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राजस्थान में बजरी का गैरकानूनी खनन : सुप्रीम कोर्ट ने 82 खान मालिकों पर प्रतिबंध लगाया, राज्य सरकार से जवाब माँगा [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
20 Nov 2017 2:32 PM GMT
राजस्थान में बजरी का गैरकानूनी खनन : सुप्रीम कोर्ट ने 82 खान मालिकों पर प्रतिबंध लगाया, राज्य सरकार से जवाब माँगा [आर्डर पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने राजस्थान में बजरी के गैरकानूनी खनन पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। यह खनन पर्यावरण अनुमति और इसकी भराई के बारे में किसी भी तरह के वैज्ञानिक अध्ययन के बिना हो रहा है। कोर्ट ने 82 खान मालिकों पर तब तक के लिए प्रतिबन्ध लगा दिया है जब तक कि इन पूर्व शर्तों का पालन नहीं होता।

अप्रैल 2013 में राजस्थान हाई कोर्ट ने एक एनजीओ नेचर क्लब ऑफ़ राजस्थान की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए राजस्थान माइनर मिनरल कंसेशन (अमेंडमेंट) रूल्स 2012 के प्रावधानों के अनुरूप नियमों को लागू कराने के लिए राजस्थान सरकार को छह महीने का समय दिया था। इस समय को बढाने के बारे में राजस्थान सरकार के आवेदन को हाई कोर्ट ने 21 अक्टूबर 2013 को खारिज कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने एक विशेष अनुमति याचिका दाखिल की जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी किया जिसके तहत खनन का पट्टा लेने वालों को पर्यावरण अनुमति लेने के लिए आवेदन करने और इस आवेदन के स्वीकृत होने तक खनन की अनुमति दी थी। 82 खान मालिकों को आशय पत्र जारी किया गया और उनसे यह कहा गया कि स्वीकृति खनन योजना और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनुमति संबंधी पत्र पेश करने पर ही यह लागू होगा और वित्तीय आश्वासन के बारे में शपथ पत्र देना होगा। इस बारे में आवेदन देने के बावजूद पर्यावरण अनुमोदन संबंधी प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सका क्योंकि बजरी के खनन के बारे में नीति निर्धारण में देरी हुई।

वृहस्पतिवार को पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, “राजस्थान में बजरी और बालू के खनन में बारे में जो हो रहा है उससे हम शकते में हैं। कई महीने से 82 खान मालिक हमारे सामने बिना किसी पर्यावरण अनुमति और भराई के बारे में किसी योजना के बिना खनन कार्य में लगे हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “यह स्पष्ट है कि एमओईएफ और सीसी राजस्थान में पर्यावरण को हो रहे नुकसान से चिंतित नहीं हैं और सबसे खराब बात तो यह है कि राजस्थान सरकार को तो इसकी कतई कोई चिंता नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस परिस्थिति में पीठ तत्काल प्रभाव से 82 खान मालिकों के खनन कार्य पर प्रतिबन्ध लगाता है और यह तब तक जारी रहेगा जब तक कि वैज्ञानिक भराई का अध्ययन पूरा नहीं हो जाता और एमओईएफ और सीसी पर्यावरण अनुमति देने या इसे रद्द करने के बारे में कोई निर्णय नहीं ले लेता।

कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव को सरकार और खान मालिकों के बीच गठजोड़ के आरोप पर शपथ पत्र दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

इस मामले की अगली सुनवाई अब 24 नवंबर को होगी।


 
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