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देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए ओपिनियन और एग्जिट पोल्स की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका [याचिका पढ़े]

LiveLaw News Network
16 Jan 2018 5:24 AM GMT
देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए ओपिनियन और एग्जिट पोल्स की  निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका [याचिका पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट में यह कहते हुए ओपिनियन और एग्जिट पोल्स के खिलाफ एक जनहित याचिका दाखिल की गई है कि ये झूठे और गलत भविष्यवाणियाँ करते हैं और आने वाले चुनावों में मतदाताओं पर इसका असर पड़ता है जो कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के आयोजन की भावना के खिलाफ है। याचिका में इसलिए ओपिनियन और एग्जिट पोल्स पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग की गई है।

यह जनहित याचिका एडवोकेट और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है और इनका कहना है कि अविनियमित एग्जिट और ओपिनियन पोल्स स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को चोट पहुंचाता है और अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत सूचना ग्रहण करने के अधिकार को प्रभावित करता है।

ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल सर्वेक्षण होते हैं जो लोगों की राय पर आधारित होते हैं और इसमें विशेष समूह के विचारों को जानकर चुनावों के बारे में भविष्यवाणियाँ की जाती हैं। ओपिनियन पोल चुनाव के पहले किए जाते हैं जबकि एग्जिट पोल चुनाव के बाद किए जाते हैं।

उपाध्याय ने कहा, “आरपीए की धारा 126 को 1 अगस्त 1996 में लागू किया गया। इसके तहत सिनेमेटोग्राफ, टेलीविज़न या अन्य इसी तरह के उपकरणों द्वारा चुनाव से संबंधित किसी भी तरह की बातों को चुनाव समाप्त होने के 48 घंटे पहले तक दिखाने पर प्रतिबंध है। हालांकि इसमें ओपिनियन पोल के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है।

उन्होंने कहा कि वे कोर्ट की शरण में जाने के लिए बाध्य हुए हैं क्योंकि प्रधानमंत्री आश्वासन देने के बावजूद चुनाव सुधार की दिशा में कुछ भी करने में विफल रहे हैं।

उपाध्याय ने अपनी याचिका में जो अपील की है वे इस तरह से हैं :




  1. चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए उचित कदम उठाए और इस बारे में प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के माध्यम से लोगों को बताए;

  2.  इसके विकल्प के रूप में चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल को विनियमित करने के लिए वह वैकल्पिक दिशानिर्देश तैयार करे और विधि आयोग द्वारा अपनी 255वें रिपोर्ट में सुझाए गए तरीकों के अनुसार इसको लागू करे।

  3. कोर्ट जैसा भी इस मामले में उचित समझे, इस बारे में निर्देश दे।


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