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सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
आर्टिकल 226 - हाईकोर्ट को रिट याचिका का निपटारा करते समय चुनौती देने के आधार पर अपना दिमाग लगाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उड़ीसा हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करने वाली एक विशेष अनुमति याचिका पर विचार करते हुए हाल ही में कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर याचिका पर विचार करते हुए हाईकोर्ट को याचिका में दी गई चुनौती के आधार को गंभीरता से देखना चाहिए और उस पर अपना दिमाग लगाना चाहिए।शीर्ष अदालत ने चुनौती के आधार पर अपना दिमाग लगाए बिना रिट याचिका का निपटारा करने के लिए हाईकोर्ट की कार्यवाही की आलोचना की।उड़ीसा हाईकोर्ट ने निम्नलिखित आदेश पारित करके उड़ीसा प्रशासनिक न्यायाधिकरण के...

अनुच्छेद 227 - पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकार हर त्रुटि को ठीक करने के लिए नहीं है जब अंतिम निष्कर्ष उचित है: सुप्रीम कोर्ट
अनुच्छेद 227 - पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकार हर त्रुटि को ठीक करने के लिए नहीं है जब अंतिम निष्कर्ष उचित है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (11 जनवरी 2022) को दिए गए एक फैसले में कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकार कानूनी दोष को ठीक करने के लिए नहीं है, जब अंतिम निष्कर्ष उचित है या इसका समर्थन किया जा सकता है ।न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की खंडपीठ ने कहा कि अनुच्छेद 227 के तहत शक्ति का प्रयोग उचित मामलों में किफायत से किया जाता है, जैसे न्यायोचित ठहराने के लिए यदि कोई सबूत नहीं है, या निष्कर्ष इतना विकृत है कि कोई भी तार्किक व्यक्ति संभवतः...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने दूसरे की पहचान का इस्तेमाल कर ठगी के एक मामले में ओएलएक्‍स इंडिया के खिलाफ जारी हाईकोर्ट के निर्देशों पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से ओएलएक्स इंडिया को जारी किए गए निर्देशों पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि ओएलएक्स इंडिया अपने प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन पोस्ट करने वालें विक्रेताओं के लिए एक स्क्रीनिंग मैकेनिज्‍म बनाए।जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के 12 दिसंबर, 2021 के आदेश के खिलाफ दायर एसएलपी पर विचार कर रही थी।पीठ ने नोटिस जारी करते हुए कहा, "आगे विचार किए जाने तक, आक्षेपित आदेश के प्रभाव और...

जब अदालत नाबालिग बच्चे की कस्टडी के मुद्दे पर फैसला करती है तो माता-पिता के अधिकार अप्रासंगिक हैं : सुप्रीम कोर्ट
जब अदालत नाबालिग बच्चे की कस्टडी के मुद्दे पर फैसला करती है तो माता-पिता के अधिकार अप्रासंगिक हैं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब कोई अदालत नाबालिग बच्चे की कस्टडी के मुद्दे पर फैसला करती है तो माता-पिता के अधिकार अप्रासंगिक होते हैं।न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति अभय एस ओक की पीठ ने कहा कि नाबालिग की कस्टडी का मुद्दा, चाहे बंदी प्रत्यक्षीकरण की मांग वाली याचिका में हो या कस्टडी की याचिका में, इस सिद्धांत की कसौटी पर तय किया जाना चाहिए कि नाबालिग का कल्याण सर्वोपरि है।इस मामले में नाबालिग बच्चे की कस्टडी की मांग को लेकर पति द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को मंजूर करते हुए पंजाब...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
एक बार उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अधिकार के आधार पर अधिग्रहण कार्यवाही समाप्त हुई तो भूमि मालिक 1894 एक्ट की धारा 48 के तहत भूमि मांगने के हकदार नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक बार जब हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुन: स्थापन अधिनियम, 2013 ("अधिनियम") में उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अधिकार की धारा 24 (2) के आधार पर अधिग्रहण कार्यवाही को समाप्त करने का आदेश पारित किया है तो भूमि मालिक इस दलील पर वापस नहीं जा सकते कि वे भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 48 के तहत भूमि को मुक्त करने की मांग करने के हकदार हैं।न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यम की पीठ दिल्ली हाईकोर्ट के 23 सितंबर, 2014 के आदेश ("आक्षेपित...

निजी बैंकों/ एआरसी द्वारा शुरू की गई सरफेसी अधिनियम के तहत कार्यवाही को चुनौती देने वाली रिट याचिका सुनवाई योग्य नहींः सुप्रीम कोर्ट
निजी बैंकों/ एआरसी द्वारा शुरू की गई सरफेसी अधिनियम के तहत कार्यवाही को चुनौती देने वाली रिट याचिका सुनवाई योग्य नहींः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निजी बैंकों/परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों द्वारा शुरू की गई सरफेसी अधिनियम के तहत कार्यवाही को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।जस्टिस एमआर शाह और बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा, "यदि सरफेसी अधिनियम के तहत कार्यवाही शुरू की जाती है और/या कोई प्रस्तावित कार्रवाई की जानी है और उधारकर्ता निजी बैंक/बैंक/एआरसी की किसी भी कार्रवाई से व्यथित है, तो उधारकर्ता को सरफेसी अधिनियम के तहत उपाय का लाभ उठाना होगा और रिट याचिका दाखिल करने योग्य और / या बनाए रखने...

प्रधानमंत्री सुरक्षा में चूक : एससीबीए ने जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​​​समिति से अधिवक्ताओं को गुमनाम धमकी भरे फोन कॉल की जांच करने का अनुरोध किया
प्रधानमंत्री सुरक्षा में चूक : एससीबीए ने जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​​​समिति से अधिवक्ताओं को गुमनाम 'धमकी भरे फोन कॉल की जांच करने का अनुरोध किया

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने हाल ही में पंजाब दौरे के दौरान प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक की जांच के लिए गठित जांच समिति की अध्यक्ष जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​को पत्र लिखकर कुछ एडवोकेट ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) को इस संबंध में आए गुमनाम 'धमकी भरे फोन कॉल' की जांच की मांग की है। एसोसिएशन ने अपने पत्र के माध्यम से समिति से आग्रह किया है कि वह प्रधानमंत्री की सुरक्षा भंग के मुद्दे की जांच करते हुए उक्त घटना की जांच करें क्योंकि यह एक इसी मामले से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।पत्र में कहा गया है कि 10 जनवरी 2022...

जस्टिस मदन बी लोकुर फिजी के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पुन: नियुक्त
जस्टिस मदन बी लोकुर फिजी के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पुन: नियुक्त

भारत के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मदन बी लोकुर को फिजी के सुप्रीम कोर्ट के अनिवासी पैनल के न्यायाधीश के रूप में फिर से नियुक्त किया गया है।जस्टिस लोकुर ने पहली बार अगस्त 2019 में फिजी के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी, यह पहला मौका था, जब किसी भारतीय न्यायाधीश को किसी अन्य देश के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया।न्यायिक सेवा आयोग की सिफारिश और अटॉर्नी-जनरल के समर्थन पर कार्य करते हुए फिजी गणराज्य के राष्ट्रपति रतु विलीएम एम काटोनिवर ने...

17 जनवरी तक फ्लैट खरीदारों को रुपये लौटाएं या जेल जाएं : सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक निदेशकों को दी चेतावनी
17 जनवरी तक फ्लैट खरीदारों को रुपये लौटाएं या जेल जाएं : सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक निदेशकों को दी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नोएडा में 40 मंजिला ट्विन टावरों में फ्लैटों खरीदारों को रुपये लौटाने में विफल रहने पर रियल एस्टेट की दिग्गज कंपनी सुपरटेक को फटकार लगाई, जिसे कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में ढहाने का निर्देश दिया था।न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ घर खरीदारों द्वारा अवमानना ​​याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक तरफ, सुपरटेक ने उन्हें अपने पैसे लेने के लिए आमंत्रित किया, दूसरी तरफ, जब उन्होंने कंपनी से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि पैसा...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
हाईकोर्ट मध्यस्थता अधिनियम की धारा 37 तहत अपील में दावे के गुण-दोष की जांच नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के तहत एक अपील में दावे के गुणदोष की जांच नहीं कर सकता है। इस मामले में, मध्यस्थ ने एक पक्ष को 9.5 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था। दूसरे पक्ष ने मध्यस्थ द्वारा पारित निर्णय के खिलाफ मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 के तहत अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, चंडीगढ़ के समक्ष आपत्ति याचिका दायर की। उक्त याचिका खारिज कर दी गई।इसके बाद, मध्यस्थता अधिनियम की धारा 37 के तहत हाईकोर्ट के समक्ष एक और अपील दायर की गई। उक्त अपील को...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
क्या पत्नी के साथ गुप्त तरीके से रिकॉर्ड की गई बातचीत को पति तलाक के लिए सबूत के तौर पर पेश कर सकता है ? सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार

सुप्रीम कोर्ट ने आज पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली एसएलपी में नोटिस जारी किया है जिसमें कहा गया था कि पत्नी की जानकारी के बिना टेलीफोन पर बातचीत की रिकॉर्डिंग उसकी निजता का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने माना था कि फैमिली कोर्ट के समक्ष साक्ष्य के रूप में एक गुप्त रूप से रिकॉर्ड की गई फोन बातचीत स्वीकार्य नहीं होगी।यह नोटिस जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने जारी किया है।याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अंकित स्वरूप ने तर्क दिया कि निजता का अधिकार पूर्ण...

सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच पर कार्यवाही की मांग करने वाली पीआईएल पर नोटिस जारी किया, याचिकाकर्ताओं को ऐसी बैठकों के खिलाफ शिकायत करने की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच पर कार्यवाही की मांग करने वाली पीआईएल पर नोटिस जारी किया, याचिकाकर्ताओं को ऐसी बैठकों के खिलाफ शिकायत करने की अनुमति

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तराखंड राज्य को उस जनहित याचिका में नोटिस जारी किया, जिसमें हरिद्वार धर्म संसद सम्मेलन के संबंध में आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है, जहां मुसलमानों के खिलाफ हेट स्पीच दी गई थी।भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने पत्रकार कुर्बान अली और वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश (पटना हाईकोर्ट की पूर्व जज) द्वारा दायर जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया। जब मामले की सुनवाई शुरू हुई तो याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश...

प्रत्यावर्तित किए गए कैदी की विदेशी कोर्ट द्वारा दी गई सजा को सिर्फ इसलिए कम नहीं किया जा सकता क्योंकि ये भारत में समान अपराध की सजा से ज्यादा है : सुप्रीम कोर्ट
प्रत्यावर्तित किए गए कैदी की विदेशी कोर्ट द्वारा दी गई सजा को सिर्फ इसलिए कम नहीं किया जा सकता क्योंकि ये भारत में समान अपराध की सजा से ज्यादा है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कैदियों के प्रत्यावर्तन अधिनियम, 2003 के अनुसार कैदियों के प्रत्यावर्तन के सिद्धांतों को निर्धारित करते हुए एक उल्लेखनीय फैसला दिया है।न्यायालय ने इस मुद्दे पर चर्चा की कि क्या एक विदेशी अदालत द्वारा एक भारतीय अपराधी, जिसे भारत प्रत्यावर्तित किया गया है, पर लगाया गया दंड भारत में इसी तरह के अपराध के लिए सजा से अधिक हो सकता है। कोर्ट ने माना कि सजा की अवधि विदेश और भारत के बीच स्थानांतरण के समझौते से नियंत्रित होगी। भारत सरकार विदेशी अदालत की सजा को तभी संशोधित कर सकती है जब ऐसी...

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में जांच कमेटी का गठन किया
प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में जांच कमेटी का गठन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 5 जनवरी की पंजाब यात्रा में हुई कथित सुरक्षा चूक की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक कमेटी का गठन किया है। कोर्ट ने कहा, "प्रश्नों को एकपक्षीय जांच पर नहीं छोड़ा जा सकता है"। यह आवश्यक है कि जांच की निगरानी न्यायिक रूप से प्रशिक्षित दिमाग करे।कमेटी में शामिल अन्य सदस्यों में महान‌िदेशक, राष्ट्रीय जांच एजेंसी, पुलिस महानिदेशक, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, एडीजीपी (सुरक्षा) पंजाब, और रजिस्ट्रार...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
" एक महिला द्वारा दूसरी महिला के खिलाफ क्रूरता अधिक गंभीर": सुप्रीम कोर्ट ने 498 ए आईपीसी के तहत 80 साल की महिला की सजा बरकरार रखी

यह कहते हुए कि जब एक महिला द्वारा दूसरी महिला के खिलाफ क्रूरता की जाती है, तो अपराध अधिक गंभीर हो जाता है, सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत क्रूरता के अपराध के लिए एक सास की सजा को बरकरार रखा।सास को पति के विदेश में रहने के दौरान बहू के साथ क्रूरता करने का दोषी पाया गया था।न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा,"एक महिला होने के नाते, अपीलकर्ता, जो सास थी, को अपनी बहू के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए था। जब एक महिला द्वारा किसी अन्य महिला यानी...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
हेबियस कॉर्पस: सुप्रीम कोर्ट ने लापता पति का पता लगाने के लिए महिला की याचिका पर मलेशिया के उच्चायुक्त को नोटिस जारी किया

न्यायमूर्ति यूयू ललित, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की खंडपीठ ने सोमवार को मलेशिया के उच्चायुक्त को एक पत्नी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें अपने पति का पता लगाने की मांग की गई थी, जो नौकरी के लिए मलेशिया गया था और 2015 से लापता है।अदालत एक राज कुमारी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने आरोप लगाया कि उसके पति और तीन अन्य का मलेशिया में 2015 में पांच भारतीय पुरुषों ने अपहरण कर लिया।याचिकाकर्ता ने अपहरण और धोखाधड़ी के लिए...

बिल्डर द्वारा ओक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त करने में विफलता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत सेवा में कमी : सुप्रीम कोर्ट
बिल्डर द्वारा ओक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त करने में विफलता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत 'सेवा में कमी' : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बिल्डर द्वारा ओक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त करने में विफलता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत सेवा में कमी है।न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि फ्लैट खरीदार 'उपभोक्ता' के रूप में परिणामी दायित्व पर मुआवजे के लिए प्रार्थना करने के लिए अपने अधिकारों के भीतर हैं जैसे कि ओक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की कमी से उत्पन्न होने वाले उच्च करों और पानी के शुल्क का मालिकों द्वारा भुगतान करना करना।इस मामले में, शिकायतकर्ता समृद्धि को-ऑपरेटिव...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
क्या बेदखली की कार्यवाही में किराए में वृद्धि के अनुरोध पर निर्णय लिया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा

सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार करने के लिए सहमत हो गया है कि क्या किराए में वृद्धि के अनुरोध पर बेदखली की कार्यवाही तय की जा सकती है।जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की पीठ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के 10 दिसंबर, 2021 के आदेश का विरोध करने वाली एक एसएलपी पर विचार कर रही थी, जिसके तहत हाईकोर्ट ने अपीलीय प्राधिकारी को बेदखली की कार्यवाही में किराए में वृद्धि के मुद्दे को तय करने के लिए मामले को रिमांड पर लिया था।पीठ ने नोटिस जारी करते हुए पूर्वी पंजाब शहरी किराया प्रतिबंध अधिनियम,...