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डाइंग डिक्लरेशन केवल तभी दोषसिद्धि का एक मात्र आधार माना जा सकता है, जब कोर्ट इस बात से संतुष्ट हो कि यह सच एवं स्वैच्छिक है : सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि कोर्ट को इस बात से अवश्य संतुष्ट होना चाहिए कि डाइंग डिक्लरेशन ( मृत्यु से पूर्व दिया गया बयान ) सच एवं स्वैच्छिक है और तभी इसे बगैर पुष्टि किये दोषसिद्धि का एक मात्र आधार बनाया जा सकता है।इस मुकदमे में कर्नाटक हाईकोर्ट ने हत्या के अभियुक्त को ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किये जाने के आदेश को पलट दिया था और अभियुक्त को दोषी ठहराया था। अभियुक्त को दोषी करार दिये जाने के लिए हाईकोर्ट ने मृतक के डाइंग डिक्लरेशन पर भरोसा जताया था।अपील की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने...
कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज और लैंडमार्क डीके बसु केस के याचिकाकर्ता जस्टिस डीके बसु का निधन
कोलकाता हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीके बसु का आज (रविवार) पीयरलेस अस्पताल में निधन हो गया।जस्टिस डीके बसु डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (AIR 1997 SC 610) के ऐतिहासिक निर्णय में याचिकाकर्ताओं में से एक थे जहां उच्चतम न्यायालय ने गिरफ्तारी करते समय आवश्यक विशिष्ट दिशानिर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया। जस्टिस बसु ने कलकत्ता हाईकोर्ट में और सुप्रीम कोर्ट में एक वकील के रूप में अपना कानूनी पेशा शुरू किया। उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के जज के रूप रूप में काम किया।जस्टिस डीके बसु...
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति का ऑडिट करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र द्वारा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को किए गए लीक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति का ऑडिट करने का निर्देश दिया है।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने अवलोकन किया कि,"इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो ऑक्सीजन की आपूर्ति आवंटित की गई है, वे अपने सही तक पहुंच रहे हैं और उसे वितरण नेटवर्क के माध्यम से अस्पतालों में उपलब्ध कराया जा रहा है और यह उपयोगकर्ताओं को कुशलतापूर्वक और पारदर्शी आधार पर हो। इसके साथ ही ऑक्सीजन के उपयोग के संबंध में बाधाओं...
'कुछ कैदी अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण रिहा नहीं किए जा सकते': सुप्रीम कोर्ट ने COVID-19 से कैदियों की सुरक्षा के लिए जेल अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए
सुप्रीम कोर्ट ने जेल अधिकारियों से कैदियों के असाधारण मामलों के संबंध में कैदियों की चिंताओं पर विचार करने के लिए कहा है, जिन्हें उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि और COVID-19 के संक्रमण के चलते जेल से रिहा नहीं किया जा सकता है।पीठ ने जेलों से अंतरिम-जमानत/ पैरोल पर कैदियों की कुछ श्रेणियों की रिहाई के लिए दिशा-निर्देश जारी करते हुए यह अवलोकन किया।भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि जेल में बंद सभी...
अर्नेश कुमार जजमेंट का उल्लंघन कर कोई गिरफ्तारी ना हो; HPCs को उन सभी कैदियों को रिहा करना चाहिए, जो पहले रिहा हो चुके हैंः सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में भीड़ कम करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए
COVID-19 की दूसरी लहर के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में कैदियों की भीड़ कम करने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एन वी रमना, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने स्वतः संज्ञान मामले में निम्न दिशा- निर्देश दिए -1. अर्नेश कुमार जजमेंट का उल्लंघन करके कोई गिरफ्तारी ना होकोर्ट ने निर्देश दिया कि अधिकरण अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में 2014 के फैसले में निर्धारित दिशानिर्देशों का उल्लंघन करके गिरफ्तारी ना करें। उक्त फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा...
आरोप तय करने या आरोपमुक्त करने से इनकार करने के आदेश न तो अंतर्वर्ती हैं और न ही प्रकृति में अंतिम हैं, इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 397 (2) की रोक से प्रभावित नहीं हैं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि आरोप तय करने या आरोपमुक्त करने से इनकार करने के आदेश न तो अंतर्वर्ती हैं और न ही प्रकृति में अंतिम हैं और इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 397 (2) की रोक से प्रभावित नहीं हैं।सीजेआई एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति दी, जिसने ट्रायल कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ आपराधिक संशोधन याचिका खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय का विचार था कि सीजेए के आदेश में हस्तक्षेप करने के लिए सीआरपीसी की धारा 397 के तहत अधिकार क्षेत्र का...
भारतीय साक्ष्य अधिनियम- 'यदि दस्तावेज में कोई अस्पष्टता नहीं है तो धारा 92 का परंतुक (Proviso) 6 लागू नहीं होगा': सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि दस्तावेज में कोई अस्पष्टता नहीं है तो भारतीय साक्ष्य अधिनियम (इंडियन एविडेंस एक्ट), 1872 की धारा 92 का परंतुक (Proviso) 6 लागू नहीं होगा।भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 92 एक लिखित दस्तावेज के चीजों के संबंध में मौखिक साक्ष्य (Oral Evidence) प्रदान करता है। हालांकि धारा 92 का परंतुक 6 में दस्तावेज़ के बाहरी तथ्यों को प्रवेश करने की अनुमति देता है जो दिखाता है कि दस्तावेज़ की भाषा मौजूदा तथ्यों से किस तरीके से संबंधित है।सुप्रीम कोर्ट एक अपील पर विचार कर रहा था,...
COVID-19: सुप्रीम कोर्ट में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की पत्र याचिका, कानूनी बिरादरी की चिकित्सा समस्याओं को दूर करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने की मांग
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक पत्र याचिका दायर की है, जिसमें COVID -19 से प्रभावित वकीलों, जजों, उनके कर्मचारियों और परिवारों सहित कानूनी बिरादरी के कष्टों को दूर करने के लिए उचित निर्देश देने की मांग की गई हैं।पिछले कुछ हफ्तों में COVID -19 के कारण कई प्रतिष्ठित वकीलों और जजों की मृत्यु के मद्देनजर, बीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट से जिला, तालुका, हाईकोर्ट के वकीलों, जजों, उनके कर्मचारी और परिवार को, जिन्हें आवश्यकता है, को पर्याप्त बेड्स और अन्य COVID उपचार सुविधा दिलाने के लिए...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : जानिए सुप्रीम कोर्ट में कैसा रहा पिछला सप्ताह
03 मई 2021 से 7 मई 2021 तक सुप्रीम कोर्ट के कुछ ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र'लॉकडाउन के दौरान स्कूलों के संचालन खर्च में बचत हुई; सुविधाओं का उपयोग नहीं करने पर छात्रों से उसकी फीस नहीं ले सकते': सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निजी स्कूलों द्वारा लॉकडाउन के दौरान छात्रों द्वारा स्कूल गतिविधियों और सुविधाओं का उपयोग नहीं करने पर भी फीस की मांग करना 'मुनाफाखोरी' और 'व्यावसायीकरण' है। कोर्ट ने इस तथ्य ध्यान दिया कि पिछले शैक्षणिक वर्ष के दौरान कक्षाएं ऑनलाइन आयोजित की गई हैं। इससे देखते हुए...
COVID-19: सुप्रीम कोर्ट में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कानूनी पेशेवरों को पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं प्रदान करने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की मांग वाली याचिका दायर की
सुप्रीम कोर्ट में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पत्र याचिका दायर की, जिसमें COVID -19 से प्रभावित होने वाले अधिवक्ताओं, न्यायाधीशों, उनके कर्मचारियों और परिवार के कष्ट को कम करने के लिए उचित निर्देश देने की मांग गई है।बीसीआई ने पिछले कुछ हफ्तों में COVID-19 के कारण कई प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं और न्यायाधीशों की मृत्यु के मद्देनजर शीर्ष अदालत से अधिवक्ताओं, न्यायाधीश, उनके कर्मचारी और परिवार को पर्याप्त बेड और अन्य कोविड उपचार सुविधा प्रदान करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने का आग्रह किया...
'जब तक कोर्ट की कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग अस्तित्व में नहीं आ जाती, मौखिक कार्यवाही के रिकॉर्ड की अनुपस्थिति न्यायिक व्यवस्था को सताती रहेगी': सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी को चुनौती देने वाली निर्वाचन आयोग की याचिका को खारिज करते हुए निर्णय में कहा कि जब तक कोर्ट की कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग अस्तित्व में नहीं आ जाती, तब तक मौखिक कार्यवाही के रिकॉर्ड की अनुपस्थिति न्यायिक व्यवस्था को सताती रहेगी।कोर्ट ने कहा कि स्वप्निल त्रिपाठी बनाम सर्वोच्च न्यायालय (2018) 10 SCC 639 मामले के फैसले के तीन साल बीत गए हैं। इसमें न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के महत्व...
बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सोली सोराबजी को दी श्रद्धांजलि; भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर श्री सोली जे सोराबजी मेमोरियल लेक्चर की स्थापना की
बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने श्री सोली जे सोराब की स्मृति में एक आभासी श्रंद्धांजलि बैठक का आयोजन किया। बैठक में देश के कई शीर्ष वकील, जो सोराब जी को व्यक्तिगत रूप से जानते थे, बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सदस्य, और वकील शामिल हुए।बैठक में स्वर्गीय श्री सोराबजी के परिवार के सदस्य भी मौजूद थे, जिसमें उनकी पत्नी सुश्री ज़ेना सोराबजी, बेटी ज़िया मोदी, बेटे जहांगीर और होर्माज़्द सोराबजी और शामिल थे। स्वर्गीय श्री सोली जे सोराबजी असाधारण वकील थे, जिन्हें भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के चैंपियन के रूप...
स्वतंत्र गवाहों का परीक्षण न करना अभियोजन के मामले के लिए घातक नहीं होगा, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि जब अभियोजन पक्ष के अन्य गवाह भरोसेमंद और विश्वसनीय पाए जाते हैं, तो स्वतंत्र गवाहों का परीक्षण न करने पर अभियोजन पक्ष के लिए यह घातक नहीं होगा ।न्यायालय ने इस प्रकार इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील को खारिज करते हुए अवलोकन किया जिसने हत्या के एक मामले में अभियुक्तों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित फैसले और आदेश को पलट दिया था। आरोपियों में से एक ने अपील दायर करके सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।सर्वोच्च न्यायालय के सामने, उन्होंने कहा...
'मानव मूल्यों के साथ ईमानदार पेशेवर': सीजेआई रमना ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एमवाई इकबाल को श्रद्धांजलि दी
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एमवाई इकबाल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।न्यायमूर्ति इकबाल के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए न्यायमूर्ति रमना ने उन्हें एक कर्तव्यनिष्ठ पेशेवर बताया, जो मानवीय मूल्यों के लिए हमेशा खड़े रहे। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।जब आज सुबह खंडपीठ कोर्ट नंबर 1 में इकट्ठी हुई तो मुख्य न्यायाधीश ने इस संबंध में एक संदर्भ दिया और भारत के सुप्रीम कोर्ट की ओर से शोक...
"चुनाव आयोग का वर्तमान कामकाज मेरे मूल्यों के अनुरूप नहीं": चुनाव आयोग के सुप्रीम कोर्ट पैनल के वकील ने इस्तीफा दिया
चुनाव आयोग के सुप्रीम कोर्ट के पैनल के एक वकील मोहित डी. राम ने ने यह कहते हुए अपना इस्तीफा दे दिया कि उनके मौजूदा मूल्य भारत के चुनाव आयोग के कामकाज के तरीके के अनुरूप नहीं है।अपने पत्र में मोहित डी. राम ने लिखा,"भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) का प्रतिनिधित्व करने एक सम्मान था। मेरे पास अपने कैरियर का यह मील का पत्थर है। यह यात्रा चुनाव आयोग के स्थायी काउंसिल के कार्यालय का हिस्सा होने के साथ शुरू हुई और ईसीआई (2013 से) पैनल वकीलों में से एक के रूप में मैंने काम किया और इस तरह यह आगे बढ़ी।मोहित डी....
सुप्रीम कोर्ट ने गर्मियों की छुट्टियों के पहले भाग में सुनवाई करने वाली अवकाश पीठ समक्ष सूचीबद्ध किए जाने वाले मामलों पर सर्कुलर जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने "न्याय की मांग को पूरा करने और अत्यधिक तत्काल मामलों की सुनवाई के लिए" ग्रीष्मकालीन अवकाश के पहले भाग 10 मई, 2021 से 25 मई, 2021 के अवधि के लिए कुछ दिशा-निर्देशों को लेकर एक सर्कुलर जारी किया है।जारी किए गए सर्कुलर में दिए गए दिशा-निर्देश इस प्रकार हैः1. 10 मई, 2021 से 16 मई, 2021 तक दो डिवीजन बेंच मंगलवार और शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई करेंगी।2. 17 मई, 2021 से 25 मई, 2021 तक दो डिवीजन बेंच मंगलवार और शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई...
'हाईकोर्ट ने राज्य के लिए ऑक्सीजन कोटा की मांग को सही तरह से परखा': सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के निर्देश के खिलाफ केंद्र की चुनौती खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार द्वारा कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा राज्य के लिए लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के प्रतिदिन के कोटा को 1200 मीट्रिक टन बढ़ाने के लिए जारी निर्देश के खिलाफ दी गई चुनौती को खारिज कर दिया।न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने सॉलिसिटर जनरल को शुरुआत में बताया,"यह हाईकोर्ट द्वारा एक सुव्यवस्थित, अच्छी तरह से न्यायिक प्रैक्टिस है।"न्यायाधीश ने कहा,"हम कर्नाटक के नागरिकों को मंझधार में नहीं छोड़ेंगे।"यह देखते हुए कि हाईकोर्ट ने मांग की सही जांच की है, पीठ ने कहा कि वह हाईकोर्ट के...
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एमवाई इकबाल का निधन
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमवाई इकबाल का आज सुबह नई दिल्ली में निधन हो गया।वह 24 दिसंबर, 2012 से 12 फरवरी 2016 तक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रहे।इससे पहले, वह मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे।उनका जन्म 13 फरवरी, 1951 को हुआ था। उन्होंने 1970 में बी.एससी. रांची विश्वविद्यालय से और एल.एल.बी. 1974 में की। कानून की डिग्री में गोल्ड मेडल प्राप्त किया।उन्होंने 1975 में एक वकील के रूप में रांची में अपने करियर की शुरुआत की, जो विशेष रूप से सिविल पक्ष में प्रैक्टिस करते थे। 1990...
'नागरिकों को ये जानने का अधिकार है कि अदालतों में क्या चल रहा है ' : सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया द्वारा अदालती सुनवाई की रिपोर्टिंग को बरकरार रखा
एक महत्वपूर्ण फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अदालती कार्यवाही के दौरान मौखिक टिप्पणियों और न्यायाधीशों और वकीलों द्वारा की गई चर्चाओं को रिपोर्ट करने के लिए मीडिया की स्वतंत्रता को बरकरार रखा।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता न्यायिक कार्यवाहियों (केस: भारत का चुनाव आयोग बनाम एमआर विजया भास्कर) तक फैली हुई है।पीठ मद्रास उच्च न्यायालय की मौखिक टिप्पणी के खिलाफ भारत के चुनाव आयोग द्वारा दायर याचिका...
केंद्र ने कर्नाटक को रोजाना 1200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन देने के हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
केंद्र सरकार ने कल (5 मई) को कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है जिसमें केंद्र से कर्नाटक के लिए दैनिक तरल ऑक्सीजन आवंटन को 1200 मीट्रिक टन बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आज जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका का उल्लेख किया, जब पीठ दिल्ली में ऑक्सीजन आपूर्ति से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी। जस्टिस चंद्रचूड़ ने एसजी को भारत...



















