अनुमति देती है, जैसे कि यह ज़मीन के लगान का बकाया हो, किसी ऐसी राशि के लिए जो बोर्ड को टैक्स के तौर पर देनी हो (सिवाय उस टैक्स के जो तुरंत मांग पर देय हो)। कलेक्टर इस बात से संतुष्ट होने...

UP Police Rules | कर्मचारी का जवाब मांगे बिना जांच रिपोर्ट से सहमत होने से अनुशासनात्मक कार्यवाही अमान्य नहीं होती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुशासनात्मक अधिकारी का 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) में जांच अधिकारी के निष्कर्षों से सहमति जताना, बाद में दिए गए सजा के आदेश को अमान्य नहीं करता। कोर्ट ने माना कि ऐसी सहमति 'कारण बताओ नोटिस' जारी करने की एक पूर्व-शर्त है।कोर्ट ने देखा कि सजा के लिए जांच अधिकारी की सिफारिश का स्पष्ट रूप से 'यू.पी. पुलिस ऑफिसर्स ऑफ सबऑर्डिनेट रैंक्स (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1991' के नियम 14(1) के अपेंडिक्स I में प्रावधान है।कोर्ट के अनुसार, 1991 के नियमों के नियम 14(1) का...

Indore Gas Pipeline Blast: पीड़ितों ने हाईकोर्ट में कहा- म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के भरोसे के बावजूद उन्हें खर्च का पैसा वापस नहीं मिला
इंदौर में 23 जून को हुई गैस पाइपलाइन दुर्घटना के पीड़ितों ने गुरुवार (6 अगस्त) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को बताया कि इलाज का खर्च अधिकारियों द्वारा उठाए जाने के म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के भरोसे के बावजूद उन्हें अभी तक अपने इलाज के खर्च का पैसा वापस नहीं मिला।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोर्ट में कॉर्पोरेशन के जवाब में गलत तरीके से यह कहा गया कि अस्पताल का खर्च पहले ही चुका दिया गया।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इंदौर में कथित तौर...
