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जिला जजों की नियुक्तिः सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सीमित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से केवल 10% पद भरे जा सकते हैं
जिला जजों की नियुक्तिः सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सीमित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से केवल 10% पद भरे जा सकते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन व अन्य बनाम यूओआई और अन्य (2010) 15 एससीसी 170 मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया, विशेष रूप से वो निर्देश, जिसके तहत हाईकोर्ट को सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के जर‌िए भरने के लिए उच्च न्यायपालिका में केवल 10% सीटें आरक्षित करने के लिए कहा गया है।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की खंडपीठ ने हाईकोर्ट को यह देखने का निर्देश दिया कि क्या एक नवंबर, 2022 के बाद किसी भी भर्ती में 10%...

जरूरी नहीं कि समलैंगिक जोड़े द्वारा गोद लिए गए बच्चे समलैंगिक हों: सीजेआई चंद्रचूड़
जरूरी नहीं कि समलैंगिक जोड़े द्वारा गोद लिए गए बच्चे समलैंगिक हों: सीजेआई चंद्रचूड़

चीफ जस्टिस ऑफ इं‌डिया डीवाई चंद्रचूड़ ने समलैंगिक ‌विवाह को कानूनी मान्यता प्रदान करने के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दरमियान कहा कि यह जरूरी नहीं कि एक समलैंगिक जोड़े का गोद लिया बच्चा समलैंगिक ही हो।सीजेआई ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के एक बयान के जवाब में यह टिप्पणी की।मेहता ने कहा कि यह संसद का काम है कि वह समलैंगिक जोड़े को कानूनी अधिकार देने पर विचार करे क्योंकि उसे यह जांचना होगा कि उस "बच्चे का मनोविज्ञान कैसा होगा, जिसने अपने माता-पिता के रूप में दो पुरुषों या दो महिलाओं को देखा हो,...

Same-Sex Marriage
समलैंगिक विवाह को मान्यता प्रदान करने के लिए दायर या‌चिकाओं पर संवैधानिक पीठ विचार करेगी, सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ का फैसला

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने समलैंगिक विवाह को मान्यता प्रदान करने के लिए दायर या‌चिकाओं को संवैधानिक पीठ को सौंप दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा, यह एक "मौलिक" मुद्दा है।बेंच ने आदेश में कहा,"हमारा विचार है कि यह उचित होगा कि पेश किए गए मुद्दों को पांच जजों की पीठ के समक्ष संविधान के अनुच्छेद 145 (3) के आलोक में हल करने के लिए प्रस्तुत किया जाए। इस प्रकार, हम मुद्दे को संवैधानिक पीठ के समक्ष रखने का निर्देश देते...

One Rank One Pension Scheme
'रक्षा मंत्रालय कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता ' : सुप्रीम कोर्ट ने ओआरओपी पेंशन बकाया पर केंद्र को चेताया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रक्षा मंत्रालय को वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) योजना के तहत सशस्त्र बलों के पात्र पेंशनरों को बकाया राशि के भुगतान के मामले में "कानून अपने हाथों में लेने" के खिलाफ चेतावनी दी।सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने मंत्रालय को पेंशन की मात्रा और तौर-तरीकों से संबंधित एक नोट उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया। अदालत ने पहले केंद्र को 15 मार्च 2023 तक सशस्त्र बलों के पात्र पेंशनरों को बकाया राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था।27 फरवरी...

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर से मस्जिद को हटाने के आदेश की पुष्टि की, वक्फ को राज्य सरकार से वैकल्पिक भूमि के लिए आग्रह की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर से मस्जिद को हटाने के आदेश की पुष्टि की, वक्फ को राज्य सरकार से वैकल्पिक भूमि के लिए आग्रह की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 2017 में "मस्जिद हाईकोर्ट" नामक एक मस्जिद को उसके परिसर से हटाने के लिए पारित आदेश की पुष्टि की।वक्फ मस्जिद हाईकोर्ट और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिकाओं को खारिज करते हुए जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को मस्जिद को हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया। पीठ ने कहा, अगर आज से 3 महीने की अवधि के भीतर निर्माण नहीं हटाया जाता है, तो यह हाईकोर्ट सहित अधिकारियों के लिए खुला होगा कि वे...

सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता साकेत गोखले की जमानत याचिका पर गुजरात पुलिस को नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता साकेत गोखले की जमानत याचिका पर गुजरात पुलिस को नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता साकेत गोखले द्वारा गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर गुजरात पुलिस को नोटिस जारी किया , जिसमें क्राउडफंडिंग के माध्यम से एकत्रित धन की कथित हेराफेरी से संबंधित मामले में गोखले को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी किया और दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा। गोखले की ओर से सीनियर एडवोकेट डॉ अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए।गोखले के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने...

Same Sex Marriage
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने समलैंगिक शादियों को मान्यता देने की मांग वाली याचिकाओं का विरोध किया

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने दायर जवाबी हलफनामे में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने वाली याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि शादी की धारणा ही अनिवार्य रूप से विपरीत लिंग के दो व्यक्तियों के बीच संबंध की पूर्वधारणा है।केंद्र ने कहा कि विपरीत लिंग के व्यक्तियों के बीच संबंध "सामाजिक, सांस्कृतिक और कानूनी रूप से विवाह के विचार और अवधारणा में शामिल है और इसे न्यायिक व्याख्या से परेशान या महीन नहीं किया जाना चाहिए।"विवाह से संबंधित सभी व्यक्तिगत कानून और वैधानिक अधिनियम केवल पुरुष और महिला...

न्यायाधीशों के रिटायर्डमेंट के बाद कार्यकारी पदों पर उनकी नियुक्ति के चलन पर रोक लगनी चाहिए : सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे
न्यायाधीशों के रिटायर्डमेंट के बाद कार्यकारी पदों पर उनकी नियुक्ति के चलन पर रोक लगनी चाहिए : सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे

सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने शनिवार को कोच्चि में एर्नाकुलम गवर्नमेंट लॉ कॉलेज ओल्ड स्टूडेंट्स एंड टीचर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक व्याख्यान में 'भारतीय संविधान की मूल संरचना और इसकी वर्तमान चुनौतियों' पर बोलते हुए टिप्पणी की कि कार्यकारी पदों पर न्यायाधीशों के रिटायर्डमेंट के बाद कार्यकारी पदों पर न्यायाधीशों की नियुक्ति के चलन पर रोक लगनी चाहिए।अपने व्याख्यान के दौरान दर्शकों के एक सदस्य ने कार्यकारी पदों पर सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की हालिया नियुक्ति पर दवे से उनकी राय पूछी। इस संबंध में...

बहुदलीय प्रणाली संविधान की बुनियादी विशेषता, इसे सीबीआई, ईडी का उपयोग करके नष्ट नहीं किया जा सकता: सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे‌
बहुदलीय प्रणाली संविधान की बुनियादी विशेषता, इसे सीबीआई, ईडी का उपयोग करके नष्ट नहीं किया जा सकता: सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे‌

सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने शनिवार को कोच्चि स्थित एर्नाकुलम गवर्नमेंट लॉ कॉलेज ओल्ड स्टूडेंट्स एंड टीचर्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित एक व्याख्यान में 'भारतीय संविधान की मूल संरचना और इसकी वर्तमान चुनौतियों' पर अपने विचार रखे।उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि किस तरह से दिन प्रति दिन भारत में लोकतंत्र का क्षरण हो रहा है और संवैधानिक संस्थाओं पर हमले हो रहे थे।उन्‍होंने कहा, "मूल संरचना सिद्धांत आज प्रासंगिक क्यों हो गया है, क्योंकि राजनीति गटर में चली गई है। किसी भी राजनीतिक दल में संविधान और...

जजों के दिलों में उनकी धड़कनें होनी चाहिए, जिनका फैसला वे करते हैं, कानूनों की व्याख्या करते हुए और अधिकारों को लागू करते हुए उनके दिमाग में न्याय होना चा‌‌हिएः जस्टिस नागरत्ना
जजों के दिलों में उनकी धड़कनें होनी चाहिए, जिनका फैसला वे करते हैं, कानूनों की व्याख्या करते हुए और अधिकारों को लागू करते हुए उनके दिमाग में न्याय होना चा‌‌हिएः जस्टिस नागरत्ना

महिला दिवस के अवसर पर केरल फेडरेशन ऑफ विमेन की ओर से आयोजित चीफ जस्टिस केके उषा मेमोरियल लेक्चर के तहत सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बीवी नागरत्ना ने 'परिवर्तनकारी संवैधानिकता' विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा,"जजों के दिलों में उनकी धड़कनें होनी चाहिए, जिनका फैसला वे करते हैं, कानूनों की व्याख्या करते हुए और अधिकारों को लागू करते हुए उनके दिमाग में न्याय होना चा‌‌हिए"।उन्होंने कहा कि संविधान की परिवर्तनकारी व्याख्या करने के लिए, सबसे पहले उन लोगों को समझना होगा, जिनके लिए इसे बनाया गया था। ...

चीफ जस्टिस ऑफ केन्या ने आर्टिफिशियल  इंटेलिजेंस से जजमेंट के अनुवाद करने की भारत की क्षमता की सराहना की
चीफ जस्टिस ऑफ केन्या ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जजमेंट के अनुवाद करने की भारत की क्षमता की सराहना की

चीफ जस्टिस ऑफ केन्या ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जजमेंट के अनुवाद करने की भारत की क्षमता की सराहना कीचीफ जस्टिस ऑफ केन्या (ईजीएच) मार्था के. कूमे के नेतृत्व में केन्या के सुप्रीम कोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान ही ईजीएच ने कानून और न्याय राज्य मंत्री और मंत्रालय के अधिकारी प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल के साथ विचार-विमर्श भी किया।ईजीएच ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके निर्णयों का अनुवाद करने की...

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, समलैंगिकों और यौनकर्मियों को वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर ब्लड डोनेशन से बाहर रखा गया: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, समलैंगिकों और यौनकर्मियों को वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर ब्लड डोनेशन से बाहर रखा गया: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने ब्लड डोनर्स दिशानिर्देशों को चुनौती देने वाली याचिका में अपना प्रारंभिक हलफनामा दायर किया। याचिका में ब्लड डोनेट करने से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, समलैंगिक पुरुषों, महिला यौनकर्मियों आदि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के दिशा-निर्देशों को चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया कि जनसंख्या समूह का निर्धारण जिसे ब्लड डोनर्स से बाहर रखा जाना है, नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूशन काउंसिल (एनबीटीसी, निकाय, जिसमें डॉक्टर और वैज्ञानिक विशेषज्ञ शामिल हैं) द्वारा निर्धारित किया गया...

दुकान में व्यवसाय करने के लिए लाइसेंस का अधिकार पार्टी को नीलामी प्लेटफॉर्म के आवंटन के अधिकार के रूप में नहीं देता: सुप्रीम कोर्ट
दुकान में व्यवसाय करने के लिए लाइसेंस का अधिकार पार्टी को नीलामी प्लेटफॉर्म के आवंटन के अधिकार के रूप में नहीं देता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी विशेष दुकान में बिजनेस करने के लिए लाइसेंस, ऑक्‍शन प्लेटफॉर्म के आवंटन के लिए एक पक्ष को अधिकार नहीं देता है, विशेष रूप से, उनकी दुकान के सामने और/या बगल में।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की खंडपीठ ने कहा, "यहां तक कि हाईकोर्ट द्वारा उचित रूप से कहा गया है, दुकान में व्यवसाय करना और नीलामी मंच पर व्यवसाय करना, दोनों अलग और अलग हैं। केवल इसलिए कि किसी व्यक्ति के पास लाइसेंस है और वह किसी विशेष दुकान में व्यवसाय कर रहा है, वह अधिकार के रूप में...

बाध्यकारी निर्णय को चुनौती देने के लिए अनुच्छेद 32 के तहत याचिका सुनवाई योग्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
बाध्यकारी निर्णय को चुनौती देने के लिए अनुच्छेद 32 के तहत याचिका सुनवाई योग्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अदालत द्वारा पारित बाध्यकारी फैसले को चुनौती देने के लिए अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ की संविधान पीठ ने उस फैसले में भूमि अधिग्रहण पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम में उचित मुआवजा और पारदर्शिता के अधिकार की धारा 24(2) की व्याख्या की।याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई राहत इस प्रकार थी,"उचित रिट, आदेश, निर्देश/दिशा-निर्देश जारी करें, जिसमें परमादेश की रिट भी शामिल है और प्रतिवादी को आदेश देने के लिए भूमि...

अतिरिक्त-न्यायिक स्वीकारोक्ति सबूत का एक कमजोर भाग है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि की आवश्यकता : सुप्रीम कोर्ट
अतिरिक्त-न्यायिक स्वीकारोक्ति सबूत का एक कमजोर भाग है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि की आवश्यकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि अतिरिक्त-न्यायिक स्वीकारोक्ति (Extra-Judicial Confession) साक्ष्य का एक कमजोर भाग है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले पर सुनवाई के दौरान देखा कि अतिरिक्त-न्यायिक स्वीकारोक्ति की विश्वसनीयता तब कम हो जाती है जब आसपास की परिस्थितियां संदिग्ध होती हैं। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने कहा कि अदालतें आमतौर पर एक अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति पर कोई भरोसा करने से पहले एक स्वतंत्र विश्वसनीय पुष्टि की तलाश करेंगी।बेंच ने कहा,"यह कानून का स्थापित...