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रेप पीड़िता के बयान में विरोधाभास के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को दोषी माना पर सजा घटाई [आर्डर पढ़े]
रेप पीड़िता के बयान में विरोधाभास के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को दोषी माना पर सजा घटाई [आर्डर पढ़े]

पीड़िता के बयान में विरोधभास के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने रेप के आरोपी को दोषी करार देते हुए कहा कि 13 साल की रेप पीड़िता के बयान को अविश्वसनीय नहीं करार दिया जा सकता। बिहार की इस लड़की के साथ रेप मामले में पटना हाई कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बहाल रखा है।सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस एल. नागेश्वर राव की बेंच ने कहा कि लड़की के बयान में पूरी तरह से तारतम्यता नहीं है। मैजिस्ट्रेट के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दिए बयान में एक बार उसने कहा था कि जब रेप...

अचल संपत्ति को बांटने के लिए मुस्लिम पिता अपनी अवयस्क बेटी का कानूनी अभिभावक हो सकता है : केरल हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अचल संपत्ति को बांटने के लिए मुस्लिम पिता अपनी अवयस्क बेटी का कानूनी अभिभावक हो सकता है : केरल हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

इस्लामी क़ानून का हवाला देते हुए केरल हाई कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम पिता अचल संपत्ति को बांटने के लिए अपनी अवयस्क बेटी का कानूनी अभिभावक बन सकता है। कोर्ट ने एक मुस्लिम बेटी की उस याचिका को ख़ारिज करते हुए यह फैसला दिया जिसने अपने पिता द्वारा संपत्ति के बंटवारे को नहीं मानते हुए संपत्ति का दुबारा बँटवारा कराए जाने की मांग की थी।यह विवादित संपत्ति शुरू में बेटी की कानूनी अभिभावक के रूप में पिता ने बेटी और उसके भाई बहनों के लिए खरीदी थी। बाद में पिता ने बेटी के कानूनी अभिभावक के रूप में इस जमीन को...

लोकायुक्तों की नियुक्ति के लिए एक समान दिशानिर्देश की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, मध्य प्रदेश के लोकायुक्त की नियुक्ति को भी चुनौती [याचिका पढ़े]
लोकायुक्तों की नियुक्ति के लिए एक समान दिशानिर्देश की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, मध्य प्रदेश के लोकायुक्त की नियुक्ति को भी चुनौती [याचिका पढ़े]

देश में लोकायुक्तों और उप लोकायुक्तों की नियुक्ति के लिए एक समान निर्देश बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।यह याचिका मध्य प्रदेश के एक पूर्व पुलिस महानिदेशक अरुण गुर्टू ने दायर की है। गुर्टू भोपाल सिटीजन्स’ फोरम के संयोजक भी हैं। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि अभी तक सिर्फ 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ही लोकायुक्त क़ानून है। इसके अलावा, इन सभी राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति के अलग अलग तरीके हैं। कुछ इसका पूरा अधिकार मुख्य न्यायाधीश को देते हैं जबकि कुछ...

वर्ष 2017 में देश के हाई कोर्टों में सर्वाधिक नियुक्तियां होंगी : रविशंकर प्रसाद
वर्ष 2017 में देश के हाई कोर्टों में सर्वाधिक नियुक्तियां होंगी : रविशंकर प्रसाद

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने रविवार को कहा कि सरकार एक साल के भीतर देश के हाई कोर्टों में अब तक की सबसे अधिक नियुक्ति करने जा रही है। वर्तमान रिकॉर्ड एक साल में सर्वाधिक 126 नियुक्तियों की रही है।प्रसाद ने ओडिशा लॉ अकादमी के समारोह में यह बात कही। उड़ीसा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा अभी हाल में एक दिन के हड़ताल के बारे में प्रश्न पूछने पर क़ानून मंत्री ने यह बात कही। वकीलों ने हाई कोर्ट में कुल 27 पदों में से नौ जजों की कमी के बावजूद जज के स्थानांनतरण के विरोध में शुक्रवार को काम बंद...

अगर पिता हो बलात्कारी तो पी़ड़िता का बयान बिना पूरक साक्ष्य के भी स्वीकार्य : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
अगर पिता हो बलात्कारी तो पी़ड़िता का बयान बिना पूरक साक्ष्य के भी स्वीकार्य : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि पीड़िता का बयान उस स्थिति में स्वीकार हो सकता है अगर बलात्कारी पिता ही हो और ऐसी स्थिति में पूरक साक्ष्य की जरूरत नहीं है।रेप मामले में सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा रानी की बेंच ने कहा कि बिना पूरक साक्ष्य के रेप पीड़िता के बयान स्वीकार हो सकते हैं।हाई कोर्ट ने रेप मामले में निचली अदालत से दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी की अर्जी पर सुनवाई के बाद फैसला दिया। 17 साल की बेटी के साथ उसके पिता ने रेप किया था। निचली अदालत ने पिता को दोषी करार दिया था और इस...

राजस्थान में बजरी का गैरकानूनी खनन : सुप्रीम कोर्ट ने 82 खान मालिकों पर प्रतिबंध लगाया, राज्य सरकार से जवाब माँगा [आर्डर पढ़े]
राजस्थान में बजरी का गैरकानूनी खनन : सुप्रीम कोर्ट ने 82 खान मालिकों पर प्रतिबंध लगाया, राज्य सरकार से जवाब माँगा [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने राजस्थान में बजरी के गैरकानूनी खनन पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। यह खनन पर्यावरण अनुमति और इसकी भराई के बारे में किसी भी तरह के वैज्ञानिक अध्ययन के बिना हो रहा है। कोर्ट ने 82 खान मालिकों पर तब तक के लिए प्रतिबन्ध लगा दिया है जब तक कि इन पूर्व शर्तों का पालन नहीं होता।अप्रैल 2013 में राजस्थान हाई कोर्ट ने एक एनजीओ नेचर क्लब ऑफ़ राजस्थान की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए राजस्थान माइनर मिनरल कंसेशन (अमेंडमेंट) रूल्स...

हदिया केस : शफीन जहां ने बिना रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की देखरेख जांच करने पर NIA के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की [याचिका पढ़े]
हदिया केस : शफीन जहां ने बिना रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की देखरेख जांच करने पर NIA के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की [याचिका पढ़े]

केरल हाईकोर्ट के अखिला उर्फ हदिया के साथ शादी रद्द करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे शफीन जहां ने अब बिना सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच करने पर नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी के खिलाफ अदालत की अवमानना की याचिका दाखिल की है।दरअसल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की  सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरवी रविंद्रन की देखरेख में NIA जांच के आदेश दिए थे लेकिन निजी कारणों का हवाला देते हुए जस्टिस रविंद्रन ने जांच की देखरेख करने से इंकार कर दिया।याचिका में कहा गया है कि...

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले के परिवार के लोग पंचायत की सदस्यता के लिए अयोग्य नहीं [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले के परिवार के लोग पंचायत की सदस्यता के लिए अयोग्य नहीं [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कहा है कि सरकारी जमीन या सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा करने वालों के परिजन पंचायत का सदस्य बनने के अयोग्य नहीं हो सकते। सुप्रीम कोर्ट ने सागर पांडुरंग धुन्दरे  बनाम केशव आभा पाटिल  मामले में महाराष्ट्र ग्रामीण पंचायत अधिनियम की धारा 14 की व्याख्या करते हुए कहा कि सिर्फ सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले की ही सदस्यता जाएगी और वह अयोग्य  होगा न कि उसके परिवार के सदस्य।सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस आर. भानुमति की बेंच के समक्ष अपील में कहा गया कि पंचायत के चुने...

नानी और दादी के बीच संरक्षण लेने की लड़ाई में नानी जीती, बॉम्बे हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]
नानी और दादी के बीच संरक्षण लेने की लड़ाई में नानी जीती, बॉम्बे हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाई कोर्ट ने आठ साल की एक लड़की को उसके नानी के संरक्षण में भेज दिया है। लड़की के संरक्षण को लेकर उसकी नानी और दादी में अदालत में मामला चल रहा था।न्यायमूर्ति मृदुला भाटकर ने नानी को बच्चे का अभिभावक नियुक्त करने के रायगढ (मनगाँव) के जिला जज के निर्णय को उचित ठहराया।इस लडकी के माँ-बाप निम्मी और आतिफ थे जिन्होंने 2008 में शादी की। निम्मी ने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया और बुशरा नाम रख लिया। 2 मार्च 2009 को उनकी लड़की पैदा हुई। चार साल बाद 11 मार्च 2013 ने आतिफ ने दुबई में बुशरा का गला घोंट दिया।...

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा, बेहतर सड़क लोगों के जीवन के अधिकार का हिस्सा, नगर निगम फंड नहीं होने का बहाना बनाकर पल्ला नहीं झाड़ सकता [आर्डर पढ़े]
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा, बेहतर सड़क लोगों के जीवन के अधिकार का हिस्सा, नगर निगम फंड नहीं होने का बहाना बनाकर पल्ला नहीं झाड़ सकता [आर्डर पढ़े]

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा है कि सड़कों का उचित रखरखाव होना और बेहतर स्थिति में होना लोगों का अधिकार है। ये लोगों के जीवन के अधिकार का मसला है। वित्तीय कमी का बहाना बनाकर नगर निगम इस जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।सुप्रीम कोर्ट ने पंकज साहू की अर्जी  पर सुनवाई के दौरान उक्त व्यवस्था दी जिसमें कहा गया कि लोग सड़कों से दुकान तक नहीं जा पा रहे हैं। सड़कों की हालत इतनी खराब है कि लोग उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। जस्टिस के. अग्रवाल की बेंच ने कहा कि म्युनिसिपल अथॉरिटी की जिम्मेदारी है कि वह सड़क को...

उपभोक्ता फोरम को शिकायत पर सुनवाई का अधिकार, भले ही विरोधी ने सिविल सूट दाखिल किया हो : NCDRC [निर्णय पढ़ें]
उपभोक्ता फोरम को शिकायत पर सुनवाई का अधिकार, भले ही विरोधी ने सिविल सूट दाखिल किया हो : NCDRC [निर्णय पढ़ें]

नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमिशन (NCDRC) ने कहा है कि अगर विरोधी पक्ष ने सिविल सूट भी दाखिल कर दिया हो तो उपभोक्ता फोरम का किसी शिकायत पर सुनवाई के लिए अधिकारक्षेत्र बना रहेगा। भले ही सिविल सूट को भी उसी करार के आधार पर दाखिल किया गया हो जो उपभोक्ता संबंधी शिकायत का मूल आधार हो।दरअसल राज्य आयोग ने याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें मुआवजे के साथ फ्लैट का कब्जा मांगा गया था। लेकिन आयोग बिल्डर की इस दलील से सहमत था कि उन्होंने पहले ती शिकायतकर्ता के साथ हुए करारनामे को रद्द करने के लिए सिविल...

‘टाइपोग्राफिकल’ गलती : गुजरात हाईकोर्ट ने फांसी की सजायाफ्ता पर आदेशों में संशोधन किया [आर्डर पढ़े]
‘टाइपोग्राफिकल’ गलती : गुजरात हाईकोर्ट ने फांसी की सजायाफ्ता पर आदेशों में संशोधन किया [आर्डर पढ़े]

गुजरात हाईकोर्ट ने एक मामले में ये पाते हुए कि जमानत की अर्जी दाखिल करने वाले को ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास नहीं बल्कि मौत की सजा सुनाई है, अपने आदेश में संशोधन करते हुए कडी शर्तें जोडी हैं।ठाकुर नागजीजी बाबूजी को दो नवंबर को अस्थाई जमानत दी गई थी। इस आदेश में खंडपीठ ने लिखा था कि वो आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।लेकिन बाद में अभियोजन ने इस संबंध में एक अर्जी दाखिल की और कोर्ट को ध्यान दिलाया कि उस वास्तव में मौत की सजा दी गई है  ये आदेश में एक ‘ टाइपोग्राफिकल’ गलती है। अर्जी में संशोधन की...

अस्थाना की CBI स्पेशल डायरेक्टर के तौर पर  नियुक्ति : प्रशांत भूषण को SC से मिला एक हफ्ते का वक्त
अस्थाना की CBI स्पेशल डायरेक्टर के तौर पर नियुक्ति : प्रशांत भूषण को SC से मिला एक हफ्ते का वक्त

गुजरात काडर के IPS अफसर राकेश अस्थाना को सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर नियुक्त किए को चुनौती देने जाने याचिका पर सुनवाई फिर से टल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण के उस आग्रह को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने इसके लिए अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का वक्त मांगा था।जस्टिस आर के अग्रवाल और जस्टिस ए एम सप्रे की बेंच ने कहा कि अब सुनवाई 24 नवंबर को होगी।दरअसल 13 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नवीन सिन्हा ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि उनके...

ब्राह्मण महिला शादी करके एससी/एसटी का स्टेटस नहीं प्राप्त कर सकती : हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
ब्राह्मण महिला शादी करके एससी/एसटी का स्टेटस नहीं प्राप्त कर सकती : हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने इस बात को दुहराया है कि एक व्यक्ति जो जन्मजात अनुसूचित जनजाति या अनुसूचित जाति का नहीं है, अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति से शादी कर उस जाति या जनजाति विशेष की जाति का नहीं हो सकता।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति मोहन गोएल की पीठ ने अथॉरिटी के इस आदेश को सही ठहराया जिसमें अनुसूचित जनजाति के एक व्यक्ति से शादी कर लेने वाली ऊंची जाति की एक महिला को मिले अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र को रद्द कर दिया गया था। इस प्रमाणपत्र के आधार पर  प्राप्त रोजगार को...

21 साल जेल में बिताने के बाद निर्दोष घोषित; इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा, आपराधिक अपील निपटाने में देरी गंभीर चिंता का कारण [आर्डर पढ़े]
21 साल जेल में बिताने के बाद निर्दोष घोषित; इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा, आपराधिक अपील निपटाने में देरी गंभीर चिंता का कारण [आर्डर पढ़े]

वर्ष 1996 में एक हत्या के अभियुक्त के रूप में 21 साल तक जेल में रहने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस व्यक्ति को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 2005 से इस मामले की सुनवाई का लंबित होना न्याय प्रशासन से जुड़े सभी लोगों के लिए गंभीर चिंता का कारण है।इस आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति नारायण शुक्ला और न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने अभियुक्त राम लखन को बरी कर दिया और निचली अदालत द्वारा आजीवन कारावास की उसकी सजा को माफ़ कर दिया। निचली अदालत ने राम लखन को छविनाथ नामक व्यक्ति की चाकू से हत्या...

मंत्री अपनी ही सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल नहीं कर सकता : केरल हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
मंत्री अपनी ही सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल नहीं कर सकता : केरल हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

केरल हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि एक मंत्री अपनी ही सरकार या इसके पदाधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल करने के अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने दो अलग अलग लेकिन सहमति से ये फैसला सुनाया है।हाईकोर्ट ने कहा है कि कोई भी मंत्री अपने पद पर रहते हुए अपनी ही सरकार या इसके नुमाइंदों के कार्य पर अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दाखिल नहीं कर सकता।दरअसल हाईकोर्ट केरल के मंत्रा थॉमस चंडी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। चंडी ने जिला कलेक्टर की उस रिपोर्ट को चुनौती दी थी जिसमें...

दिवालिया केस के कोर्ट में जाने के बाद भी मामले को निपटाने के लिए नियम संशोधित किए जा सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
दिवालिया केस के कोर्ट में जाने के बाद भी मामले को निपटाने के लिए नियम संशोधित किए जा सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी (एप्लीकेशन टू एड्जुडीकेटिंग अथॉरिटी) रूल्स, 2016 में संशोधन का सुझाव दिया ताकि इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 (आईबीसी) के तहत मामले को स्वीकार करने के बाद भी ट्रिब्यूनल सेटलमेंट को रिकॉर्ड कर सके।कोर्ट ने इस मामले में अनुच्छेद 142 के तहत ऋण लेने वाली कंपनी उत्तरा फूड्स एंड फीड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई के दौरान यह सुझाव दिया। कंपनी ने कोर्ट को बताया कि वह ऋणदाता कंपनी मोना फर्माकेम के साथ मामले को सुलझा लिया...

क़ानून मंत्रालय ने आरटीआई के जवाब में कहा, जजों के तबादले के लिए उनकी सहमति की जरूरत नहीं
क़ानून मंत्रालय ने आरटीआई के जवाब में कहा, जजों के तबादले के लिए उनकी सहमति की जरूरत नहीं

सूचना का अधिकार के तहत एक आवेदन के जवाब में क़ानून मंत्रालय ने कहा है कि किसी जज का तबादला करने के लिए किसी जज की सहमति लेने की जरूरत नहीं है।क़ानून और न्याय मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “किसी जज के तबादले के प्रस्ताव पर अमल भारत का मुख्य न्यायाधीश कर सकता है और उनका दृष्टिकोण ही इस मामले में मायने रखता है। इस मामले में पहली बार या उसके बाद के तबादले के लिए उस जज की सहमति प्राप्त करने की जरूरत नहीं है। हर तबादला आम हित को ध्यान में रखकर होता है यानी पूरे देश में बेहतर न्यायिक...