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अस्थाना की CBI स्पेशल डायरेक्टर के तौर पर नियुक्ति : प्रशांत भूषण को SC से मिला एक हफ्ते का वक्त

LiveLaw News Network
18 Nov 2017 5:03 AM GMT
अस्थाना की CBI स्पेशल डायरेक्टर के तौर पर  नियुक्ति : प्रशांत भूषण को SC से मिला एक हफ्ते का वक्त
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गुजरात काडर के IPS अफसर राकेश अस्थाना को सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर नियुक्त किए को चुनौती देने जाने याचिका पर सुनवाई फिर से टल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण के उस आग्रह को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने इसके लिए अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का वक्त मांगा था।

जस्टिस आर के अग्रवाल और जस्टिस ए एम सप्रे की बेंच ने कहा कि अब सुनवाई 24 नवंबर को होगी।

दरअसल 13 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नवीन सिन्हा ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि उनके भाई इस मामले को नहीं सुनना चाहते इसलिए कोई दूसरी बेंच इसकी सुनवाई करेगी।

गौरतलब है कि NGO कॉमन कॉज ने कोर्ट में दाखिल याचिका में अस्थाना की नियुक्ति को समग्र अखंडता और संस्थानिक अखंडता के सिद्धांत के विपरीत बताया है। याचिका में नियुक्ति के रद्द करने और भ्रष्टाचार के मामले की जांच पूरी होने तक अस्थाना को सीबीआई से बाहर ट्रांसफर की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टाब्लिशमेंट एक्ट, 1946 के तहत स्पेशल डायरेक्टर की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार को  सीबीआई निदेशक के परामर्केंश से केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC), सतर्कता आयुक्त ( VC), गृह सचिव और सचिव ( कार्मिक) की सिफारिशों के आधार पर नियुक्ति करनी है।

याचिका में दावा किया गया है कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने ये कहते हुए नियुक्ति का विरोध किया था कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले की जांच चल रही है। ये जांच गुजरात की स्टर्लिंग बॉयोटेक और मुंबई, वडोदरा व ऊटी की संदेसारा ग्रुप ऑफ कंपनीज से मिली एक डायरी के आधार पर चल रही है। डायरी में अस्थाना का नाम आया है कि उन्होंने कंपनियों से घूस ली है।

याचिका में कहा गया है कि सीबीआई निदेशक की आपत्ति के बावजूद प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की कैबिनेट कमेटी ने अगले ही दिन अस्थाना की नियुक्ति के आदेश दे दिए।

याचिका में द पायोनियर में जाने माने पत्रकार जे गोपालकृष्ण के आर्टिकल का हवाला दिया गया है जिसमें लिखा है कि आपत्ति का कारण अखंडता का क्लॉज था। इसमें द हिंदू में छपे समाचार का हवाला दिया गया जिसमें सेलेक्ट कमेटी के एक सदस्य की ओर से कहा गया कि शनिवार को बैठक के दौरान सदस्य अस्थाना की पदोन्नति को लेकर विभाजित थे। इसलिए निर्णय लिया गया कि सोमवार को दोबारा बैठत होगी।

हालांकि एक संवाददाता सम्मेलन में CVC के वी चौधरी ने इसका खंडन करते हुए कहा था कि अस्थाना की नियुक्ति का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। उन्होंने ये भी कहा कि सीबीआई डायरेक्टर सेलेक्ट कमेटी के सदस्य नहीं हैं बल्कि सिर्फ उनकी राय ली जाती है।

याचिका में कहा गया कि सीबीआई डायरेक्टर की राय को अनदेख किया गया और ये भी साफ  नहीं है कि सलेक्शन कमेटी में नियुक्ति को लेकर क्या हुआ। साथ ही क्या ये नियुक्ति सेक्शन 4C के तहत 21 अक्तूबर 2017 को सिफारिशों के तहत हुई। साफ है कि इस मामले में सीबीआई डायरेक्टर के परामर्श को अनदेखा किया गया जो नियमों के खिलाफ है और ये कई फैसलों में कहा गया है।

इस नियुक्ति को अवैध बताते हुए कहा गया है कि बिना ठोस कारण बताए हुए सीबीआई डायरेक्टर के परामर्श को अनदेखा कर की गई ये नियुक्ति अवैध है। चूंकि अस्थाना सीबीआई डायरेक्टर के अधीन सीबीआई में काम करते रहे हैं इसलिए वो उनके मामले का सही मूल्यांकन कर सकते हैं। इसलिए बिना पर्याप्त कारण उनकी राय को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

याचिका में कहा गया है कि अस्थाना ने 2016 में सीबीआई के लिए जरूरी अपनी संपत्ति का रिटर्न भी दाखिल नहीं किया। याचिका में इस नियुक्ति को अवैध, बदनीयती से लिया गया फैसला और कोर्ट द्वारा तय किए गए अखंडता के सिद्धांत के खिलाफ है। साथ ही कानून का राज्य स्थापित करने के सिद्धांत के तहत ये नागरिकों के अनुच्छेद 14 और 21 के अधिकारों का उल्लंघन है।

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