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पहली नजर में सांठगांठ की भनक मिलते ही सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलटी मुंबई में दिवालिएपन की कार्यवाही रोकी [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
13 Jan 2018 2:37 PM GMT
पहली नजर में सांठगांठ की भनक मिलते ही सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलटी मुंबई में दिवालिएपन की कार्यवाही रोकी [आर्डर पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मुंबई बेंच में दिवालिए के एक मामले की सुनवाई उस समय स्थगित कर दी जब उसको पता चला कि प्रोमोटरों और याचिकाकर्ताओं के बीच सांठगांठ है।

न्यायमूर्ति रोहिंटन एफ नरीमन और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा एक सामूहिक निवेश योजना के निवेशकों द्वारा दायर याचिका की सुनवाई कर रहे थे। इस कंपनी को दो प्रोमोटरों रॉयल ट्विंकल स्तर क्लब लिमिटेड और साइट्रस चेक्स इन्स लिमिटेड ने शुरू किया था।

इस सामूहिक निवेश योजना के 10 निवेशकों ने एनसीएलटी, मुंबई के समक्ष उस समय एक अपील दाखिल की जब उनको पता चला कि एनसीएलटी में कंपनी के कॉर्पोरेट इंसोल्वेंसी के लिए याचिका स्वीकृत हो गई है। इंसोल्वेंसी के लिए आवेदन दोनों ही प्रोमोटरों ने दाखिल किया था। एनसीएलटी ने तकनीकी आधार पर उनकी याचिका खारिज कर दी और इसके बाद निवेशकों ने एनसीएलएटी का दरवाजा खटखटाया पर वहाँ भी उनकी याचिका रद्द कर दी गई। तब जाकर इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका दायर की।

निवेशकों ने अपनी याचिका में कहा कि कुल 18 लाख निवेशकों ने इस कंपनी की योजना में 7500 करोड़ रुपए का निवेश किया और एनसीएलटी को सेबी और एसएटी के कुछ फैसलों के बारे नहीं बताया गया था।

बाजार नियामक ने रॉयल ट्विंकल स्टार क्लब लिमिटेड (आरटीएससी) के चार निदेशकों को तीन महीने के अंदर निवेशकों का पैसा वापस करने को कहा था। ये पैसे विभिन्न हॉलिडे प्लान के तहत जमा किए गए थे जिसमें प्रावधान यह था कि अगर निवेशक प्लान का उपयोग नहीं करते तो उनको पैसे वापस मिल जाएंगे। सेबी ने आरटीएससी और उसके निदेशकों से कहा कि वे कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम के तहत पैसा जमा करने की योजना पर अमल नहीं करें और सेबी ने 2016 में इन कंपनियों को चार साल के लिए बाजार से दूर रहने को कहा था।

2015 में अपने आदेश में सेबी ने कहा था, “कंपनी और इसके निदेशक निवेशकों को पैसे चुकाने के अलावा किसी अन्य कार्य के लिए अपनी परिसंपत्ति नहीं बेचेंगे।

एसएटी ने भी सेबी के आदेश को सही ठहराया था और कंपनी की योजना को प्रतिबंधित कर दिया था।

निवेशकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट को कहा गया कि यह तथ्य कि जब इंसोल्वेंसी रिजोल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) नियुक्त किया गया तो उस समय प्रतिवादी ने विरोध नहीं किया जो कि यह बताता है कि प्रोमोटरों और निवेशकों के बीच सांठगांठ थी।

कोर्ट ने कहा, “...इसलिए हमारा मानना है कि प्रथम दृष्टया यह बात सही लगती है और इंसोल्वेंसी कोड के तहत कार्यवाही को तत्काल स्थगित किया जाता है।” कोर्ट ने आईआरपी को निर्देश दिया कि वह इस मामले में अब तक जो काम हुआ उसकी जानकारी कोर्ट को दे।


 
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