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उदयपुर फाइल्स फिल्म में छह कट लगाए गए, पुनः प्रमाणन लंबित: निर्माता ने दिल्ली हाईकोर्ट को दी जानकारी
सोमवार 28 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट को फिल्म Udaipur Files: Kanhaiya Lal Tailor Murder के निर्माताओं द्वारा सूचित किया गया कि फिल्म में छह कट लगाए गए हैं लेकिन अब तक इसका पुनः प्रमाणन लंबित है।इस जानकारी के बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख निर्धारित की।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिन्हें जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अर्शद मदनी और कन्हैया लाल हत्या मामले में आरोपी मोहम्मद जावेद द्वारा दायर किया...
'भारत भर में कितने मंदिरों का प्रबंधन कानून द्वारा अपने अधीन किया गया?' उत्तर प्रदेश बांके बिहारी मंदिर न्यास अध्यादेश के विरुद्ध याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा
उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास अध्यादेश, 2025 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा मंदिर की प्रबंधन समिति से यह पता लगाने को कहा कि देश भर में कितने मंदिरों का प्रबंधन कानूनों के माध्यम से अपने अधीन किया गया।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल (मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से) की दलील सुनने के बाद मामले को पुनः सूचीबद्ध किया। सिब्बल ने दलील दी कि बांके बिहारी मंदिर से संबंधित एक मामला एक...
BREAKING| नई OBC सूची मामले में बंगाल सरकार को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें पश्चिम बंगाल राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की नई सूची से संबंधित अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी गई थी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने पश्चिम बंगाल राज्य द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया।बेंच ने हाईकोर्ट द्वारा अपनाए गए इस तर्क पर आश्चर्य व्यक्त किया कि केवल विधायिका के पास ही ओबीसी सूची को मंजूरी देने का अधिकार...
सुप्रीम कोर्ट ने सोनी के मुकदमे को बॉम्बे हाईकोर्ट से मद्रास हाईकोर्ट ट्रांसफर करने की इलैयाराजा की म्यूजिक कंपनी की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (28 जुलाई) को संगीत जगत के दिग्गज इलैयाराजा की कंपनी 'इलैयाराजा म्यूजिक एन मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड' (IMMA) द्वारा दायर ट्रांसफर याचिका खारिज की, जिसमें सोनी म्यूजिक एंटरटेनमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उसके खिलाफ दायर कॉपीराइट उल्लंघन के मुकदमे को बॉम्बे हाईकोर्ट से मद्रास हाईकोर्ट ट्रांसफर करने की मांग की गई थी।चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले की सुनवाई की। बेंच ने कहा कि इलैयाराजा द्वारा मद्रास हाईकोर्ट में...
BREAKING| 'हर दिन सैकड़ों कुत्ते काटते हैं': सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में बच्चों पर आवारा कुत्तों के हमले की रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया
सुप्रीम कोर्ट ने टाइम्स ऑफ इंडिया के दिल्ली एडिशन में प्रकाशित "शहर आवारा कुत्तों से परेशान और बच्चे चुका रहे कीमत" शीर्षक वाली खबर पर स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने इस बात का संज्ञान लेते हुए एक रिट याचिका दायर की कि कैसे बिना टीकाकरण वाले आवारा कुत्तों के कारण शिशु, बच्चे और बुजुर्ग रेबीज रोग का शिकार हो रहे हैं।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने एक आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया:"सप्ताह शुरू हो गया और सबसे पहले हमें टाइम्स ऑफ इंडिया के दिल्ली एडिशन में प्रकाशित एक बेहद...
'तमिलनाडु राज्यपाल मामले के फैसले में शामिल 14 में से 11 प्रश्न': केरल ने सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति के संदर्भ की स्वीकार्यता पर जताई आपत्ति
केरल राज्य ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दायर कर विधेयक को मंज़ूरी देने की समय-सीमा के संबंध में अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा दिए गए संदर्भ की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया। राज्य ने राष्ट्रपति के संदर्भ को अनुत्तरित वापस करने की मांग की।22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा संविधान के अनुच्छेद 200 और 201 के तहत राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों के संबंध में दिए गए राष्ट्रपति के संदर्भ के संबंध में केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया।पिछले हफ़्ते,...
7 साल तक दाखिल नहीं की गई चार्जशीट, सुप्रीम कोर्ट ने PMLA मामले में ट्रायल पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत एक मामले में 4 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई पर रोक लगा दी, जिसमें 7 साल से आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट पीबी सुरेश (याचिकाकर्ताओं की ओर से) की दलील सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। सुरेश ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं का नाम इस अपराध में नहीं है और सवाल उठाया कि जब आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया तो PMLA मामले में सुनवाई कैसे आगे बढ़ सकती है।याचिकाकर्ताओं के खिलाफ सुनवाई...
MACT मुआवज़े के आधार पर शुल्क का दावा करने पर वकील के निलंबन को सुप्रीम कोर्ट ने रखा बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक वकील के मामले में नरमी बरतने से इनकार किया, जिसका लाइसेंस 5 लाख रुपये के मोटर दुर्घटना मुआवज़े के दावे वाले मुवक्किल को 2.3 लाख रुपये की फीस नोटिस जारी करने के कारण 3 साल के लिए निलंबित कर दिया गया था।न्यायालय ने मोटर दुर्घटना मुआवज़े के दावों की मांग करने वाले गरीब लोगों के वकीलों के 'गिरोहों' द्वारा शोषण के जोखिम को रेखांकित किया और कहा कि MACT के नतीजों के आधार पर फीस की मांग करने का याचिकाकर्ता का आचरण 'घोर कदाचार' है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की...
2026 के बाद की जनगणना से पहले राज्यों में शीघ्र परिसीमन की याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि संविधान का अनुच्छेद 170 किसी भी राज्य के परिसीमन कार्य पर तब तक प्रतिबंध लगाता है, जब तक कि 2026 के बाद की पहली जनगणना के प्रासंगिक आंकड़े उपलब्ध न हो जाएं।कोर्ट ने कहा,"अनुच्छेद 170(3) का प्रावधान स्पष्ट रूप से और व्यापक रूप से यह प्रावधान करता है कि प्रत्येक राज्य की विधान सभा में सीटों के आवंटन, जिसमें प्रत्येक राज्य को प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित करना भी शामिल है, उसको तब तक पुनर्समायोजित करना आवश्यक नहीं होगा, जब तक कि वर्ष 2026 के बाद की पहली...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (21 जुलाई, 2025 से 25 जुलाई, 2025 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।स्टूडेंट्स के कल्याण के लिए दिशानिर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने घोषणा की, कहा- मानसिक स्वास्थ्य अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग स्टूडेंट्स के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का अधिकार जीवन और...
बिहार में त्रुटिपूर्ण और जल्दबाजी में की गई SIR प्रक्रिया के कारण लगभग 40 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का खतरा: योगेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
चुनाव विश्लेषक और राजनेता योगेंद्र सिंह यादव ने सुप्रीम कोर्ट में प्रतिउत्तर दाखिल कर कहा कि बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में लगभग 40 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका है।यादव के प्रतिउत्तर के अनुसार, वोटर लिस्ट अपेडट करने के लिए गणना प्रपत्र भरने की अंतिम तिथि से एक सप्ताह पहले भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बिहार के 7.9 करोड़ मतदाताओं में से केवल 94.68% मतदाताओं को ही शामिल किया था, जिसका अर्थ है कि 5.2% मतदाताओं ने अभी तक अपने प्रपत्र जमा नहीं किए।यादव ने SIR...
नकदी मामले में जांच रिपोर्ट के खिलाफ जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर 28 जुलाई को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट सोमवार (28 जुलाई) को जस्टिस यशवंत वर्मा द्वारा दायर उस रिट याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने इन-हाउस इंक्वारी कमेटी की रिपोर्ट को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें आवास पर नकदी विवाद में दोषी ठहराया गया।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ 'XXX बनाम भारत संघ और अन्य' टाइटल वाले इस मामले की सुनवाई करेगी।गौरतलब है कि वर्तमान में मानसून सत्र के दौरान संसद में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया गया है।पिछले हफ्ते सीनियर वकीलों कपिल सिब्बल,...
Bihar SIR | मतदाताओं की जानकारी या सहमति के बिना BLO बड़े पैमाने पर गणना प्रपत्र अपलोड कर रहे हैं: ADR ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं के समूह में एक प्रतिउत्तर दायर किया। प्रतिउत्तर के अनुसार, ADR का दावा कि वोटिंग लिस्ट को अपडेट करने के लिए उपयोग किए जाने वाले मतदाताओं के गणना प्रपत्र, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ERO) द्वारा मतदाताओं की सहमति के बिना बड़े पैमाने पर अपलोड किए जा रहे हैं।यह कहा गया कि जिन मतदाताओं ने सहायक दस्तावेजों के साथ गणना प्रपत्र जमा नहीं किए और जिनके नाम 1...
'बढ़ी हुई सज़ा का पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू होना अनुच्छेद 20(1) का उल्लंघन': सुप्रीम कोर्ट ने POCSO Act मामले में सज़ा में संशोधन किया
सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के तहत मामले में निचली अदालत द्वारा पूर्वव्यापी प्रभाव से सुनाई गई आजीवन कारावास की सज़ा रद्द कर दी, जहां दोषी को 5 साल की नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार का दोषी ठहराया गया था।सज़ा बरकरार रखते हुए न्यायालय ने सज़ा को केवल POCSO Act की धारा 6 के अनुसार आजीवन कारावास में बदल दिया, जिसे 2019 में संशोधित किया गया था।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली...
सहमति की उम्र 18 वर्ष ही रहनी चाहिए; किशोर संबंधों के मामलों में न्यायिक विवेक का प्रयोग किया जा सकता है: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
सुप्रीम कोर्ट में यौन अपराधों के मामले में भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली की प्रतिक्रिया में सुधार के संबंध में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें दी गई लिखित दलील में यूनियन ऑफ इंडिया ने भारतीय कानून के तहत सहमति की वैधानिक आयु 18 वर्ष से कम करने के किसी भी कदम का विरोध किया है। केंद्र ने न्यायमित्र सीनिय एडवोकेट इंदिरा जयसिंह के उस सुझाव का भी विरोध किया जिसमें न्यायालय ने 16 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों के बीच सहमति से यौन गतिविधियों को POCSO अधिनियम और संबंधित कानूनों के दायरे से बाहर रखने...
स्टूडेंट्स के कल्याण के लिए दिशानिर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने घोषणा की, कहा- मानसिक स्वास्थ्य अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग
स्टूडेंट्स के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का अधिकार जीवन और सम्मान के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) का एक अभिन्न अंग है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जीवन के अधिकार से अविभाज्य है। साथ ही उन्होंने कोचिंग सेंटरों और शैक्षणिक संस्थानों की विषाक्त रैंक और परिणाम संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आलोचना की।न्यायालय ने कहा,"शिक्षा का उद्देश्य शिक्षार्थी को मुक्त करना है, न...
अभियुक्त के प्रति कोई पूर्वाग्रह न उत्पन्न हुआ हो तो संज्ञान के बाद शिकायत में संशोधन किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि संज्ञान के बाद शिकायत में संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते कि अभियुक्त के प्रति कोई 'पूर्वाग्रह' न उत्पन्न हुआ हो और शिकायतकर्ता की क्रॉस एक्जामिनेशन का इंतज़ार किया जा रहा हो।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (IN Act) की धारा 138 के तहत शिकायत में संशोधन करने के शिकायतकर्ता के अनुरोध स्वीकार कर लिया। खंडपीठ ने कहा कि कोई जिरह पूरी नहीं हुई और "देसी घी (दूध उत्पाद)" को "दूध" में बदलने का सुधार टाइपोग्राफिकल...
दिल्ली सरकार की NCR में 10-15 साल पुराने डीजल/पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार की मांग
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने वाले 2018 के आदेश की पुनर्विचार की मांग की गई।याचिका में कहा गया कि वाहनों पर इस तरह का प्रतिबंध आवश्यक नहीं होगा, क्योंकि 2018 के बाद उत्सर्जन निगरानी के कड़े मानक और प्रदूषण परीक्षण का दायरा बढ़ा दिया गया। याचिका में केंद्र सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को आयु-आधारित प्रतिबंध के वास्तविक...
S. 156(3) CrPC| शिकायतकर्ता ने धारा 154(3) के तहत उपाय नहीं अपनाने पर मजिस्ट्रेट द्वारा FIR दर्ज करने का आदेश अमान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (25 जुलाई) को CrPC की धारा 156(3) के तहत पुलिस जांच का निर्देश देने वाला मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द करने से इनकार कर दिया, क्योंकि शिकायतकर्ता ने धारा 154(3) के तहत वैकल्पिक उपाय नहीं अपनाए थे।न्यायालय ने कहा कि पुलिस जाँच का निर्देश देने वाला मजिस्ट्रेट का आदेश अनियमित हो सकता है, लेकिन अगर शिकायत में संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है। मजिस्ट्रेट ने जांच का आदेश देने से पहले अपने विवेक का इस्तेमाल किया है तो उसे अवैध नहीं कहा जा सकता। इसलिए आदेश में कोई त्रुटि नहीं...
अदालतें दोषी ठहराने या बरी करने के लिए होती हैं, YouTube अदालतों का विकल्प नहीं हो सकता: क्राइम रिपोर्टर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि YouTube प्रस्तुतियाँ न्यायिक प्रक्रिया का स्थान नहीं ले सकतीं। इसके साथ ही कोर्ट ने केरल के एक पत्रकार की उनके वीडियो के लिए आलोचना की, जिसमें कथित तौर पर एक प्रमुख महिला राजनेता को निशाना बनाया गया था।पत्रकार ने दावा किया कि वीडियो का उद्देश्य सार्वजनिक चर्चा को प्रोत्साहित करना और भ्रष्टाचार से लड़ना था।जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ नंदकुमार टीपी की अग्रिम ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो अपने YouTube चैनल क्राइम ऑनलाइन पर अपलोड किए...



















